NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोरोना संकट: विपक्ष को साथ लेकर तत्काल एक राष्ट्रीय सरकार के गठन की ज़रूरत
तत्काल प्रभाव से एक राष्ट्रीय सरकार का गठन किया जाए। इस सरकार में विपक्षी दलों के भी नेता रखे जाएं और सबका दर्जा कैबिनेट मंत्री का हो। कुछ बड़े चिकित्सक और अर्थशास्त्री तथा न्यायविद भी इसमें शामिल किए जाएं। वे सब परस्पर विमर्श से कोरोना से जूझने का कोई सर्वमान्य हल निकालें।
शंभूनाथ शुक्ल
26 Apr 2021
कोरोना संकट: विपक्ष को साथ लेकर तत्काल एक राष्ट्रीय सरकार के गठन की ज़रूरत

यह समय ‘मन की बात’ करने का नहीं है प्रधानमंत्री जी! यह समय देश की जनता पर आई कोरोना नामक आपदा से लड़ने का है। यह आपदा राष्ट्रीय है, इसलिए आप सबके साथ मिल कर इस लड़ाई से जूझने के लिए तैयार हों। कभी कुछ व्यक्तियों पर दोष, तो कभी किसी राजनीतिक दल को दोषी करार देने से या सारा दोष सिस्टम के मत्थे मढ़ देने से आप दोषमुक्त नहीं हो पाएँगे।

आज शहर-शहर, गाँव-गाँव मौत झपट्टा मार रही है। लोगों को न इलाज मिल पा रहा है न अस्पतालों में बिस्तर हैं न दवाएँ मिल रही हैं और न प्राण-वायु। क्या किसी भी जीवित व्यक्ति ने ऐसी कोई आपदा देखी होगी?

शायद पूरी दुनिया ने पिछले सौ वर्षों में ऐसी कोई बिपदा नहीं आई होगी। लेकिन आप इसे वैश्विक महामारी बता कर बच नहीं सकते क्योंकि आज यह महामारी भारत में ही सबसे विकराल रूप दिखा रही है।

एक महीने पहले तक आप सगर्व बताते थे कि हमने नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका को कोरोना वैक्सीन दी। वहाँ के लोगों की ज़िंदगी बचायी। किंतु महीने भर के भीतर यह हाल हो गया कि पाकिस्तान तक कह रहा है कि भारत को मदद की ज़रूरत हो तो बताए, हम करेंगे। अमेरिका ने आपसे मुँह मोड़ लिया है। वहाँ के राष्ट्रपति जो बाइडेन तो आपको कोरोना वैक्सीन का टीका बनाने के लिए रॉ-मटीरियल तक देने को तैयार नहीं हुए। वह तो शुक्र हो वहाँ के उन भारत वंशियों का, जो बाइडेन प्रशासन में प्रभावशाली पदों पर हैं, के दबाव में बाइडेन झुके और भारत को कोरोना वैक्सीन के लिए रॉ-मटीरियल सप्लाई को राज़ी हुए।

योरोप के अधिकांश देशों ने भारत से विमानों की आवा-जाही रोक दी है। न्यूज़ीलैंड और कनाडा ने पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन भारत में जब प्राण-वायु का संकट बढ़ा तब ब्रिटेन और योरोपियन यूनियन के देश आगे आए। ऐसी स्थिति में एक ही रास्ता बचता है। और वह यह कि आप ख़ुद पहल कर अपने विरोधी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करिए। यह बहुत बड़ा मुल्क है और वैविध्य भी यहाँ बहुत ज़्यादा है। इसलिए किसी एक एजेंडे पर चल कर यहाँ की समस्याओं से नहीं निपटा जा सकता। अभी भी समय है कि लोगों को इस राष्ट्रीय आपदा से मिल-जुल कर लड़ने का आह्वान किया जाए। इसके लिए अपने निज के अहंकार को तिलांजलि देनी होगी। और ख़ुद से आगे बढ़ कर उन्हें लाना होगा।

