NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
कोरोना संकट: बिछड़ते जा रहे हैं दोस्त-रहबर
कोविड की दूसरी लहर रोज़ ही एक नई बुरी ख़बर ला रही है। अभी हम एक साथी, एक बौद्धिक, एक लेखक को श्रद्धांजलि भी नहीं दे पाते तब तक दूसरी बुरी ख़बर आ पहुंचती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Apr 2021
कोरोना ने इन शख़्सियतों को हमसे असमय छीन लिया। अजीत साहनी (बाएं), अंबरीष राय (मध्य में) और रमेश उपाध्याय (दाएं)।
कोरोना ने इन शख़्सियतों को हमसे असमय छीन लिया। अजीत साहनी (बाएं), अंबरीष राय (मध्य में) और रमेश उपाध्याय (दाएं)।

कोविड की दूसरी लहर रोज़ ही एक नई बुरी ख़बर ला रही है। अभी हम एक साथी, एक बौद्धिक, एक लेखक को श्रद्धांजलि भी नहीं दे पाते तब तक दूसरी बुरी ख़बर आ पहुंचती है। कल, 24 अप्रैल को ऐसी ही दो बुरी ख़बरें लगभग साथ-साथ मिलीं। एक रंगकर्मी और ज़िंदादिल इंसान अजीत साहनी हमारे बीच से चले गए और दूसरे हिंदी के प्रख्यात जनवादी कथाकार रमेश उपाध्याय हमारे बीच नहीं रहे। इनसे दो दिन पहले पत्रकार और सीपीएम महासचिव के युवा बेटे आशीष येचुरी के जाने की ख़बर आई और अगले दिन शिक्षा का अधिकार आंदोलन के संयोजक और समाजसेवी अंबरीष राय हमारे बीच से चले गए।

इसे पढ़ें: सीताराम येचुरी के पत्रकार बेटे आशीष येचुरी का कोरोना से निधन

अंबरीष राय के निधन पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश लिखते हैं-

उफ्फ़, ये कैसा वक़्त है भाई ! वक़्त की ऐसी बेलगाम खूनी रफ़्तार हममें किसी ने भी नहीं देखी! देखने की बात छोड़िये, हमने इतने बुरे दिनों की कभी कल्पना भी नहीं की। भाई Ambarish Rai के जाने की इस दुखद खबर मिलने के साथ ही मेरे शरीर में अचानक कम्पन होने लगा! अजीब तरह की सिहरन! स्तब्ध हूं!

शिक्षा का अधिकार मंच और उसके राष्ट्रव्यापी अभियान से उनके जुड़ने के पहले से मैं अंबरीष जी को जानता था। वह छात्र-राजनीति से गैर-सरकारी सामाजिक संगठनों से जुड़े और हम पत्रकारिता के रास्ते चल पड़े। हम दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़े पर छात्र राजनीति में होने के चलते एक दूसरे के नाम से अच्छी तरह परिचित थे। हम जब पहली बार दिल्ली के किसी कार्यक्रम में मिले तो लगा कि काफी समय बाद मिल रहे हैं! ये बिल्कुल महसूस नहीं हुआ कि पहली बार मिल रहे हैं।

उनके बुलावे पर RTE से सम्बद्ध कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने जब कभी आमंत्रित किया, विवादास्पद शिक्षा नीति विषयक कुछ कार्यक्रमों में गया। इसी तरह हमने जब भी याद किया, राज्यसभा टीवी के हमारे कार्यकाल में वह कई बार हम लोगों के कार्यक्रमों में आते रहे। शिक्षा या शिक्षा नीति से जुड़े विषयों पर जब कभी मुझे कुछ सूचना या ज्ञान की आवश्यकता होती, मैं जिन तीन-चार लोगों के फोन खड़काता, अंबरीष जी उनमें प्रमुख थे।

बेहद दुखद! 23 अप्रैल की यह सुबह बहुत उदास और बहुत खराब है! कुछ समझ में नहीं आ रहा है, क्या होगा, हमारे समाज का, हमारे देश का और हम सबका?

सलाम और श्रद्धांजलि, दोस्त! परिवार के प्रति शोक-संवेदना!

अलविदा रमेश उपाध्याय !

जनवादी लेखक संघ ने रमेश उपाध्याय जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए बयान जारी किया है। बयान इस प्रकार है-

हिंदी के प्रख्यात जनवादी कथाकार रमेश उपाध्याय हमारे बीच नहीं रहे। वे पिछले कई दिनों से कोविड से संक्रमित थे और एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। सारी कोशिशों के बावजूद दिनांक 24 अप्रैल को प्रात:काल उनका देहावसान हो गया।

1 मार्च 1942 को उत्तर प्रदेश में जन्मे रमेश जी का आरंभिक जीवन काफी संघर्षों के बीच बीता था। प्रिंटिंग प्रेस में कंपोजिटर से लेकर पत्रकारिता करने तक उन्होंने जीवनयापन के लिए कई तरह के काम किये। इसी दौरान उन्होंने एम.ए., पीएच.डी. तक की पढ़ाई पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में प्राध्यापक नियुक्त हुए जहाँ आगे तीन दशकों तक उन्होंने अध्यापन कार्य किया।

