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अमीरों द्वारा किए जा रहे कार्बन उत्सर्जन से ख़तरे में "1.5 डिग्री सेल्सियस" का लक्ष्य
बेहद अमीर लोगों की विलासितापूर्ण चमक-दमक वाली जीवनशैली से COP26 जैसे सम्मेलनों के ज़रिए मौसम परिवर्तन को रोकने के लिए जो संकल्प लिए जा रहे थे, वे ख़तरे में पड़ गए हैं।
संदीपन तालुकदार
10 Nov 2021
कार्बन उत्सर्जन

दुनिया ग्लासगो में जारी COP26 सम्मेलन की तरफ आतुरता से देख रही है। लोगों का ध्यान इस सम्मेलन में अलग-अलग देशों द्वारा किए जाने वाले उन वायदों की तरफ ज्यादा है, जिनमें मानव निर्मित मौसम आपात के प्रभाव को रोकने की बात की जाएगी। इसमें एक अहम मुद्दा जीवाश्म ईंधन उपयोग और कार्बन फुटप्रिंट को कम से कम उस स्तर तक कम करना है, जिसका वायदा 2015 में अपनाए गए पेरिस समझौते में किया गया था। 

अब इससे जुड़ा ज्यादा व्यापक सवाल यह उठता है कि यहां जवाबदेही में किसका हिस्सा ज़्यादा है? क्या सभी देशों और पृथ्वी पर मौजूद पूरी इंसानी आबादी की बड़ी जिम्मेदारी है, जबकि अमीर देश और अमीर आबादी कुल उत्सर्जन का ज़्यादा हिस्सा उत्सर्जित करते हैं। 

इस संबंध में ऑक्सफैम द्वारा किया गया एक दिलचस्प अध्ययन अहम हो जाता है। इस अध्ययन को "यूरोपियन एंवॉरनमेंटल पॉलिसी (आईईईपी) और स्टॉकहोम एंवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई) ने संयुक्त तौर पर किया था। अध्ययन कहता है कि दुनिया सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोगों द्वारा उत्सर्जित किया जा रहे कार्बन उत्सर्जन की दर, 1.5 डिग्री सेल्सियस ताप बढ़ाने के लिए जरूरी कार्बन उत्सर्जन की तुलना में 30 गुना ज़्यादा है। इसके उलट, दुनिया के सबसे गरीब़ 50 फ़ीसदी लोग मौसम परिवर्तन को थामने के लिए तय की गई दर से कहीं ज़्यादा कम उत्सर्जन कर रहे हैं।    

यह रिपोर्ट दुनिया की अलग-अलग आबादी द्वारा की जा रही ख़पत और उत्सर्जन में गंभीर अंतर को बताती है। यह रिपोर्ट COP26 की पृष्ठभूमि में भी अहमियत रखती है। 

ऑक्सफैम में मौसम नीति प्रमुख नाफकोटे दाबी कहती हैं, "कुलीन लोगों के एक छोटे हिस्से को प्रदूषण फैलाने की छूट मिली नज़र आ रही है।"

वह कहती हैं, "उनका जरूरत से ज्यादा उत्सर्जन अतिवादी मौसम स्थितियों का निर्माण कर रहा है और वैश्विक ताप की बढ़ोत्तरी को सीमित करने के लक्ष्यों को दूर कर रहा है।"

अगर पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पाना है, तो कार्बन डाइऑक्साइड का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन, 2030 तक हर साल के लिहाज से प्रति व्यक्ति 2.3 टन कम करना होगा। यह मात्रा, आज हमारे द्वारा किए जा रहे उत्सर्जन की आधी है। अमीर अल्पसंख्यकों की भड़कीली-चमकीली जीवन शैली इस महत्वकांक्षी परियोजना को धता बता रही है, जबकि यह परियोजना दुनिया के लिए इस अहम मोड़ पर बेहद जरूरी है। 

