NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
हिमालयी लोगों की आजीविका पर असर डाल रहा जलवायु परिवर्तन
दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एक छोटा सा कस्बा औली इस बार बर्फ़ न गिरने से मायूस है। यहां के स्थानीय लोग, खिलाड़ी, छोटे व्यवसायी मौसम में आ रहे परिवर्तन की कीमत चुका रहे हैं। बर्फ़ न होने की वजह से विंटर गेम्स रद्द कर दिए गए। मौसम के बदलाव बता रहे हैं कि उत्तराखंड जैसे राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश को क्लाइमेट पॉलिसी की सख़्त जरूरत है।
वर्षा सिंह
28 Feb 2021
हिमालयी लोगों की आजीविका पर असर डाल रहा जलवायु परिवर्तन
औली का मनोहारी दृश्य (फाइल फोटो)। इस बार बर्फ़ न गिरने से औली में नेशनल विंटर गेम्स रद्द, जम्मू-कश्मीर को मिली मेज़बानी

बर्फ़ न गिरने की वजह से चमोली के औली में फरवरी के आखिरी हफ़्ते में होने वाले विंटर गेम्स रद्द कर दिए गए। अब ये खेल जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में आयोजित हो रहे हैं। औली के लोग सालभर इस इवेंट का इंतज़ार करते हैं। ये आयोजन स्थानीय लोगों की आजीविका का बड़ा ज़रिया होते हैं। इससे पहले वर्ष 2012, 2013, 2015 और 2016 में भी मौसम अनुकूल न होने की वजह से औली में विंटर गेम्स रद्द किये जा चुके हैं।

समुद्रतल से करीब 2500 से 3500 मीटर तक ऊंचाई पर बसा औली उत्तराखंड के पर्यटन के नक्शे पर एक ख़ास स्थान रखता है। बर्फ़ की ढलानों पर स्कीइंग से जुड़े खेलों के ख़ास आकर्षण के लिए पर्यटक औली आते हैं। इस बार की सर्दियों का मौसम पर्यटन और स्कीइंग से जुड़े लोगों को निराश कर बीत रहा है। विंटर गेम्स स्थानीय लोगों के लिए एक ख़ास मौका होता है। इसके अलावा बर्फ़ से ढके मैदान पर स्कीइंग का आकर्षण भी पर्यटकों को यहां खींचता है।

मौसम की मार और प्रशासन की बेरुखी

स्कीइंग और स्नो बोर्डिंग समेत एंडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े और इनके अंतर्राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा ले चुके औली के विवेक पंवार मौसम के गर्म मिज़ाज़ से निराश हैं। लेकिन उससे भी ज्यादा मायूसी इस बात को लेकर है कि बर्फ़ न पड़ने की स्थिति में कृत्रिम बर्फ़ बनाने के लिए लाई गई मशीनें किसी काम की नहीं हैं। विवेक कहते हैं “इस बार बर्फ़ काफी कम रही है। पिछली दो सर्दियां अच्छी बर्फ गिरी थी। लोग आ रहे हैं और देखते हैं कि बर्फ़ नहीं है तो वापस लौट जा रहे हैं”।

“कृत्रिम बर्फ़ बनाने के लिए वर्ष 2009 में मशीनें लगाई गई थीं। करीब एक-डेढ़ किलोमीटर लंबी झील बनायी गई थी। ताकि जब बर्फ़ न गिरे तो इन स्नो गन मशीनों से बर्फ़ बनायी जा सके। लेकिन ये मशीनें कभी काम नहीं आईं। हमने इस पर आरटीआई भी लगाई लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिली। स्थानीय प्रशासन से भी हम इसकी शिकायत कर चुके हैं”।

विवेक कहते हैं “औली में बर्फ़ बनाने के लिए करोड़ों खर्च करके लगाई गई मशीनें हमारे किसी काम की नहीं हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने  पिछले वर्ष  नवंबर में यहां ओपन आइस स्केटिंग रिंक का उदघाटन किया। उन्होंने जोशीमठ से इसका उदघाटन कर दिया। वह ग्राउंड ज़ीरो पर गए भी नहीं। अगर ये रिंक बनी होती तो आज आइस हॉकी चलती। टूरिज़्म चलता। सिर्फ झूठा प्रचार कर दिया गया है”।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने नवंबर 2020 में एक करोड़ 38 लाख 89 हज़ार रुपये की लागत से तैयार आइस स्टेकिंग रिंक का उदघाटन किया था।

उजाड़ पड़े इस आइस रिंक का पिछले वर्ष नवंबर में सतपाल महाराज ने किया था उद्घाटन

स्की और स्नोबोर्ड एसोसिएशन ऑफ चमोली के सचिव संतोष कुंअर इस ओपन रिंक की तस्वीर हमसे साझ़ा करते हैं। वह बताते हैं कि जंगली सूअरों ने इस रिंक की मिट्टी उधेड़ दी है। चारों तरफ तख्ते लगाकर छोड़ दिया गया है। बांज के जंगलों के बीच जिस जगह ये रिंक बनायी गई है, वहां का तापमान बेहद कम रहता है। अगर ये रिंक सही तरीके से बनी होती तो पर्यटक यहां तीन-चार दिन ठहरते। यहां नाइट आइस-स्कीइंग भी हो सकती थी।

संतोष कुंअर कहते हैं कि मौसम में बदलाव की वजह से हमारी आमदनी प्रभावित हो रही है। औली में पर्यटक बर्फ़ की वजह से ही आते हैं। इसके अलावा यहां पर्यटकों को रोकने के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं है। बर्फ़ के समय स्कीइंग के सात दिन और 14 दिन के कोर्स कराए जाते हैं। स्कीइंग-स्केटिंग के अलावा यहां पर्यटन की कोई अन्य गतिविधि नहीं है।

