NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक:  अब नीतीश का आबादी के आधार पर आरक्षण का दांव
बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग से पहले नीतीश कुमार ने आरक्षण पर बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि वह भी जानते हैं कि किसी भी आरक्षण का तब फायदा है जब रोज़गार के अवसर मौजूद हों। इसके अलावा ये बात उनकी सहयोगी बीजेपी को भी शायद ही पसंद आए
आज का कार्टून
30 Oct 2020
कार्टून क्लिक

बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग से पहले नीतीश कुमार ने आरक्षण पर बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर में चुनावी सभा में नीतीश कुमार ने कहा कि हम तो चाहेंगे कि जितनी आबादी है, उसके हिसाब से आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। इसमें हम लोगों की कहीं से कोई दो राय नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां तक संख्या का सवाल है, जनगणना होगी तब उसके बारे में निर्णय होगा। यह निर्णय हमारे हाथ में नहीं है।

समझा जा रहा है कि रोज़गार ख़ासकर सरकारी नौकरी के सवाल पर तेजस्वी यादव से मात खा रहे नीतीश ने आबादी के आधार पर आरक्षण का दांव खेला है। हालांकि वह भी जानते हैं कि किसी भी आरक्षण का तब फायदा है जब शिक्षा और रोज़गार के अवसर मौजूद हों। अगर सरकारी नौकरी ही नहीं है तो आरक्षण कितना भी बढ़ा दीजिए, किसी को भी दे दीजिए उसका कोई फायदा नहीं है। हालांकि नीतीश की सहयोगी बीजेपी को शायद ही आरक्षण की ये बात पसंद आए, क्योंकि यह तय है कि देश में आबादी के आधार पर भी दलित और पिछड़ों की संख्या सबसे ज़्यादा है, तभी ये नारा गूंजता है कि ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ और ये बात बीजेपी के अगड़ी जाति के कोर वोटर के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

cartoon click
Irfan ka cartoon
cartoon
Bihar election 2020
Nitish Kumar
Tejashwi Yadav

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

कार्टून क्लिक: मैंने कोई (ऐसा) काम नहीं किया जिससे...

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

राम मंदिर के बाद, मथुरा-काशी पहुँचा राष्ट्रवादी सिलेबस 


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License