NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
सेवा और अनुशासन से ही मिलेगी ‘कोरोना मुक्ति’
अनुशासित लोग ही सेवा का काम कर सकते हैं और ज़रूरतमंदों की मदद कर सकते हैं। इसलिए कोरोना से जीतने का संकल्पपूर्ण अनुशासन के बाद ही सेवा और चेतना जगाने का काम बनता है।
राजेंद्र सिंह
05 Apr 2020
कोरोना मुक्ति
Image courtesy: India Today

कोरोना भारत में अब अपने उच्चतम शिखर पर है, अब उसे नीचे हो जाना चाहिए। नीचे जाएगा तब, जब सभी भारतवासी अपने घर पर रहकर, अपने अधूरे कामों को पूरा करने में जुटेंगे। खेती की धूप और खेत का काम, कोरोना को अपने पास नहीं आने देता। अपने गेहूं, सरसों की कटाई के काम को समय पर पूरा करने की अत्यंत ज़रूरत है इसलिए स्वास्थ्य टेस्टिंग आदि की व्यवस्था करके अपने खेती के काम अलग-अलग रहकर पूरा करना चाहिए। अन्यथा भारत की किसानी, जवानी और पानी, प्रदूषण से और अधिक संकट में आएगी।

यह बीमारी प्रकृति की लक्ष्मण रेखाओं को अपने रहन-सहन, खान-पान से लांघने वालों की वजह ही आई है। यह बाजार या प्रयोगशाला में पैदा हुई या प्रकृति ने पैदा की है? अभी इस पर बहस लम्बी चलने वाली है। हमें इस बहस से ऊपर उठकर अपने काम में लगना है। हम जैसे लोगों को अलग-अलग रहकर, काम करने से यह बीमारी हमारे पास नही आएगी। किसानी ही भारत की आत्मा है, वही हमें कोरोना से जीतने में मदद करेगी। बशर्ते कि हम इस बुरे वक्त में कोरोना से मुक्ति का रास्ता खोज ले।

अभी लॉकडाउन और भारतीयों के अनुशासन से हमारी जीत के लक्षण दिखाई देंगे। इस समय यदि काई जिता सकता है, तो वह है ‘अनुशासन’। अन्यथा हमारे जीवन में हम जितनी अनुशासनहीनता और लापरवाही बरतेगें, कोरोना का उतना ही परपंच बढ़ेगा। इससे बचने का समय बहुत कम है। इसलिए आज से संकल्प करें कि कोरोना के साथ कोई लापरवाही नहीं करेंगे। ये धोखेबाज बीमारी है। धोखा देकर आती है, जो इस बीमारी को लेकर आता है, उसे सबसे ज्यादा ईमानदारी और अनुशासन से अपने जीवन में व्यवहार करना चाहिए। एक व्यक्ति की लापरवाही से ही यह बहुत लोगों की जान ले सकता है। इसलिए जो यह जानता है उसे अपने आप को बचाने के साथ-साथ, दूसरों को बचाना भी उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए। तभी इस जानलेवा धोखा देने वाली बीमारी से भारत जीतेगा।

जिस अनुशासन के कारण भारतीय 700 साल पहले तक दुनिया के गुरु थे, वह सम्मान कोरोना को हराकर, हम पुनः प्राप्त कर सकते हैं। कोरोना जहां एक तरफ हम पर हमला कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमें दुनिया को अनुशासन सिखाने वाला अवसर भी सृजित कर रहा है। इसे हमें एक अवसर मानकर ही देखने और इसके साथ व्यवहार करने की जरूरत है।

लॉकडाउन के कारण देश में हजारों, लाखों परिवारों के पास जीने के लिए जरूरी खाद्य सामग्री एवं सेवा उपलब्ध नहीं है। इसलिए जिनके पास अधिक सामग्री है, वो अपने पड़ोसियों को बांट दें। जिनके पास ये साम्रगी उपलब्ध कराने की क्षमताएं हैं, वो साधन ढूंढ कर उपलब्ध कराने का प्रयास अधिक करें। जैसे तरुण भारत संघ ने जिस दिन से लॉकडाउन हुआ और संकटग्रस्त लोगों के फोन आये, तो उनके घर पर खाद्य व स्वास्थ्य सामग्री पहुंचाने का कार्य कर रहा है, खासकर ज़रुरी खाद्य व स्वास्थ्य साम्रगी (मास्क, आटा, सरसों तेल, दालें, जीरा, नमक, मिर्च, धनिया, हल्दी, साबुन, फिनाइल) बिना साधन होते हुए भी मांग-तांग कर, इक्कट्ठा करके जरुरतमंद लोगो के घर यह साम्रगी पहुंचाने का कार्य तरुण भारत संघ के कार्यकर्ता कर रहे है और अभी रात-दिन इसी में लगे हुए हैं।

