NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
एप्रिल फूल बनाया, हमको गुस्सा नहीं आया
लोगों ने भी बेवकूफ बनने के लिए एक दिन चुना हुआ था पर अब लोग किसी भी दिन या फिर हर दिन बेवकूफ बन सकते हैं। अब न तो बेवकूफ बनने वालों के लिए और न ही बेवकूफ बनाने वालों के लिए कोई विशेष दिन मुकर्रर है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
03 Apr 2022
april fools
फ़ोटो: गेट्टी/थिंकस्टॉक

अभी परसों ही एक अप्रैल गुजरा है। एप्रिल फूल बनाने का दिन। अभी कुछ साल पहले तक एक अप्रैल के दिन लोगों को बेवकूफ बनाने का काफी प्रचलन था। पर अब लगता है लोगों ने यह एक अप्रैल को फूल बनाने का चक्कर अब छोड़ ही दिया है। अब पूरा दिन गुजर जाता है पर शायद ही कोई बेवकूफ बनाने आता है।

एक्चुअली, पहले लोगों ने बेवकूफ बनाने के लिए एक दिन निश्चित किया हुआ था। अब आप किसी भी दिन बेवकूफ बना सकते हैं। लोगों ने भी बेवकूफ बनने के लिए एक दिन चुना हुआ था पर अब लोग किसी भी दिन या फिर हर दिन बेवकूफ बन सकते हैं। अब न तो बेवकूफ बनने वालों के लिए और न ही बेवकूफ बनाने वालों के लिए कोई विशेष दिन मुकर्रर है।

अभी इसी एक अप्रैल की ही बात है। मैंने एक पकोड़े तलने वाले को बताया कि भाई, कमर्शियल गैस का सिलेंडर ढाई सौ रुपए महंगा हो गया है। वह बोला, 'भाई साहब, क्यों गरीब का एप्रिल फूल बना रहे हो। क्या मैं ही मिला हूं सुबह-सुबह बेवकूफ बनाने के लिए'। हालांकि उस समय दोपहर हो रही थी पर उसकी सुबह तभी हुई थी। उसने अपना ठेला उसी समय लगाया था।

शाम को मैं फिर उस पकोड़े वाले के ठेले के पास से गुजरा। वह बोला, 'बाऊजी, आप ठीक ही कह रहे थे। कामर्शियल गैस सिलेंडर वास्तव में ही ढाई सौ रुपए महंगा हो गया है'। वह रुआंसा सा हो रहा था।

'आपने तो सुबह ही कहा था परन्तु मुझे ही लगा कि आप मेरा एप्रिल फूल बना रहे हैं। पहले भी मैं तब एप्रिल फूल बना था जब सरकार जी ने नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाने की कहानी सुनाई थी। मैंने भी गंदे नाले के किनारे ठेला लगा लिया था और उसमें पाइप लगा पकोड़े तलने की कोशिश की थी। हजार रुपए खर्च हो गए थे उस ताम झाम में और लोगों ने मजाक उड़ाया था वह अलग'। फिर वह गहरी सांस लेकर बोला, 'सरकार तो रोज ही एप्रिल फूल बना रही है, कम से कम एक अप्रैल को तो रहने देती। पर क्या करें, इन एप्रिल फूल बनाने वालों की ही सरकार बनानी पड़ रही है। कोई और है भी तो नहीं सरकार जी बनने के लिए'।

'अब तुम मेरा एप्रिल फूल बना रहे हो', मैंने कहा। वह कुछ समझा नहीं। मैंने कहा, 'बहुत सारे लोग तब भी सरकार जी बन गए जब वे कहीं भी नहीं थे। चंद्रशेखर, गुजराल और देवगौड़ा की बात तो छोड़ो, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह भी तब सरकार जी बने जब उनके सरकार जी बनने की उम्मीद किसी को थी ही नहीं। औरों की तो छोड़ो, तुम्हें भी अगर सरकार जी बना दिया जाए तो तुम भी गैस सिलेंडर पर एकदम से ढाई सौ रुपए तो नहीं ही बढा़ओगे। इस तरह से लोगों का एप्रिल फूल तो तुम भी नहीं बनाओगे। ऐसा करने से पहले तुम कम से कम एक बार तो जरूर ही सोचोगे। कुछ तो लोगों का भी ख्याल करोगे'। उसे सोचता छोड़ मैं आगे बढ़ गया।

