NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
कोरोना संकट: आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने का रोडमैप क्या है?
यह कितना विचित्र है कि जब आर्थिक गतिविधियां फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है तब विभिन्न राज्यों से करोड़ों की संख्या में मज़दूर अपने गांव लौट रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि हमारे औद्योगिक शहर मज़दूरों से खाली हो गए तो फिर आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों का थमा पहिया नए सिरे से गति कैसे पकड़ेगा?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 May 2020
कोरोना संकट
Image Courtesy: NDTV

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था संकट में है और हम लंबे समय तक लॉकडाउन को बरकरार नहीं रख पाएंगे। राजस्व पिछले साल के अप्रैल माह में 3,500 करोड़ रुपये से गिरकर इस वर्ष 300 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में सरकार कैसे काम कर पाएगी?

गौरतलब है कि यह सिर्फ दिल्ली और अरविंद केजरीवाल का ही हाल नहीं है। कोरोना संकट के चलते लंबे समय से लागू लॉकडाउन के चलते ज्यादातर राज्यों और केंद्र सरकार की हालत ऐसी ही हो गई है। शायद इसी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने तीसरे लॉकडाउन में आर्थिक गतिविधियों समेत तमाम छूट देने की घोषणा की है।

आपको बता दें कि देश को लॉकडाउन से बाहर निकालने की मांग तेज हो रही है। इस मांग के पीछे यह अंदेशा है कि कहीं लॉकडाउन जीविका के साधनों को इतना अधिक पंगु न कर दे कि गरीब तबके के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाए। लोग वायरस से बच भी गए तो बेरोजगारी, भूख, हताशा, अवसाद से मर जाएं।

इस अंदेशे को दूर करने का उपाय यही है कि कारोबारी गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के साथ ही अन्य सामान्य गतिविधियों को भी शुरू करने की अनुमति दी जाए।

नीति-नियंताओं को इसका आभास होना चाहिए कि लॉकडाउन को खत्म करने की घोषणा मात्र से ही सब कुछ पहले जैसा नहीं होने वाला। उन्हें यह भी देखना होगा कि अर्थव्यवस्था का थमा हुआ पहिया तेजी से गति पकड़े।

लेकिन जैसा कि हमारा दुर्भाग्य है कि यह सरकार हर चीज अधूरी तैयारी के साथ करती है। आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने का काम भी इसी तरीके से हो रहा है। दरअसल नोटबंदी के समय से लेकर अब तक सरकार की आदत यही रही है कि पहले नोटिफिकेशन जारी करो फिर स्पष्टीकरण जारी करो। हालत यहां तक बुरी हो गई है कि जब तक स्पष्टीकरण न आ जाए तब तक इस सरकार की किसी बात पर यकीन ही नहीं होता है।

गौरतलब है कि बिना प्लानिंग के लागू लॉकडाउन के चलते करोड़ों की संख्या में मज़दूर देशभर के अलग अलग हिस्सों में फंस गए थे। ऐसे में यह कितना विचित्र है कि जब आर्थिक गतिविधियां फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है तब विभिन्न राज्यों से करोड़ों की संख्या में मज़दूर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके लिए ट्रेने और बसें चलाई जा रही हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि हमारे औद्योगिक शहर मज़दूरों से खाली हो गए तो फिर आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों का थमा पहिया नए सिरे से गति कैसे पकड़ेगा?

यह अच्छा है कि हरियाणा, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारें गांव जाने को तैयार मज़दूरों से रुकने की अपील कर रही हैं, लेकिन केवल इतना ही पर्याप्त नहीं। उन्हें और साथ ही अन्य राज्यों को उन कारणों की तह तक जाना होगा जिसके चलते मज़दूर अपने गांव जाने के लिए बेचैन हो उठे। इस बेचैनी का बड़ा कारण यही है कि लॉकडाउन के दौरान उनके खाने-रहने की जो व्यवस्था की गई वह संतोषजनक नहीं थी। जब कोई काम न होने से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित मज़दूरों की उचित तरीके से देखभाल की जानी चाहिए थी तब ऐसा नहीं किया गया।

