NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोरोना और महाकुंभ : धर्म से बड़ा है मनुष्य
कोरोना कोई ढोल बजा कर नहीं आता। अगर कुंभ स्थगित हो जाता तो न धर्म का लोप होता न हिंदू समाज का। अलबत्ता एक मैसेज यह जाता कि हिंदू एक सहिष्णु और सभ्य व वैज्ञानिक चेतना वाली क़ौम है।
शंभूनाथ शुक्ल
15 Apr 2021
कोरोना और महाकुंभ : धर्म से बड़ा है मनुष्य
Image courtesy : NDTV

कोई भी धर्म, कोई भी कर्मकांड, कोई भी विचार मनुष्य से ऊपर नहीं हो सकता। मनुष्य है, तब ही धर्म है, कर्मकांड है और विचार है। इसीलिए इस बार हरिद्वार का कुंभ स्थगित किया जा सकता था। क्योंकि चाहे जितनी जाँच कर लो, दवाएँ ले लो अथवा टीका लगवा लो, अगर कोई कोरोना संक्रमित है तो उसे पकड़ा नहीं जा सकता। कोरोना कोई ढोल बजा कर नहीं आता। अगर कुंभ स्थगित हो जाता तो न धर्म का लोप होता न हिंदू समाज का। अलबत्ता एक मैसेज यह जाता कि हिंदू एक सहिष्णु और सभ्य व वैज्ञानिक चेतना वाली क़ौम है। ऐसा नहीं है कि पहले कभी कुंभ स्थगित नहीं हुए। आपदा-बिपदा में अक्सर कुंभ स्थगित होते रहे हैं। शायद इसीलिए यह उक्ति बनाई गई होगी कि “आपत्तिकाले मर्यादानास्ति!” यानी आपत्ति काल में कोई शास्त्रोक्त मर्यादा नहीं होती। इसलिए धर्म का कर्मकांड समयानुकूल होना चाहिए। पिछले वर्ष चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही लॉक-डाउन लगा था। मंदिरों के पट बंद हो गए थे। तब भी लोगों ने पूजा-पाठ किए थे पर चुपचाप घर पर बैठ कर। फिर इस साल क्या दिक़्क़त थी?

यूँ भी धर्म की पालना तब ही संभव है, जब जान बची रहे। राहुल सांकृत्यायन ने अपनी पुस्तक ‘घुमक्कड़ स्वामी’ में एक ऐसे घुमक्कड़ साधु का वर्णन किया है, जो यात्रा करते हुए कैलाश मानसरोवर पहुँच गए और तूफ़ान के बीच वहीं फँस गए। वहाँ कुछ तिब्बती लामा कन्दराओं में रहते थे, व वे जिस याक की सवारी करते थे, उन्हीं को काट कर जाड़ों में उनका मांस भून कर खाते थे। जाड़े में भूख मिटाने का और कोई ज़रिया वहाँ नहीं था। स्वामी जी, जाति से इटावा के कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे जिनके यहाँ मांसाहार वर्जित है। और याक तो गाय की प्रजाति का पशु है। लेकिन यदि नहीं खाते हैं तो जान जाती है। स्वामी जी ने फ़ैसला किया और याक का मांस खा कर जान बचायी। उनके बहुत से साथी भूख से मर गए। उन स्वामी जी ने बाद में राहुल जी से कहा, कि अगर मैं जीवित ही नहीं रहता तो धर्म बचा कर भी क्या कर लेता! यह साफ़गोई और विवेक ही किसी समाज को ज़िंदा रखता है। लेकिन जब कूप-मंडूकता और अंध भक्ति चरम पर हो तो धर्म, समाज और राजनीति विवेक को खो देती है।

अब आज के समय में जब कोरोना की दूसरी लहर अपने घातक रूप से सामने खड़ी हो और मृत्यु हर कहीं दस्तक दे रही हो, तब सोमवारी अमावस्या (12 अप्रैल) समेत हरिद्वार में कुंभ के सभी स्नान स्थगित किए जा सकते थे। हरिद्वार में 12 अप्रैल को मेले में आए 408 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। अगले रोज़ यह संख्या 594 हो गई। इनमें से 18 साधु भी संक्रमित मिले। इसके बावजूद 14 अप्रैल (बैशाखी) के शाही स्नान को भी नहीं रोका गया। इसके अलावा हरिद्वार में 200 लोग पहले से कोरोना संक्रमित थे।  ज़ाहिर है, ये लोग कोई आइसोलेशन में नहीं थे और स्वस्थ लोगों के संपर्क में भी आए होंगे। इन लोगों के स्पर्श से कितने और लोग संक्रमित हुए होंगे, इसका कोई आँकड़ा नहीं है। ऐसे में कुंभ स्नान को टाल देना बेहतर विकल्प होता। आख़िर पिछले वर्ष उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सावन के महीने में कांवड़ियों के हरिद्वार प्रवेश पर रोक लगाई ही थी और उसके सार्थक परिणाम भी सामने आए थे। किंतु उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथसिंह रावत ने यह फ़ैसला नहीं किया। नतीजा सामने है। कुंभ को टालने का फ़ैसला कोई इतिहास में पहली बार नहीं हुआ होता, इसके पहले भी कई बार हरिद्वार में कुंभ को स्थगित करना पड़ा है।

