NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
ग्रामीण भारत में कोरोना-17: उपज की क़ीमत जहां कम है वहीं किराना की क़ीमत आसमान छू रही है
मीडिया में निज़ामुद्दीन मरकज़़ की भड़काऊ कवरेज के बाद से ही ग्रामीणों ने मुसलमानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और कुल मिलाकर महाराष्ट्र के तक्विकी गांव में अशांति का माहौल बना हुआ है।
करन राउत
21 Apr 2020
ग्रामीण भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर। सौजन्य: इण्डियन एक्सप्रेस

यह इस श्रृंखला की 17वीं रिपोर्ट है जो ग्रामीण भारत के जीवन पर कोरोना वायरस-19 से संबंधित नीतियों से पड़ने वाले प्रभावों की तस्वीर पेश करती है। सोसाइटी फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा जारी की गई इस श्रृंखला में विभिन्न विद्वानों की रिपोर्टों को शामिल किया गया है, जो भारत के विभिन्न गावों का अध्ययन कर रहे हैं। यह रिपोर्ट उनके अध्ययन में शामिल गांवों में मौजूद लोगों के साथ हुई टेलीफोनिक साक्षात्कार के आधार पर तैयार की गई है। ये रिपोर्ट लॉकडाउन के बीच महाराष्ट्र के उस्मानाबाद ज़िले के तक्वीकी गांव की मुश्किलों की तरफ ध्यान खिंचती है।

कोविड-19 महामारी और इस पर सरकार द्वारा की गई पहल कदमियों का मराठवाड़ा के गांवों पर गंभीर असर पड़ रहा है। यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के उस्मानाबाद ज़िले के तक्विकी गांव के हालात पर केंद्रित है।

रबी का सीजन है और फसल की कटाई अब बस कुछ ही दिनों में शुरू की जानी है। किसानों की चिंता बस अब इसी बात को लेकर है कि गेहूं की कटाई के लिए पर्याप्त संख्या में मज़दूर नज़र नहीं आ रहे हैं। हालांकि मार्च महीने के मध्य में ही लॉकडाउन शुरू होने से कुछ दिन पहले, कई दिहाड़ी मजदूर जो काम के सिलसिले में बड़े शहरों में चले गए थे, वे लौट आए और कटाई का काम पूरा हो चुका था।

मौजूदा समय में किसान के लिए खाद और कीटनाशक जैसे खेती में इस्तेमाल होने वाली चीजों को हासिल कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि लॉकडाउन की घोषणा में राज्य सरकार ने खेती किसानी से जुड़े तत्वों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में वर्गीकृत कर रखा था और इस प्रकार कृषि से संबंधित सामग्रियों की दुकानों के खुले रहने की अनुमति दे दी गई थी। लेकिन इनमें से अधिकांश दुकानें अभी भी नहीं खुल रही हैं; और इसके नतीजे में कुछ किसानों द्वारा अधिक क़ीमतों पर आवश्यक कृषि सामग्रियों के खरीदने की ख़बरें आ रही हैं।

इसी बीच बाज़ारों तक न जा पाने के कारण किसानों को अपने उत्पादों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक छोटे किसान ने एक एकड़ में बैंगन (भंटा बैंगन) और आधे एकड़ में बीन्स बो रखी थी। बीन्स की फसल तो पहले ही खेतों से निकाल ली गई थी जबकि बैंगन की फसल इस हफ्ते निकाली जानी है। लेकिन अपनी इस फसल को बड़ी मंडियों तक ले जाने के लिए किसी भी तरह के परिवहन की सुविधा न मुहैय्या हो पाने के कारण इन्हें अपनी उपज स्थानीय एजेंट को काफी कम क़ीमत पर बेचनी पड़ी है। मजबूरन उन्होंने बीन्स को 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया, जबकि पुणे में बीन्स का खुदरा भाव 60-70 रुपये प्रति किलो चल रहा है।

दिलचस्प बात ये है कि जहां एक तरफ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा, वहीं शहरों में इसके उपभाक्ताओं को इन्हें हासिल करने के लिए काफी अधिक क़ीमत चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के लिए जहां किसान 20 किलो टमाटर की पेटी 50 रुपये में बेच रहे हैं, वहीँ पुणे में उपभोक्ता 1 किलो टमाटर के लिए 60 रुपये चुकता कर रहे हैं। यहां तक कि वे किसान भी जो किसी तरह से अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक ले जा पाने में सक्षम हैं, उन्हें भी काफी मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है। क्योंकि अधिकांश एपीएमसी [कृषि उपज बाज़ार समिति] बाज़ारों और मंडियों में नीलामी का काम रुका पड़ा है।

कई गांव ने अपने सभी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को रोक दिया है। ऐसा इसलिये क्योंकि या तो ऐसा उन्हें प्रशासन द्वारा करने के आदेश दिए गए हैं, या कभी-कभी स्वेच्छा से भी ऐसा कर दिया जाता है। इसका मतलब है कि तक्विकी गांव में ग़ैर-कृषि रोज़गार की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। आसपास के इलाकों में ग़ैर-कृषि क्षेत्र में रोज़गार के मुख्य स्रोत प्राथमिक तौर पर कंस्ट्रक्शन, ईंट-भट्टे, या छोटे उद्योग-धंधे आदि रहे हैं। इन सभी क्षेत्रों में काम-काज पूरी तरह से ठप पड़ा है और दिहाड़ी मज़दूर बेरोज़गार हैं। और जैसा कि सारे महाराष्ट्र में यह सामान्य घटना है, तक्विकी गांव में भी मनरेगा से संबंधित कोई काम उपलब्ध नहीं है।

