NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कोविड-19 : गंभीर तौर पर बीमार लोगों के लिए कुछ उम्मीद लाया है डेक्सामेथासोन
डेक्सामेथासोन, जो कि बेहद मामूली दाम में व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल में आने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा है, उसके परीक्षण में पाया गया है कि जिन मरीजों को वेंटीलेटर पर रखा गया था उनमें से एक तिहाई और जो मरीज़ ऑक्सीजन के सहारे थे, उनमें पाँचवें हिस्से तक कम मौतें देखने को मिली हैं।
प्रबीर पुरकायस्थ
20 Jun 2020
कोविड-19

आखिरकार कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल रही है। अब हमारे हाथ में एक ऐसी दवा है जो कोविड-19 की मारक क्षमता को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। जहाँ इस दवा ने गंभीर रूप से बीमार मरीजों में इसके घातक प्रभाव को तकरीबन एक तिहाई तक कम करके रख दिया है, लेकिन उन लोगों पर इसका असर कम देखने को मिला है जो गंभीर तौर पर बीमार नहीं थे। और सबसे अच्छी बात यह है कि यह डेक्सामेथासोन नामक यह दवा पेटेंट के दायरे से बाहर है, और व्यापक पैमाने पर इसका इस्तेमाल आम बात है और यह एक बेहद सस्ता कॉर्टिकोस्टेरॉइड है। यह फेफड़े और अन्य अंगों में दाहकता को कम करने के काम आता है, जोकि कोरोनावायरस से गंभीर रूप से बीमार लोगों की मौत की सबसे बड़ी वजहों में से एक रही है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिकवरी परीक्षण में एनएचएस अस्पतालों के मरीजों को भारी संख्या में सूचीबद्ध किया गया है, और उनके बीच में कई दवाओं के परीक्षण के जरिये इस वायरस पर उन सभी की प्रभावोत्पादकता को परखने की कोशिशें जारी हैं। इस मामले में उन्होंने 2,104 मरीजों को बिना किसी अनुक्रम के चुना जिन्हें डेक्सामेथासोन दवा दी गई थी, और उनकी तुलना अन्य 4,321 रोगियों से की गई, जो परीक्षण के सामान्य देखभाल शाखा में रखे गये थे।

जिन मरीजों को सामान्य देखभाल वाली शाखा में रखा गया था उनमें से वेंटीलेटर पर रखे गए मरीजों में 28-दिवसीय मृत्यु दर 41% तक पाई गई थी, वहीँ यह दर 25% उन रोगियों में देखने को मिली है जिन्हें  ऑक्सीजन के सहारे रखा गया था, और सबसे कम 13% उन लोगों के बीच देखने को मिली है जिन्हें बाहर से किसी भी श्वसन संबंधी सहायता की जरूरत नहीं थी। जो मरीज वेंटीलेटर के सहारे थे, उनमें डेक्सामेथासोन ने एक तिहाई और जिन मरीजों को ऑक्सीजन पर रखा गया था उनमें एक-पाँचवे हिस्से तक की मौतों में कमी देखने को मिली है। जबकि जिन मरीजों को किसी भी प्रकार की वाह्य श्वसन मशीनरी का सहारा नहीं लेना पड़ रहा था, उनके बीच इस दवा का कोई फायदा देखने को नहीं मिला।

अतिसक्रिय इम्यून सिस्टम की दाहकता को रोकने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड को आम तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता रहा है। समस्या सिर्फ यह है कि स्टेरॉयड जहाँ दाहकता को बढने से रोकने का काम करते हैं वहीँ साथ ही साथ इसकी वजह से वायरस और उसके साथ आने वाले अन्य बैक्टीरिया के संक्रमणों से लड़ने में यह मरीजों में मौजूद शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर बैठता है। इसलिए अभी तक यह तर्क पेश किया जा रहा था की कोविड-19 के मरीजों के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल नुकसानदेह साबित हो सकता है। स्टेरॉयड के इस्तेमाल में मुख्य चुनौती इस बात को लेकर बनी हुई है कि खुराक की मात्रा को इतनी मात्रा पर रखा जाए कि हम शरीर की अतिसक्रिय इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को जहाँ एक तरफ कम से कम रख पाने में कामयाब हो सकें तो इसके साथ ही उसकी मात्रा इतनी कम की जा सके कि इसकी वजह से इम्यून सिस्टम पूरी तरह से ही न बैठ जाए, वरना वायरस और बैक्टीरिया को खुलकर खेलने का मौका मिल सकता है। यदि यह संभव है तो फिर हम बिना रोगी को नुकसान पहुंचाए इम्यून सिस्टम की दाहकता को प्रभावी तौर पर नियंत्रित कर सकने में सफलता हासिल कर सकते हैं।

