NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ईपीएफओ ब्याज दर 4-दशक के सबसे निचले स्तर पर, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आम हड़ताल से पहले खोला मोर्चा 
ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने शनिवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी मौजूदा ब्याज दर को 8.5% से घटाकर 8.1% करने की सिफारिश की है। 
रौनक छाबड़ा
15 Mar 2022
 EPFO
चित्र साभार: द इंडियन एक्सप्रेस 

नई दिल्ली: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उसकी ओर से आगामी राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने का आहवान किया गया है क्योंकि केंद्र की ओर से देश के सबसे बड़े सेवानिवृत्त कोष के लिए नई ब्याज दर की सिफारिश की गई, जो कि लगभग चार दशकों में सबसे कम है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केन्द्रीय न्यासी बोर्ड ने शनिवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी ब्याज दर को मौजूदा 8.5% से घटाकर 8.1% करने की सिफारिश की है। मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1977-78 के बाद से यह सबसे कम दर है, उस दौरान यह 8% थी।

इस नवीनतम फैसले को ईपीएफओ के केन्द्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की गुवाहाटी में हुई बैठक के दौरान लिया गया। यह एक संवैधानिक निकाय है जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के सदस्यों को शामिल किया जाता है। 

केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता में, सीबीटी के द्वरा ब्याज दर की संस्तुति की जाती है, जिसे बाद में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इसके बाद, अधिसूचित हो जाने के बाद ईपीएफओ के द्वारा इसे ग्राहकों के खातों में रिटर्न जमा कर दिया जाता है। वर्तमान में, ईपीएफओ के पांच करोड़ से अधिक की संख्या में ग्राहक (अभिदाता) हैं। 

शनिवार को सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की ओर से बताया गया कि उक्त ईपीएफओ की सीबीटी बैठक में कर्मचारियों के सभी प्रतिनिधियों ने ब्याज दरों में कटौती के फैसले का “विरोध” किया था। इस कदम की निंदा करते हुए, सीटू के महासचिव तपन सेन ने कहा कि केंद्र के द्वारा जिस तर्क को आगे बढ़ाया जा रहा है वह यह है कि ईपीएफओ के रिटर्न को बैंक में किसी भी अन्य जमा पर मिलने वाली ब्याज दरों के बराबर किया जाना चाहिए।

सेन का तर्क था, “यह कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकता, क्योंकि ईपीएफ कर्मचारियों की जीवन भर की आवर्ती बचत है जो सामाजिक सुरक्षा के हिस्से के तौर पर उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए है।”

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, निश्चित रूप से, पिछले कुछ वर्षों से वित्त मंत्रालय द्वारा सेवानिवृत्त निधि निकाय के द्वारा लिए उच्च दर को बरकरार रखे जाने पर सवाल खड़े किये जाते रहे हैं, और इसकी ओर समग्र ब्याज दर परिदृश्य के अनुरूप इसे कम करने के लिए दबाव बनाया जाता रहा है। भारत में, छोटी बचत दरें 4% से 7.6% के बीच बनी हुई हैं।

हालाँकि, जब बात ईपीएफओ की आती है, जो आम तौर पर वरिष्ठ नागिरकों को भविष्य निधि के संचयन के जरिये उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के समान होता है, ऐसे में ब्याज दरों में कटौती की बात निश्चित रूप से ट्रेड यूनियनों को रास नहीं आने वाली है।

आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव, अमरजीत कौर ने कहा है कि केंद्र औद्योगिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने की अपनी “जिम्मेदारी से पीछे हट” रहा है और “उन्हें वित्तीय बाजार की सनक के भरोसे छोड़ रहा है।”

