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आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक:  दरअसल आपने किसानों को भारत में बंद कर दिया है!
किसान तो भारत बंद करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन हक़ीक़त ये है कि हमारी सरकार ने, हमारी व्यवस्था ने ही किसानों को भारत में बंद कर दिया है, बंधक बना लिया है।
आज का कार्टून
25 Sep 2020
cartoon click

किसान तो भारत बंद करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन हक़ीक़त ये है कि हमारी सरकार, हमारी व्यवस्था ने ही किसानों को भारत में बंद कर दिया है, बंधक बना लिया है। वरना क्या वजह थी कि जो कृषि बिल किसानों के फ़ायदे के लिए लाए गए बताए जा रहे हैं उनके बारे में किसानों से, उनके संगठनों से एक लाइन बात नहीं की गई। किसानों को वो दिया जा रहा है जो उन्होंने मांगा भी नहीं था। वे तो बरसों बरस से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक अपनी उपज का उचित दाम और सभी के लिए एमएसपी पर ख़रीद की अनिवार्यता की मांग कर रहा है। लेकिन नहीं उन्हें जबर्दस्ती की आज़ादी दी जा रही है जो उन्हें ग़ुलामी की ओर धकेल देगी। यही मज़दूरों के साथ हो रहा है। श्रम सुधार के नाम पर उनके और शोषण की व्यवस्था की जा रही है। दरअसल सच ये है कि आज हर बात, हर शब्द के मायने बदल दिए गए हैं। ‘अच्छे दिन’ बुरे में बदल गए हैं, विकास का नाम ‘विनाश’ हो गया है। इसी स्थिति को लेकर मुकुल सरल ने कहा कि  

आज़ादी-ओ-इंसाफ़, तरक़्क़ी, बराबरी

हैं लफ़्ज़ वही आज भी मतलब बदल गए

 

बदला नहीं है आज भी हुक्काम का चलन

बस नाम के ही रहनुमा-ओ-रब बदल गए

लेकिन ये हालात तब तक नहीं बदलने वाले जब तक ग़रीब, मेहनतकश एकजुट नहीं होगा। जब तक किसान, मज़दूर, कर्मचारी, छात्र-युवा ऊंच-नीच, जात-पात और धर्म-मज़हब में बंटे हैं तब तक राजनेता उन्हें इसी तरह बांटते, छांटते और शोषित करते रहेंगे।

है काम एक मेहनत, ग़ुरबत भी एक है

फिर क्या हुआ, किस बात पे मज़हब बदल गए

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