NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़ : विज्ञापन की शब्दावली पर आपत्ति, वामपंथी पार्टियों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
वाम नेताओं ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह विज्ञापन आदिवासी क्षेत्रों के पिछड़ेपन के लिए "वामपंथी" ताकतों को जिम्मेदार ठहराता प्रतीत होता है। इसलिए इस विज्ञापन में प्रयुक्त दक्षिणपंथी शब्दावली को सुधारा जाए और भविष्य में इस प्रकार की शब्दावली का उपयोग न करने का निर्देश सक्षम अधिकारियों को जारी किया जाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Jul 2021
छत्तीसगढ़ : विज्ञापन की शब्दावली पर आपत्ति, वामपंथी पार्टियों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी विज्ञापन की शब्दावली पर आपत्ति व्यक्त करते हुए प्रदेश की तीन वामपंथी पार्टियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है तथा मांग की है कि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग न करने के निर्देश सक्षम अधिकारियों को जारी किए जाएं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने दो दिन पहले एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें आगामी दो सालों में "वामपंथ प्रभावित" क्षेत्रों में सड़क संपर्क के लिए 1637 करोड़ रुपये खर्च करने का उल्लेख है। वामपंथी पार्टियों का कहना है कि यह शब्दावली गलत है और पूर्व भाजपा राज में वामपंथ को बदनाम करने के लिए ऐसी दक्षिणपंथी भाषा का उपयोग होता था, लेकिन आज कांग्रेस राज में भी इस शब्दावली का जारी रहना खेदजनक है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव संजय पराते, भाकपा के सचिव आरडीसीपी राव तथा भाकपा (माले)-लिबरेशन के सचिव बृजेन्द्र तिवारी ने इस संबंध में एक संयुक्त पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा है। अपने पत्र में तीनों वामपंथी नेताओं ने कहा है कि "वामपंथ प्रभावित" और "वामपंथ-उग्रवाद प्रभावित" शब्द समानार्थी नहीं है और उनके राजनीतिक निहितार्थ भिन्न-भिन्न होते हैं। इस देश की मुख्यधारा की वामपंथी पार्टियों को "वामपंथी उग्रवाद" के समकक्ष रखकर उसे बदनाम करने की कोशिश भाजपा करती रही है, जबकि हमारा वामपंथी-उग्रवाद से कोई लेना-देना नहीं रहा है। भाजपा की इसी समझदारी को इस विज्ञापन के जरिये आगे बढ़ाया गया है, जो खेदजनक है।

अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि वामपंथी ताकतों की देश की संसदीय राजनीति को रूपाकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका है और वह देश की संवैधानिक-लोकतांत्रिक-राजनैतिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 2005 में वामपंथ के बाहरी और सक्रिय समर्थन से ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का केंद्र की सत्ता में आना सुनिश्चित हो सका था। आज भी आम जनता के हितों से जुड़े कई साझा मुद्दों पर कांग्रेस और वामपंथी ताकतों के सहयोग व समर्थन से संघर्ष विकसित हो रहा है।

पूरा पत्र  इस प्रकार है :

प्रिय मुख्यमंत्री जी,

हम तीन वामपंथी पार्टियां -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा (मा-ले)-लिबरेशन -- आपका ध्यान निम्न तथ्यों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं :

हमारा ध्यान आपकी सरकार की ओर से 10 जुलाई, 2021 को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापन की ओर गया है, जिसमें आपकी सरकार ने कहा है कि अगले दो सालों में "वामपंथ प्रभावित क्षेत्र में 1637 करोड़ रुपयों से सड़क संपर्क" बनाया जाएगा। विज्ञापन संलग्न है।

निश्चित ही यहां आपकी सरकार का इशारा "माओवाद-प्रभावित या नक्सल प्रभावित वामपंथी-उग्रवाद" से है। लेकिन विज्ञापन में उपयोग में लाया गया शब्द "वामपंथ प्रभावित" भ्रम पैदा करता है। "वामपंथ प्रभावित" और "वामपंथ-उग्रवाद प्रभावित" शब्द समानार्थी नहीं है और उनके राजनीतिक निहितार्थ भिन्न-भिन्न होते हैं।

