NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
कोविड-19: नए अध्ययन से पता चला है कि प्राकृतिक इम्मुनिटी, वैक्सीन सुरक्षा से कहीं ज़्यादा मज़बूत
हालांकि अध्ययन के नतीजों के साथ चेतावनी भी दी गई है। मतलब अगर कोई एक बार संक्रमित हो चुका है, तो अध्ययन यह सलाह नहीं देता कि उसे कोविड को रोकने वाले व्यवहार को करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उसके पास बेहतर प्रतिरोधक क्षमता आ चुकी है।
संदीपन तालुकदार
31 Aug 2021
कोविड-19

हाल में कोविड-19 से संबंधित सबसे ज़्यादा चिंताएं, बेहद संक्रामक डेल्टा वेरिएंट और इसके खिलाफ वैक्सीन कितनी कारग़र होगी, इस बात से जुड़ी हैं। हज़ारों लोगों पर किए गए एक नए अध्ययन में अब कुछ अहम बातें निकल कर सामने आई हैं। अध्ययन बताता है कि जो लोग SARS-CoV-2 से संक्रमित हुए थे, उनमें फाइजर बायोएनटेक वैक्सीन लेने वालों की तुलना में ज़्यादा प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है।

medRxiv के प्री-प्रिंट सर्वर में छपा यह अध्ययन बताता है कि जिन लोगों को एक बार कोरोना हो चुका है, उनमें पूरे वैक्सीन डोज़ लेने वालों की तुलना में डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण फैलने, बीमारी के गंभीर होने के चलते अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी कम है।

हालांकि अध्ययन के नतीज़ों के साथ चेतावनी भी दी गई है। संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन ही कोरोना वायरस के खिलाफ़ प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करती है। अध्ययन के नतीज़ों से यह संदेश नहीं जाता है कि जो लोग संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें कोविड-19 में अपनाया जाने वाला आदर्श व्यवहार छोड़ देना चाहिए। 

अध्ययन में यह भी पता चला कि 'जिन लोगों को पहले कोविड-19 हो चुका है और उन्हें वैक्सीन नहीं लगी है', उनकी तुलना में 'कोरोना से संक्रमित हो चुके ऐसे लोग, जिन्हें फाइज़र वैक्सीन की एक डोज़ लग चुकी है', वे डेल्टा वेरिएंट से ज़्यादा सुरक्षित हैं। इस नतीज़े ने एक और नई चिंता को जन्म दे दिया है- क्या पहले संक्रमित रह चुके लोगों को वैक्सीन की एक या दो, कितनी डोज़ देना चाहिए?

वैज्ञानिक तरीके से देखें, तो अध्ययन के बारे में अच्छी चीज रही कि यह इज़रायल में किया गया था, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा टीकाकृत देशों में से एक है। दूसरी चीज, इस अध्ययन के लिए 1 जून से 14 अगस्त के बीच आए हजारों मरीज़ों के रिकॉर्ड का सहारा लिया गया। मतलब उनके संक्रमण, लक्षण और अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी। गौर करने वाली बात है कि इस दौरान इज़रायल में डेल्टा वेरिएंट ही सबसे ज़्यादा संक्रमण फैला रहा था। अध्ययन का दावा है कि प्राकृतिक और वैक्सीन द्वारा कोरोना वायरस के खिलाफ़ उपलब्ध कराई जाने वाली प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा, यह अबतक का सबसे बड़ा अध्ययन है।

स्वीडन के डांडेरिड हॉस्पिटल में क्लिनिकल साइंस विभाग के इम्यूनोलॉजिस्ट चार्लोट्टे थालिन 'साइंस मैगजीन' से बात करते हुए अध्ययन के बारे में कहते हैं, "यह पहली बार है जब कोविड-19 से जुड़ी इस तरीके की चीजें दिखाई गई हैं।" हालांकि थालिन और दूसरे लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वैक्सीन ना लगवाए हुए लोगों में जानबूझकर संक्रमण फैलाया जाता है, तो इससे उनमें गंभीर तौर पर बीमार पड़ने, मौत या लंबे समय के लिए कोविड का ख़तरा बढ़ जाएगा। 

इस अध्ययन में मैक्काबी हेल्थकेयर सर्विस के आंकड़े उपयोग किए गए हैं। मैक्काबी ने इज़रायल में 25 लाख लोगों को भर्ती किया था। तेल पाटालॉन और सिवान गैजिट के नेतृत्व में, इज़रायल के 'केएसएम इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर' में की गई इस रिसर्च में पता चला कि जिन लोगों को कभी संक्रमण नहीं हुआ और उन्हें जनवरी से फरवरी के बीच वैक्सीन लगा है, तो जून, जुलाई और अगस्त में उनके संक्रमित होने की संभावना, 'पहले संक्रमित हो चुके लोगों' के दोबारा संक्रमित होने की तुलना में 6 से 13 गुना है।

32,000 मरीज़ों के अपने विश्लेषण में उन्होंने पाया कि कभी संक्रमित ना होने वाले, लेकिन वैक्सीन लगवा चुके लोगों में, लक्षणयुक्त कोविड संक्रमण होने की संभावना 27 गुना ज़्यादा है। वहीं अस्पताल में भर्ती होने की इन लोगों की संभावना 8 गुना ज़्यादा है। 

