NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
शिक्षा
पुस्तकें
समाज
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: प्रश्न पूछो, पर ज़रा ढंग से तो पूछो
अभी ऐसे ही, बारहवीं कक्षा की परीक्षा में एक प्रश्न पूछ लिया गया कि किस सरकार के तहत सन् दो हजार दो में गुजरात में अप्रत्याशित स्तर पर मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी। सरकार को अखर गया, माथा ठनक गया। इतना कठिन प्रश्न और इतने छोटे बच्चों से। ये बच्चे जब अगले चुनाव में वोट डालेंगे तो इसी ज्ञान से डालेंगे!
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
12 Dec 2021
CBSE
प्रतीकात्मक तस्वीरें

आर्यव्रत में आज प्रश्न पूछना गुनाह हो गया है। सिर्फ आज ही नहीं हुआ है, पिछले साढ़े सात साल से हो गया है। साढ़े सात साल पहले तक आप तब के सरकार-जी से जो मरजी, जैसा मरजी, जितने मरजी कठिन प्रश्न पूछ सकते थे। पर अब के नए सरकार-जी से आप कठिन प्रश्न नहीं पूछ सकते हैं। कठिन प्रश्न पूछने पर सरकार-जी को कोई दिक्कत हो न हो, पर हां! प्रश्न पूछने वाले को दिक्कत अवश्य हो सकती है।

ऐसा नहीं है कि सरकार-जी से आप कोई प्रश्न पूछ ही नहीं सकते हैं। आप सरकार-जी से कठिन नहीं, बहुत ही अधिक कठिन प्रश्न भी पूछ सकते हैं। बस जरा ढंग से पूछने की जरूरत है। आप सरकार-जी से इतना कठिन सवाल भी कर सकते हैं कि आप चाय कैसी पीते हैं? ठंडी कर के, चुस्कियां ले कर पीते हैं या फिर गर्मागर्म ही गटक जाते हैं? चाय लाइट पीते हैं या फिर तेज पत्ती की स्ट्रांग चाय? चीनी वाली चाय पसंद है या फिर बिना चीनी की? और अगर चीनी लेते हैं तो चीनी कम लेते हैं या ज्यादा चीनी लेते हैं, या फिर ठीक-ठीक? ब्लैक टी पीते हैं या फिर दूध डालकर पीते हैं? साथ ही चाय में अदरक डलवाते हैं या नहीं? इलायची या तेजपत्र या कोई अन्य फ्लेवर वाली चाय पसंद हैं या फिर बिना फ्लेवर वाली चाय पीते हैं? मसाला टी पीते हैं या असम टी, दार्जिलिंग टी, या फिर नीलगिरी टी? 

अभी भी आप काली पत्ती वाली साधारण चाय ही पीते हैं या फिर आपने 'मनोहरी गोल्ड चाय' पीनी शुरू कर दी है? यह चाय चालीस-पचास हजार रुपए या फिर इससे भी अधिक रुपए की एक किलो मिलती है। अब तो आप सरकार-जी हैं और जनता के पैसे से चाय पीते हैं, तो फिर जितनी मर्जी महंगी चाय पी सकते हैं। और हां! अब भी आप चाय ही पीते हैं या फिर आपने कॉफी पीना भी शुरू कर दिया है? फिर कॉफी पर भी इतने ही सारे सवाल हो सकते हैं। है न कितना कठिन प्रश्न?

आप आम कैसे खाते खाते हैं? इसी प्रकार यह प्रश्न भी बहुत ही कठिन प्रश्न है। यह प्रश्न अक्षय कुमार ने सरकार-जी से एक बहुत ही मुश्किल प्रश्नोत्तर के क्रम में पूछा था। अक्षय बीरबल बनना चाहता था। पर बस चाहता ही था। वह सरकार-जी को आम की गुठली खिलाना चाहता तो था पर खिला नहीं सकता था। उसमें बीरबल जितना साहस और बुद्धिमत्ता नहीं थी। अक्षय कुमार सरकार-जी से यह नहीं पूछ सका कि सरकार-जी, मैं तो अपने निर्माता-निर्देशक के निर्देशों पर आम कैसे भी खा सकता हूं। छिलका समेत खा सकता हूं, गुठली समेत खा सकता हूं, ऊपर से या नीचे से, कहीं से भी खा सकता हूं, और खा ही नहीं, निकाल भी सकता हूं। पर सरकार-जी, क्या आप भी अपने निर्माताओं और निर्देशकों के निर्देश पर यह सब कुछ कर सकते हैं? अक्षय कुमार के पास मौका था। अक्षय कुमार पूछ सकता था, पर पूछा नहीं। अक्षय को साहस न हुआ। उसे यह पूछना कठिन लगा।

