NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
शिक्षा
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना का क़हर: लड़कियों की पढ़ाई पर फुल स्टॉप लगने का ख़तरा बढ़ा
आंकड़ों के मुताबिक कोरोना खत्म होने के बाद भी कई कम और मध्यम आय वाले देशों को मिलाकर तकरीबन 2 करोड़ लड़कियां स्कूल नहीं लौट सकेंगी। इन देशों में भारत भी शामिल है।
विवेक
13 Nov 2020
लड़कियों की पढ़ाई पर फुल स्टॉप लगने का ख़तरा बढ़ा
'प्रतीकात्मक तस्वीर' फोटो साभार : ट्विटर

कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में स्कूली शिक्षा प्रभावित हुई है। लड़कियों की पढ़ाई पर इसका सबसे बुरा असर हुआ। आंकड़ों के मुताबिक कोरोना खत्म होने के बाद भी कई कम और मध्यम आय वाले देशों को मिलाकर तकरीबन 2 करोड़ लड़कियां स्कूल नहीं लौट सकेंगी। इन देशों में भारत भी शामिल है।

एक ओर महिला सशक्तिकरण के लिए दुनिया-जहान के कैंपेन चल रहे हैं, तो दूसरी ओर देश में ही 15 से 18 साल के आयु वर्ग की लगभग 40 प्रतिशत लड़कियां ऐसी हैं, जो स्कूल नहीं जा सकी हैं। साथ ही लड़कों के मुकाबले ऐसी लड़कियों की संख्या दोगुनी है, जो चार साल तक भी स्कूली शिक्षा नहीं ले पाईं। यूनेस्को के ये आंकड़े कोरोना काल के बाद और भी डरावने हो सकते हैं।

इसपर सेंटर फॉर बजट एंड पॉलिसी स्टडीज (CBPS) ने मलाला फंड के सहयोग से बिहार में एक स्टडी की। इसमें ये समझने की कोशिश की गई कि स्कूल बंद रहने के दौरान डिजिटल लर्निंग लड़कियों के लिए किस हद तक काम आ रही है। बता दें कि कोरोना के कारण 21 मार्च से देश के लगभग सभी स्कूल बंद पड़े हैं। अधिकतर स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा है कि बच्चों के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग नहीं रखी जा सकती। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। हालांकि बच्चों से बातचीत में दिखा कि खासकर लड़कियों के लिए डिजिटल माध्यम बेकार साबित हुए हैं। स्टडी में पता चलता है कि लगभग 47% बच्चों के पास ही फोन की सुविधा है, जिनमें से 31% के पास स्मार्ट फोन है। इसमें भी ज्यादातर लड़कियों को पढ़ने के लिए फोन नहीं मिल पा रहा। असल में हो ये रहा है कि मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा अगर किसी घर में एक ही शख्स के पास है और पढ़ने वाले लड़के और लड़की दोनों ही हैं तो लड़के की पढ़ाई को प्राथमिकता मिलती है। ऐसे में लड़कियों का यह सत्र एक तरह से बेकार जा रहा है।

कोरोना खत्म होने के बाद या इस दौरान किशोर लड़कियों की शादी भी पढ़ाई रुकने की एक वजह बनने जा रही है। जैसा कि यूनिसेफ के आंकड़े बताते हैं, हर साल 18 साल से कम उम्र की लगभग 15 लाख भारतीय लड़कियों की शादी हो जाती है। इसके बाद पढ़ाई का तो कोई सवाल ही नहीं आता, बल्कि कम उम्र में मां बनने जैसे खतरे भी होते हैं। इस बारे में एक अजीबोगरीब ट्रेंड देखने में आया। साल 2005 से 2006 के बीच 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी की दर में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन साल 2015-2016 में ये ग्राफ एक बार फिर से ऊंचा हो गया। अब कोरोना के बाद चिंता जताई जा रही है कि कम उम्र में लड़कियों की शादी का ग्राफ काफी ऊपर जा सकता है। यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड का अनुमान है कि आने वाले 10 सालों में 13 मिलियन से भी ज्यादा लड़कियों की कम उम्र में शादी करवा दी जाएगी। गौर करें कि ये आंकड़ा उस आंकड़े से अलग है, जो बताता है कि कोरोना से पहले भी कितनी लड़कियां गर्ल चाइल्ड मैरिज का शिकार होती रही हैं।