शोध में अब तक टीकाकरण ना करवाने वाले और पहले कोरोना वायरस का संक्रमण झेल चुके 14000 लोगों की तुलना, पहले संक्रमित हो चुके और फाइजर वैक्सीन का एक डोज़ लगवा चुके 14,000 लोगों से की गई। शोध में पाया गया कि टीका ना लगवाने वाले समूह की, एक टीका लगवाने वाले समूह की तुलना में, दोबारा संक्रमित होने की संभावना दोगुनी है।

स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक और फिजिशियन एरिक टोपोल ने कहा, "हम लगातार प्राकृतिक संक्रमण प्रतिरोधकता की अहमियत नज़रंदाज कर रहे हैं। खासकर तब जब संक्रमण हाल में मरीज़ के भीतर पहुंचा हो। फिर जब इसे आप वैक्सीन की एक डोज़ के साथ बढ़ावा देते हैं, तो यह उस स्तर पर पहुंच जाती है, जहां दुनिया की कोई भी वैक्सीन आज नहीं पहुंच सकती।"

लेकिन इस अध्ययन में कुछ खामियां भी हैं। अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी में बॉयो स्टेटिस्टीसियन नताली डीन कहती हैं, "यह देखना अहम होगा कि अध्ययन से आए नतीज़े दूसरी जगह भी वैसे ही पाए जाते हैं या खारिज होते हैं। इस अध्ययन की जो सबसे बड़ी सीमा है, वह यह है कि सार्स संक्रमण के लिए होने वाली जांच अब भी स्वैच्छिक चीज है- यह अध्ययन के डिज़ाइन का हिस्सा नहीं थी।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। 

 

COVID-19: Natural Immunity Stronger than Vaccine Protection, Suggests New Study

 

Natural Immunity and Vaccine Immunity
SARS-CoV-2
Reinfection
Delta variant
Pfizer-BioNTech

Related Stories

कोविड-19: ओमिक्रॉन की तेज़ लहर ने डेल्टा को पीछे छोड़ा

कोविड: प्रोटीन आधारित वैक्सीन से पैदा हुई नई उम्मीद

ओमिक्रोन के नए संस्करण का पता चला, यह टीके की सुरक्षा को दे सकता है मात

ओमिक्रॉन से नहीं, पूंजी के लालच से है दुनिया को ख़तरा

डेल्टा वेरिएंट के ट्रांसमिशन को टीके कब तक रोक सकते हैं? नए अध्ययन मिले-जुले परिणाम दिखाते हैं

SARS-CoV-2 के क़रीबी वायरस लाओस में पाए गए

जानवरों में पाए जाने वाले सार्स-जैसे वायरस हर साल 4,00,000 इंसानों को संक्रमित करते हैं

डेल्टा वैरिएंट : क्या इसके पीछे की वजह 'P681R' का म्युटेशन है?

वीडियो: शोधकर्ताओं ने दर्शाया चूहों में कोविड-19 का संक्रमण और उससे लड़ती एंटीबाडीज़

अमरीका ने दी तीसरी डोज़ को मंजूरी पर क्या यह जरुरी है ?


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या हैं जनता के असली मुद्दे?
    27 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक ने उत्तर प्रदेश बनारस विधानसभा में मीलों का सफ़र तय किया, यह जानने की कोशिश थी की आखिर जनता क्या चाहती है? क्या जनता इस बार भी धर्म को सबसे ऊपर रखते हुए अपना मुख्यमंत्री चुनेगी या…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव 2022: व्यापारियों का भाजपा पर फूटा गुस्सा
    27 Feb 2022
    अयोध्या में हनुमानगढ़ी के पास स्थित दुकानों पर ख़तरा मंडरा रहा है और वहां के व्यापारी भाजपा से काफी नाराज़ हैं। आखिर ऐसा क्यों है? आइये देखते हैं यह ग्राउंड रिपोर्ट
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव 2022: क्या समाजवादी के पक्ष में है जनता ?
    27 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और विजय शंकर सिंह बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश चुनावों की। विजय शंकर सिंह का मानना है कि इन चुनावों में समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी है।
  • UP
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अब बस दो क़दम और...: यूपी में 5वें चरण का मतदान संपन्न, चित्रकूट-अयोध्या आगे, प्रतापगढ़-प्रयागराज रहे सबसे पीछे
    27 Feb 2022
    यूपी में आज पांचवें चरण का मतदान संपन्न हो गया। अब बस दो कदम यानी दो चरण और बचे हैं। उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं। आज पांचवें चरण में 12 ज़िलों की 61 विधानसभा सीटों पर शाम पांच…
  • यूक्रेन ने रूस के साथ बेलारूस में वार्ता से किया इनकार, रुसी सेना खारकीव में घुसी
    एपी/भाषा
    यूक्रेन ने रूस के साथ बेलारूस में वार्ता से किया इनकार, रुसी सेना खारकीव में घुसी
    27 Feb 2022
    यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश रूस के साथ शांति वार्ता करने के लिए तैयार है लेकिन बेलारूस में नहीं।इसी के साथ यूक्रेन के प्राधिकारियों ने कहा कि रूसी सेना देश के दूसरे सबसे बड़े शहर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License