NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
त्रिपुरा में भाजपा द्वारा वाम मोर्चे और मीडिया संस्थानों पर बर्बर हिंसा के ख़िलाफ़ दिल्ली में माकपा का रोष प्रदर्शन
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि यह हमला माकपा पर नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र पर हमला है। बीजेपी और आरएसएस देश के संवैधानिक मूल्यों को खत्म करना चाहती है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Sep 2021
त्रिपुरा में भाजपा द्वारा वाम मोर्चे और मीडिया संस्थानों पर बर्बर हिंसा के ख़िलाफ़ दिल्ली में माकपा का रोष प्रदर्शन

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं की उग्र भीड़ द्वारा मुख्य विपक्षी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ) यानी माकपा के कार्यालयों और नेताओं के घरों पर हुई हिंसा के खिलाफ दिल्ली में माकपा कार्यकर्ताओं ने रोष प्रदर्शन किया। इस रोष प्रदर्शन में माकपा के महासचिव सीतराम येचुरी, पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, प्रकाश करात, सुभाषणी अली, राज्यसभा सांसद वी शिवदसान, दिल्ली राज्य सचिव के एम तिवारी भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा और कई अन्य नेता भी शमिल हुए।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि यह हमला माकपा पर नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र पर है। बीजेपी और आरएसएस देश के संवैधानिक मूल्यों को खत्म करना चाहती है। 

येचुरी न कहा कि ये हमला हमारे द्वारा लड़े जा रहे जनता के संघर्ष को दबाने का प्रयास है। लेकिन वो नहीं जानते इससे हम डरने वाले नहीं हैं । आपको बता दें यह हमला उस वक्त हुआ जब माकपा की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने अपने राष्ट्रीय अभियान 'कहाँ है हमारा रोज़गार' के सवाल पर जुलूस निकाला। इस तरह का प्रदर्शन देशभर के अलग-अलग राज्यों में लगातार हो रहे हैं। दिल्ली में भी डीवाईएफआई ने केजरीवाल सरकार से यही सवाल पूछते हुए 12 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेरने का आह्वान किया है। हालाँकि बीजेपी के नेताओं और उनकी सरकार का कहना है कि इसी दौरान माकपा के लोगों ने बीजेपी के कार्यकर्ता पर कथित तौर पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

बीजेपी के दावों पर शक इसलिए होता है क्योंकि त्रिपुरा में जबसे सत्ता परिवर्तन हुआ है उसके बाद से विपक्ष लगातार उस पर हिंसा के आरोप लगा रहा है। यहाँ तक कि पंचायत चुनावों में बीजेपी पर आरोप लगा की उसने वाम समर्थित उम्मीदवारों को नामांकन तक दाखिल करने नहीं दिया। हाल ही में बीते सोमवार को त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को धनपुर जाने से रोका गया था और माकपा ने उस दौरन भी हिंसा का आरोप लगाया था।

डीवाईएफआई के दिल्ली राज्य सचिव अमन सैनी ने न्यूज़क्लिक से कहा कि त्रिपुरा में  बीजेपी की सरकार जनता के बीच उठ रहे असंतोष के सुर को दबाने के लिए प्रयास कर रही है। आज त्रिपुरा में बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन जब युवा रोजगार मांगता है तो सरकार उन पर हमला कर रही है । 

माकपा ने बताया कि उदयपुर उपमंडल कार्यालय, गोमती जिला समिति कार्यालय, सिपाहीजाला जिला समिति कार्यालय, विशालगढ़ उपमंडल समिति कार्यालय, पश्चिम त्रिपुरा जिला समिति कार्यालय और सदर उपमंडल समिति कार्यालय को जला दिया गया है और क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।

उनके मुताबिक़ सबसे ख़तरनाक हमला अगरतला में राज्य समिति कार्यालय पर हुआ। कार्यालय के भूतल और पहली मंजिल में तोड़फोड़ की, दो कार्यालय कारों को जला दिया और त्रिपुरा के सम्मानित जन-नेता दशरथ देब की प्रतिमा को तोड़ दिया।