अब तक के ज्ञात इतिहास में पता चलता है कि तैमूर लंग के हमले के बाद हरिद्वार में शाही स्नान स्थगित कर दिए थे। 1398 में जब उसने दिल्ली को फ़तेह किया, तभी उसे किसी ने हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेले की तरफ़ ध्यान दिलाया था। उसे भड़काया गया कि वहाँ हिंदू लोग खूब पैसा लेकर आते हैं और दान-दक्षिणा करते हैं। वहाँ के मंदिरों में सोना गड़ा है। उसने हरिद्वार कूच किया और हज़ारों लोग मारे गए। ख़ुद तैमूर लंग ने अपनी आत्म कथा ‘तुजक-ए-तैमूर’ में यह वर्णन किया है। इसके बाद से हरिद्वार कुंभ में स्नान गृहस्थों के लिए रोक दिया गया। और हमलावरों से रक्षा के लिए 1565 में मधुसूदन सरस्वती ने ऐसे साधुओं की सेना खड़ी की जो कुंभ में हमलावरों से स्नान करने आने वालों की रक्षा कर सके।

जब दिल्ली में मुग़ल बादशाह अकबर गद्दीनशीं हुए, तब हिंदू गृहस्थ फिर से हरिद्वार कुंभ में स्नान के लिए आने लगे। ख़ुद राजा मानसिंह कई बार हरिद्वार कुंभ में गए। कहा जाता है, कि अकबर के पीने के लिए गंगा जल हरिद्वार से आता था। 1760 में हरिद्वार कुंभ के दौरान शैव और वैष्णव सम्प्रदाय के साधु परस्पर भिड़ गए। इसमें 1800 साधुओं की जान गई। इसके बाद फिर हरिद्वार कुंभ सिर्फ़ संन्यासियों के लिए हो गया और गृहस्थों ने आना बंद कर दिया। 1803 में दूसरे आँग्ल-मराठा युद्ध के बाद अपर दो-आब अंग्रेजों के पास चला गया। इसलिए हरिद्वार कुंभ को सरकारी आदेश से आम लोगों के लिए बंद हो गया। इसके बाद 1820 में हरिद्वार कुंभ पड़ा तो भारी भगदड़ मच गई। क़रीब 500 लोग मारे गए। इसके बाद दो कुंभ में आम जनता नहीं आई। 1856 में झगड़े की आशंका के चलते सिर्फ़ साधु लोग ही कुंभ में आए। बाद में ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफ़सरों को पता चला, कि इस कुंभ में जुटे साधुओं में अन साधुओं की संख्या भी ख़ासी थी, जिन्होंने कम्पनी सरकार के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काया। ग़दर के बाद ब्रिटिश सरकार ने ऐसे किसी जुटान पर रोक लगा दी। 

इस रोक के बाद 1906 में हुए हरिद्वार कुंभ का पता चलता है, जिसमें पटियाला की महारानी की विशालकाय छावनी देख कर तो अंग्रेज भी हक्के-बक्के रह गए। कोई देसी रियासत इतना तड़क-भड़क कर सकती है, यह उन्हें समझ न आया। 1918 का कुंभ इंफ़्ल्यूइंजा के चलते रद्द रहा। 1945 में प्लेग फैलने के कारण सब जगह के कुंभ मेले प्रतिबंधित कर दिए गए। सिर्फ़ साधु लोग ही स्नान कर सकते। 1950 के हरिद्वार कुंभ से पुनः गृहस्थ लोग आने शुरू हुए। 