शनिवार को अपने एक बयान में उन्होंने कहा है, “समय आ गया है कि सरकार को किसानों से लेकर संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के मेहनतकश लोगों के सभी वर्गों की देखभाल के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष निधि में अपना योगदान करने की जरूरत है। वित्तीय बाजार के साथ खिलवाड़ करने से कहीं से भी करोड़ों मेहनतकश वर्ग के लोगों को मदद नहीं मिलने जा रही है, जो राष्ट्रीय संपत्ति में अपने हिस्से की मांग कर रहे हैं, जिसे वे अपने खुद के बल पर पैदा करते हैं।” 

दोनों केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने देश के श्रमिकों से इस नवीनतम फैसले के खिलाफ 28 और 29 मार्च को आगामी राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। देश में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा संयुक्त रूप आहूत की गई, हड़ताल की कार्यवाही केंद्र पर अन्य मुद्दों के अलावा चार श्रम संहिताओं को वापस लेने के लिए दबाव बनाने का काम करेगी।

दरों में कटौती के फैसले ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को भी केंद्र की आलोचना करने के लिए प्रेरित किया है।

इस बीच, केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेन्द्र यादव ने शनिवार को यह तर्क रखते हुए इस फैसले को सही ठहराने की कोशिश की कि सामाजिक सुरक्षा को वैश्विक स्थिति और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए विचार किये जाने की जरूरत है। 

पिछले दिनों, कोविड-19 महामारी के चलते सेवानिवृत्त कोष में भारी निकासी और पहले से कम अंशदान को देखा गया था। इस अवधि के दौरान 2020-21 में, ईपीएफओ ने पीएफ जमा राशि पर ब्याज दरों को पिछले वर्ष के समान ही बरकरार रखा था। 

शनिवार को, यादव ने कहा कि वित्त वर्ष22 के लिए ईपीएफओ का कोष 9.4 लाख करोड़ रूपये के स्तर पर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के दौरान 8.29 लाख करोड़ रूपये था। 2021-22 में निवेशों से इसकी आय 2020-21 के 70,457 करोड़ रूपये से बढ़कर 76,768 करोड़ रूपये पहुँच गई थी। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

CTUs up the Ante Ahead of General Strike as EPFO Rate Slashed to 4-Decade Low

Employees’ Provident Fund Organisation
Interest Rate
CITU
AITUC
general strike
Central Government
Narendra modi
Bhupendra Yadav
EPFO

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत
    16 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर के अस्पतालों में हर दिन चमकी बुखार के लक्षण वाले बच्चे आ रहे हैं।
  • पीपुल्स डिस्पैच
    द.अफ्रीकाः स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना बाद की कटौती का विरोध कर रहे हैं
    16 Apr 2022
    दक्षिण अफ्रीका के कई प्रांतों में स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों ने अपने रोजगारों के नुकसान और सेवाओं के पुनर्गठन के खतरों का सामना करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और औद्योगिक…
  • सोनिया यादव
    यूपी: अब झांसी में अवैध खनन की रिपोर्टिंग करने गए पत्रकार पर हमला, कहां है कानून व्यवस्था? 
    16 Apr 2022
    प्रदेश में पत्रकारों के ख़िलाफ़ जिस तरह से मार-पीट और मुक़दमे दर्ज हो रहे हैं उससे तो यही लगता है कि आने वाले दिनों में राज्य में पत्रकारिता और पत्रकारों की दशा और खराब हो सकती है।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: ये बुलडोजरिस्तान हमारा, हम को प्राणों से है प्यारा!
    16 Apr 2022
    सच तो यह है कि बुलडोजर, मोदी जी के नये भारत की निशानी है। दिखाने में सेक्युलर और घर-दुकान गिराने में, छांट-छांटकर चलने वाला। बाबा का, मामा का या और किसी भी भगवाधारी का बुलडोजर जब चलता है, पुराना…
  • रमा तेलतुंबड़े आंबेडकर
    दो साल से कैद आनंद तेलतुंबड़े के जीवन के सबसे मार्मिक पल
    16 Apr 2022
    आनंद ने न्यायपालिका से अपने खिलाफ़ लगाए गए घृणित और गलत आरोपों को रद्द करने की गुहार लगाई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License