NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
संकट: दिल्ली से लखनऊ ही नहीं लखनऊ से आगे घर जाने के लिए भी की गई वसूली!
लखनऊ से गोरखपुर के लिए 300 रुपये किराया मांगा गया। सड़क के किनारे अपने बच्चे के साथ बैठी एक महिला ने बताया वह दिल्ली से 600 रुपये किराया देकर लखनऊ आईं। लेकिन यहाँ चार घंटे इंतज़ार के बाद भी आगे की बस नहीं मिली।
असद रिज़वी
30 Mar 2020
lockdown

दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर भूखे-प्यासे पैदल चलकर अपने घरों को आते मज़दूरों की तस्वीरें, जब मीडिया में दिखीं तब उत्तर प्रदेश सरकर की नींद खुली और उसको अपनी ज़िम्मेदारी का कुछ एहसास हुआ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को आदेश दिया कि दिल्ली से मज़दूरों को प्रदेश में वापस लाने के लिए बसों का प्रबंध किया जाये। दिल्ली और दूसरे कई शहरो में बसें पहुँच भी गईं। लेकिन प्रबंधन की कमी का ये आलम रहा कि मज़दूरों को न केवल ठूंसकर बसों में बैठाया गया, बल्कि उनसे हज़ारों में किराया भी वसूला गया।

मज़दूरों ने आरोप लगाया की उनसे न केवल टिकट के साथ भारी किराया लिया गया, बल्कि मजबूरी का फ़ायदा उठाते हए बिना टिकट के भी वसूली भी की गई। जबकि कहा यह जा रहा था की नि:शुल्क बस सेवा शुरू की गई है।

कई मज़दूरों ने आरोप लगाया की किराया नहीं होने पर उनको बसों से उतार दिया गया और यही हाल निजी बसों का था उनमें भी मनमाना किराया वसूला गया।

सभी मज़दूरों से भरी बसों को लखनऊ लाया जा रहा था। जहाँ से दूसरी बसों में बैठा कर उनको गोण्डा, बस्ती, गोरखपुर, श्रावस्ती, बहराइच, बाराबंकी अयोध्या और अकबरपुर आदि भेजा जा था। राजधानी लखनऊ में भी यात्रियों ने आरोप लगाया की उन से किराया वसूला गया।

जब एक लोकल चैनल ने किराया वसूली की ख़बर सोशल मीडिया के मध्यम से लाइव (सीधा प्रसारण) की तो परिवहन निगम और शासन हरकत में आया। बस कंडक्टरो और चालकों को संदेश भेजा गया कि यात्रियों से किसी तरह का किराया नहीं लिया जाएगा।

मेहनतकश जो रोज़ कमाते-खाते हैं उनका कहना है की अभी तो हम होली के बाद घर से वापस लौटे थे। सभी जमा पैसे ख़र्च हो चुके हैं। ऐसे में 250-300 रुपये किराया देना भी मुश्किल हो रहा है और उनसे इससे भी ज़्यादा किराया वसूला गया। किराया वसूली के अपने आरोप को सिद्ध करने के लिए कई मज़दूरों ने टिकट भी मीडिया को दिखाए।

IMG_6935.jpg

IMG_6936.jpg

एक मेहनतकश ने बताया की वह आठ लोगों के साथ 600 रुपये प्रति यात्री किराया देकर दिल्ली से लखनऊ आया। वह कहते हैं कि हम सब लखनऊ से बस्ती जाने के लिए निजी बस में बैठे थे। निजी बस में भी हमसें बस्ती तक का 600 रुपये किराया मांगा गया। इसलिए वह निजी बस से वापस आकर परिवहन निगम की बस का इंतज़ार कर रहे हैं। शायद उसमें कुछ कम पैसा लगेगा।

यात्रियों की मदद करने आये एक स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता ने बताया की उनको भी सूचना मिली है कि बसों में वसूली की जा रही है। स्वयंसेवी संस्था के एक कार्यकर्ता कहते हैं कि यहाँ मौजूद यात्रियों ने आरोप लगाया कि आलमबाग़ से बसों में यात्रियों को ले जाया जा रहा है। लेकिन किराया नहीं देने पर उनको बीच में कहीं उतार दिया जाता है। जहाँ से उनको वापस पैदल फिर नि:शुल्क बस की तलाश में कई किलोमीटर पैदल चल वापस आना पड़ता है।

यात्रियों का आरोप है की उनसे लखनऊ से गोरखपुर के लिए 300 रुपये किराया मांगा जा रहा है। सड़क के किनारे अपने बच्चे के साथ बैठी एक महिला ने बताया वह दिल्ली से 600 रुपये किराया देकर लखनऊ आई। लेकिन यहाँ चार घंटे इंतज़ार के बाद भी आगे की बस नहीं मिली है। कई यात्रियों का कहना था कि दिल्ली में भी उनको बस के लिए काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। सही प्रबंध नहीं होने की वजह से कभी आनंद विहार और लाल कुआँ बस अड्डों पर उनको घंटो तक दौड़ना पड़ा।

07.jpg

बता दें कि बाहर से आ रही लगभग सभी बसों को रविवार लखनऊ के आलमबाग़ इलाक़े में नहरिया चौराहे के निकट रोका गया। जहाँ से यात्रियों को दूसरे ज़िलों की बसें मिलना थी। हालाँकि वहाँ भारी पुलिस बल भी तैनात था, लेकिन यात्रियों की इतनी भीड़ थी की लॉकडाउन पूरी तरह विफल नज़र रहा था। 

