NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना संकट : क्या संविदा कर्मचारियों के जान की कोई क़ीमत नहीं है?
सार्वजनिक सेवाओं की बात करें तो अधिकतर सेवाओं का निजीकरण  या ठेकाकरण कर दिया गया है। समान्य स्थिति में भी इन कर्मचारियों को कर्मचारी होने के नाते मिलने वाले मूलभूत अधिकार नहीं दिए जाते हैं। कोरोना माहमारी के बीच तो इनके सुरक्षित रहने, सम्मान से जीने और काम करने का भी अधिकार  छीन गया  है। 
मुकुंद झा
01 Apr 2020
संविदा कर्मचारी
Image courtesy: The Hindu

केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमित मरीज़ों के लिए काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिये 50 लाख रुपये के बीमा कवर की घोषणा की है लेकिन इसमें  ठेका कर्मचारी शामिल नहीं हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये लोग काम नहीं करते या इनके जीवन को ख़तरा नहीं है?

सार्वजनिक सेवाओं की बात करेें तो अधिकतर सेवाओं का निजीकरण या ठेकाकरण कर दिया गया है। समान्य स्थति में भी इन कर्मचारियों को कर्मचारी होने के नाते मिलने वाले मुुुुलभूूत अधिकार भी नहीं दिए जाते हैं। कोरोना माहमारी के बीच तो इनके सुरक्षित रहने, सम्मान से जीने और काम करने का भी अधिकार  छीन गया  है। 

अगर स्वास्थ्य विभाग में  डाक्टरों को छोड़ दिया जाए तो बाकी नर्स, वार्ड बॉय और अन्य स्टाफ ठेके पर ही काम करते हैं। इसके साथ ही दिल्ली सहित देश के  तमाम   राज्यों में एंबुलेंस सेवा का भी निजीकरण कर दिया गया है। और तो और  अस्पतालों के सुरक्षा कर्मी और सफाई कर्मी सभी निजी कंपनियों के तहत अस्थाई  कर्मचारी के रूप में ही काम करते हैं।  

दिल्ली में एंबुलेंस कर्मचारियों का कहना है कि वो लोग कोरोना संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं लेकिन उन्हें सुरक्षा के नाम पर बेसिक सेफ्टी किट भी नहीं दिए गए है। बॉडी सूट की बात तो छोड़ ही दीजिए यहाँ तो ग्लब्स और मास्क भी नहीं मिल रहे हैं।

दिल्ली में एंबुलेंस सेवा का निजिकरण सरकार द्वार  2015 में कर दिया गया था।  अभी एक  निजी कंपनी जीवीके कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। कर्मचारियों ने इस कंपनी को लेकर कई तरह की शिकायते की हैं। लेकिन सरकार की ओर से  अभी इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर कर्मचारियों ने 70 से अधिक दिनों तक हड़ताल भी की थी। जिसके बाद सरकार ने कर्मचारियों से उनकी मंगो को लकेर सहमति जताई थी लेकिन अभी तक दिल्ली सरकार ने इस मामले में कुछ किया नहीं है।

कैट्स एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के महसचिव अजित डवास ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सवाल किया ," केंद्र सरकार ने जीवन बीमा की बात कही लेकिन उसमें हम शामिल नहीं हैं क्यों ?" इसके साथ ही उन्होंने बताया कि "दिल्ली में मान लो किसी सरकारी कर्मचारी को कोरोना संक्रमण हो गया वो तो अस्पताल में भर्ती हो जायेगा उसका सारा खर्च सरकार उठेगी लेकिन अगर हमारे कर्मचारी को हो गया तो कोई पूछने वाला है? इसी असुरक्षा के कारन कई कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं।  स्थति इतनी खराब है की एंबुलेंस में सुरक्षा के नाम पर न मास्क है न ही दस्ताने और न ही सैनिटायाजर ,गाड़ी में बदबू न आये इसके लिए गाड़ियों में कपूर की गोलियां रखी जताई हैं।"

 अजित ने बतया "कंपनी ने सरकार से 200 एंबुलेंस चलने का ठेका लिया है लेकिन दिल्ली में मात्र 40 एंबुलेंस चल रही हैं,और केवल 19 गाड़ियों में कोरोना से सुरक्षा किट मौजूद है बाकी बिना किसी सुरक्षा के चल रही हैं। "

इस तरह की समस्या उत्तर प्रदेश के एंबुलेंस कर्मियों के साथ भी है जिसके चलते मंगलवार, 31 माा्च को कई जिलों में हड़ताल भी हुई। एंबुलेंस कर्मचारी संघ का आरोप है कि उन्हें कोरोना वायरस महामारी के दौरान सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।   इसके साथ ही उन्हें जनवरी से वेतन भी नहीं मिला है।

दिल्ली की तरह ही उत्तर प्रदेश में  एंबुलेंस सेवा  निजी कंपनी ‘जीवीके’ चलती है।  इसके तहत  प्रदेश में करीब 4500 एंबुलेंस काम करती हैं। इसमें करीब 17 हजार कर्मचारी हैं, जिसमें एंबुलेंस ड्राइवर, आपातकालीन तकनीशियन आते हैं। ये कर्मचारी निजी कंपनी यानी जीवीके के साथ ठेके पर काम करते हैं।