औली में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अंतिप्रकाश शाह कहते हैं कि पिछले वर्ष की सर्दियों की तुलना में इस वर्ष हमारी 20 प्रतिशत भी आमदनी नहीं हुई। होटल, होम स्टे, बर्फ़ में चलने के लिए गम बूट्स देने वाले, टेंट लगाने वाले, लकड़ी बेचने वाले जैसे पर्यटन से जुड़े सभी लोग प्रभावित हुए हैं। सर्दियों में ही यहां लोगों की अच्छी आमदनी होती है।

मौसम में उतार-चढ़ाव

वर्ष 2018-19 और 2019-20 की सर्दियों ने बर्फ़बारी के पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। समुद्र तल से एक हज़ार मीटर की ऊंचाई पर भी वर्षों बाद बर्फ़ गिरी थी। इस बार की सर्दियों में गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया।

देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र नैनीताल के मुक्तेश्वर में स्थापित वेदर स्टेशन से बर्फ़बारी के आंकड़े जारी करता है। मुक्तेश्वर समुद्र तल से 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। केंद्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जनवरी में मुक्तेश्वर में कोई बर्फ़ नहीं गिरी। 6 फ़रवरी को ठीक बर्फ़बारी हुई थी।

इससे पहले वर्ष 2020 में कुल 19.2 इंच बर्फ़ गिरी थी। जबकि वर्ष 2019 में कुल 17.9 इंच बर्फ़ गिरी। वर्ष 2018- 3 इंच, 2017- 8 इंच, 2016-1.5 इंच और 2015- 4 इंच बर्फ़ गिरी थी।

फरवरी में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड

समुद्रतल से 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बसे मसूरी में भी फरवरी के महीने में गर्मी सामान्य से अधिक देखी जा रही है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक 21 से 27 फ़रवरी के बीच मसूरी का अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया गया। इस हफ्ते में मसूरी का अधिकतम तापमान 23 डिग्री तक पहुंच गया जबकि सामान्य तौर पर अधिकतम तापमान 12-13 डिग्री के बीच होना चाहिए। इसी तरह न्यूनतम तापमान भी सामान्य 5 डिग्री सेल्सियस की जगह 8-9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

मार्च-अप्रैल में खिलने वाले बुरांश में फरवरी में आए फूल

बदलती जलवायु का प्रतीक बना बुरांश

चमोली आपदा के पीछे भी जलवायु परिवर्तन एक बड़ी वजह मानी जा रही है। बर्फ़ और गर्मी से पैदा हुआ अवलांच अपने साथ भारी तबाही लाया। पूरी सर्दियां उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, इस समय फरवरी के दूसरे-तीसरे हफ्ते में खिले बुरांश के मोहक फूल भी मौसमी परिवर्तन को दिखा रहे हैं। मार्च के अंतिम हफ्ते या अप्रैल में खिलने वाले बुरांश तेज़ गर्मी के चलते फ़रवरी में छा गए हैं। मौसम में आ रहे इन बदलावों का असर पर्यटन के साथ खेती-बागवानी पर भी पड़ रहा है।

क्लाइमेट पॉलिसी की ज़रूरत

हिमालय धरती का तीसरा ध्रुव कहे जाते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग का असर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को बढ़ा रहा है। यहां आ रहे बदलावों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। हिमालयी लोग आजीविका के लिए कृषि-पशुपालन के साथ पर्यटन पर भी निर्भर करते हैं। दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एक छोटा सा कस्बा औली इस बार बर्फ़ न गिरने से मायूस है। यहां के स्थानीय लोग, खिलाड़ी, छोटे व्यवसायी मौसम में आ रहे परिवर्तन की कीमत चुका रहे हैं। बर्फ़ न होने की वजह से विंटर गेम्स रद्द कर दिए गए। ये बदलाव बता रहे हैं कि उत्तराखंड जैसे राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश को क्लाइमेट पॉलिसी की सख़्त जरूरत है।

(देहरादून स्थित वर्षा सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

himalaya
Himalayan States
climate change
pollution
Environment
Tourism sector

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

बनारस में गंगा के बीचो-बीच अप्रैल में ही दिखने लगा रेत का टीला, सरकार बेख़बर


बाकी खबरें

  • मालिनी सुब्रमण्यम
    छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया
    09 Mar 2022
    कई दिनों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने के बाद, अंततः छात्र अपने घर लौटने कामयाब रहे।
  • EVM
    श्याम मीरा सिंह
    मतगणना से पहले अखिलेश यादव का बड़ा आरोप- 'बनारस में ट्रक में पकड़ीं गईं EVM, मुख्य सचिव जिलाधिकारियों को कर रहे फोन'
    08 Mar 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंकाओं के बीच अपनी पार्टी और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को चेताया है कि वे एक-एक विधानसभा पर नज़र रखें..
  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    मालिक महान है बस चमचों से परेशान है
    08 Mar 2022
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा आज बात कर रहे हैं Ukraine और Russia के बीच चल रहे युद्ध के बारे में, के जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स यूक्रेन में अपनी जान बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार से सवाल…
  •  DBC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
    08 Mar 2022
    DBC के कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  ये कर्मचारी 21 फरवरी से लगातार हड़ताल पर हैं। इस दौरान निगम के मेयर और आला अधिकारियो ने इनकी मांग पूरी करने का आश्वासन भी दिया। परन्तु…
  • Italy
    पीपल्स डिस्पैच
    इटली : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल की
    08 Mar 2022
    इटली के प्रमुख डॉक्टरों ने 1-2 मार्च को 48 घंटे की हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ चेतवनी भी दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License