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राजनीति
कोविड-19: लॉकडाउन की मार से बुरी तरह से बेहाल ओला-उबर चालकों ने वित्तीय सहायता की मांग की है 
27 मई को दो यूनियनों, जिनमें से एक तेलंगाना और दूसरी दिल्ली में है, ने अपनी-अपनी राज्य सरकारों से ऐप-बेस्ड चालकों के समक्ष आये वित्तीय संकट पर तत्काल ध्यान दिये जाने की मांग की है।
रौनक छाबड़ा
29 May 2021
कोविड-19: लॉकडाउन की मार से बुरी तरह से बेहाल ओला-उबर चालकों ने वित्तीय सहायता की मांग की है 
चित्र साभार: द इकॉनोमिक टाइम्स 

कोरोना वायरस महामारी ने देश भर के सभी प्रमुख महानगरीय शहरों में ऐप-आधारित चालकों को दाने-दाने के लिए मुहताज कर दिया है – और उनके सामने अपनी रोजी-रोटी को चला पाने के लिए भविष्य की राह भी बेहद उबड़-खाबड़ बनी हुई है।

इस हकीकत से रूबरू होते हुए, चालकों के संघ निकायों ने एक बार फिर से सरकारों से वित्तीय मदद के लिए गुहार लगानी शुरू कर दी है, जबकि ओला और उबर जैसी अपनी नियोक्ता कंपनियों को “इन मुश्किल हालात में पर्याप्त सहायता नहीं देने” के लिए आड़े हाथों लिया है। 

बृहस्पतिवार, 27 मई को, तेलंगाना और दिल्ली में एक दूसरे से मीलों दूर रहते हुए दो यूनियनों ने अपनी-अपनी राज्य सरकारों से वित्तीय संकट का सामना कर रहे ऐप-आधारित वाहन चालकों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग की है, जिसकी मुख्य वजह शहरी केन्द्रों में लॉकडाउन से उत्पन्न बेहद कम दैनिक यात्रियों के आवागमन के चलते उठ खड़ी हुई है।

तेलंगाना स्टेट टैक्सी एंड ड्राईवर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने गुरूवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को “इस हालात की गंभीरता का संज्ञान लेने” के लिखा और तेलंगाना में सभी व्यावसायिक टैक्सी चालकों के लिए प्रति माह 8,500 रूपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का अनुरोध किया।

पत्र में कहा गया है कि “लॉकडाउन के कारण पिछले एक साल से उनकी बचत लगभग खत्म हो चुकी है, घरों में राशन का स्टॉक खत्म हो चुका है और कर्जे लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, जबकि वे इस अभूतपूर्व संकट से निपटने की कोशिशों में लगे हुए हैं।” तेलंगाना राज्य चालकों की जॉइंट एक्शन कमेटी एक छतरी निकाय है, जिसमें 20 गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स यूनियन शामिल हैं।

बाकी चीजों के अलावा संयुक्त निकाय ने तेलंगाना चालक कल्याण परिषद की स्थापना और कम से कम तीन महीनों के लिए वाहन फिटनेस एवं रोड टैक्स पर छूट दिए जाने की भी मांग की है।

राज्य में कोविड-19 मामलों में एक बार फिर से उभार के मद्देनजर, वर्तमान में तेलंगाना 30 मई तक कुछ अपवादों के साथ पूर्ण बंदी के अधीन है। कथित सूचना के मुताबिक, यातायात पर लागू प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने का फैसला 30 मई को ही मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लिया जायेगा।  

तेलंगाना चालकों के संयुक्त निकाय के चेयरमैन, शेख सलाउद्दीन ने शुक्रवार को न्यूज़क्लिक को बताया कि राज्य में अभी तक 700 से अधिक “ऐप-आधारित चालक” इस वायरल कोविड-19 संक्रमण की जद में आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि “उनमे से करीब 10 से 11 लोग वायरस की वजह से अपनी जान गँवा चुके हैं।”

सलाउद्दीन ने इस दौरान सवारियों को तय करने वाली कंपनियों के द्वारा वाहन चालकों के प्रति दिखाई गई उदासीनता की जमकर आलोचना की। उनका आरोप था कि “इन कठिन परिस्थितियों में वे वाहन चालकों के लिए पर्याप्त नहीं कर रहे हैं। यहाँ तक कि कंपनियों द्वारा बहु-प्रचारित वित्तीय मदद भी सिर्फ कुछ प्रतिशत वाहन चालकों तक ही पहुँच पाई है।”

राष्ट्रीय राजधानी में सर्वोदय ड्राइवर्स एसोसिएशन ऑफ़ डेल्ही ने कुछ इसी तरह की मांग अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्ववाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने पेश की है, जिसमें सरकार की घोषित सहायता को राष्ट्रीय राजधानी में सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को कवर करने के लिए विस्तारित किये जाने की मांग उठाई गई है।

इससे पहले पिछले महीने, सीएम केजरीवाल ने ऑटोरिक्शा चालकों, सार्वजनिक सेवा वाहन (पीएसवी) बैज रखने वाले सभी व्यक्तियों और परा-पारगमन वाहन चालकों को 5,000 रूपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी। इस धनराशि का वितरण इस सप्ताह से शुरू होने की खबर है। दिल्ली में 19 अप्रैल से लॉकडाउन लागू है। 

सर्वोदय ड्राईवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए दावा किया कि यह घोषणा “सभी वाणिज्यिक वाहन चालकों को कवर नहीं करती है।”

इससे पहले व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए हल्के मोटर वाहन श्रेणी के यातायात वाहनों को चलाने के लिए कमर्शियल लाइसेंस लेना आवश्यक था। हालांकि साल 2018 में इस नियम को बदल दिया गया था, जब सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद, केंद्र ने व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए चालकों को टैक्सी एवं अन्य हल्के वाहन चलाने के लिए प्राइवेट लाइसेंस का उपयोग करने की अनुमति प्रदान कर दी थी। 

गिल ने न्यूज़क्लिक को बताया “दिल्ली में बिना पीएसवी बैज के ऐसे करीब 50,000 वाहन चालक हैं जो ओला और उबर जैसी कंपनियों के लिए वाहन चलाते हैं। हमारी आप सरकार से मांग है कि उन्हें भी यह वित्तीय मदद दी जाये।”

गिल ने “आबादी को बिना पर्याप्त सामाजिक सहायता” पहुंचाए “लॉकडाउन थोपने वाली नीति” की भी आलोचना की। उनका प्रश्न था कि “लॉकडाउन के दौरान भी किराया, ईएमआई और अन्य मासिक भुगतान चुकाने होते हैं। हमसे कैसे उम्मीद की जाती है कि बिना काम पर गए हम इन सबका प्रबंधन कर सकेंगे?

जहाँ तक ऐप-आधारित वाहन चालकों का मुद्दा है तो इस बारे में उनका कहना था कि लॉकडाउन हटाने के बाद उनकी स्थिति “तुरंत नहीं सुधरने वाली है।” उन्होंने कहा “ऐसा नहीं होने जा रहा है कि कंपनियां हमसे कमीशन लेना बंद कर देंगी। यदि ऐसा होता है तो इसके बाद भी वाहन चालकों के लिए यह सब आसान नहीं होगा।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

COVID-19: Hit Hard by Lockdown, Ola-Uber Drivers Call for Financial Support

Telangana State Taxi and Drivers Joint Action Committee
Sarvodaya Drivers Association
Ola Uber Drivers
COVID 19 Second Wave
Lockdown Impact on Drivers
Delhi
Telangana
App Based Drivers
Lockdown Compensation

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