NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
CAA-NRC: एक महीने बाद भी सैकड़ों आम लोग यूपी की जेलों में बंद, ज़मानत का इंतज़ार
19-20 दिसंबर की हिंसा में उत्तर प्रदेश में पुलिस ने लगभग 5558 लोगों को हिरासत में लिया था और क़रीब 1240 लोगों को गिरफ़्तार किया था। राजधानी लखनऊ में करीब 40 लोगों की अब तक ज़मानत हो चुकी है। लेकिन अभी भी क़रीब 160 लोग जेल में बंद हैं।
असद रिज़वी
17 Jan 2020
CAA protester

नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ 19 दिसंबर, 2019 हुए विरोध प्रदर्शन के बाद जेल भेजे लोगों को अब न्यायालय से राहत मिलना शुरू हो गई है। राजधानी लखनऊ में करीब 40 लोगों की अब तक ज़मानत हो चुकी है। लेकिन पूरे प्रदेश की बात करें तो अब भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें ज़मानत का इंतज़ार है। अकेले लखनऊ में ही अभी भी क़रीब 160 लोग जेल में बंद हैं। इनमें बड़ी संख्या बेहद आम लोगों की है।

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जनपदों में हिंसा भड़क गई थी। जिसमें 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए। हिंसा के दौरान हुई आगज़नी और सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान को लेकर प्रशासन द्वारा पूरे प्रदेश में क़रीब 327 मुक़दमे दर्ज किए गए।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पुलिस ने प्रदेश भर से क़रीब 1240 लोगों को गिरफ़्तार किया और लगभग 5558 लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया। लखनऊ में तक़रीबन 218 लोगों को गिरफ़्तार करके पुलिस द्वारा जेल भेजा गया।अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (ऐडवा) की फैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन के दिन 19 दिसंबर 2019 को क़रीब 124 प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी की गई है। अन्य को 20 दिसंबर और उसके बाद गिरफ़्तार किया गया है।

5e2d75ab-ee08-4ed1-8960-ca70d8cb5043.jpg

पुलिस द्वारा प्रदर्शन के दौरान परिवर्तन चौक से कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। लेकिन देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बदला लेने वाले बयान के बाद पुलिस ने लखनऊ के हुसैनाबाद, ख़दरा (हसनगंज) हज़रतगंज, मौलवीगंज-चिकमंडी (अमीनाबाद) आदि से बड़ी संख्या में गिरफ़्तारियाँ की थी।

अधिवक्ताओं के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कबीर, एस. आर दारापुरी, कांग्रेसी नेता सदफ़ जाफ़र, प्रोफ़ेसर रॉबिन वर्मा और अंबेडकरवादी “संविधान बचाओ देश बचाओ आंदोलन” के सूत्रधार पी. आर अंबेडकर के अलावा अन्य क़रीब तीन दर्जन लोगों की लखनऊ के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत से ज़मानत मंज़ूर हो गई है। इन लोगों में कुछ को जेल से रिहा कर दिया गया है और कुछ ज़मानती के काग़ज़ात के सत्यापन की वजह से अभी भी जेल में हैं।

अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में अधिवक्ता ज़िया जीलानी ने क़रीब 22 लोगों की ज़मानत के लिए अर्ज़ी दी थी। उन्होंने बताया कि सभी 22 लोगों को ज़मानत मिल गई है। ज़िया जीलानी के अनुसार जिनको ज़मानत मिली है उनमें शाह फ़ैज़, इक़बाल, इरफ़ान, अनस, फ़ैज़ अहमद, सय्यद फ़हद, फ़ैज़ अहमद ख़ान,अदनान और मोहम्मद ज़ाकिर आदि हैं।

अधिवक्ता ज़िया जिलानी बताते हैं की है उनके मुवक्किलों के ख़िलाफ़ पुलिस के पास कोई सुबूत नहीं था। उनके अनुसार अदालत में भी पुलिस अभियुक्त प्रदर्शनकारियों के विरोध में कोई वीडियो फ़ुटेज भी प्रस्तुत नहीं कर सकी। जिससे प्रदर्शनकारी द्वारा आगज़नी या सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने का पुलिस का दावा सिद्ध हो सके।

सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता आसमां इज़्ज़त बताती हैं कि उन्होंने अदालत के समक्ष क़रीब 12 लोगों की ज़मानत की अर्ज़ी पेश की थी। जिसमें से अब तक 10 लोगों को ज़मानत मिल चुकी है। आसमां इज़्ज़त के अनुसार जिन 10 लोगों को ज़मानत मिली है उसमें ज़्यादातर बंगाली मज़दूर हैं। जो लखनऊ में रेस्टोरेंट वग़ैरह में भी काम करते हैं। उनके अनुसार पुलिस का रवैया बहुत निराशाजनक क्योंकि पुलिस ज़मानती के दस्तावेज़ो आदि सत्यापन में देरी कर रही है।जिसकी वजह से ज़मानत मिलने के बाद भी कई लोग अभी भी जेल में है।

6a73e80d-f0da-4fc2-bd2e-a9799ed0cd89.jpg

आसमां इज़्ज़त बताती हैं जिन बंगाली लोगों को ज़मानत मिली है उनमें ख़ैरुल, सालेहदुल, संजू, साग़र अली , वसीम और कलीम शामिल हैं। इसके अलवा उन्होंने बताया कि मोहम्मद शोएब की भी ज़मानत हो गई और वह जेल से रिहा भी हो गए है। मोहम्मद शोएब पेशे से टेलर हैं और साँस के मरीज़ है। उन्हें 19 दिसंबर को दवा लेने जाते समय गिरफ़्तार किया गया था।

बीएसी के छात्र हाशिम (20) को भी ज़मानत हो गई है। उनके अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर बताते हैं कि हाशिम को मदेहगंज (हसनगंज) से गिरफ़्तार किया गया था।जबकि हाशिम मदेहगंज चौकी में आग लगने के बाद पुलिस की वहाँ रखे दस्तावेज़ बाहर निकालने में मदद कर रहे थे।

अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर के अनुसार हज़रतगंज से गिरफ़्तार इरशाद अहमद (24) को भी ज़मानत पर रिहा करने का आदेश अदालत द्वारा पारित कर दिया गया है। उन्होंने बताया की इरशाद अहमद को उस समय गिरफ़्तार किया गया जब वे अपनी मां के लिए दवा लेकर हुसैनगंज इलाक़े से लौट रहे थे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष व प्रसिद्ध अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब की भी ज़मानत मंज़ूर हो गई है। अधिवक्ता जमाल सईद सिद्दीक़ी के अनुसार रिहाई मंच के अध्यक्ष को अपर सत्र न्यायाधीश संजय शंकर पांडेय के न्यायालय से राहत मिली है। मुहम्मद शुऐब के अधिवक्ता जमाल सईद सिद्दीक़ी बताते हैं कि उनकी ज़मानत की सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई है। अब मुहम्मद शुऐब किसी भी समय जेल से रिहा किए जा सकते हैं।

प्रदर्शन के दौरान हज़रतगंज इलाक़े से परिवर्तन चौक के रास्ते अपने घर जा रहे बुजुर्ग मोहम्मद नसीम (68) को भी अदालत द्वारा ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि गिरफ़्तार किए गए सभी लोगों में मोहम्मद नसीम सबसे बुजुर्ग थे।

ऐडवा ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि प्रदर्शनकारी फ़ैज़ (24) को भी ज़मानत मिल गई है। फ़ैज़ नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन करने गए थे। लेकिन पुलिस ने उनको प्रदर्शन स्थल से पहले ही रोक दिया था। किंतु उनको प्रदर्शन के बाद क़रीब पाँच बजे परिवर्तन चौक से गिरफ़्तार किया गया। फ़ैज़ होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर चुके हैं और फ़ुट्बॉल के एक अच्छे खिलाड़ी भी हैं। फ़िलहाल वह ज़मानत पर जेल से रिहा हो चुके हैं।

अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर बताते हैं की 14 लोगों की ज़मानत पर अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में 20 जनवरी को सुनवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी भी क़रीब 160 लोग लखनऊ जेल में बंद हैं।

(सभी आँकड़े पुलिस सूत्रों और अधिवक्ताओं से प्राप्त किये गए हैं।)

CAA
Protest against CAA
NRC
Protest against NRC
NPR
UttarPradesh
UP police
Yogi Adityanath
yogi sarkar
BJP
modi sarkar
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License