NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”
छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कहा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति लागू करे एसईसीएल
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Jun 2021
छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कोयला खनन परियोजना के विस्तार के लिए मलगांव को बिना किसी पुनर्वास योजना के दोबारा विस्थापित किये जाने की एसईसीएल की योजना का विरोध किया है और इसके खिलाफ ग्रामीणों को संगठित कर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

आपने एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के कोरबा जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, सचिव प्रशांत झा व सहसचिव दीपक साहू ने कहा है कि 1980-85 में पहली बार मलगांव को बिना किसी पुनर्वास व्यवस्था के उजाड़ा गया था। पुनर्वास न मिलने के कारण यहां के ग्रामीण बस्ती से थोड़ी दूरी पर ही बस गए थे। इस बसाहट का भी ग्रामीणों के विरोध के बावजूद 2004 में अधिग्रहण कर लिया गया और अब इसे हटाने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि बुनियादी सुविधाओं सहित पुनर्वास के नाम पर एसईसीएल चुप्पी साधे हुए हैं। 

किसान सभा के एक प्रतिनिधि मंडल ने प्रभावित ग्रामों का दौरा किया और मलगांव के प्रभावित ग्रामीणों से मिलकर, बिना किसी पुनर्वास योजना के, एसईसीएल द्वारा लॉकडाउन के समय गलत तरीके से विस्थापन का विरोध किया है। उन्होंने इस विस्थापन को अवैध करार दिया है।

किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने बताया कि बिना मूलभूत सुविधा के अमगांव, भठोरा, भिलाई बाजार, रलिया, बाहनपाठ, पोड़ी, नरईबोध आदि गांवों को हटाने की तैयारी का भी विरोध किया है। 

किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि पूर्व में पुनर्वास के तहत गंगानगर, विजयनगर, नेहरूनगर, बेलटिकरी, सिरकी, चैनपुर, वैशाली नगर आदि गांवों में विस्थापितों को पुनर्वास के तहत बसावट दी गई है। यहां आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं और अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज भी कई विस्थापित नौकरी और मुआवजा के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

किसान सभा के नेता दीपक साहू ने कहा कि मलगांव में भी अभी तक भूमि अधिग्रहण की शर्तों का एसईसीएल प्रबंधन ने पालन नहीं किया है और न ही वर्तमान कानूनों के अनुसार इस अधिग्रहण का मुआवजा और रोजगार स्वीकृत किया गया है। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीण मलगांव से हटने के लिए तैयार नहीं है।

किसान सभा नेताओं ने कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास नीति को घटिया करार देते हुए इसे चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की कंपनी की पुनर्वास नीति को केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति पर वरीयता नहीं मिल सकती, यदि वह इससे कमतर हो। उन्होंने मांग की है कि मलगांव के 160 परिवारों को विस्थापित करने से पहले एसईसीएल गैर-विवादास्पद भूमि पर सड़क, सफाई, प्रकाश, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास कर ग्रामीणों का पुनर्वास करे, हर परिवार को आवासीय भूमि का स्वामित्व दें तथा घर बनाने के लिए अनुदान दें, अधिग्रहित भूमि के एवज में प्रत्येक परिवार के सदस्यों को स्थायी नौकरी दें और वर्तमान बाजार दर से चार गुना मुआवजा दे। इसके बिना किसी भी प्रकार के विस्थापन के खिलाफ किसान सभा के बैनर तले संगठित होकर सभी ग्रामीण जन आंदोलन करेंगे। 

Chhattisgarh
Chhattisgarh Kisan Sabha
Coal mining project
SECL

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी

लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा

छत्तीसगढ़: खैरागढ़ विधानसभा सीट के लिए मंगलवार को मतदान, तैयारी पूरी

छत्तीसगढ़: आदिवासियों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर वाले एड़समेटा कांड को 9 साल पूरे, माकपा ने कहा दोषियों पर दर्ज हो हत्या का मामला 

छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय

विचार-विश्लेषण: विपक्ष शासित राज्यों में समानांतर सरकार चला रहे हैं राज्यपाल

कोरबा : रोज़गार की मांग को लेकर एक माह से भू-विस्थापितों का धरना जारी


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License