आज़ादी के बाद 1954 में प्रयाग का कुंभ पड़ा। इसमें भारी भगदड़ मची और हज़ारों लोग लापता हो गए। 1962 में हरिद्वार कुंभ को भारत-चीन युद्ध की वजह से आम लोगों को रोकना पड़ा। इसके बाद से कुंभ नियमित चल रहे हैं। 1998 के हरिद्वार कुंभ में हरियाणा के एक वीवीआईपी नेता स्नान करने आए। उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई। इसी बीच साधु लोग क्रुद्ध हो गए और भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग मारे गए। इसके बाद मुख्य स्नान में वीआईपी लोगों को रोकने का नियम बना। हालाँकि हरिद्वार में हर की पैड़ी के सामने वीआईपी घाट बना हुआ है पर मोक्ष की आकांक्षा में लोग हर की पैड़ी में ही स्नान करते हैं। जब हर की पैड़ी में जो गंगा जल आ रहा है, वह बैराज का पानी है। गंगा की मुख्यधारा तो चंडी देवी की तरफ़ बहती है। लेकिन हर की पैड़ी के संकरे घाट में एक साथ लाखों लोगों का स्नान बीमारियों को भी न्योतता है तथा किसी अनहोनी को भी। इसलिए या तो नहाने के लिए कोई विस्तृत मैदान हो अन्यथा हरिद्वार कुंभ में स्नान को सिर्फ़ साधुओं के लिए किया जाए।

सच बात तो यह है, कि कुंभ स्नान का महत्त्व सिर्फ़ प्रयागराज का है, जहां गृहस्थ लोग भी स्नान कर सकते हैं। बाक़ी स्थानों में सिर्फ़ अखाड़ों के साधु-संन्यासियों के स्नान का ही महत्त्व है। यही होता भी रहा है। इसीलिए हरिद्वार में अखाड़ों के ही मुख्यालय हैं। यूँ भी हिंदू धर्म में हरिद्वार का सम्बंध पितरों के तर्पण से है। किंतु मंदिरों और महंतों ने इसे कुंभ से जोड़ दिया। मगर जो भी धार्मिक स्थल आम लोगों के लिए खुला हो, वहाँ पर प्रवेश प्रतिबंधित होना आवश्यक है। मान्यता है कि साधु लोग चूँकि बस्तियों से दूर रहते हैं इसलिए छूत की बीमारियों से वे दूर रहते हैं। ऐसे में यदि हरिद्वार कुंभ को साधुओं तक सीमित रखा जाता तो इस कोरोना को रोकने में कुछ तो मदद मिलती।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Kumbh 2021
Kumbh Mela
religion
haridwar
COVID-19
Covid-19 India
corona pandemic

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • BCI
    भाषा
    बीसीआई ने खोसला को दोषी ठहराने के ख़िलाफ़ जारी वकीलों की हड़ताल वापस लेने का निर्देश दिया
    09 Nov 2021
    बीसीआई ने कहा कि यह कानून के तहत प्रदत्त वैध तरीका नहीं है। एक निचली अदालत ने 1994 में एक महिला वकील के साथ मारपीट करने के मामले में 29 अक्टूबर को खोसला को दोषी ठहराया था। सजा पर बहस 15 नवंबर को होगी।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चैक: भाजपा द्वारा बुंदेलखंड में घर-घर नल से जल का दावा ग़लत
    09 Nov 2021
    भाजपा उत्तर प्रदेश के आधिकारिक अकाउंट से एक ट्वीट किया गया है। ट्वीट किये गए ग्रैफिक में बुंदेलखंड में पानी के संबंध में दो तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। इन तस्वीरों के जरिये सपा, बसपा, कांग्रेस…
  • rafale
    भाषा
    रफ़ाल मामले पर पर्दा डालने के लिए मोदी सरकार और सीबीआई-ईडी के बीच सांठगांठ हुई: कांग्रेस
    09 Nov 2021
    कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से ये आरोप उस वक्त लगाए गए हैं जब फ्रांस के पोर्टल ‘मीडिया पार्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि रफ़ाल निर्माता कंपनी दसॉल्ट की ओर से बिचौलियों को कम से कम 75…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर्यावरण को दांव पर लगाकर पर्यावरणविद् का सम्मान!
    09 Nov 2021
    पर्यावरण को बचाना ही पर्यावरण का सच्चा सम्मान है। पर्यावरण को लेकर देश-दुनिया में चिंता है, ऐसे में पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना अच्छा कदम है, लेकिन इससे भी अच्छा होता…
  • Demonetisation
    अनिल जैन
    नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया
    09 Nov 2021
    नोटबंदी का फ़ैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हर लिहाज से आत्मघाती साबित हुआ। इसीलिए सरकार और उसके ढिंढोरची की भूमिका निभा रहे मीडिया ने भी नोटबंदी के पांच साल पूरे होने पर इस मसले पर पूरी तरह खामोशी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License