NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
कोल खदानों के निजीकरण के खिलाफ हड़ताल पर जाएंगें कोयला श्रमिक
41 कोयला खदानों को निजी हाथों में बेचे जाने के खिलाफ कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के मज़दूरों ने दो जुलाई से तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने का ऐलान किया हैं।  इस हड़ताल को आरएसएस से संबंद्ध भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) समेत सभी सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Jun 2020
कोल खदानों के निजीकरण के खिलाफ हड़ताल पर जाएंगें कोयला श्रमिक

दिल्ली: प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोरोना महामारी आपदा नहीं अवसर है। शायद इसी का पालन करते हुए मोदी सरकार ने 41 कोयला खदानों को निजी हाथों में बेच दिया है। सरकार के इस फैसले का विरोध तेज़ हो गया है। इसके खिलाफ कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के मज़दूरों ने दो जुलाई से तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने का ऐलान किया हैं।

इस हड़ताल का सभी सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन किया है और इसे लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया है। यहाँ तक कि बीजेपी और मोदी सरकार समर्थक आरएसएस से संबंद्ध भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने भी इसका विरोध किया हैं। बीएमएस ने भी कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के मज़दूरों ने दो जुलाई से तीन दिवसीय हड़ताल का समर्थन किया और इसमें शामिल होने की बात कही हैं। वैसे बीएमएस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए संयुक्त अभियानों से खुद को अलग ही रखती रही है। लेकिन शायद इस फैसले से सरकार के ख़िलाफ़ इतना गुस्सा है कि उसे खुद को लग कर पाना आसान नहीं लग रहा है।

सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का पूर्ण समर्थन

एक ओर जहां सरकार कोयला खदानों निजी हाथों में सौंपे जाने को देशहित में बता रही है और इसे आत्मनिर्भर भारत के लिए एक मास्टरस्ट्रोक बता रही है। साथ ही इस नीलामी से हज़ारों करोड़ों के रेवन्यू आने की बात कर रही है। तो दूसरी ओर मज़दूर संगठनों का कहना है कि इससे कोयला खनन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता ख़त्म हो जाएगी और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादन इकाईयां निजी कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगी ।

ट्रेड यूनियनों ने 18 जून को सरकार को इस हड़ताल से संबंधित नोटिस भी दिया है और इसका समर्थन सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया है। एटक, सीटू, इंटक, एचएमएस, सेवा, ऐक्टू सहित दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा कि सभी ट्रेड यूनियनों ने कोयला खनन क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों और फ़ेडरेशनों के हड़ताल का समर्थन करती हैं।

अपने बयान में यूनियनों ने कहा कि कोयला खनन क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों ने 10 और 11 जून 2020 को इसका विरोध किया था। लेकिन सरकार ने इनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। बल्कि प्रधानमंत्री खुद 18 जून को नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आगे आए, जिसकी घोषणा 11 जून को हुई थी, इसलिए यूनियनों ने इसी दिन को विरोध का निर्णय किया और हड़ताल नोटिस दिया।

यूनियनों ने कहा कि इस मामले का तथ्य यह है कि पूर्व नीलामी और आवंटित कोयला ब्लॉक भी अनुसूची अवधि के अनुसार शुरू नहीं किया जा सका। इसलिए उन्हें तुरंत रद्द करने की आवश्यकता है।

यूनियनों ने पांच मांगें उठाई हैं:

1. कोयला उद्योग में वाणिज्यिक खनन का निर्णय वापस लें।

2. सीआईएल या एससीसीएल के कमजोर या निजीकरण की ओर सभी कदम वापस लिए जाए।

3. सीआईएल से सीएमपीडीआईएल को डी-लिंक करने का निर्णय वापस लें।

4. एचपीसी/सीआईएल की तरह ही सीआईएल और एससीसीएल में अनुबंध श्रमिकों के लिए मजदूरी लागू की जाए।

5. राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के खंड 9.3.0, 9.4.0 और 9.5.0 को लागू करें।

कोयला क्षेत्र की यूनियनों और सीटीयू कोयला क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की सरकारी नीति का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की अत्मनिर्भरता को बचने के लिए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

राज्य सरकारों ने भी किया विरोध

सरकार के इस फैसले का पूरे देश में विरोध हो रहा है। झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्य खनन के प्रमुख राज्य है, दोनों ही राज्य सरकारों ने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तो इसको लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सरपंचों ने भी सरकार के इस निर्णय की आलोचना की और इसे तत्काल वापस लेने की बात कही है।

सीपीएम ने किया प्रदर्शन और हड़ताल को पूर्ण समर्थन

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ और कोरोना महामारी के राहत पैकेज के लिए फंड जुटाने के नाम पर देश की सार्वजनिक संपत्ति को बेचने का आरोप लगाते हुए एसईसीएल, सुराकछार गेट के सामने कल यानि 19 जून को विरोध प्रदर्शन किया तथा कमर्शियल माइनिंग करने, कोल ब्लॉकों और कोल उद्योग का निजीकरण न करने, श्रम कानूनों में परिवर्तन कर कोयला मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश बंद करने, राहत पैकेज के लिए सार्वजनिक उद्योगों की बिक्री बंद करने की मांग की।

सीपीएम के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि "मोदी सरकार देश की सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेशीकरण और निजीकरण करने की नीति पर चल रही है। आज से कोल ब्लाकों की नीलामी की प्रक्रिया इसी का हिस्सा है। कमर्शियल माइनिंग से निजी मालिकों को कोयला खुले रूप से बेचने का अधिकार मिल जाएगा, जिससे कोल इंडिया का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा और लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।"

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार श्रम कानूनों में परिवर्तन कर मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश की जा रही है।

सी.पी.एम. नेता ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट से निपटने के लिए धन जुटाने के नाम पर देश के किसानों-मजदूरों और आदिवासियों-दलितों के अधिकारों पर इस सरकार ने हमले तेज कर दिए हैं। 20 लाख करोड़ रुपयों का कथित आर्थिक पैकेज केवल धोखाधड़ी है, क्योंकि इसमें बजट के बाहर जीडीपी का आधा प्रतिशत भी अतिरिक्त खर्च नहीं किया जा रहा है। इस पैकेज में भी पूंजीपतियों को सब्सिडी दी गई है और आम जनता के लिए कर्ज रखा गया है।

उन्होंने कहा कि "आम जनता को कर्ज नहीं, कैश चाहिए। तभी जनता की क्रयशक्ति में वृद्धि होगी और बाजार में मांग बढ़ेगी। तभी अर्थव्यवस्था में आई गिरावट को रोका जा सकेगा। लेकिन बड़े तानाशाहीपूर्ण तरीके से यह सरकार संकट का बोझ आम जनता पर लादना चाहती है। इसके खिलाफ माकपा सड़कों पर अपना संघर्ष तेज करेगी।"

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माकपा पार्षद सुरती कुलदीप ने कहा कि "कोरबा जिले में भी घने जंगलों को उजाड़ कर आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने और पर्यावरण को ख़त्म करने की साजिश की जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों पर समाज का अधिकार खत्म करने का अर्थ है, देश को देशी-विदेशी पूंजी का गुलाम बनाना।"

सीपीएम ने अगले माह 2 से 4 जुलाई तक कोयला उद्योग में होने वाली तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का समर्थन भी किया है।

privatization
Privatization of coal mines
coal mines
Coal workers
workers protest
Narendra modi
modi sarkar
trade unions
CPI

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License