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यूपी: कोरोना से बिगड़ते हालात के बीच सरकारी दावे और ज़मीनी सच्चाई में मेल नहीं!
मुख्यमंत्री के दावे के उलट राज्य में चारों ओर ऑक्सीजन, दवाइयों और अस्पताल में बेड के लिए हाहाकार मचा हुआ है। रीफ़िल सेंटरों के बाहर सिलिंडर लिए लोगों की लंबी क़तार अभी भी देखी जा सकती है। विपक्ष के अलावा खुद सत्ताधारी पार्टी के मंत्री, विधायक, सांसद बार-बार सरकार को चेता रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक रेंगती नहीं नज़र आ रही।
सोनिया यादव
03 May 2021
यूपी: कोरोना से बिगड़ते हालात के बीच सरकारी दावे और ज़मीनी सच्चाई में मेल नहीं!
Image courtesy : Hindustan Times

"राज्य के किसी भी सरकारी या ग़ैर सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन या बेड की कोई कमी नहीं है। कुछ लोग कालाबाज़ारी कर रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जा रही है।"

ये बयान देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का है। सीएम योगी ने मीडिया हाउस के संपादकों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग में कुछ दिनों पहले ही यह दावा किया था कि राज्य में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हालांकि राज्य में मुख्यमंत्री के दावे के उलट चारों ओर ऑक्सीजन, दवाइयों और अस्पताल में बेड के लिए हाहाकार मचा हुआ है। रीफ़िल सेंटरों के बाहर सिलिंडर लिए लोगों की क़तार अभी भी देखी जा सकती है। विपक्ष तो सरकार से सवाल कर ही रहा है साथ ही खुद सत्ताधारी पार्टी के लोग और सरकार में बैठे मंत्री भी ट्वीट कर मदद की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन पर लापरवाही और नाकामी छुपाने जैसे गंभीर आरोप

राजधानी लखनऊ समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी, सीएम योगी का शहर गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, हर तरफ लाशें जल रही हैं। लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। कई जगह तो प्रशासन पर लापरवाही और नाकामी पर पर्दा डालने जैसे गंभीर आरोप भी लग रहे हैं। लखनऊ के बैकुंठ धाम विवाद के बाद गोरखपुर में नगर निगम की तरफ से एक श्मशान घाट के बाहर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें लिखा था कि कि शवों या चिताओं की फोटो लेना दंडनीय अपराध है। इस पोस्टर की फोटो सोशल मीडिया पर आई और लोगों ने इसे मौतों की संख्या छुपाने की टैक्टिक्स बताया। वैसे भी केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे वक्त से ये आरोप लग रहे हैं कि वो मौतों का असल आंकड़ा नहीं बता रहे हैं। श्मशानों, कब्रिस्तानों से आ रही तस्वीरें उन आंकड़ों से मेल नहीं खा रही हैं जो सरकार जारी कर रही है।

हेमंत कुमार नाम के यूज़र ने ट्विटर पर लिखा, “सरकारें और नेता संवेदनहीन हो चुके हैं, अपनी नाकामी को सुधारने के बजाय अब उन्हें छिपाने के इंतजाम कर रहे हैं, गोरखपुर में श्मशान घाट पर ये सूचना लगा दी गई है लाशों को जलाने की खबर अब आप तक नहीं पहुंचेगी, ये दंडनीय अपराध हो गया है।”

सरकारें और नेता संवेदनहीन हो चुके हैं, अपनी नाकामी को सुधारने के बजाय अब उन्हें छिपाने के इंतजाम कर रहे हैं, गोरखपुर में शमशान घाट पर ये सूचना लगा दी गई है लाशों को जलाने की खबर अब आप तक नहीं पहुंचेगी, ये दंडनीय अपराध हो गया है pic.twitter.com/VxMCTJ62KR

— Hemant Kumar (@hemantkumarnews) May 2, 2021

मौत का सरकारी आंकड़ा अधूरा ही लगता है!

इस पोस्टर को लेकर यूपी सरकार की खूब किरकिरी हई, जिसके बाद पोस्टर हटा लिया गया। नगर निगम ने न पोस्टर लगाने की वजह साफ बताई थी और न ही पोस्टर को हटाने की वजह बताई है। हालांकि माना जा रहा है कि पोस्टर की वजह से सरकार की हुई आलोचना के चलते उसे हटाया गया है। श्मशान घाट के आस-पास रह रहे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी जैसे बड़े शहरों के लोगों का कहना है कि जिन श्मशान घाटों में अमूमन दिन की 20 लाशें पहुंचती थीं, वहां हर दिन सौ के पार लाशें आ रही हैं। यहां 24 घंटे चिताएं जल रही हैं। किसी शहर के श्मशान में अगर दिन की सौ लाशें पहुंच रही हैं तो ऐसे में पूरे राज्य में 300 मौतों का सरकारी आंकड़ा अधूरा ही लगता है।