शरीर के अचानक से बड़ी तेजी से इम्यून सिस्टम की ओर से प्रतिक्रिया के चलते गंभीर दाहकता को ही साइटोकिन तूफान का नाम दिया गया है, जोकि आगे चलकर खुद मौत की एक बड़ी वजह साबित हो सकती है। 1918 में आई फ्लू महामारी के दौरान भी मौतों की मुख्य वजह साइटोकिन तूफान ही था। कोविड-19 के मरीजों में भी यह मौत की एक मुख्य वजह बनी हुई है।

शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम में संक्रमण से लड़ने के लिए कई प्रतिक्रियाएं मौजूद हैं। एक कॉर्टिकोस्टेरॉइड इन सभी प्रतिक्रियाओं को कम करके शरीर के इम्यून सिस्टम को शांत रखने का काम करता है; या जैसा कि आईआईएसईआर पुणे के प्रोफेसर सत्यजीत रथ ने न्यूज़क्लिक को इस बारे में विस्तार से बताया है कि किस प्रकार से यह एक हथौड़े की तरह काम करता है। हमारे पास एक और दवा जीनटेक का टोसीलिज़ुमाब है जिससे कुछ आशा जगती है, जो कि एक इम्यून सिस्टम अवरोधक के तौर पर काम करने की क्षमता रखता है।

यह मुख्यतौर पर एक प्रमुख मार्ग को अवरुद्ध रखता है- इंटरल्यूकिन मार्ग को- लेकिन इसमें बाकी के रास्ते खुले रहते हैं। फ्रांस में इसके बेहद छोटे गैर-अनुक्रमिक परीक्षण के दौरान आशातीत सफलता भी देखने को मिली है। इसमें यह सुविधा है की चुनिन्दा तौर पर इम्यून सिस्टम के मार्ग को अवरुद्ध किया जा सकता है, जबकि इम्यून सिस्टम के बाकी के हिस्से संक्रमण पर हमले के लिए आजाद रहते हैं। टोसीलिज़ुमाब के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है और भले ही आप रोच की इकाई जीनटेक के पेटेंट के एकाधिकार की लागत को यदि इसमें नहीं जोड़ते हैं, लेकिन इस सबके बावजूद भी इसके उत्पादन में जो लागत आएगी, वह इस विकल्प को बेहद महँगा बना देती है। भारत में इसकी लागत 40,000 रूपये प्रति खुराक के हिसाब से बैठती है और किसी मरीज को इसकी कम से कम 2 खुराक दिए जाने की आवश्यकता होती है। वहीँ यदि इसकी तुलना डेक्सामेथासोन से करें तो इसके 20 गोलियों के पत्ते की कीमत चंद रूपये ही बैठती है।

जहाँ ज्यादा गंभीर मामलों में रोगी के फेफड़ों एवं अन्य अंगों पर इम्यून सिस्टम द्वारा हमले को रोकने की जरूरत पड़ती है, क्या ऐसी दवाएं भी हैं जो वायरस के विकास पर भी हमलावर हो सकें? विभिन्न क्लिनिकल ​​परीक्षणों से अब यह पूरे तौर पर स्पष्ट हो चुका है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा इस बीमारी के लिए असरकारक नहीं है और इसके इस्तेमाल के अपने गंभीर दुष्परिणाम हैं। गिलियड के रेम्डेसिविर से कुछ सकारात्मक प्रभाव नजर आते हैं, बशर्ते कि इसे रोग की शुरुआत में ही मरीजों को मुहैय्या करा दिया जाए जो गंभीर रूप से बीमारी की हालत में न हों। रैंडमाइज्ड डबल ब्लाइंड परीक्षण (जिसमें शोधकर्ता और मरीज दोनों ही परिणाम को लकर अँधेरे में होते हैं) में गिलियड ने एक प्रेस विज्ञप्ति में सूचित किया है कि इसके सेवन से कोरोनावायरस मरीजों के अस्पताल में रहने के दिनों में 4 दिन की कमी देखी गई है।

अब यह भी स्पष्ट हो चुका है कि रेम्डेसिविर और दूसरे अन्य एंटी-वायरल दवाओं के परीक्षण के दौर से गुजरना तभी फायदेमंद हो सकता है अगर रोग के शुरुआती चरण में ही इसकी डोज ले ली गई हो, लेकिन जो मरीज गंभीर हालत में हैं उनपर इसका बेहद मामूली या ना के बराबर असर पड़ता है। कुछ अन्य एंटी-वायरल दवाओं के विपरीत रेमेड्सवियर एक छोटे मॉलिक्यूल दवा के तौर पर भी मौजूद है, जिसका अर्थ है यह है कि यदि पेटेंट के नाम पर मामूली फीस देनी पड़े तो इसे काफी सस्ती कीमत पर तैयार किया जा सकता है। लेकिन यहीं पर एक पेंच भी है: क्या गिलियड अपनी पेटेंट रॉयल्टी को कम करने के लिए सहमत होगा?