सोशल डिस्टेंसिंग भी बिल्कुल नहीं थी। सैकड़ों यात्री एक बस से उतर के दूसरी के इंतज़ार में एक साथ खड़े या बैठे थे। कुछ यात्री मास्क लगाए थे और कुछ ने मुँह पर केवल रुमाल बाँध रखा था। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थे जिन्होंने सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं पहना था। बसों में भी सीटों से बहुत अधिक लोग बैठे थे। यही नहीं बसों की छत पर भी यात्री सवार थे।

जहाँ पर बसों को रोका जा रहा था वहाँ पर कोरोना की जाँच का कोई प्रबंध नहीं था। एक पुलिसकर्मी ने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि चारों तरफ़ अफ़रातफ़री का माहौल है। भीड़ को क़ाबू करने के सारे प्रयास पूरी तरह विफल हो गए। पुलिसकर्मी स्वयंसेवी से लेकर बस कंडक्टरों तक का काम करते दिखे।

किराया वसूली के बारे में जब बस कंडक्टरों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनको नि:शुल्क सेवा का आदेश अधिकारियों द्वारा देर से भेजा गया। अब किराया नहीं लिया जाएगा। हालाँकि निजी बसों के बारे में बोलने के लिए कोई मौजूद नहीं था। इसी के साथ कई स्वयंसेवी संस्थाए भी सक्रिय है, जो यात्रियों की भीड़ में ख़ाने का सामान पानी और चाय आदि मुहैया करा रही हैं।

उल्लेखनीय है लखनऊ आने वाले ज़्यादातर लोग दिल्ली और उसके आसपास के शहरो की फ़ैक्टरीयों में काम करने वाले हैं। जिनको गोरखपुर, बस्ती, श्रावस्ती, बहराइच, जौनपुर, सुल्तानपुर,  प्रयागराज और वाराणसी आदि की तरफ़ जाना था। लखनऊ के पड़ोसी ज़िले कानपुर और उन्नाव में काम करने वाले भी अपने घरों को जाने के लिए लखनऊ आए। जिनका कहना था कि उन्नाव लखनऊ की 60 किलोमटर की दूरी के लिए भी उनसे किराया लिया गया।

बता दें कि कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश परिवहन की बस सेवा भी बंद थी। इनको दूसरी जगहों पर फँसे मेहनतकशों को वापस लाने के लिए विशेषकर शुरू किया गया। इस काम में निजी बसों को भी लगाया गया। 

जब किराया वसूली और निजी बसों के बारे में उत्तर प्रदेश परिवहन के महाप्रबंधक राज शेख़र से फ़ोन पर सम्पर्क करना चाहा तो उनका फ़ोन नहीं उठा। इससे पहले राज शेख़र ने सभी ज़िलों के प्रशासन को एक पत्र लिखकर कहा था की चेकिंग के नाम पर बसों को नहीं रोका जाये, ताकि यात्री सीधे अपने घरों तक पहुँच सकें।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए प्रमुख सचिव सूचना और अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा क किराया वसूली को लेकर शासन को शिकायतें मिली थीं। जिनको अब दूर कर दिया गया है और अब किसी बस में किराया नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा बस सेवा पहले भी निशुल्क थी और अगर कोई किराया लेता है तो उस के विरुद्ध सख़्त करवाई की जाएगी। इसी के साथ कहा कि अन्य राज्यों से अब और लोगों को लाना संभव नहीं है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मेहनतकश कामगार महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा तमाम प्रदेशों में काम करते हैं।

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Lockdown
India Lockdown
Migrant workers
Delhi
Arvind Kejriwal
UttarPradesh
Yogi Adityanath
yogi sarkar
BJP

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    शहरों की बसावट पर सोचेंगे तो बुल्डोज़र सरकार की लोककल्याण विरोधी मंशा पर चलाने का मन करेगा!
    25 Apr 2022
    दिल्ली में 1797 अवैध कॉलोनियां हैं। इसमें सैनिक फार्म, छतरपुर, वसंत कुंज, सैदुलाजब जैसे 69 ऐसे इलाके भी हैं, जो अवैध हैं, जहां अच्छी खासी रसूखदार और अमीर लोगों की आबादी रहती है। क्या सरकार इन पर…
  • रश्मि सहगल
    RTI क़ानून, हिंदू-राष्ट्र और मनरेगा पर क्या कहती हैं अरुणा रॉय? 
    25 Apr 2022
    “मौजूदा सरकार संसद के ज़रिये ज़बरदस्त संशोधन करते हुए RTI क़ानून पर सीधा हमला करने में सफल रही है। इससे यह क़ानून कमज़ोर हुआ है।”
  • मुकुंद झा
    जहांगीरपुरी: दोनों समुदायों ने निकाली तिरंगा यात्रा, दिया शांति और सौहार्द का संदेश!
    25 Apr 2022
    “आज हम यही विश्वास पुनः दिलाने निकले हैं कि हम फिर से ईद और नवरात्रे, दीवाली, होली और मोहर्रम एक साथ मनाएंगे।"
  • रवि शंकर दुबे
    कांग्रेस और प्रशांत किशोर... क्या सोचते हैं राजनीति के जानकार?
    25 Apr 2022
    कांग्रेस को उसकी पुरानी पहचान दिलाने के लिए प्रशांत किशोर को पार्टी में कोई पद दिया जा सकता है। इसको लेकर एक्सपर्ट्स क्या सोचते हैं।
  • विजय विनीत
    ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?
    25 Apr 2022
    "चंदौली के किसान डबल इंजन की सरकार के "वोकल फॉर लोकल" के नारे में फंसकर बर्बाद हो गए। अब तो यही लगता है कि हमारे पीएम सिर्फ झूठ बोलते हैं। हम बर्बाद हो चुके हैं और वो दुनिया भर में हमारी खुशहाली का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License