अनुशासित लोग ही सेवा का काम कर सकते हैं और ज़रूरतमंदों की मदद कर सकते हैं। इसलिए कोरोना से जीतने का संकल्पपूर्ण अनुशासन के बाद ही सेवा और चेतना जगाने का काम बनता है। दुनिया और भारत देश में स्वैच्छिक कार्य से जुड़े व्यक्तियों, संगठनों और संस्थाओं का यह दायित्व आन पड़ा है। पहले कोरोना को हराने वाला लोक शिक्षण, जिसमें मास्क लगाना, घर में रहना, बातचीत करते वक्त या खड़े होते समय 1 मीटर की दूरी बनाए रखना, सफाई स्वास्थ्य के लिए, गांव व शहरों में जरुरतमंदों की मदद करना। यह काम नौकरी के नहीं है, सेवा के है। इन्हें सेवा भाव से ही किया जा सकता है। इसलिए सभी स्वैच्छिक सेवा में लगे व्यक्तियों, संगठनों और संस्थाओं को आगे आकर, इस सेवा के भाव में जुटना चाहिए। कोरोना वायरस को हराने के लिए अनुशासन और सेवा दोनों लगेंगे। इसलिए हम सब को इस काम के लिए तत्परता से इन कार्यों में जुटना चाहिए।

भारत में कोरोना जैसी बीमारी से बचने का व्यवहार और संस्कार पहले से ही मौजूद है। हम पहले किसी भी मित्र या दोस्त से मिलते वक्त हाथ नही मिलाते थे, उसका कंठ, गाल नहीं चूमते थे बल्कि दूर से ही अपने हाथों को जोडकर उनका सम्मान और प्यार करते थे। इसलिए हमारे देश में बीमारी आने के रास्ते हमारे पुराने आरोग्य रक्षण में निहित थे। लेकिन अब हम इस रास्तों को भूल गए है। अब हमनें दूसरे देशों के तरीके अपना लिए है, जो खुद बीमार होकर, बीमार न होने वाली व्यवस्था को बीमार बनाने का काम कर रहे हैं।

अब हमें सोचना है कि हम अपने ‘‘स्वावलंबी जीवन के तरीकों को अपनाएं और कोरोना को भगाएं।” इस धोखा देने वाली बीमारी को फैलाने वाले देशों व व्यक्तियों से बचें। हां, हम वसुधैव कुटुम्बकम तथा जय जगत को मानने वाले थे और हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी विविधता को भूलकर, दूसरों की नकल करने लगें हैं। कोरोना हमारे बीच दूसरों की जीवन पद्धति को अपनाने से आया है। हम भारतीयों को अपनी जीवन पद्धति की अच्छाइयों पर विचार करने का यह खास अवसर है।

अच्छे लोग वो होते हैं, जो बुरा वक्त आने से पहले बुराई और बुरे वक्त से बचने के लिए काम में जुट जाते हैं। जुटना तो पड़ेगा ही, इसलिए जितनी तत्परता की जाएगी, उतना अच्छा होगा। मैं यह काम अलवर जिले के थानागाजी तहसील के गांव भीकमपुरा में रहकर कर रहा हूं और इस काम की जरूरत समझ रहा हूं। इसलिए यह लेख कोरोना अनुशासन पालन व सेवा क्रियान्वयन हेतु लिखा है। मैं जानता हूं कि आप मुझसे ज्यादा कोरोना को समझ सकते हैं, इसलिए इससे बचने के उपाय आप भी ढूंढ रहे होंगे, फिर भी मेरी कम बुद्धि में, मुझे जो सूझा, वह मैंने लिख दिया है।

(लेखक राजेंद्र सिंह प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। आप वर्षों से पानी के संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं। इसलिए आपको जल पुरुष भी कहा जाता है। लेख में व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Social Distancing
Fight Against CoronaVirus

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • maha covid
    अमेय तिरोदकर
    कोविड-19 मामलों की संख्या में आये भारी उछाल से महाराष्ट्र के कमजोर तबकों को एक और लॉकडाउन का डर सताने लगा है!
    04 Jan 2022
    दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी आजीविका के नुकसान का डर फिर से सताने लगा है। पिछले दो लॉकडाउन के दौरान वे ही इससे सबसे अधिक बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। 
  • SAFDAR
    रवि शंकर दुबे
    सफ़दर: आज है 'हल्ला बोल' को पूरा करने का दिन
    04 Jan 2022
    सफ़दर की याद में मज़दूरों और कलाकारों का साझा कार्यक्रम- क्योंकि सफ़दर के विचार आज भी ज़िंदा हैं...
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट : देश में 24 घंटों में 37,379 नए मामले, ओमीक्रॉन के मामले बढ़कर 1,892 हुए 
    04 Jan 2022
    देश में आज फिर कोरोना के 37,379 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वही ओमीक्रॉन के 192 नए मामलों के साथ कुल मामलो की संख्या बढ़कर 1,892 हो गयी है।
  • The Beatles
    ब्रेंडा हास
    "द बीटल्स" से नए साल की सीख
    04 Jan 2022
    जे के रोलिंग, ओप्रा विन्फ़्रे, स्टीवन स्पीलबर्ग और द बीटल्स में क्या चीज़ एक जैसी है? संकेत: यह न तो प्रसिद्धि है और न ही उनका पैसा।
  • punjab assembly
    डॉ. ज्ञान सिंह
    पंजाब विधानसभा चुनाव: आर्थिक मुद्दों की अनदेखी
    04 Jan 2022
    सर्दी में भोजन करने के बाद रेवड़ी खाने से भोजन पचाने में मदद मिलती है। पिछले कई विधानसभा चुनावों की तरह, लोगों को लंबे वादों को पचाने के लिए एक बार फिर से राजनीतिक रेवड़ियाँ बांटी जा रही हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License