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छत्तीसगढ़: पीएम किसान सम्मान के लिए किस्त-दर-किस्त क्यों घट रही है लाभार्थियों की संख्या?
बुजुर्ग किसान आई के वर्मा को उम्मीद थी कि 25 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री देश भर के किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये डालेंगे तो उनका नाम भी होगा। लेकिन, सातवीं किस्त के रूप में दी जाने वाली यह राशि भी जब उनके खाते में नहीं आई तो उन्हें बड़ी निराशा हुई।
शिरीष खरे
28 Dec 2020
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के किसानों को नहीं मिल रही दो हजार रुपये की किस्त। फाइल फोटो: शिरीष खरे
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के किसानों को नहीं मिल रही दो हजार रुपये की किस्त। फाइल फोटो: शिरीष खरे

"मुझे पहले कुछ किस्तें मिलीं, पर पिछले आठ महीने से कोई रकम खाते में नहीं आई। इसके लिए एक बार ब्लॉक ऑफिस में अधिकारियों से मिलने भी गया था। वे बोले बहुतों का रुका है, जल्दी ही आपको 2,000 रुपये की किस्तें मिलने लगेंगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।" यह बात प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को लेकर छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के कुंडा गांव के एक बुजुर्ग किसान आई के वर्मा बताते हैं। आई के वर्मा ढाई एकड़ की जमीन पर धान और सब्जियां उगाने वाले छोटे किसान हैं। इन्हें उम्मीद थी कि 25 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर के किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये डालेंगे तो उनका नाम भी होगा। लेकिन, सातवीं किस्त के रूप में दी जाने वाली यह राशि भी जब उनके खाते में नहीं आई तो उन्हें बड़ी निराशा हुई। प्रश्न है कि जिन किसानों को पिछली कई किस्तें ही हासिल नहीं हुईं उन्हें अचानक सातवीं किस्त मिलती भी तो क्यों?

इसी तरह, आरती दानी छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के सिलतारा गांव की एक महिला किसान हैं। वे अपनी सवा एकड़ की जमीन पर पति के साथ मिलकर मक्का की खेती करती हैं। अपने चार सदस्यों वाले इस छोटे से परिवार की आजीविका का मुख्य जरिया खेती ही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में पंजीयन कराने के बाद इसी साल मई में उनके बैंक खाते में पहली किस्त के तौर पर 2,000 रुपये की राशि जमा हुई। लेकिन, उसके बाद अगली किस्त के तौर पर अगस्त में मिलने वाली 2,000 रुपये की राशि उनके खाते में नहीं पहुंची। अब उन्हें दिसंबर में मिलने वाली 2,000 रुपये की किस्त का इंतजार है।

आरती दानी बताती हैं, "एक बार जब मेरा पंजीयन हो चुका है और एक लाभार्थी के रुप में जब मैं इसके पात्र हूं, यहां तक की मुझे मेरी पहली किस्त का पैसा भी दिया जा चुका है तो समझ नहीं आता कि अगली किस्तों को क्यों रोक दिया गया है।" आरती ने भी इस बारे में जानने की कोशिश भी की। लेकिन, उन्हें अपने सवाल का जवाब नहीं मिला। असल में उन्हें नहीं पता कि उनके सवाल का जवाब देने वाली एजेंसी कौन-सी है। आमतौर पर एक सामान्य किसान यह जानने के लिए हद से हद पटवारी और तहसीलदार तक ही जा सकता है। लेकिन, आरती की तरह कई किसानों को पटवारी और तहसीलदार से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। वहीं, आरती की तरह बतौर लाभार्थी कई किसानों के नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पोर्टल में तो दर्ज दिखाए दे रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत है कि उन्हें इस योजना का पैसा मिलना बंद हो गया है।

पीएम किसान सम्मान की अनिश्चतता के कारण राज्य के छोटे किसानों में इसे लेकर उत्साह नहीं है।  फाइल फोटो: शिरीष खरे

दरअसल, छत्तीसगढ़ में यह कुछ किसानों की समस्या नहीं है। आंकड़े बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत जिस संख्या में यहां के किसानों का पंजीयन हुआ था, हर किस्त के साथ वह संख्या घटते हुए न के बराबर पहुंच चुकी है। छत्तीसगढ़ में किसानों के नेता राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि इस राज्य में पांच एकड़ से कम रकबा वाले करीब 32 लाख किसान हैं। किंतु, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करीब 24 लाख किसानों का पंजीयन हुआ। अब आखिरी किस्त आते-आते स्थिति यह है कि मुश्किल से दो लाख किसानों को ही इसका लाभ मिल सका है। उनके मुताबिक हर किस्त के बाद केंद्र सरकार द्वारा जो सूची अपडेट होनी चाहिए, शायद वह सूची अपडेट नहीं हो रही है। पता करने पर यह कारण भी बताया जा रहा है कि किसानों के पंजीयन के दौरान छोटी-छोटी त्रुटियां होने से यह स्थिति बन गई है। यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र इसके लिए एक तंत्र तैयार कर रहा है। अब वजह जो भी हों, हकीकत यह है कि लाभार्थी किसानों को फिलहाल आर्थिक रुप से नुकसान उठाना पड़ रहा है। दरअसल, जिन लाभार्थियों को पंजीयन के बाद भी लाभ नहीं मिल रहा है उनमें एक बड़ी संख्या उन किसानों की है जिनकी सीएससी सेंटरों में एंट्री के दौरान आधार कार्ड या बैंक खाते से संबंधित जानकारियों में गलतियां हो गई हैं।