इसके अलावा स्कूल बंद होने का मनोवैज्ञानिक असर भी लड़कियों पर ज्यादा दिख रहा है। इसकी वजह ये है कि वो लगातार घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। खुद चाइल्डलाइन इंडिया ने माना कि लॉकडाउन के दो हफ्तों के भीतर ही उनके पास आने वाले बच्चों के कॉल 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। कहना न होगा कि इनमें से ज्यादातर कॉल उन लड़कियों के थे, जो बंदी के दौरान कई तरह की हिंसाएं झेल रही है।

इन हालातों में अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि गरीबी से जूझ रहे परिवारों की किशोर लड़कियों के लिए कोरोना बंदी एक तरह से स्कूल छोड़ने की चेतावनी साबित हो रही है। यही वजह है कि अब देशभर की कई संस्थाएं #बैकटूस्कूल कैंपेन के तहत लड़कियों की शिक्षा के बारे में चेता रही हैं। खासकर सेकेंड्री एजुकेशन पर ध्यान देने को कहा जा रहा है ताकि हालात बदतर न हों।

वैसे यहां बता दें कि साल 2014 में अफ्रीकन देशों में इबोला महामारी के कहर का अंजाम भी कुछ ऐसा ही था। वहां भी लड़कों के मुकाबले लड़कियों का स्कूल छूटा। जल्दी शादियां और कम उम्र में मां बनना जैसे दुष्परिमाण वहां भी दिखे थे। हालांकि बाद में इनपर नियंत्रण की काफी कोशिशें हुईं। अब कोरोना वायरस महामारी के दौरान विकासशील देशों में एक बार फिर से वही डरावनी तस्वीर बन रही है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Pandemic Coronavirus
education
Education crises
Girl's Education
gender discrimination
poverty

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • सत्येन्द्र सार्थक
    आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?
    25 Apr 2022
    सरकार द्वारा बर्खास्त कर दी गईं 991 आंगनवाड़ी कर्मियों में शामिल मीनू ने अपने आंदोलन के बारे में बताते हुए कहा- “हम ‘नाक में दम करो’ आंदोलन के तहत आप और भाजपा का घेराव कर रहे हैं और तब तक करेंगे जब…
  • वर्षा सिंह
    इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा
    25 Apr 2022
    “बांध-बिजली के लिए बनाई गई झील में अपने घरों-खेतों को डूबते देख कर लोग बिल्कुल ही टूट गए। उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा। सब परेशान हैं कि अब तक खेत से निकला अनाज खा रहे हैं लेकिन कल कहां से खाएंगे। कुछ…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,541 नए मामले, 30 मरीज़ों की मौत
    25 Apr 2022
    दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच, ओमिक्रॉन के BA.2 वेरिएंट का मामला सामने आने से चिंता और ज़्यादा बढ़ गयी है |
  • सुबोध वर्मा
    गहराते आर्थिक संकट के बीच बढ़ती नफ़रत और हिंसा  
    25 Apr 2022
    बढ़ती धार्मिक कट्टरता और हिंसा लोगों को बढ़ती भयंकर बेरोज़गारी, आसमान छूती क़ीमतों और लड़खड़ाती आय पर सवाल उठाने से गुमराह कर रही है।
  • सुभाष गाताडे
    बुलडोजर पर जनाब बोरिस जॉनसन
    25 Apr 2022
    बुलडोजर दुनिया के इस सबसे बड़े जनतंत्र में सरकार की मनमानी, दादागिरी एवं संविधान द्वारा प्रदत्त तमाम अधिकारों को निष्प्रभावी करके जनता के व्यापक हिस्से पर कहर बरपाने का प्रतीक बन गया है, उस वक्त़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License