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रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ सीटू का दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन
निजीकरण के ख़िलाफ़ और 109 ट्रेन मार्गों को निजी खिलाड़ियों के लिए खोले जाने को लेकर रेलव कर्मचारी यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल की योजना बना रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jul 2020
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रेलवे के निजीकरण के सरकारी फैसले को वापस लेने के लिए सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने पूरे देशभर में दो दिवसीय प्रदर्शन किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस प्रदर्शन का आयोजन पूरे देश में 16-17 जुलाई को विकेंद्रित तरीके से किया गया। लगभग 22 राज्यों के 100 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में मज़दूर संगठन के आलावा छात्र-नौजवान और किसान संगठनों की भी भागीदारी देखी गई।

आपको बता दें कि भारत सरकार ने हाल ही में 109 हाई स्पीड यात्री ट्रेन सेवाओं के निजी कंपनियों द्वारा संचालन की घोषणा की है तथा इसके लिए देशी और विदेशी निजी कॉरपोरेट्स को न्योता देने के लिए उनसे ‘अर्हता प्राप्त करने का अनुरोध’ (Request for Qualification) आमंत्रित करने की भी शुरुआत कर दी है। यह निजी यात्री ट्रेनें रेलवे के सबसे अधिक मुनाफे वाले रूटों पर ही चलेंगी।

यह ट्रेनें पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर, रेलवे के ही ड्राइवरों और गार्डों द्वारा चलाई जाएगी। पर इन ट्रेनों का बाकी स्टाफ, उनका मालिकाना व मुनाफा उन निजी कंपनियों का होगा। निश्चित ही इस बाकी स्टाफ में बहुमत उन्हीं ठेका व अस्थायी श्रमिकों का ही रहेगा जिनकी स्थिति हम पहले से जानते हैं। सरकार ने पहले से ही रोलिंग स्टॉक, सिग्नल और इलेक्ट्रिक कार्यों और समर्पित मालवाहक लाइनों के निर्माण और रखरखाव में 100% एफडीआई की अनुमति दे रखी है।

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सीपीआई (एम), सीपीआई, और अन्य वाम दलों सहित विपक्षी दलों,कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने कई आधारों पर निजीकरण के कदम का स्पष्ट रूप से विरोध किया है।

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रेल मंत्रालय दावा कर रहा है कि इस कदम के माध्यम से निजी भागीदारी द्वारा लगभग 30,000 करोड़ रुपये आएंगे, जिसका उपयोग राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा और इससे रोजगार पैदा होगा। दूसरी ओर, रेलवे की यूनियनों और ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि इस कदम से रेलवे को नुकसान ही होगा।

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सीटू महासचिव तपन सेन का कहना है कि "सरकार के 30,000 करोड़ रुपये के निवेश और रोजगार सृजन के दावे का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इससे रेलवे का नुकसान होगा।

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सेन का कहना है कि उत्पादन इकाइयों के निजीकरण के कारण रोजगार खोया है, भारतीय रेलवे के गहने कहे जाने वाले उसके कार्यशालाओं में, और रखरखाव इकाइयों में रोज़गार निजी खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए रोजगार से कई गुना अधिक है। जो नई नौकरियां सृजित होंगी, उनमें से ज्यादातर अनिश्चित रोज़गार होंगे, न कि निश्चित और सभ्य रोज़गार और उसमें किसी भी प्रकार का सामाजिक सुरक्षा नहीं होगी।

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16 एवं 17 जुलाई को पूरे देश में रेलवे के निजीकरण के खिलाफ अखिल भारतीय विरोध दिवस के तहत देश के कई रेलवे स्टेशन पर सीटू के कार्यकर्ताओं नें प्रदर्शन कर स्टेशन मास्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

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सीटू ने अपने ज्ञापन में कहा कि सरकार का यह कदम पूरी तरह से देश व देश की जनता के हितों के विपरीत है। सीटू ने कहा है कि भारतीय रेल इस देश की जनता के पैसों से स्थापित किया गया है। इसका संचालन भी देश की जनता, जिनमें बहुतायत गरीब है, की सुविधा को दृष्टि में रखकर ही किया जाता है। इसके चलते आज जनता के आवागमन का सबसे सस्ता साधन रेल है। रेलवे देश के विकास व सामाजिक जीवन की मुख्य धुरी है। यह देश की जीवन रेखा है। इसके निजी हाथों में दिए जाने से देश की सम्पूर्ण आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों पर अत्यंत नकारात्मक प्रभाव पढ़ना निश्चित है। यह देश के लिए घातक होगा।

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सीटू ने कहा है कि हम सरकार के इस कदम, व रेलवे के निजीकरण के सभी प्रयासों का तीव्रतम विरोध करते है। सीटू ने मांग की है कि सरकार देश व जनता के हितार्थ भारतीय रेल को निजीकृत करने के इन सभी कदमों को तत्काल वापस लें।

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ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF), जो राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर में सबसे बड़ा मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन है, और यहां तक कि आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने पहले मांग की है कि सरकार 109 मार्गों के निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने के लिए कदम उठाए। AIRF ने रेलवे बोर्ड से अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी देते हुए बोली प्रक्रिया को रद्द करने का आग्रह किया है, जबकि BMS ने कुछ राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया है।

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सीटू सचिव एआर सिंधु ने कहा "भाजपा सरकार के निजीकरण और रेलवे की अन्य जनविरोधी नीतियों पर ट्रेड यूनियन आंदोलनों की कार्रवाई के भविष्य के योजना पर निर्णय लेने के लिए सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की एक संयुक्त बैठक के बाद प्रदर्शन किया जाएगा" ।

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गुरुवार सुबह, सीटू राष्ट्रीय नेतृत्व नई दिल्ली में रेल भवन के सामने एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ। इसके साथ ही शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी प्रदर्शन किया।

AIRF से संबद्ध दक्षिण मध्य रेलवे मजदूर संघ (SCRMU) ने पिछले हफ्ते तेलुगु राज्यों में सरकार के निजीकरण के ख़िलाफ़  अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का दावा करते हुए निजीकरण का विरोध किया। 109 ट्रेन मार्गों को निजी खिलाड़ियों के लिए खोले जाने पर यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल की योजना बना रहा है।

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आपको बता दें कि एआईआरएफ के नेतृत्व में 8-28 मई, 1974 तक तीन सप्ताह तक जारी रहने वाले रेलवे कर्मचारियों और श्रमिकों की अंतिम  बड़ी हड़ताल को एशिया के प्रमुख रेलवे हमलों में से एक माना गया है। यह हड़ताल ऐतिहासिक हड़ताल थी।

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सीटू से संबद्ध दक्षिण रेलवे कर्मचारी संघ (डीआरईयू) ने केरल और तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन किया है। तेलुगु राज्यों में, सीटू और संबद्ध जन संगठन रेलवे स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

पश्चिम बंगाल में, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने भी निजीकरण और रेलवे में खाली पदों को बंद करने के खिलाफ जिलों में विरोध प्रदर्शन किया।

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