यदि वह सहमत नहीं होता तो क्या सरकारें, जिसमें भारतीय सरकार भी शामिल है वैसा कुछ करने की हिम्मत दिखा सकती है, जैसा कि बांग्लादेश ने कर दिखाया है- किसी भी कंपनी को गिलियड के पेटेंट को तोड़ने की अनुमति देकर? भारतीय कानून और 2001 के डब्ल्यूटीओ के दोहा घोषणा के तहत किसी भी देश को स्वास्थ्य आपातकाल या महामारी के हालात में अनिवार्य लाइसेंस जारी करने का अधिकार हासिल है। कोई भी यदि सही सोच के साथ इस पर विचार करे तो इस बात से असहमति नहीं रख सकता कि कोविड-19 इन दोनों का ही प्रतिनिधित्व करता है। एकमात्र प्रश्न यही बना रह जाता है कि क्या ऐसा करने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है या नहीं, जिससे कि प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को इसे सस्ते दरों पर उपलब्ध कराया जा सके।

कोई यह प्रश्न कर सकता है कि चार दिनों की कमी लाकर हमें क्या फायदा होने जा रहा है जिसके चलते किसी पेटेंट को तोडना जायज है। इसका जो जवाब प्रोफेसर रथ ने दिया था वो ये है कि यदि इससे संक्रमण 4 दिनों तक के लिए भी कम किया जा सके तो इससे मरीज के संक्रमण में रहने की अवधि में अंतर लाया जा सकता है, और इसकी वजह से वायरस के संचरण में कमी हो जाती है। यदि वायरस का संचरण कम हुआ तो इसका साफ़ मतलब हुआ कि महामारी के प्रसार को कम करने में सफलता प्राप्त कर ली गई है, जिसे  सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए।

इसलिए दवा के मोर्चे पर अभी भी कुछ उम्मीद बनी हुई है, जिसमें गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए डेक्सामेथासोन और जो लोग कम बीमार हैं उनके लिए रेमेडिसविर दवा से उपचार का विकल्प खुल गया है। दोनों ही छोटे मॉलिक्यूल हैं और जीवविज्ञान से इनका संबंध न होने की वजह से इनके उत्पादन को तेजी से बढाया जा सकता है। डेक्सामेथासोन पेटेंट के दायरे से बाहर है और इसलिए उसके निर्माण में कोई दिक्कत नहीं है। रेमेडिसविर के लिए हमें यह लड़ाई हाथ में लेनी होगी ताकि इसे व्यापक तौर पर सर्वसुलभ कराया जा सके।

हमें इस बात को अभी देखना होगा कि वैक्सीन के मोर्चे पर कितनी प्रगति हो पाई है। अपनेआप में यह अगली लड़ाई है जिसमें ट्रम्प पहले से ही इस बात के संकेत दिए जा रहे हैं कि ‘अमेरिका को एक बार फिर से महान बनाने’ के लिए वैक्सीन उनका नया हथियार साबित होने जा रहा है। आज मुख्य मुद्दा यह सुनिश्चित करने को लेकर है कि कोरोनावायरस की दवा को लेकर चल रही लड़ाई का हश्र कहीं एड्स की दवा को लेकर चली मारपीट के दोहराव के तौर पर ही न बनकर रह जाए। इसके लिए बिग फार्मा कम्पनियों और उनकी संरक्षक सरकारों से संजीदा व्यवहार अमल में लाने की दरकार है।

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Covid-19: Dexamethasone Provides Some Hope for Severely ill

Dexamethasone
COVID
Coronavirus
COVID-19

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • varun gandhi
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन पर वरुण गांधी ने दी केंद्र सरकार को हिदायत, शेयर किया अटल बिहारी वाजपेयी का वीडियो
    14 Oct 2021
    वरुण गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक भाषण को शेयर करते हुए किसानों का समर्थन किया है और अपनी सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। 
  • muslim
    वसी मनाज़िर
    कैसे भारत मुसलमानों को मनमाने तरीके से अनिश्चित काल के लिए जेलों में कैद कर रहा है?
    14 Oct 2021
    यह कोई अकेले आर्यन खान के साथ नहीं हो रहा है। ऐसा अलग-अलग शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले मुसलमानों के साथ हो रहा है, जो अपनी ताकत, विशेषाधिकार और शिक्षा या उसके बगैर भी जेलों में…
  • Dr. Udit Raj
    सबरंग इंडिया
    Hate watch: बीजेपी नेता ने डॉ. उदित राज के बारे में जातिवादी, दलित विरोधी पोस्ट किए
    14 Oct 2021
    पूर्व सांसद का कहना है कि वह जल्द ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे
  • delhi pollution
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जानलेवा दिल्ली की हवा, 75 प्रतिशत बच्चों को सांस लेने में परेशानी
    14 Oct 2021
    413 बच्चों पर ये स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया जिसमें से 75.4% ने सांस फूलने की शिकायत की, 24.2% ने आंखों में खुजली, 22.3% बच्चों ने नियमित तौर पर छींकने या नाक बहने की शिकायत की और 20.9% बच्चों ने…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    मोदी लहर से मोदी कहर तक…
    14 Oct 2021
    “नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद हम पर है... लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उनके नाम से ही हमें वोट मिलेगा।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License