रमेश उपाध्याय की पहली कहानी 1962 में प्रकाशित हुई थी और पहला कहानी संग्रह ‘जमी हुई झील’ 1969 में। तब से वे लगातार कहानी, उपन्यास, नाटक, नुक्कड़ नाटक, आलोचना आदि विधाओं में लेखन करते रहे। कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकों के अनुवाद भी उन्होंने किये। अपनी पीढ़ी के वे काफी चर्चित और प्रतिष्ठित लेखक थे और हर पीढ़ी के लेखकों से उनका आत्मीय संवाद रहा। वे उन कुछ वरिष्ठ लेखकों में से थे जिन्होंने जनवादी लेखक संघ की स्थापना में सक्रिय हिस्सा लिया था।

रमेश उपाध्याय लघु पत्रिका आंदोलन से भी गहरे रूप में जुड़े थे। स्वयं उनके द्वारा प्रकाशित और संपादित त्रैमासिक पत्रिका ‘कथन’ कई दशकों तक हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका के रूप में लोकप्रिय रही है। अब इस पत्रिका का संपादन उनकी छोटी बेटी संज्ञा उपाध्याय कर रही हैं। रमेश जी ने ‘आज के सवाल’ नामक पुस्तक शृंखला का संपादन भी किया है। उनकी बड़ी बेटी प्रज्ञा भी हिदी की जानी-पहचानी युवा कथाकार हैं और बेटा अंकित चित्रकार हैं। कुछ साल पहले ही उनकी पत्नी सुधा उपाध्याय की आत्मकथा भी प्रकाशित हुई थी, जो काफी चर्चित रही। सुधा जी स्वयं अभी कोविड से ग्रस्त हैं और उनका इलाज चल रहा है।

रमेश उपाध्याय के अब तक पंद्रह से अधिक कहानी संग्रह, पांच उपन्यास, तीन नाटक, कई नुक्कड़ नाटक, आलोचना की कई पुस्तकें और अंग्रेजी और गुजराती से कई पुस्तकों के अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं। अपने रचनात्मक लेखन के अलावा उन्होंने साहित्य के सैद्धांतिक पक्ष पर भी काफी लिखा है। पिछले तीन दशकों में यथार्थवाद का जो नया रूप साहित्य लेखन में व्यक्त हुआ, उसे उन्होंने भूमंडलीय यथार्थवाद नाम दिया था और इस अवधारणा के विभिन्न पक्षों की विस्तृत व्याख्या भी प्रस्तुत की थी। लेखन के लिए उन्हें केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान और हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा भी पुरस्कृत और सम्मानित किया गया था।  

छह दशकों से हिंदी साहित्य को अपने लेखन से समृद्ध करने वाले और अभी भी लेखन में सक्रिय रहने वाले रमेश जी का इस तरह हमारे बीच से चले जाना हम सभी के लिए एक बहुत बड़ा आघात है। जनवादी लेखक संघ अपने इस वरिष्ठ साथी की मृत्यु पर गहरा शोक और उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। हम सुधा जी, संज्ञा और अंकित के कोविड से जल्दी मुक्त होने और स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

COVID-19
Coronavirus
Coronavirus 2nd wave

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • एक ट्रांसजेंडर महिला की मौत और लिंग पुनर्निधारण सर्जरी में सुधार करने की जरूरत
    प्रशांत पद्मनाभन
    एक ट्रांसजेंडर महिला की मौत और लिंग पुनर्निधारण सर्जरी में सुधार करने की जरूरत
    02 Aug 2021
    टीजी (ट्रांसजेंडर) अधिनियम की धारा 15 संबंधित सरकारों को ट्रांसजेंडर समुदाय को अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश देती है।
  • बाबुल सुप्रियो
    सोनिया यादव
    आख़िर क्यों बीजेपी के लिए इतने ख़ास हैं बाबुल सुप्रियो, जो अब गले की फांस बन गए हैं!
    02 Aug 2021
    माना जा रहा है कि अगर सुप्रियो लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो बीजेपी को राज्य में उपचुनाव का सामना करना पड़ सकता है, जो फिलहाल बीजेपी बिल्कुल नहीं चाहती।
  • मूंग किसान मुश्किल में: एमपी में 12 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के मुकाबले नाममात्र की ख़रीद
    रूबी सरकार
    मूंग किसान मुश्किल में: एमपी में 12 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के मुकाबले नाममात्र की ख़रीद
    02 Aug 2021
    मध्य प्रदेश में 12 लाख मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार ख़रीद रही एक लाख, 34 हज़ार मीट्रिक टन, बाक़ी मूंग लेकर किसान कहां जाएं! ऊपर से बरसात शुरू होने से संकट हो गया है।
  • बिजली (संशोधन) विधेयक के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर 3 अगस्त से धरना देंगे कर्मचारी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिजली (संशोधन) विधेयक के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर 3 अगस्त से धरना देंगे कर्मचारी
    02 Aug 2021
    "सत्याग्रह कार्यक्रम के बाद अगले कदम के रूप में 10 अगस्त को देशभर के 15 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर एक दिन हड़ताल करेंगे। अगर केंद्र सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए कोई एक तरफा कार्यवाही करती…
  • एविक्शन मोरेटोरियम पारित करने में कांग्रेस की विफलता के बाद अमेरिका में नाराज़गी
    पीपल्स डिस्पैच
    एविक्शन मोरेटोरियम पारित करने में कांग्रेस की विफलता के बाद अमेरिका में नाराज़गी
    02 Aug 2021
    प्रगतिशील लोगों का कहना है कि कांग्रेस ये क़ानून पारित करने में विफल रहा क्योंकि बाइडेन प्रशासन अंतिम समय तक कांग्रेस को सूचित करने में विफल रहा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License