देखते-देखते देश में कोरोना की मार इतनी भयानक हो गई है कि रोज़ाना लगभग साढ़े तीन लाख लोग संक्रमित हो रहे हैं। लॉक-डाउन, मास्क भी इसे रोक नहीं पा रहा है। हर व्यक्ति डरा हुआ है। सरकार के कर्ता-धर्ता स्वयं कोरोना से भयभीत हैं। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा, क्या करें। सभी यह महसूस कर रहे हैं कि कोरोना से पार पाना किसी एक व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। इसलिए कुछ ऐसे फ़ैसले किए जाने चाहिए, जो भले संविधान से हट कर लगें, लेकिन मनुष्य को बचाने का अकेला रास्ता अब यही बचा है। तत्काल प्रभाव से एक राष्ट्रीय सरकार का गठन किया जाए। इस सरकार में विपक्षी दलों के भी नेता रखे जाएँ और सबका दर्जा कैबिनेट मंत्री का हो। कुछ बड़े चिकित्सक और अर्थशास्त्री तथा न्यायविद भी इसमें शामिल किए जाएँ। वे सब परस्पर विमर्श से कोरोना से जूझने का कोई सर्वमान्य हल निकालें। वैक्सीन बनाने के लिए जहाँ से भी जो कुछ मँगाना हो, मंगाया जाए। आक्सीजन, टीके के लिए रॉ-मटीरियल, सुरक्षित मॉस्क आदि सब कुछ। कोई प्रोटोकाल नहीं, कोई एनओसी नहीं। लेकिन पहली प्राथमिकता लोगों को बचाने की हो।

हर ज़िले व शहर के निजी अस्पतालों को भी ज़िला अस्पताल का एक्सटेंशन बनाया जाए। वहाँ के अस्पताल और पैरा-मेडिकल स्टाफ़ को सरकार वेतन दे। हर पीड़ित व्यक्ति को इलाज मिले और दवाएँ भी। सरकार भले टैक्स बढ़ा दे किंतु इलाज सबको मिले। कोई इसलिए वंचित न रहे कि उसके पास पैसा नहीं था। तब ही इस महामारी से बचा जा सकेगा। यह पहली बीमारी है, जिसमें न धन काम आ रहा है न राजनीतिक रसूख़। कई-कई एकड़ में फैले अपने विशाल आवासों में रहने वाले लोग भी कोरोना से ग्रस्त हो कर दम तोड़ रहे हैं और सरकारी व राजनीतिक पौवे वाले विधायक व सांसद भी। कोरोना किसी को बख्श नहीं रहा। ऐसी आपदा से निपटने में क्या कोई एक व्यक्ति अथवा एक पार्टी की सोच सफल हो सकती है? जवाब होगा- नहीं! इसके लिए सभी की सम्मिलित सोच और जुगाड़ की ज़रूरत है। 

सौ साल पहले जब स्पैनिश फ़्लू भारत में फैला था, तब अंग्रेज सरकार ने कांग्रेस से भी मदद की गुहार की थी। आज भी स्थिति वैसी ही है। ऐसे में क्यों नहीं प्रधानमंत्री ख़ुद पहल कर कांग्रेस और वाम दलों समेत सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को सरकार में आने का न्योता देते? पिछले साल कोरोना जब आया तो केरल की स्वास्थ्य मंत्री शैलजा टीचर ने ही काफ़ी हद तक कोरोना पर कंट्रोल किया था। इसकी खूब प्रशंसा हुई थी। पर चूँकि केरल से लोगों का देश-विदेश में आना-जाना बहुत है इसलिए वहाँ इस दूसरी लहर में संख्या बढ़ी है, पर अब खुद वहाँ के मुख्यमंत्री भी कोरोना के विरुद्ध अभियान में जी-ज़ान से जुटे हैं।

केरल के अतिरिक्त ग़ैर भाजपाई मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे और झारखंड के हेमंत सोरेन ने बड़ी सहजता और धीरज के साथ कोरोना के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। जिस महाराष्ट्र में पिछले साल भर से कोहराम मचा था, वहाँ आज लगाम लगी है और संक्रमण थमा है।

उधर भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और मध्य परदेश में स्थिति बेलगाम होती जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश में विदेशों से आवा-जाही बहुत कम है। यहाँ दो मंत्री (चेतन चौहान और कमला रानी वरुण) तथा कई विधायकों की कोरोना से मृत्यु हुई थी। अभी तीन दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के दो विधायक कोरोना के चलते नहीं रहे। सांसद कौशल किशोर के भाई का तो इलाज तक नहीं हो सका। ऐसा ही हाल बिहार का है।

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ भी ऐसी ही स्थितियों से जूझ रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में भी कोरोना संक्रमण बढ़ा है। जब सबका हाल एक जैसा है, तो परस्पर मिल-बैठ कर हल क्यों न निकाला जाए! यहाँ तक कि भाजपा के राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ट्वीट कर गुहार कर रहे हैं।