आप जानते हैं कि वामपंथी ताकतों की देश की संसदीय राजनीति को रूपाकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका है और वह देश की संवैधानिक-लोकतांत्रिक-राजनैतिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक से अधिक राज्यों में वह सत्ता में है/ रही है या प्रमुख विपक्षी पार्टी है/ रही है। वर्ष 2005 में वामपंथ के बाहरी और सक्रिय समर्थन से ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का केंद्र की सत्ता में आना सुनिश्चित हो सका था। आज भी आम जनता के हितों से जुड़े कई साझा मुद्दों पर कांग्रेस और वामपंथी ताकतों के सहयोग व समर्थन से संघर्ष विकसित हो रहा है।

इस देश की मुख्यधारा की वामपंथी पार्टियों को "वामपंथी उग्रवाद" के समकक्ष रखकर उसे बदनाम करने की कोशिश भाजपा करती रही है, जबकि हमारा वामपंथी-उग्रवाद से कोई लेना-देना नहीं रहा है। भाजपा की इसी समझदारी को इस विज्ञापन के जरिये आगे बढ़ाया गया है, जो खेदजनक है। एक बार फिर यह विज्ञापन आदिवासी क्षेत्रों के पिछड़ेपन के लिए "वामपंथी" ताकतों को जिम्मेदार ठहराता प्रतीत होता है।

हम तीनों वामपंथी पार्टियों का आग्रह है कि इस विज्ञापन में प्रयुक्त दक्षिणपंथी शब्दावली को सुधारा जाए और भविष्य में इस प्रकार की शब्दावली का उपयोग न करने का निर्देश सक्षम अधिकारियों को जारी किया जाए।

आपके सकारात्मक उत्तर की आशा में,

धन्यवाद सहित,

आपके,

* संजय पराते

* राज्य सचिव, माकपा

* आरडीसीपी राव

* राज्य सचिव, भाकपा

* बृजेन्द्र तिवारी*

* राज्य सचिव, भाकपा (माले)-लिबरेशन

Chhattisgarh
bhupesh baghel
left parties
Chhattisgarh government
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • up
    सोनिया यादव
    यूपी चुनाव 2022: कई जगह जमकर लड़ीं महिला उम्मीदवार, कई सीटों पर विजयी
    10 Mar 2022
    बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिला उम्मीदवारों की संख्या में 4 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है और वो फिलहाल मैदान में 30 से अधिक सीटों पर आगे चल रही हैं।
  • biren singh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने की प्रबल दावेदार केवल बहुमत का इंतज़ार
    10 Mar 2022
    मणिपुर की बात करें तो मणिपुर में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत है। खबर लिखने तक मणिपुर में भी भाजपा 60 में से 15 सीट जीत चुकी है और 13 सीट पर आगे चल रही है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: महंगाई-बेरोज़गारी पर हावी रहा लाभार्थी कार्ड
    10 Mar 2022
    यूपी की ज़मीन पर इस बार किसान आंदोलन से लेकर लखीमपुर कांड और हाथरस कांड की गूंज थी। कोविड की पहली लहर और दूसरी लहर की मार थी, छुट्टा पशु की परेशानी थी, महंगाई, बेरोज़गारी जैसे बड़े मुद्दे थे। विपक्ष…
  • अनिल अंशुमन
    झारखंड : मुआवज़े की मांग कर रहे किसानों पर एनटीपीसी ने किया लाठीचार्ज
    10 Mar 2022
    अपने खेतों के बदले उचित मुआवज़े की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए लाठीचार्ज से किसान आक्रोशित हो गए और जवाब में अधिकारियों पर पथराव किया।
  • bela and soni
    सौरव कुमार
    सोनी सोरी और बेला भाटिया: संघर्ष-ग्रस्त बस्तर में आदिवासियों-महिलाओं के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा
    10 Mar 2022
    भारत की सामूहिक उदासीनता ने आदिवासियों के अधिकारों को कुचलने वालों के प्रतिरोध में कुछ साहसी लोगों को खड़ा करने का काम किया है, और उनमें सबसे उल्लेखनीय दो महिलाएं हैं- सोनी सोरी और बेला भाटिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License