अध्ययन चेतावनी देते हुए कहता है, मौजूदा दर के हिसाब से सबसे अमीर 1 फ़ीसदी लोग एक साल में प्रति व्यक्ति 70 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करेंगे। कुलमिलाकर, 2030 तक यह एक फ़ीसदी आबादी करीब़ 16 फ़ीसदी उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होगी। जबकि 1990 में यह आंकड़ा 13 फ़ीसदी था। इससे पता चलता है कि इनके उत्सर्जन में तीव्र उछाल आ रहा है। इस बीच सबसे गरीब़ 50 फ़ीसदी लोग औसत तौर पर प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक साल में सिर्फ़ एक टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करेंगे। 

अध्ययन के मुताबिक़, दुनिया के यह सबसे अमीर 1 फ़ीसदी लोग, ना केवल अरबपति या करोड़पति हैं, बल्कि इसमें वह लोग भी शामिल हैं, जो 1,72,000 अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा कमा रहे हैं। अध्ययन ने दुनिया के सबसे अमीर 10 फ़ीसदी लोगों पर भी गौर फरमाया। इनमें वे लोग शामिल थे, जो 55 हजार अमेरिकी डॉलर सालाना से ज़्यादा कमा रहे हैं। अध्ययन में पता चला कि आबादी का यह हिस्सा, 9 गुना ज़्यादा उत्सर्जन कर रहा है। 

अध्ययन के लेखक और IEEP से ताल्लुक रखने वाले टिम गोर कहते हैं, "यह पेपर दिखाता है कि वैश्विक ताप को 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी के दायरे में रखने की लड़ाई को ज़्यादातर लोग नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं, इसको नुकसान दुनिया के सबसे अमीर लोगों द्वारा किए जा रहे उत्सर्जन से हो रहा है।"

ऑक्सफैम स्कॉटलैंड के प्रमुख जैमी लिविंगस्टोन कहते हैं, "COP26, मौसम परिवर्तन के खिलाफ़ लड़ाई में सच्चाई का वक़्त है। वैश्विक नेताओं को अतिरिक्त उत्सर्जन और वैश्विक ताप वृद्धि को कम करने पर सहमत होना होगा और उन्हें यह ग्लासगो में ही करना होगा। देरी करने से जिंदगियों का नुकसान होगा।"

सबसे अमीर लोगों की विलासित और चमक-दमक वाली जीवन शैली पर मौसम आपात से बढ़ती चिंताओं और इन्हें सीमित करने के संकल्पों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी उद्योगपति जेफ बेजोस ने अपने नए शेफर्ड रॉकेट में अंतरिक्ष की यात्रा की, ऐसा ही रिचर्ड ब्रेसनन ने भी किया, जो अपने मालिकाना हक़ वाले वर्जिन गैलेक्टिक रॉकेट में अंतरिक्ष की सीमा तक गए। हम सब जानते हैं कि एलन मस्क ने इंसानों को मंगल पर ले जाने का वायदा किया है। अध्ययन बताते हैं कि स्पेस फ्लाइट को 11 मिनट चलाने पर 75 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। यह मात्रा सबसे गरीब़ एक अरब लोगों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन से भी ज़्यादा है।  

बेइंतहां अमीर लोग, जिनके पास कई निजी हवाई जहाज़, घर और याच हैं, वे अपनी बेहद विलासितापूर्ण गतिविधियों के चलते बहुत ज़्यादा उत्सर्जन करते हैं। एक हालिया अध्ययन ने मशहूर हस्तियों की यात्राओं की जांच की और पाया कि इनमें से कुछ लोग एक साल में 1000 टन से भी ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करते हैं। इन लोगों की यात्राओं की जानकारियां उनके सोशल मीडिया हैंडल से ली गई थीं। 

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Carbon Emission of 1% Super-Rich Imperils 1.5 Degree Celsius Target

COP26
Carbon Emission
PARIS AGREEMENT
climate change
Super Rich Emitters
1% Rich Emits Most
Oxfam
Institute for European Environmental Policy
Stockholm Environment Institute

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