गांव में न तो बैंक की शाखा ही है और ना ही एटीएम की कोई सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान कोई नक़द लेन-देन भी नहीं हो पा रहा है। अगर कोई अपने घरों से बाहर निकल भी रहा है तो पुलिस द्वारा ऐसे लोगों की पिटाई की खबरें आ रही हैं, और इसलिए ज़्यादातर लोग बैंकों या एटीएम तक जाने में हिचक रहे हैं। खेती के काम-काज के लिए किसानों के साथ-साथ खेतिहर मज़दूर भी नक़दी के बजाय सामानों के लेन-देन को वरीयता दे रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों के पास नक़दी का घोर संकट बन हुआ है।

ग़रीब तबकों के पास काम और नकदी की कमी के संकट के बीच स्थिति और भी विकट इसलिए हो गई है क्योंकि गांव में मौजूद राशन की दुकानों में आवश्यक खाद्य और गैर-खाद्य पदार्थ ऊंचे दामों में बिक रहे हैं। इन किराना दुकानों के मालिकों का कहना है कि यदि यह लॉकडाउन इसी तरह 15 दिनों से अधिक जारी रहा तो उनके पास जो सामान मौजूद है वो सब का सब समाप्त हो जाएगा और उनके पास बाहर से कोई स्टॉक भी नहीं आने जा रहा।

ग्रामीण ख़ुद अपनी तरफ से भी लॉकडाउन को लागू करने में जुटे हुए हैं। गांव में प्रवेश के सभी रास्तों को बंद कर दिया गया है और किसी भी नए लोगों को गांव में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं है। यदि कोई गांव में लौटकर आया भी था तो उसे अपने घर पर ही क्वारंटीन रहने की हिदायत दे दी गई थी। इस इलाक़े के कई गांवों से हिंसा की घटनाओं की ख़बर मिली हैं, जिनमें से ज़्यादातर घटनाएं पुणे और मुंबई से आने वाले प्रवासियों के साथ घटी हैं, जो अपने-अपने घरों को जाना चाहते हैं। मीडिया में निज़़ामुद्दीन मरकज़़ की भड़काऊ कवरेज के बाद से गांव के लोग मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं और कुल मिलाकर देखें तो गांवों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

लेखक पीईएटी में वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

COVID-19 in Rural India- XVII: Produce Sold at Lower Rates, Groceries’ Price Soar in Maharashtra’s Takviki

COVID-19 in Rural India
novel coronavirus
COVID-19
Lockdown
Maharashtra
marathwada
Osmanabad
Rural Economy
Rabi harvest
Takviki
Nizamuddin Markaz

Related Stories

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

पश्चिम बंगाल में मनरेगा का क्रियान्वयन खराब, केंद्र के रवैये पर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी

दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली

पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक


बाकी खबरें

  • ali javed
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा
    01 Sep 2021
    प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और उर्दू के प्रसिद्ध लेखक अली जावेद के आकस्मिक निधन से साहित्यिक-सांस्कृतिक जगत में शोक व्याप्त हो गया है।
  • cast census
    राज वाल्मीकि
    जाति-जनगणना : क्यों और कौन कर रहा है विरोध?
    01 Sep 2021
    यदि जातिगत जनगणना होती है तो सत्ता के समीकरण बदलेंगे। यथास्थिति बदलेगी। समाज में एक बड़ी हलचल होगी। यही कारण है कि भाजपा इस विषय में बहुत बचकर चल रही है। वह न विरोध कर पा रही है न खुलकर समर्थन।
  •    India Corona Update
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में फिर 41,965 नए मामले, 460 मरीज़ों की मौत
    01 Sep 2021
    देश में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 28 लाख 10 हज़ार 845 हो गयी है। जिनमें से अब तक 4 लाख 39 हज़ार 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • Jallianwala bagh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जलियांवाला बाग़ परिसर पुनर्निर्माण पर विपक्ष, इतिहासकार उठा रहे सवाल, कहा शहीदों का अपमान
    01 Sep 2021
    ‘‘जलियांवाला बाग़ के शहीदों का ऐसा अपमान वही कर सकता है जो शहादत का मतलब नहीं जानता। मैं एक शहीद का बेटा हूं। शहीदों का अपमान किसी कीमत पर सहन नहीं करूंगा। हम इस अभद्र क्रूरता के ख़िलाफ़ हैं।’’
  • DU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध
    01 Sep 2021
    ‘रिजेक्ट एनईपी’ हैशटैग का इस्तेमाल कर शिक्षक और छात्र संगठनों ने ट्विटर पर शिक्षा नीति के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। इससे पहले 24 अगस्त को डूटा आह्वान पर डीयू के शिक्षक और छात्रों ने उपकुलपति के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License