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बात बोलेगी: कोरोना में गोमूत्र-गोबर का जानलेवा जाप करने वालों पर कब होगी कार्रवाई
पूरे माहौल को अवैज्ञानिकता, अंधविश्वास की गर्त में ढकेलने की बहुत ही सुनियोजित साजिश चल रही है। भाजपा की यह पुरानी कॉन्सटीटुअंसी है— गाय-गोबर, गोमूत्र, और हर आपदा में वह अपने समर्थकों के साथ इसका भरपूर प्रयोग करती है।
भाषा सिंह
17 May 2021

आज जब देश में बात-बात पर, महज प्रधानमंत्री से सवाल पूछने वाले पोस्टर लगाने पर एफआईआर हो जाती है, गिरफ्तारी हो जाती है, तो आखिर क्यों भाजपा, संघ और संघ समर्थकों के कोरोना पीड़ितों को जानलेवा संकट में डालने वाले, अवैज्ञानिक और सिरे से बेहूदा, अपमानजनक बयानों पर कार्रवाई होने की उम्मीद भी झूठी है। पूरे माहौल को अवैज्ञानिकता, अंधविश्वास की गर्त में ढकेलने की बहुत ही सुनियोजित साजिश चल रही है। भाजपा की यह पुरानी कॉन्सटीटुअंसी है— गाय-गोबर, गोमूत्र, और हर आपदा में वह अपने समर्थकों के साथ इसका भरपूर प्रयोग करती है। यह कोई अपवाद नहीं है। इन सारे नेताओं-बाबाओं और संघी ब्रिगेड के जरिये देश को पीछे ढकेल कर मध्ययुगीन बर्बरता की ओर ले जाने वाली सोच काम कर रही है।

वरना यह कैसे संभव है कि जब कोरोना से बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीनों का अभूतपूर्व संकट है, ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड के अभाव में हज़ारों भारतवासी दम तोड़ रहे हैं, तब भाजपा की भोपाल से सांसद प्रज्ञा ठाकुर सरेआम अंधविश्वास और सिरे से वैज्ञानिक रूप से गलत, भ्रामक, कोरोना पीड़ितों के लिए जानलेवा साबित हो सकने वाली बात सार्वजनिक मंच से कहती हैं, कि देसी गाय का गोमूत्र कोरोना से बचाव करता है, छाती में इंफेक्शन को रोकता है और वह खुद इसलिए बची हुई हैं क्योंकि वे प्रतिदिन इसका सेवन करती हैं। यह कहकर वह कई निशाने साधती हैं। गाय हो—लेकिन देसी गाय हो। यानी देसी और विलायती या जर्सी गाय के बीच जो भेदभाव करने की लंबी साजिश दक्षिणपंथी संगठन कर रहे हैं, उस पिच पर सांसद प्रज्ञा खेलती हैं। दूसरा छाती में इंफेक्शन की बात को भी लाती हैं और इसका इलाज भी गोमूत्र बताती हैं। तीसरा, कोरोना से बचाव के लिए दवा नहीं, गोमूत्र ही इलाज है। --ये सारी बातें किसी भी कोरोना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। साथ ही कोरोना से लड़ाई की वैज्ञानिक जमीन की ही हत्या करती है गोमूत्र इलाज वाली सारी सोच। यह अब तक जितने लोगों को दवा के जरिए बचाया गया है, उनका उपहास करती है। --यह कहने वाली कोई मामूली व्यक्ति या नेता नहीं, भाजपा सांसद हैं—देश की नीति निर्माता।

ऐसी घातक बातों का प्रचार करने वाली सांसद के खिलाफ कहीं से कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसा कहने का साहस प्रज्ञा ठाकुर सरीखी सांसद को कहां से मिलता है, यह एक बड़ा प्रश्न होना चाहिए। वह भी तब जब एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर दिसंबर 2020 में कोरोना लक्षणों के इलाज के लिए एम्स में भर्ती हुई थीं। सवाल यहां सिर्फ प्रज्ञा ठाकुर का नहीं है, भाजपा में ऐसे ज्ञानचक्षु खोलने वाले नगीने अनगिनत हैं, जो पूरे बदन में गोबर का लेप लगा कर कोरोना गो कोरोना गो का जाप करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में गोबर लेप की होड़ लगी हुई है। उत्तर प्रदेश में भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने तो बकायदा ट्रायल भी दिखाया कि किस तरह से गोमूत्र को एक गिलास ठंडे पानी के साथ पीने से कोरोना खत्म हो जाता है।

ये सारे लोग दरअसल देश को अंधकार-युग में ढकेलने वाली विचारधारा और राजनीति से जुड़े हुए हैं। ये कोरोना आपदा में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोगन को चरितार्थ करते हुए, इस आपदा को अवसर में तब्दील कर रहे हैं। वे जिस विचारधारा में विश्वास रखते हैं, उसका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इससे नागरिकों की जान जोखिम में पड़े इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे आगे भी इसी तरह से बयानों के जरिए समाज को पीछे ढकेलने की कोशिश करेंगे। तभी केंद्र की मोदी सरकार गाय-गोबर-गोमूत्र पर शोध के लिए खज़ाने खोल देती है।  

योग पर कारोबार करने वाले रामदेव भी इसीलिए ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटकने वाले भारतीयों का माखौल उड़ाते हुए हंसते हुए कहते हैं, तुम क्यों ऑक्सीजन के पीछे पड़े हुए हो पगले, बावले, भगवान ने तुम्हें दो-दो ऑक्सीजन सिलेंडर दिये हैं—(नथुने) और वह अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं। मानो लाखों भारतीय नागरिक मर्जी से मर रहे हैं।

इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोरोना पर जो ज्ञान दिया उससे लगता है कि उन्हें इन लाखों मौतों की तो चिंता नहीं, लेकिन पालघर में दो संन्यासियों की हत्या पर खूब आंसू बहाते हुए जो करते हैं—वह शुद्ध रूप से संघी मानसिकता की पराकाष्ठा है। कोरोना से मरने वालों पर कहते हैं---जो चले गये वे मुक्त हो गये।

यह मुक्ति कितनों को मुबारक कहेंगे भागवत, लेकिन कितनी ओछी और घिनौनी हो सकती है सोच—इसकी ज़रूर मिसाल पेश की। एक और अहम बात उन्होंने कही, जिससे पता चलता है कि उनके भारतीय नागरिकों में हम भारतीय महिलाएं दर्ज ही नहीं होतीं। उन्होंने कहा, भारत का 130 करोड़ का समाज,  भारत माता का पुत्र है। यानी भारत में औरतें वास ही नहीं करती। ये सब 2021 में बोल रहे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर में जब भारत लाशों को सम्मानजनक विदाई देने में तक में पूरी तरह से विफल राष्ट्र के रूप में अंतर्ऱाष्ट्रीय मंच पर भर्त्सना का शिकार हो रहा है, ऐसे में डैमेज कंट्रोल कर रहे हैं। लाशों में पॉजिटिव-पॉजिटिव खोज रहे हैं। यही है उनका भारत प्रेम।  

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

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