NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना : संकट के समय ही प्रगतिशील और प्रतिक्रियावादी सोच का अंतर साफ़ होता है
मुख्य सवाल है कि ख़तरा जब पैदा हुआ तो उस ख़तरे से मुकाबला कैसे किया जाए? यहीं से दो नज़रिये या मॉडल सामने आते हैं।
राजीव कुंवर
25 Mar 2020
कोरोना वायरस
Image courtesy: Nature

संकट के समय ही प्रगतिशील एवं प्रतिक्रियावादी सोच का अंतर समझ में स्पष्ट हो जाता है। बिना सिद्धांत के कोरोना वायरस के कारण उपजे संकट - जो ग्लोबल संकट है - इसे समझने की कोशिश करते हैं।

नवंबर के अंत और दिसंबर के शुरुआत से ही चीन से कोरोना वायरस के फैलने की ख़बर आने लगी थी। तब से हमारा देश NRC और CAA के बहस में देने और लेने की बहस को केंद्र में रखकर चुनाव से लेकर दंगे तक में व्यस्त था। चीन का मज़ाक बनाया जा रहा था। चमगादड़ खाने से लेकर कुत्ते और बंदर तक की बात की जा रही थी। उसके ठीक बाद ख़बर आने लगी कि वायरस हथियार का निर्माण करने के दौरान का हादसा है यह। इन सब के पीछे जिम्मेदारी तय की गई तो चीन की जनता की या फिर चीन की सरकार की। जो जिम्मेदारी तय की जा रही थी उसके पीछे कोई वैज्ञानिक चिंतन नहीं। बस जिम्मेदारी तय करना। दुश्मन का निर्माण करना। प्रतिक्रियावादी सोच फर्जी दुश्मन की निर्मिती के बिना संभव नहीं।

सरल तौर पर देखें तो वायरस अलग-अलग समय पर अलग-अलग देश में अलग-अलग प्राकृतिक स्थिति में पैदा होते रहे हैं। महत्वपूर्ण है उसकी व्यापकता। चीन में पैदा कोरोना वायरस की व्यापकता इतनी बड़ी क्यों है ? वजह साफ है भूमंडलीकरण। भूमंडलीकरण भले ही पूँजी का एक देश से दूसरे देश में मुनाफा कमाने के लिए बेरोकटोक आवाजाही का नाम है- परन्तु उत्पादन का वितरण तो वैश्विक ही होगा। भले ही श्रम की आवाजाही भूमंडलीकरण में सीमित है, पूँजी की तरह वैश्विक नहीं, पर श्रम के द्वारा जो माल तैयार हो रहा है, उसका वितरण तो वैश्विक ही होगा न! चीन सस्ते श्रम के कारण दुनियाभर की पूँजी का उत्पादन केंद्र है। अब सिर्फ माल का ही नहीं वायरस का भी वितरण वैश्विक होगा। अगर चीन में वायरस पैदा हुआ तो उसका प्रसार भी अपने उत्पादन के वितरण के साथ वैश्विक स्तर पर ही होगा। 

अब सवाल पैदा होता है कि ख़तरा जब पैदा हुआ तो उस खतरे से मुकाबला कैसे किया जाए? यहीं से दो नजरिये सामने आते हैं। एक जो चीन से लेकर कोरिया एवं केरल तक में अपनाया गया। सरकारी अस्पताल। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा। यूनिवर्सल हेल्थ सिस्टम। जो मुनाफा कमाने के उद्देश्य से नहीं रोग के निदान के उद्देश्य से चलता है। इसे ही सरकारी अस्पताल कहते हैं। जो जाँच के लिए किट बनाएगा, वह भी बहुत ज्यादा संख्या में- जो सस्ता हो और सबके लिए हो। जाँच के बाद ही तो सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कौन है जो इन्फेक्टेड है! इन्फेक्टेड का इलाज या आइसोलेशन उसके बाद ही तय हो सकता है। 

लेकिन प्रतिक्रियावादी सोच एक फर्जी दुश्मन क्रिएट करेगा। चीन  कम्युनिस्ट और फिर सीमा विवाद के कारण स्वाभाविक शत्रु की योग्यता रखता है। उसकी लपेट में नार्थ ईस्ट के मंगोल नस्ल वाले भी आ जाएं तो यह भी स्वाभाविक ही है। चिंकी जो नस्लीय गाली है, उसे प्रतिक्रियावादी लोग संकट के फर्जी दुश्मन के रूप में पहचान देते हैं।

