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भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक: यहां रहें या वहां, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है!
कोई इसे दोस्त की ‘पीठ में छुरा घोंपना’ कह सकता है, तो कोई सहयोगी के घर में ‘चोरी या डाका’। कोई कह सकता है कि जब खुद कोई घर छोड़कर जा रहा है तो दूसरों को क्या दोष देना। वैसे यूं भी कहा जा सकता है कि जेडीयू में रहो या बीजेपी में क्या फ़र्क़ पड़ता है। अब फ़र्क़ बचा ही क्या है!  
आज का कार्टून
26 Dec 2020
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देश की राजनीति में इन दिनों पाला बदल का खेल काफ़ी तेज़ है। बंगाल की ख़बरें तो सुर्खियों में हैं हीं, अरुणाचल से भी ऐसा ही उलटफेर सामने आया। अरुणाचल प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सात में से छह विधायकों के भाजपा में शामिल हो गए हैं। यानी इसे अरुणाचल में पूरी पार्टी का भाजपा में विलय कहा जा सकता है। क्रिसमस के मौके और नये साल से पहले जेडीयू को जो तोहफा मिला है उसे लेकर जेडीयू नेतृत्व भी सन्न है। नीतीश कुमार की यही जेडीयू बिहार में बीजेपी की सहयोगी है। और दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार चला रहे हैं। लेकिन बीजेपी अब अपने ही सहयोगी पार्टी को तोड़ रही है। और तोड़ना क्या लगभग खुद में विलय कर रही है। नीतीश जी को अब सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि बिहार में इस बार के जो नतीजे आए हैं उसमें भी इस तरह की टूट-फूट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

ताजा सियासी उलटफेर के बाद 60 सदस्यीय अरुणाचल विधानसभा में बीजेपी के 48 विधायक हो गए हैं। वहीं जेडीयू के पास अब केवल एक विधायक बचा है। कांग्रेस और एनसीपी के 4-4 विधायक हैं।

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License