इन हमलों में सबसे भयावह यह था कि सरकार से सवाल पूछने वाली मीडिया को भी नहीं बख्शा गया। एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल 'पीएन-24 न्यूज' और एक अखबार 'प्रतिभा कलम' के कार्यालयों पर भी हमला किया गया। वहीं माकपा समर्थित समाचार पत्र 'डेली देशारकथा' का कार्यालय भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

सरकार द्वारा ये कहे जाने पर कि ये एक राजनीतिक झड़प है, का  जवाब देते हुए  प्रकाश करात ने कहा, “ये कोई झड़प नहीं बल्कि एक सुनियोजित हमला है।  वॉ चाहते हैं कि हम वाम मोर्चा के लोगों को डरा कर विरोध न करे। लेकिन इसके बाद भी हम लड़ रहे है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह पहला  कोई हमला  नहीं है, इससे पहले कांग्रेस ने भी हमारे ऊपर हमला कर के 400 से अधिक कार्यकर्ताओं की हत्या की थी। हमने इसके अगले चुनाव दो तिहाई के बहुतम से जीते थे और 25 सेल तक सरकार  चलाई थी। अब इन हमलों से भी हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

गौरतलब है कि इनमें से कई जगहों पर मौजूद पुलिस भी चुप बैठी रही। एक वीडियो है जिसमें माकपा राज्य समिति कार्यालय के मामले में कुछ सीआरपीएफ जवान कार्यालय के सामने मौजूद थे लेकिन हमला शुरू होने से एक घंटे पहले उन्हें वापस बुला लिया गया।

इससे पहले माकपा के नेता सीताराम येचुरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि त्रिपुरा में आठ सितंबर को उनकी पार्टी के दफ्तरों पर ‘बीजेपी के लोगों की भीड़’ द्वारा हमला किया गया।

इस पत्र में उन्होंने लिखा कि माकपा और वाम मोर्चे के खिलाफ इन हिंसक हमलों को रोकने के लिए हम आपसे बिना किसी देरी के हस्तक्षेप करने का पुरजोर अनुरोध करते हैं। जिस तरह से हमले हुए, उससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राजनीतिक गतिविधियों को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने के विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों को कायम रखने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल है।

अगर पुलिस की मिलीभगत नहीं है तो भी हिंसा को रोकने और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने में नाकाम रहने पर केंद्र सरकार संवैधानिक सिद्धांतों को लागू करने के लिए कार्रवाई करती है।

पूरा पत्र यहाँ पढ़ें 

दिल्ली की तरह ही माकपा की हरियाणा राज्य कमेटी ने भी अपने सभी इकाइयों से इस बर्बर हिंसा के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरने का आह्वान किया है। बयाना जारी करते हुए राज्य सचिव सुरेंद्र सिंह ने कहा है कि पूर्व नियोजित तरीके से राज्य मुख्यालय सहित माकपा के कार्यालयों पर भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने हमला किया जो की निंदनीय है।

सिंह ने कहा कि भाजपा के गैंग जिस बेबाकी से काम कर रहे हैं, वह राज्य सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। ये हमले इसलिए हुए क्योंकि सत्ताधारी दल ने राज्य में प्रमुख विपक्षी दल की गतिविधियों को दबाने की कोशिश की और वह नाकाम रहा।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र और विपक्ष पर इस अपमानजनक हमले की सभी लोकतांत्रिक विचारधारा वाले लोगों और पार्टियों को निंदा करनी चाहिए।

माकपा ने कहा केंद्र सरकार, विशेष रूप से गृह मंत्रालय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि त्रिपुरा में कानून का शासन कायम है और नागरिकों के अधिकार सुरक्षित हैं।

Tripura
BJP
Left Front
Left party
CPIM
Delhi Protests
Sitaram yechury
Modi government
Brinda Karat

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License