पाकिस्तान और मुसलमान ही नहीं, प्रतिक्रियावाद राष्ट्रवाद के जरिए अपने दुश्मनों का गढ़ंत करता आया है और आगे भी करेगा। अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए। पिछले तीन महीने का इस्तेमाल उसी प्रतिक्रियावादी राजनीति ने NRC और NPR-CAA के इर्दगिर्द रखा। अर्थव्यवस्था की नाकामी को छिपाने एवं निजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया गया। रेलवे से लेकर LIC तक का डिसइन्वेस्टमेंट और बैंकों की लूट को नागरिकता के सवाल के नीचे दबा दिया गया।

अभी जब चर्चा यह हो रही है कि पिछले दो महीने का समय था जब देश तैयार होता कोरोना वायरस से लड़ने के लिए- किट बनाने से लेकर आयात करने से लेकर डॉक्टर एवं नर्स एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया करने वाले लोगों के लिए जरूरी सुरक्षा कवच जमा किया जाता - यह सरकार एक इंच पीछे नहीं हटेंगे का नारा बुलंद करती रही। अब जब हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं तो थाली और ताली थमायी जा रही है एवं चीन, चिंकी और कम्युनिस्ट को टारगेट कर फर्जी जिम्मेदार दुश्मन की निर्मिति की जा रही है। 

ठीक उसी समय प्रगतिशील सोच एवं सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, सरकारी अस्पताल से लेकर कामगार जनता तक खाने एवं जांच से लेकर इलाज तक कि व्यवस्था में लगी है। बिहार में एक इन्फेक्टेड आता है और मारा जाता है। वजह जांच तक की सुविधा नहीं है। जाँच की रिपोर्ट कोलकाता से आते-आते मरीज मारा जाता है। इस बीच उसने कितने लोगों तक वायरस को फैला दिया है इसका बिहार सरकार को कोई भी पता नहीं।

ऐसे में जरूरी है कि ताली-थाली पीटने के जरिए प्रतिक्रियावादी सोच के खतरे को समझा जाए। दिल्ली विश्वविद्यालय की नार्थ ईस्ट की शिक्षिका के ऊपर थूक फेंककर गाली देने की मानसिकता को समझने की जरूरत है। यह वैसा ही है जैसे हाल में दिल्ली में हुए दंगे में पहचान पत्र से नाम देखकर या गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से मालिक की पहचान कर हत्या और जलाने की घटना। 

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
novel coronavirus
COVID-19
China
Globalisation
Universal health system
WHO
CAA
NRC
NPR
BJP

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • covid
    भाषा
    ओमीक्रॉन को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक उपाय तत्काल बढ़ाने की ज़रूरत : डब्ल्यूएचओ
    18 Dec 2021
    डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें आगामी हफ्तों में और सूचना मिलने की संभावना है। ओमीक्रॉन को हल्का मानकर नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।’’
  • suicide
    भाषा
    प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों में लगे श्रमिक ने की आत्महत्या
    18 Dec 2021
    पुलिस ने बताया कि फूलपुर थाना क्षेत्र के पिंडरा करखियांव में प्रधानमंत्री की रैली की तैयारी में लगे 36 वर्षीय विक्रम ने शुक्रवार रात ‘‘फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।’’
  • rumy
    अयसकांत दास , परंजॉय गुहा ठाकुरता
    रमी ऑनलाइन पर रार 
    18 Dec 2021
    वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक सिंघवी ऑनलाइन कार्ड गेम की वैधता को लेकर विवाद में उलझ गये हैं, यहां तक कि भारत सरकार इंटरनेट पर खेले जा रहे इस "जुआ" पर अपनी नीति को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी से…
  • uttar pradesh
    लाल बहादुर सिंह
    उत्तर प्रदेश बदलाव के मुहाने पर : ध्रुवीकरण का ब्रह्मास्त्र भी बेअसर
    18 Dec 2021
    मोदी से अधिक शिद्दत से शायद ही किसी को एहसास हो कि UP हारने के बाद उनके लिए दिल्ली बहुत दूर हो जाएगी। इसीलिए जैसे वह गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ते थे, उसी अंदाज में de facto मुख्यमंत्री की तरह…
  • Minority Rights Day
    डॉ. राजू पाण्डेय
    अल्पसंख्यक अधिकार दिवस विशेष : मुस्लिम अधिकारों पर संकट
    18 Dec 2021
    विकास के हर पैमाने पर पिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए 2014 के बाद का समय बहुत कठिन रहा है। मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा और नफ़रत का प्रसार भाजापा के राजकाज का केंद्र बिंदू है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License