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट, हरिश्चंद्र घाट पर शवों की लंबी कतारें दिनभर लगी रहती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक वाराणसी के ज़िला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर दिन जो आंकड़े जारी कर रहे हैं, श्मशान घाटों पर होने वाले दाह संस्कारों और अस्पतालों में होने वाली मौतों से वह कहीं मेल नहीं खा रहे।

वाराणसी में लगभग सभी छोटे-बड़े, सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों को कोविड अस्पताल बना दिया गया है लेकिन अस्पतालों तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस तक के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। अमूमन आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट एक दिन में आ जाती है लेकिन कई मरीज के परिजनों का कहना है कि सिस्टम अपडेट के नाम पर यहां रिपोर्ट आने में छह से सात दिन का समय लग रहा है। सारे हेल्पलाइन नंबर्स हेल्पलेस साबित हो रहे हैं, पूरी की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ही भगवान भरोसे है।

सरकार क्या कर रही है?

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते दिन के लॉकडाउन को दो दिनों के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब छह मई मतलब गुरुवार सुबह सात बजे तक बंदी रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम-9 के साथ हुई कोरोना समीक्षा बैठक में कोविड-19 को लेकर प्रदेश के सभी 97 हजार राजस्व गांव में  4 मई से विशेष कोरोना स्क्रीनिंग अभियान चलाए जाने का किया।  

इस दौरान खांसी बुखार और जुकाम जैसे लक्षणों वाले लोगों का टेस्ट कर तत्काल उन्हें आइसोलेशन में भेजा जाएगा। घर में आइसोलेशन की व्यवस्था न होने पर सरकार इसकी व्यवस्था करेगी। बाहर से पंचायत चुनाव में सिर्फ वोट डालने आए लोगों पर कड़ी नजर रहेगी। इसके अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जरूरी सुविधाओं से युक्त अस्पताल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी दावे और ज़मीनी सच्चाई में कोई साम्य नहीं !

योगी सरकार का दावा है कि राज्य के पास पर्याप्त संसाधन हैं और किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। प्रदेश में महामारी को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इस दावे और ज़मीनी सच्चाई में कोई साम्य नहीं है और इसकी वजह सीएम की महानायक की छवि है जो कुछ ख़ास लोगों गढ़ दी गई है, अब उसे ही बचाने का प्रयास हो रहा है। सीएम योगी को ‘पॉवरफुल फायर ब्रांड’ नेता के तौर पर पेश किया जाता है ऐसे में वो खुद को भला ‘हेल्पलेस’ कैसे दिखा सकते हैं।

गौरतलब है कि पिछले क़रीब तीन-चार हफ़्तों से कोरोना संक्रमण से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में हर तरफ़ खस्ता स्वास्थ्य व्यवस्था और जरूरी सुविधाओं के अकाल की चर्चा है। कोरोना संक्रमित लोगों के परिजन दर-दर भटक रहे हैं, सोशल मीडिया के ज़रिए एक-दूसरे से मदद मांग रहे हैं और मदद के अभाव में कई मरीज़ दम तोड़ रहे हैं। कोरोना के काल में जो कुछ भी हो रहा है आम आदमी को न सिर्फ़ दिख रहा है, बल्कि हर व्यक्ति उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से महसूस भी कर रहा है लेकिन उसे भी झुठलाने की कोशिश की जा रही है। यूपी में कोई और नहीं बल्कि बीजेपी के अपनी ही पार्टी के मंत्री, विधायक, सांसद बार-बार सरकार को चेता रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक रेंगती नहीं नज़र आ रही।

कुछ दिनों पहले ही लखनऊ के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने एक वीडियो संदेश के ज़रिए अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और लोगों के परेशान होने का ज़िक्र किया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लाइन में लगे लोगों को ऑक्सीजन गैस उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो मैं धरने पर बैठ जाऊंगा। कौशल किशोर इससे पहले भी अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन न मिलने की शिकायत कर चुके थे। खुद कौशल किशोर के बड़े भाई की भी कोरोना संक्रमण की वजह से मृत्यु हो गई है।

कृपया घरों में आइसोलेट लोगों को भी गैस रिफलिंग प्लांट पर ऑक्सीजन गैस देने का आदेश देने की कृपा करें आप की महान कृपा होगी ताकि घरों में आइसोलेट लोगों की जान बचाई जा सके।@narendramodi @PMOIndia @rajnathsingh @myogiadityanath @AdminLKO

— Kaushal Kishore (@mp_kaushal) April 24, 2021

सरकारी आंकड़ों की माने तो प्रदेशभर में 2 मई, रविवार को 30,983 नए केस मिले। वहीं ठीक होने वालों की संख्या 36,650 रही। इसके अलावा 290 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 13,162 मरीजों की मौत हो चुकी है। ध्यान रहे कि ये वो तस्वीर है जो सरकार हमें दिखा रही है वास्तव में ये संख्या कितनी ज्यादा है शायद हम और आप केवल अंदाज़ा ही लगा सकते हैं।

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