NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक: किताबों की राजनीति, राजनीति की किताब
राजनीति में समय का बहुत महत्व है। और दोनों किताब वाकई भाजपा के हिसाब से ‘समय पर’ ही आईं हैं!
आज का कार्टून
24 Nov 2021
cartun

हर किताब की अपनी राजनीति होती है और राजनीति की भी अपनी किताब होती है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के बाद मनीष तिवारी की किताब भी चर्चा में आ गई है। इन दोनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की किताबों में बहुत कुछ ऐसा है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद मुफ़ीद और फ़ायदेमंद है। इसलिए उसने इन्हें लपक लिया है। और क्यों न लपके क्योंकि मौका यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव का जो है। और उसे इसी बहाने कांग्रेस पर निशाना साधने और उसे कठघरे में खड़ा करने का मौका जो मिल गया है। इन दोनों किताबों पर सवाल भी इसी लिए उठ रहे हैं, क्योंकि राजनीति में समय का बहुत महत्व है। और दोनों किताब वाकई भाजपा के हिसाब से ‘समय पर’ ही आईं हैं!

क्या है पूरा मामला? क्यों है विवाद

दरअसल मनीष तिवारी की किताब में 26/11 के बाद की प्रतिक्रिया को लेकर यूपीए सरकार की आलोचना की गई है। हालांकि मनीष तिवारी ने उनकी किताब के इस अंश के जरिये भाजपा के कांग्रेस पर हमले को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के एक उद्धरण को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी की प्रतिक्रिया पर उन्हें हंसी आती है।

पीटीआई-भाषा की ख़बर के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पुस्तक को लेकर विवाद अभी थमा ही था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की नयी पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा हो गया क्योंकि इसमें वह साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले पर जवाबी प्रतिक्रिया को लेकर तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की आलोचना करते हुए दिख रहे हैं।      

तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘10 फ्लैश प्वाइंट्स: 20 ईयर्स’ में लिखा है कि कई बार संयम कमजोरी की निशानी होती है और भारत को 26/11 हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी।     

उनकी पुस्तक के इस अंश को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने फिलहाल इस पुस्तक पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।      

लोकसभा सदस्य तिवारी ने इस पुस्तक में पिछले दो दशक के देश के सुरक्षा हालात पर प्रकाश डाला है। यह पुस्तक दो दिसंबर से पाठकों के लिए उपलब्ध होगी।       

तिवारी कांग्रेस के उस ‘जी 23’ समूह में शामिल हैं जिसने पिछले साल सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक संगठनात्मक बदलाव और जमीन पर सक्रिय अध्यक्ष की मांग की थी।

तिवारी ने मंगलवार को ट्विटर पर अपनी इस पुस्तक के कुछ अंश साझा किए। पुस्तक में उन्होंने लिखा, ‘‘अगर किसी देश (पाकिस्तान) को निर्दोष लोगों के कत्लेआम का कोई खेद नहीं है तो संयम ताकत की पहचान नहीं है, बल्कि कमजोरी की निशानी है। ऐसे मौके आते हैं जब शब्दों से ज्यादा कार्रवाई दिखनी चाहिए। 26/11 एक ऐसा ही मौका था।’’

तिवारी ने मुंबई आतंकी हमले को क्रूर हमला करार देते हुए इसे ‘भारत का 9/11’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसा समय था जब भारत को प्रतिक्रिया में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी।’             

उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्री मार्ग से मुंबई के विभिन्न इलाकों में घुस गए थे और उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। उस हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों सहित 166 लोग मारे गए थे        

भाजपा ने तिवारी की इस पुस्तक को लेकर आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार को 2008 में 26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के बाद जिस प्रकार की मजबूत जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए थी, वैसी नहीं की और उसने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा।      

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस तथ्य के बाद आज स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस की जो सरकार थी, वह निठल्ली और निकम्मी थी। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर भारत की अखंडता की भी उसे चिंता नहीं थी।’’

तिवारी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पुस्तक के एक उद्धरण को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी की इस प्रतिक्रिया पर उन्हें हंसी आती है।     

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मुझे 304 पृष्ठों की किताब से एक उद्धरण पर भाजपा की प्रतिक्रिया पर हंसी आती है। इस पुस्तक में भारत को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा हालात संबंधी प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है। मुझे हैरानी होगी कि अगर भाजपा अपने शासनकाल के समय राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति से निपटने के संदर्भ में किए गए ‘कड़े विश्लेषण’ पर भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दे।’’    

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने तिवारी की पुस्तक पर फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तिवारी की पुस्तक से जुड़े सवाल पर कहा, ‘‘पहले किताब आए, हम और आप पढ़ेंगे। फिर देखते हैं कि चर्चा करनी है या नहीं... उस किताब या किसी अन्य बात से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आम लोग आज महंगाई के कारण कितना संघर्ष कर रहे हैं। हमारा यह धर्म है कि हम इन लोगों की आवाज उठाएं।’’   

तिवारी की इस पुस्तक से कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस नेता खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ को लेकर विवाद खड़ा हुआ था क्योंकि इसमें उन्होंने कथित तौर पर हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों के साथ की थी।    

विवाद खड़ा होने के बाद खुर्शीद ने कहा था कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क है और उन्होंने किसी को आतंकवादी नहीं कहा है।

 


बाकी खबरें

  • तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : मथुरा की जनता ने कहा मंदिर के नाम पर भंग हो रही सांप्रदायिक शांति
    19 Jan 2022
    कई स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई मुद्दा नहीं है, हम इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देंगे।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2.82 लाख से ज़्यादा नए मामले, 441 मरीज़ों की मौत
    19 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4.83 फ़ीसदी यानी 18 लाख 31 हज़ार हो गयी है।
  • यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    एम.ओबैद
    यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    19 Jan 2022
    प्रदेश में काम न मिलने के अलावा मनरेगा से जुड़े मज़दूरों को समय पर भुगतान में देरी का मामला अक्सर सामने आता रहता है। बागपत में इस योजना के तहत काम कर चुके मज़दूर पिछले दो महीने से मज़दूरी के लिए तरस…
  •  Memorial
    विक्रम सिंह
    1982 की गौरवशाली संयुक्त हड़ताल के 40 वर्ष: वर्तमान में मेहनतकश वर्ग की एकता का महत्व
    19 Jan 2022
    19 जनवरी, 1982 के दिन आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार ऐसी संयुक्त हड़ताल का आयोजन किया गया था जो न केवल पूरी तरह से सफल रही बल्कि इसकी सफलता ने भविष्य में मजदूरों और किसानों की एकता कायम करते…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर ; कश्मीर से UP: सियासत की बिछी बिसात, फ़रेब का खेल
    18 Jan 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर प्रेस क्लब को साजिशाना ढंग से बंद करने और उत्तर प्रदेश में बिछी सियासत की बिसात पर की चर्चा। कार्यक्रम में उन्होंने कश्मीर के पत्रकार अनीस ज़रगर और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License