वास्तव में ही हमें, जनता को तो जब मर्जी एप्रिल फूल बना दिया जाता है, उसके लिए अब एक अप्रैल की कोई जरूरत नहीं है। सरकार जी बिहार जाते हैं और वहां पहुंच सिकंदर को भी बिहार तक पहुंचा देते हैं। तारीख जो भी रही हो, एक अप्रैल तो हरगिज ही नहीं थी और बिहार के लोगों का एप्रिल फूल बना दिया जाता है। और हम, हम बस इतिहास की किताबें टटोलते रह जाते हैं।

ऐसे ही सरकार जी उत्तर प्रदेश जाते हैं। वहां पर भी मंच से गुरु नानक देव, संत कबीर और बाबा गोरखनाथ को एक साथ एक मंच पर बैठ कर चर्चा करते बता देते हैं। उस दिन भी एक अप्रैल का दिन नहीं ही था परन्तु लोगों का एप्रिल फूल बना दिया गया था। और हम गुगल पर गुरु नानक देव, संत कबीर और बाबा गोरखनाथ का काल खंड ढूंढते रह गए थे।

चलो बोल कर एप्रिल फूल बनाने की बात तो छोड़ो, यहां तो कर के भी एप्रिल फूल बनाया जा रहा है। नोटबंदी और जीएसटी से करोड़ों लोगों को एप्रिल फूल बनाया गया। पुरानी बात तो छोड़िए, अभी दो वर्ष पहले ही, पहले तो लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को गरीब बना कर अब उन्हें मुफ्त में राशन दे उनका एप्रिल फूल बनाया जा रहा है और उन पर अहसान भी लादा जा रहा है। और तो और उस अहसान की कीमत भी वसूली जा रही है।

वैसे यह राजनेताओं द्वारा जब मर्जी, जिसको मर्जी एप्रिल फूल बनाना पहले से ही चला आ रहा है। इंदिरा जी गरीबों की गरीबी दूर करने के नाम पर एप्रिल फूल बनाती रहीं और मोदी जी हिन्दूओं को बचाने के नाम पर। न तो इंदिरा गांधी गरीबी दूर कर पाईं और न ही आज हिन्दू किसी खतरे में है जिससे उनको बचाने कोई आयेगा। बस वे हमारा एप्रिल फूल बना रहे हैं और हम खुशी-खुशी बन रहे हैं।

Satire
Political satire
tirchi nazar

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • yogi and amit shah
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा को चुनावों में भगवान और मुसलमान का ही सहारा
    07 Feb 2022
    ख़बरों की इस भाग दौड़ में ख़बरों का मर्म छूट जाता है। इस हफ़्ते की कुछ ख़ास ख़बरें लेकर आए हैं अनिल जैन, जिसमें राम जी की जाति से लेकर केजरीवाल का मोदी मॉडल तक शामिल है। 
  • Lata Mangeshkar
    नम्रता जोशी
    लता मंगेशकर की उपलब्धियों का भला कभी कोई विदाई गीत बन सकता है?
    07 Feb 2022
    संगीत और फ़िल्म निर्माण में स्वर्ण युग के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक लता मंगेशकर का निधन असल में वक़्त के उस बेरहम और अटूट सिलसिले का एक दुखद संकेत है, जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन चुके…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक महीने बाद कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए  
    07 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 83,876 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.62 फ़ीसदी यानी 11 लाख 8 हज़ार 938 हो गयी है।
  • MGNREGA
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी
    07 Feb 2022
    कोविड-19 के इस भयानक दौर में यह आशा की जा रही थी कि सरकार न केवल मनरेगा को ज्यादा मजबूती देगी, बल्कि शहरी इलाकों के लिए भी कोई ऐसी ही योजना लाई जाएगी। विगत वित्तीय वर्ष के संशोधित आकलन की तुलना में…
  • Farming in UP
    सुबोध वर्मा
    उत्तर प्रदेश चुनाव : डबल इंजन की सरकार में एमएसपी से सबसे ज़्यादा वंचित हैं किसान
    07 Feb 2022
    सरकार द्वारा एमएसपी पर कुल उत्पादित गेहूं में से सिर्फ़ 15 फ़ीसदी और धान में से सिर्फ़ 32 फ़ीसदी का उपार्जन किया गया। बाकी की फ़सल को किसानों को एमएसपी से कम मूल्य पर व्यापारियों को बेचने पर मजबूर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License