कर्मचारियों ने खत लिखकर मांग की है कि एंबुलेंस में खुद के सुरक्षा के लिए उपकरण जैसे- मास्क, ग्लब्स, सेनेटाइजर, पीपीई, हैंडवाश आदि की कमियों की पूरा करें।

वहीं, जनवरी से लेकर अब तक दोनों माह की सैलेरी तत्काल रूप में रिलीज की जाए।  कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 50 लाख का बीमा देने का ऐलान हुआ है, वह तत्काल प्रभाव से हमारे एंबुलेंस कर्मचारियों पर लागू की जाए।

 इस तरह दिल्ली में कोरोना के रोकथाम के लिए काम करने वाले डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) कर्मचारी भी बिना किसी सुरक्षा के लगातर काम कर  रहे हैं। यहाँ तक की इन्हें कई-कई महीने वेतन भी नहीं दिया जाता है ,तीन महीने बाद उन्हें इस माह वेतन दिया गया हैं।  

‘एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन’  के अध्यक्ष देवन्द्र शर्मा ने बताया कि हम लोग सीधे मरीजों के संपर्क में जाकर काम करते है ,यहाँ तक की हम कोरोना से मरे लोगों के मृत शरीर को सैनिटीज़ करते हैं।  इसके बाबजूद भी हम लोगों को किसी तरह की कोई सुरक्षा नहीं दी गई है।  सुरक्षा की बात तो दूर है यहां तो मात्र कुछ कर्मचारियों को ही मास्क और ग्लब्स दिया जाता है।आगे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आशा वर्कर की तो बात की लेकिन हमारी नहीं ? यह सब हम लोगों के मनोबल को तोड़ने वाला है।

इसी तरह की  समस्या  को लेकर कई अस्पतालों के संविदा कर्मचारियों ने भी शिकायत की और कहा कि उन्हें किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरण के बिना काम करने पर मज़बूर किया जा रहा है। यहाँ तक की इन लोगों को हाथ धोने के लिए साबुन और सैनिटाइजर भी नहीं दिया जाता है।  कलवती अस्पताल के संविदा कर्मचारियों ने इसे लेकर अधिकारियों को पत्र लिखकर  मांग की थी कि उन्हें सुरक्षा के मुलभूत उपकरण दिए जाएं।

 इसी तरह का एक पत्र सत्यवादी हरिश्चंद्र अस्पताल के सफाई कर्मचारियों ने भी अपने  उच्च अधिकारियों को  लिखा। इसके साथ ही यूनियन ने मांग की है की ये सभी कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। इसलिए इन्हें प्रतिदिन 500 रूपये प्रोत्साहन राशि की रूप में दिया जाए।

इसी तरह की मांग और समस्या अस्पतालों में काम कर रहे सुरक्षाकर्मियों की भी है।  इनकी यूनियन ने भी सरकार और उपराजयपाल से सुरक्षा की मांग की है।

आपको बता दें कि सरकार ने खुद ही गाइड लाइन जारी कर ये बताया है कि किसे एन-95  मास्क की जरूरत है और किसे नहीं। आइए पूरी लिस्ट देखते हैं...

corona_1.jpg

 उपरोक्त जितने भी कर्मचारियों का जिक्र हुआ ये सभी के लिए जरूरी है की उन्हें मास्क दिया जाए लेकिन इन सभी की शिकायत है की इन्हे नहीं दिया जा रहा है।

सभी संविदा कर्मचारियों की शिकायत है की वो लोग अन्य कर्मचारियों के समान ही काम करते हैं लेकिन उन्हें दोयम दर्जे का कर्मचारी समझा जाता है, न ही वेतन पूरा दिया जाता है नाही कोई समाजिक सुरक्षा दी जाती है। यह सब तो छोड़िए इस माहमारी के समय जान की सुरक्षा भी नहीं है।

आपको बता दें  कि इन कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या वेतन का नियमित न मिलाना है, जोकि किसी भी श्रमिक का मूल अधिकार है। इसके आलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार अपने आदेश में कहा है कि समान काम का समान वेतन दिया जाए लेकिन वाा्तव में ऐसा कहीं होता दिखाई नहीं दे रहा है। निजी तो छोड़िए सरकारी संस्थाओं में इसका पालन नहीं हो रहा है। इसके साथ ही श्रम कानूनों के मुताबिक स्थाई स्वरूप के काम के लिए संविदा कर्मचारी नहीं रखा जा सकता हैं लेकिन लगभग सभी स्थाई स्वरूप के काम के लिए संविदा कर्मचारी रखे गए हैं।  किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव न हो यह सुनिश्चित करना सरकार का काम है  लेकिन यहां तो सरकार ही संविदा कर्मचारियों के साथ भेदभाव और उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है ।

इन कर्मचारियों के लिए जो भी नियम हैं उनका खुलेआम उलंघन होता है लेकिन हमारी सरकारें कुछ नहीं करती हैं या यूं कहें कि सरकार भी इनके शोषण में शामिल हैं। ये न सिर्फ नैतिक रूप से गलत बल्कि यह सब एक कानून अपराध भी है।

COVID-19
Coronavirus
Corona Crisis
Health workers
Contract Workers
Security of workers
BJP
modi sarkar

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License