अभी ऐसे ही, बारहवीं कक्षा की परीक्षा में एक प्रश्न पूछ लिया गया कि किस सरकार के तहत सन् दो हजार दो में गुजरात में अप्रत्याशित स्तर पर मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी। प्रश्न सिलेबस से ही था। पाठ्यक्रम का हिस्सा ही था। पाठ्य पुस्तक में लिखा हुआ भी था। पढ़ाया भी गया था। पर सरकार को अखर गया, माथा ठनक गया। इतना कठिन प्रश्न और इतने छोटे बच्चों से। ये बच्चे जब अगले चुनाव में वोट डालेंगे तो इसी ज्ञान से डालेंगे! बोर्ड को तो माफी मांगनी ही पड़ी, प्रश्न पत्र सेट करने वाले व्यक्ति पर भी कड़ी कार्यवाही की ही गई होगी। परन्तु गलती प्रश्न पत्र सेट करने वाले की भी नहीं थी। वह क्या करता। उसे तो पूरी की पूरी पाठ्य पुस्तक में एक ही कार्य ऐसा मिला था जिसका श्रेय भाजपा को दिया जा सकता था। तो उसने वही सवाल पूछ लिया।

प्रश्न मल्टीपल चॉइस था। चार संभावित उत्तर थे। भाजपा, कांग्रेस, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट। जिन्होंने उत्तर दिया- भाजपा, मतलब उन्होंने पाठ पढ़ा था और साथ ही उन्हें यह भी विश्वास था कि भाजपा आज ही नहीं बीस साल पहले भी इन सब कर्मों को करने में उतनी ही सक्षम थी जितनी कि आज है। वे ठीक थे, और किसी भी तरह से गलत नहीं थे। न पाठ्य पुस्तक की दृष्टि से, न सत्य की दृष्टि से और न ही भाजपा पर पूरा विश्वास करने की दृष्टि से।

जिन्होंने उत्तर कांग्रेस दिया, उन छात्र-छात्राओं ने भी एक तरह से उत्तर ठीक ही दिया था। वे छात्र देश में दो हजार चौदह से पहले हुए हर अच्छे-बुरे, सभी कामों के लिए और उसके बाद हो रहे सभी गलत कामों के लिए, ठीक सरकार-जी की ही तरह कांग्रेस को उत्तरदायी मानते हैं। इसलिए जिन छात्रों ने उत्तर में कांग्रेस के आप्शन का चुनाव किया, वे भी ग़लत नहीं थे, सही ही थे।

और जिनका उत्तर रिपब्लिकन या डेमोक्रेट था, वे भी ग़लत नहीं थे। और गलत हो भी कैसे सकते थे। वे छात्र तो भारत सरकार की तरह हर गलत काम के लिए विदेशी हाथों को ही जिम्मेदार मान रहे हैं, तो फिर गलत कहां हुए। इसलिए चारों ही उत्तर ठीक थे। और अगर पांचवीं आप्शन हो सकती थी, तो वह चीन या पाकिस्तान हो सकती थी और वह उत्तर भी ठीक ही होता। 

तो प्रश्न पूछना गुनाह तो नहीं ही है न। न सरकार-जी से और न ही छात्रों से। बस प्रश्न ऐसा आसान होना चाहिए जिसका कोई भी उत्तर ठीक हो। ऐसा सवाल, जिसके सारे उत्तर ठीक ही हों। जैसे आप चाय कैसी पीते हैं? आप आम कैसे खाते हैं? आप कौन सा टॉनिक लेते हैं? आप मोबाइल में कौन सा सिम इस्तेमाल करते हैं? आदि, आदि। और न तो सरकार-जी से और न ही छात्रों से ऐसे सवाल हरगिज ही नहीं पूछे जाने चाहिए जिनसे सवाल पूछने वाला ही मुश्किल में पड़ जाए। जैसे कि दो हजार दो में गुजरात दंगों के दौरान किस दल की सरकार थी या वहां कौन मुख्यमंत्री था? जैसे कि नोटबंदी किस के राज में हुई और उससे किस किस को लाभ पहुंचा। अरे! प्रश्न पूछो पर ढंग का तो पूछो, ढंग से तो पूछो। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं। विचार निजी हैं।)

ये भी पढ़ें: व्यंग्य : इमेज बड़ी चीज़ है!

CBSE
CBSE EXAMS
Indian government
Indian constitution
Children
Modi government

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़

कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता

हम भारत के लोग: देश अपनी रूह की लड़ाई लड़ रहा है, हर वर्ग ज़ख़्मी, बेबस दिख रहा है

हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License