पूरी दुनिया में भारत की छवि टूटती जा रही है। पाकिस्तान और बांग्लादेश तथा श्रीलंका भी कोरोना कंट्रोल में हमसे आगे हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो भारत पर परोक्ष रूप से यह भी आरोप लगाया था, कि मुद्रा स्थिरता में भी हेर-फेर कर रहा है। इसलिए उसकी करेंसी को निगरानी सूची में डाल दिया है। यह कार्रवाई उन देशों के विरुद्ध की जाती है, जिन पर शक हो कि वे डॉलर के मुक़ाबले अपनी मुद्रा को बढ़ा-चढ़ा कर बता रहा है। हो सकता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी खुन्नस में ऐसा कर रहे हों किंतु इसमें अपने प्रधानमंत्री की भूमिका भी ठीक नहीं रही। उन्हें जो बाइडेन के विरुद्ध डोनाल्ड ट्रंप के लिए प्रचार नहीं करना था। जब यह जानी-मानी बात है कि अमेरिका विश्व की बहुत बड़ी ताक़त है तब वहाँ की अंदरूनी राजनीति में यूँ खुल कर किसी नेता के साथ खड़े होना कूटनीतिक शिष्टाचार के ख़िलाफ़ है।

सच बात तो यह है कि मोदी सरकार इस समय अपनी कई राजनीतिक भूलों के कारण बुरी तरह फँस गई है। राजनीति में सारे खिड़की-दरवाज़े खुले रखने पड़ते हैं। भारत इतना बड़ा गणराज्य है, यहाँ पर किसी एक एजेंडे को लेकर सारे फ़ैसले करना और एक सीध पर चलना सदैव ख़तरनाक होता है। इसलिए भी मोदी सरकार बुरी तरह घिरी हुई है। और पूरी दुनियाँ में भारत को अलग-थलग किया जा रहा है। ऐसी स्थिति भारत की कभी नहीं रही। इसलिए प्रधानमंत्री जी इस स्थिति से बाहर आने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए।

ऐसे में सिर्फ़ यही अकेला रास्ता बचता है कि मोदी जी कोई ऐसी पहल करें, जिससे उनकी और उनकी सरकार की प्रतिष्ठा तो रहे ही विश्व में भारत की साख बचे। इसमें कोई शक नहीं कि आज भी भारत की प्रतिष्ठा एक सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की बनी हुई है। हमारा लोकतंत्र 75 साल का होने जा रहा है। शून्य से यहाँ तक पहुँचने में बहुत यत्न करने पड़े हैं। इसके पीछे यहाँ की जनता की भी ताक़त हैं। उसने कभी भी ऐसे राजनेता को पसंद नहीं किया, जिसके फ़ैसले अधिनायकवादी हुए। इसलिए मोदी जी अगर ऐसा कोई फ़ैसला करें जो उनका क़द सर्वग्राही बना दे तब ही लोग उनके मन की बात सुनेंगे क्योंकि उसमें जन की बात भी होगी। अन्यथा हर महीने के अंतिम रविवार को होने वाला उनका यह प्रसारण उनका एकालाप बन कर रह जाएगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
COVID-19
corona pandemic
Modi Govt
opposition parties
Rahul Gandhi
Sitaram yechury

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • sbi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    DCW का SBI को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग
    29 Jan 2022
    एसबीआई ने नयी भर्तियों या पदोन्नत लोगों के लिए अपने नवीनतम मेडिकल फिटनेस दिशानिर्देशों में कहा कि तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माना जाएगा।
  • Yogi
    रश्मि सहगल
    यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 
    29 Jan 2022
    यूपी की जनता में इस सरकार का एक अजीब ही डर का माहौल है, लोग डर के मारे खुलकर अपना मत ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग ही लहर जन्म ले रही है, जो दिखाई नहीं देती। 
  • Pegasus
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस मामले में नया खुलासा, सीधे प्रधानमंत्री कठघरे में, कांग्रेस हुई हमलावर
    29 Jan 2022
    अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2017 में भारत और इजराइल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पाईवेयर तथा एक मिसाइल…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कैसे करेंगे चुनाव प्रचार? जब बागों में ही नहीं है कोई बहार! 
    29 Jan 2022
    बिहार चुनाव होते हैं तो नीतीश बाबू अपने 15 साल के शासन को भुलाकर लालू-राबड़ी की सरकार को कोसते रहते हैं, लेकिन यूपी में किसको कोसेंगे? यहाँ तो उनके ही भाई-बंधुओं की सरकार है।
  • potato farming UP
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें
    29 Jan 2022
    ख़राब मौसम और फसल की बीमारियों के बावजूद, यूपी की आलू बेल्ट में किसानों ने ऊंचे दामों की चाह में आलू की अच्छी पैदावार की है। हालांकि, मौजूदा खुदाई के मौसम में गिरती कीमतों ने उनकी उम्मीदों पर पानी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License