NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
हारे और घबराए ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन डाल रहे हैं आम चुनाव के लिए दबाव
22 अक्टूबर को संसद में एक और हार के बाद बोरिस जॉनसन ने कहा कि वे ब्रेग्ज़िट की तारीख बढ़ाए जाने के लिए ईयू के फैसले का इंतजार करेंगे। वो आम चुनावों पर भी विचार कर रहे हैं।
पीपल्स डिस्पैच
25 Oct 2019
brexit

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का 31 अक्टूबर तक  ब्रेग्ज़िट समझौते को पास करवाने का सपना धराशायी हो गया है। अब ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन के नेताओं द्वारा अंतिम तारीख को बढ़ाए जाने का इंतजार कर रहा है। इस बीच नए चुनाव करवाने के लिए जनमत बनता नजर आ रहा है।

''प्रोग्राम मोशन'' पर हुई अहम वोटिंग के हारने के बाद जॉनसन को ''निकासी समझौते विधेयक'' को फिलहाल ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। अगर प्रोग्राम मोशन सफल हो जाता तो इस विधेयक को जल्दी पास करवाया जा सकता था। विधेयक के जरिए  ब्रेग्ज़िट को कानूनी मान्यता मिलनी थी। 22 अक्टूबर को जब ''हाउस ऑफ कॉमन्स'' में ''सेकंड रीडिंग'' के बाद इस पर मुहर लगाई गई, तब विधेयक ने अपनी पहली अड़चन पार की थी। वहां इसके पक्ष में 329 वोट पड़े, वहीं विरोध में 299 वोट डाले गए। सेकंड रीडिंग द्वारा किसी विधेयक को आगे के विमर्श के लिए सहमति मिल जाती है। इससे तीसरी रीडिंग में विधेयक में संशोधन का रास्ता खुल जाता है, जिसके बाद इसे कानून बनाने पर वोटिंग द्वारा सहमति-असहमति बनती है।

सांसदों ने प्रोग्राम मोशन को नकार प्रधानमंत्री जॉनसन के उत्साह को ज्यादा लंबा नहीं चलने दिया, मोशन के जरिए जॉनसन, विधेयक को तीन दिन में पास करवाकर, 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख से पहले  की प्रक्रिया खत्म करना चाहते थे।
 
मतदान के बाद लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कहा कि, 'हमने एक बेहद अहम कानून को सिर्फ दो दिन में पास करने की जल्दबाजी से इंकार कर दिया। विधेयक के आर्थिक प्रभाव पर कोई विश्लेषण या नोटिस भी नहीं मिला।' उन्होंने आगे कहा,'सांसदों को इस बदतर संधि को बेहतर बनाने के लिए ज्यादा वक्त की जरूरत है।'

वोटिंग में हारने के बाद सरकार ने विधेयक को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है। प्रश्न काल के दौरान जॉनसन ने कहा कि अब यह यूरोपियन यूनियन पर निर्भर करता है कि वह आगे की तारीख बढ़ाएं। हालांकि जॉनसन ने दोहराया कि वे तारीख के बढ़ाए जाने के खिलाफ हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अगर यूरोपियन यूनियन ने संसद की तीन महीने तारीख बढ़ाए जाने की मांग मान ली, तो जॉनसन एक बार फिर आम चुनाव के लिए दबाव डालेंगे। जॉनसन पहले कह चुके हैं कि की तारीख को बढ़ाया जाता है तो वे अपने समझौते को किनारे कर देंगे और इस साल के खात्मे से पहले आम चुनाव करवाएंगे।

ईयू काउंसिल प्रेसिडेंट डोनल्ड टस्क ने कहा है कि वे यूरोपियन काउंसिल को  ब्रेग्ज़िट डेटलाइन को बढ़ाकर 31 जनवरी किए जाने की सलाह देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे लिखित प्रक्रिया के लिए कहेंगे ताकि इस मामले पर एक और सम्मेलन न हो। अंतिम तारीख के फैसले के थोड़ा ज्यादा लोचदार होकर आने की संभावनाओं पर भी अंदाजा लगया जा रहा है। इस प्रक्रिया को ''फ्लेक्सटेंशन'' कहते हैं। इससे बार फिर प्रक्रिया में तारीख बढ़ाए जाने की जरूरत नहीं होगी।

कॉर्बिन ने कहा कि संसद को बिना वक्त दिए फैसला लेने पर मजबूर करने की कोशिश से सरकार ने खुद के खात्मे की पटकथा लिखी है। बाद में जॉनसन और लेबर पार्टी के नेता कार्बिन की मीटिंग से भी कोई नतीजा नहीं निकला। कॉर्बिन ने कहा कि अगर समझौता नहीं होता तो उनकी पार्टी आम चुनावों के लिए तैयार है। कॉर्बिन ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि वो निकासी के समझौते और आम चुनाव के लिए तार्किक तरीके से तेजी लाने वाले वक्त का समर्थन करेंगे।

अगर जॉनसन आम चुनाव करवाना भी चाहते हैं तो भी सदन को भंग करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यह तभी हो सकता है जब लेबर पार्टी जॉनसन का समर्थन करे, जो अभी तक आकस्मिक चुनाव करवाने से दूर ही रही है।

साभार- पीपल्स डिस्पेच

अंग्रेजी में लिखा मूल लेख आप नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। 

Beaten and Bewildered, Boris Pushes for Another Election

Boris Johnson
Brexit
Conservative Party
Donald Tusk
European Union
House of Commons
Jeremy Corbyn
Labour Party
No-Deal Brexit

Related Stories

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉनसन ‘पार्टीगेट’ मामले को लेकर अविश्वास प्रस्ताव का करेंगे सामना

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

रूसी तेल की चिकनाहट पर लड़खड़ाता यूरोपीय संघ 

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका

मैक्रों की जीत ‘जोशीली’ नहीं रही, क्योंकि धुर-दक्षिणपंथियों ने की थी मज़बूत मोर्चाबंदी

डोनबास में हार के बाद अमेरिकी कहानी ज़िंदा नहीं रहेगी 

बुलडोजर पर जनाब बोरिस जॉनसन


बाकी खबरें

  • poverty
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता
    11 Mar 2022
    राष्ट्रवाद और विकास के आख्यान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं ने रोटी और स्वाधीनता के विमर्श को रोटी बनाम स्वाधीनता बना दिया है।
  • farmer
    सुरेश गरीमेल्ला
    सरकारी इंकार से पैदा हुआ है उर्वरक संकट 
    11 Mar 2022
    मौजूदा संकट की जड़ें पिछले दो दशकों के दौरान अपनाई गई गलत नीतियों में हैं, जिन्होंने सरकारी कंपनियों के नेतृत्व में उर्वरकों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया और आयात व निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादन…
  • सोनिया यादव
    पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने
    11 Mar 2022
    कांग्रेस को जो नुक़सान हुआ, उसका लगभग सीधा लाभ 'आप' को मिला। मौजूदा वक़्त में पंजाब के लोगों में नाराज़गी थी और इस कारण लोगों ने बदलाव को ही विकल्प मानते हुए आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया है।
  • विजय विनीत
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मोदी-योगी का जादू बेअसर नहीं कर सके। बार-बार टिकटों की अदला-बदली और लचर रणनीति ने स
  • LOOSERES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी हो गई है, हालांकि इस प्रचंड जीत के बावजूद कई दिग्गज नेता अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License