इसका परिणाम यह रहा कि बड़ी संख्या में मज़दूर अपनी जान की बाजी लगाकर घर की तरफ निकल पड़े। आपको बता दें कि लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिये सरकार द्वारा ट्रेनें चलाने की तैयारियों के बीच धर्मवीर और तबारत मंसूर की जान चली गई। इनमें से एक व्यक्ति की मौत दिल्ली से बिहार जाने के दौरान बेहोश होकर साइकिल से गिर जाने पर हो गई, जबकि दूसरे व्यक्ति की मौत महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जाने के दौरान हुई।

लंबी यात्रा की थकान के चलते दोनों लोगों की मौत हुई। इन जैसे कई प्रवासी मज़दूर काम बंद हो जाने, अपने पास पैसे खत्म हो जाने, अपने सिर पर छत नहीं होने के चलते सैकड़ों और हजारों किलोमीटर दूर स्थित अपने-अपने घरों के लिये पैदल, साइकिल या रिक्शा-ठेला से निकल पड़े।

उल्लेखनीय है कि 25 मार्च से शुरू हुआ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन अब 17 मई तक रहेगा। महानगरों और अन्य शहरों से प्रवासी कामगारों और दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन आजादी के बाद से लोगों का संभवत: सबसे बड़ा पलायन है। कुछ लोग घर पहुंच गये, कुछ रास्ते में हैं और कुछ लोगों की बीच रास्ते में ही मौत हो गई।

नि:संदेह किसी भी मज़दूर को जबरन नहीं रोका जा सकता, लेकिन इसकी चिंता तो की ही जानी चाहिए कि आखिर उनके बगैर कारोबारी गतिविधियों को रफ्तार कैसे मिलेगी? यह चिंता इसलिए भी की जानी चाहिए, क्योंकि शहरों में अपनी उपेक्षा-अनदेखी से आहत मज़दूरों में से तमाम ऐसे हैं जो फिर नहीं लौटना चाह रहे हैं।

ऐसे में केंद्र सरकार को एक रोडमैप लेकर आना चाहिए जिसमें मज़दूरों की रोजी रोटी की व्यवस्था के साथ आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने की योजना हो। कही ऐसा न हो कि औद्योगिक शहरों को मज़दूरों की कमी का सामना करना पड़े और इन मज़दूरों को अपने गृहराज्यों में रोटी की किल्लत का सामना करना पड़े। क्योंकि अभी सरकार के पास अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का कोई आइडिया दिख नहीं रहा है।

Coronavirus
COVID-19
Lockdown
economic crises
migrants
Migrant workers
Resuming economic activity
Arvind Kejriwal
Central Government
modi sarkar
Workers and Labors

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत


बाकी खबरें

  • Cuba
    ऋचा चिंतन
    वैश्विक एकजुटता के ज़रिये क्यूबा दिखा रहा है बिग फ़ार्मा आधिपत्य का विकल्प
    11 Jan 2022
    दुनिया को बिग फ़ार्मा के एकाधिकारवादी चलन का एक विकल्प सुझाते हुए क्यूबा मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा अहमियत लोगों को देता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, राज्य से वित्त पोषित अनुसंधान को बढ़ावा देता…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,68,063 नए मामले, 277 मरीज़ों की मौत 
    11 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 2.29 फ़ीसदी यानी 8 लाख 21 हज़ार 446 हो गयी है।
  • kashi
    विजय विनीत
    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: कैसे आस्था के मंदिर को बना दिया ‘पर्यटन केंद्र’
    11 Jan 2022
    काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप सड़क के किनारे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का न्यास सुविधा केंद्र है। यहां एक हेल्प डेस्क है, जिसके बाहर कांच के गेट पर 300 रुपये में सुगम दर्शन का पोस्टर चस्पा किया गया है।…
  • security lapse
    शिव इंदर सिंह
    “मोदी की सुरक्षा में चूक या राजनीतिक ड्रामा?” क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग! 
    11 Jan 2022
    जिला लुधियाना के नौजवान किसान जगजीत सिंह का कहना है, “पहली बात तो किसान मोदी के काफिले से करीब एक किलोमीटर दूरी पर थे। दूसरी बात उनके पास कोई हथियार नहीं थे। वह कम से कम मोदी को काले झंडे दिखा सकते…
  • Rahul and Modi
    ओंकार पूजारी
    2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य
    11 Jan 2022
    कमज़ोर कांग्रेस इतनी कमज़ोर नहीं है कि औपचारिक मोर्चे या भाजपा विरोधी ताक़तों की अनौपचारिक समझ के मामले में किसी भी अखिल भारतीय भाजपा विरोधी परियोजना से बाहर हो जाए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License