दूसरी तरफ, यदि जांजगीर, बलरामपुर, सूरजपुर, रायपुर, गरियाबंद और राजनंदगांव सहित राज्य के अन्य जिलों की स्थिति देखें तो लाखों की संख्या में इस योजना के तहत मिलने वाला पैसा रुक गया है। उदाहरण के लिए, जांजगीर जिले की ही बात करें तो यहां इस योजना के तहत तीन लाख 29 हजार किसानों का पंजीयन किया गया था। यहां पहली किस्त दो लाख 40 हजार किसानों के खाते में आई। फिर दूसरी किस्त एक लाख 83 हजार किसानों को ही मिली। उसके बाद तीसरी किस्त 75 हजार किसानों को ही दी गई। अंत में चौथी किस्त 35 हजार किसानों तक ही आई। जाहिर है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पंजीयनकृत किसानों के मुकाबले में बहुत कम किसानों को ही इसका लाभ मिल रहा है।

इस बारे में छत्तीसगढ़ के वामपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता संजय पराते मानते हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा किसानों को दी गई सम्मान निधि का राज्य के किसानों पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। वे इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि पहले केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा था कि देश के लगभग साढ़े चौदह करोड़ किसानों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। लेकिन, अब साफ हुआ कि नौ करोड़ किसानों को ही इसका लाभ मिला यानी साढ़े पांच लाख किसान इस योजना से छूट गए। आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में स्थिति और भी ज्यादा खराब है और यहां किसानों का पंजीयन होने के बावजूद लाखों की संख्या में इससे बेदखल कर दिया गया। इसलिए, मीडिया में तो इस पर चर्चा हो रही है, लेकिन धरातल में किसान कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। 

देखा जाए तो इस योजना के तहत छोटे किसान के लिए भी एक साल दौरान तीन किस्तों में कुल 6,000 रुपये की राशि बहुत अधिक नहीं है। लेकिन, इस बारे में कई किसानों का मानना है कि पांच सौ रुपये महीने के हिसाब से पैसा मिलना भले ही कम लगे, पर यह राशि एक अतिरिक्त राहत की तरह होती है। जैसे कि बिलासपुर जिले में खपरा खोल गांव के किसान शत्रुघ्न यादव कहते हैं कि छोटे किसानों के लिए फसल उगाना महंगा होता जा रहा है। कई बार जब किसी कारण से फसल खराब हो जाती है तो उनके जैसा मामूली किसान कर्ज में फंस जाता है। तब उसके लिए यह 6,000 की रकम भी बहुत हो जाती है।

दूसरी तरफ, किसानों के प्रतिनिधि पूरनचंद्र साहू का इस बारे में मत भिन्न है। वे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री किसान निधि योजना छोटे किसानों को भी लुभा नहीं पा रही है। उनके मुताबिक, "हमारी (राज्य) सरकार ढाई हजार रुपये क्विंटल के हिसाब से इस समय धान खरीद रही है। किसानों को ज्यादा पैसा मिल रहा है। इसलिए, उसे अभी प्रधानमंत्री (केंद्र) से मिलने छोटी रकम की परवाह नहीं है।" बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा इस समय देश भर में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से धान  खरीद रही है।

इसी तरह, राजीव गांधी न्याय योजना के नाम पर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री सम्मान निधि से एक अन्य योजना लागू की है। इस योजना के तहत खरीफ 2019 से धान व मक्का उत्पादक किसानों को सहकारी समिति के माध्यम से अधिकतम दस हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से हर साल सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाना है। शुरुआती योजना में इसके अंतर्गत 19 लाख धान उत्पादक किसानों को जोड़ा गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा सालाना 5,700 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है।

किसान नेता राजकुमार गुप्ता के मुताबिक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के मुकाबले राज्य सरकार की यह योजना छत्तीसगढ़ के किसानों को अधिक आकर्षित कर रही है। वजह यह है कि इसमें प्रति एकड़ के हिसाब से दस हजार सालाना की राशि पचास एकड़ तक के किसानों को दी जा रही है। ऐसी स्थिति में केंद्र को लगता है कि उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का छत्तीसगढ़ में अधिक राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। लिहाजा, छत्तीसगढ़ में इसे लागू कराने को लेकर वह हतोत्साहित हो गई है। यदि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में केंद्र को अपनी योजना को सफल बनाना है तो उसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तर्ज पर इस योजना को भी रकबा पर आधारित बनाना होगा। साथ ही, प्रधानमंत्री सम्मान निधि की राशि भी बढ़ानी पड़ेगी। 

(शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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