NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
केंद्र किसानों के आंदोलन को बदनाम कर रहा है, मांगें पूरी करे सरकार : एसकेएम
एसकेएम ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए हर अवसर का जमकर फायदा उठाया जा रहा है। हालांकि, उनकी विफल रणनीति को फिर से विफल होना तय है। कई राज्य सरकारें आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी हैं तथा आंदोलन से जुड़ने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन स्थल पर और किसान पहुंच गए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Jun 2021
केंद्र किसानों के आंदोलन को बदनाम कर रही है, मांगें पूरी करे सरकार : एसकेएम

नयी दिल्ली: दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को विपरीत परिस्थतियों में प्रदर्शन करते हुए 205 दिन हो गए हैं, लेकिन सरकार अभी भी इनकी सुध नहीं ले रहा है।  बल्कि सत्तधारी दल और उसके समर्थक अभी भी इस आंदोलन को बदनाम करने और किसान नेताओं पर सवाल उठाने में व्यस्त हैं। जबकि किसान आंदोलन भीषण ठंड, गर्मी बे मौसम की बरसता और आंधी तूफ़ान के बाद अब मानसून में भी वो हजारों हज़ार किसान सड़कों पर बैठे हैं। इस दौरान सैकड़ों किसानों ने अपनी जान भी गावं दी है।  ताज़ा मामला आंदोलन स्थल के पास एक व्यक्ति की मौत का है जिसे पुलिस हत्या बता रही है।  सत्ताधारी बीजेपी और उसके साथी इसको लेकर किसानों पर हमलावर हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) जो देशभर के सैकड़ों छोटे-बड़े किसान संगठनों का साँझा मंच है।  उसने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को ‘‘बदनाम’’ कर रही है और अगर सरकार उम्मीद कर रही कि आंदोलन खत्म हो जाएगा तो ऐसा नहीं होने वाला।

क्या है पूरा मामला

किसानों के प्रदर्शन स्थल टिकरी बॉर्डर पर हरियाणा के झज्जर के एक 42 वर्षीय व्यक्ति की प्रदर्शन स्थल पर बुधवार रात मौत हो गई। उसकी मृत्यु बुरी तरह से जलने के कारण हुई।  मृतक की पहचना कसार गांव निवासी मुकेश के तौर पर हुई है।  वो एक बस चालक थे, उनके भाई द्वारा नामित व्यक्ति के ख़िलाफ़ शिकायत की थी जिसे पुलिस द्वारा गिरफ़्तार कर लिया गया है।

पुलिस का कहना है मृतक और कुछ लोग वहां दारु पी रहे थे, वहीं इनकी बहस हुई जो  झगडे में बदल गई और फिर मृतक को आग के हवाले कर दिया गया।

हालांकि संयुक्त मोर्चे ने इस ख़बर के आते ही कहा कि इस घटना में आंदोलन  कर रहे किसानों का कोई लेना देना नहीं है। हरियाणा पुलिस इसकी 'निष्पक्ष जाँच' करे। उन्होंने कहा मुकेश की मौत के पीछे पारिवारिक कलह एक बड़ी वजह थी।  किसानों पर इसका इल्ज़ाम आंदोलन को बदनाम करने के लिए लगाया जा रहा है।

लेकिन हरियाणा सरकार और बीजेपी को तो जैसे ये मौका मिल गया। वो लोग इसे लेकर किसान आंदोलन पर ही सवाल उठाने लगे। पूरे आंदोलन को अनौतिक बताने लगे। 

एसकेएम ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए हर अवसर का जमकर फायदा उठाया जा रहा है। हालाँकि, उनकी विफल रणनीति को फिर से विफल होना तय है। कई राज्य सरकारें आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी हैं तथा आंदोलन से जुड़ने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन स्थल पर और किसान पहुंच गए हैं।

तीन कृषि कानूनों को खत्म करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून की मांग को लेकर मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान पिछले छह महीने से ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

मोर्चे ने अपने बयान में कहा, “सत्याग्रह किसानों का मार्ग है और कृषि कानूनों पर उनकी समझ, उनके विश्लेषण के सत्य के साथ-साथ उनकी आशा, शांति और दृढ़ता सुनिश्चित करेगी कि इस संघर्ष में अंततः जीत उनकी है। कसार गांव के मुकेश द्वारा आत्महत्या के दुर्भाग्यपूर्ण मामले को भाजपा सरकार के साथ-साथ मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा भी भुनाया जा रहा है  यह इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में भी परिलक्षित होता है।'

किसान संगठन ने आशंका जताई और कहा 'यह बताया गया है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की थी और विरोध स्थलों पर ‘अनुचित घटनाओं’ और “बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति” के आधार पर कुछ कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।'

एसकेएम ने कहा  ‘‘किसान जो मांग रहे हैं, वह यह है कि उनके आजीविका के मौलिक अधिकार की रक्षा की जाए। लोकतंत्र में यह अपेक्षा की जाती है कि सरकार उनकी जायज मांगों को मान लेगी। इसके बजाय, भाजपा नेतृत्व वाली सरकार अनावश्यक रूप से आंदोलन को लंबा खींच रही है, इसे बदनाम कर रही है और उम्मीद कर रही है कि यह ऐसे ही खत्म हो जाएगा। यह नहीं होने वाला है।’’

एसकेएम ने यह समझाते हुए कहा कि सरकार के एमएसपी जुमलों में कोई वास्तविक समाधान मौजूद नहीं है, भारत भर के किसान मांग कर रहे हैं कि इसे पूरे भारत में उन सभी के लिए कानूनी गारंटी के रूप में बनाया जाना चाहिए। कल अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर महाराष्ट्र के 20 जिलों के किसानो ने कम से कम 35 रुपये प्रति लीटर दूध के लाभकारी मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कोविड महामारी और लॉकडाउन के कारण दूध की कीमत घटकर केवल रु. 20/- प्रति लीटर रह गई है ।

संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि भाजपा के कई नेता केंद्र सरकार से किसानों के मुद्दे का समाधान करने के लिए कह रहे हैं। बयान में कहा गया, ‘‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (एम के स्टालिन) ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन में तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया। महाराष्ट्र भी किसानों पर केंद्रीय कानूनों के बुरे प्रभावों को बेअसर करने के लिए अपने कानून में संशोधन करने की प्रक्रिया में है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) भी लगातार कहती रही हैं कि आंदोलनकारी किसानों की मांगें पूरी होनी चाहिए। कुछ अन्य राज्यों में अन्य दलों की सरकारें भी किसानों के आंदोलन के साथ खड़ी हैं।’’

मोर्चा ने दावा किया कि उत्तराखंड के जसपुर से सैकड़ों किसान बृहस्पतिवार को गाजीपुर सीमा पर पहुंचे और भाकियू (टिकैत) के नेतृत्व में बड़ा काफिला पांच दिनों तक पैदल चलने के बाद शुक्रवार को गाजीपुर सीमा पहुंचा।

farmers protest
Farm Bills
Farm Laws
BJP
Modi Govt
SKM
Samyukt Kisan Morcha
MSP
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License