NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयू ऑनलाइन एग्ज़ाम प्रकरण: क्या एबीवीपी अंतत: सरकार के कवच का काम करेगी?
कोरोना संकट का फ़ायदा उठाते हुए मोदी सरकार के निर्देश पर देशभर की बीजेपी सरकारों ने श्रम क़ानून को ख़त्म करना शुरू कर दिया और मज़दूरों में रोष व्याप्त होने लगा तो आरएसएस के मज़दूर संगठन को सामने आना पड़ा। यही आज आरएसएस के छात्र संगठन के आने की मजबूरी है। ये जनता में नीतियों की वजह से व्याप्त रोष को साम्प्रदायिक मोड़ देने और उसे भटकाने तक सामने हैं। इनका लक्ष्य सरकार के लिए कवच का काम करना है।
राजीव कुंवर
21 May 2020
Delhi University

यह देखना अपने में बहुत ही सुखद है कि दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन जिसमें नेतृत्व वाम विचारधारा का है और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जो आरएसएस से सीधा जुड़ा हुआ है - एक साथ छात्रों के हित में ऑनलाइन परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। यह वैसा ही नज़ारा है जैसा FYUP यानी चार साल के स्नातक डिग्री कोर्स के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय के आंदोलन में उभरकर सामने आया था। दोनों ही मामले में कारण शिक्षा नीति में हो रहे बदलावों से आम छात्रों पर नकारात्मक असर एवं उससे उत्पन्न उनका रोष है। तब सरकार कांग्रेस की थी, अभी सरकार भाजपा की है। प्रधानमंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री तक आरएसएस से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में आरएसएस के ही संगठन ABVP को क्यों शिक्षक संगठन के साथ हाथ मिलाकर इसका विरोध करना पड़ रहा है?

क्या इसका कारण यह है कि सरकार नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने में लगी हुई है और इससे पैदा हो रहे असंतोष को वह आरएसएस की ही अन्य एजेंसी ABVP के जरिए नियंत्रित करना चाहती है?

इसे विस्तार से समझने के लिए पहले ऑनलाइन परीक्षा में दिल्ली विश्वविद्यालय ने ऐसा क्या प्रस्तावित किया है उसे समझ लें।

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा के लिए एक निर्देश जारी किया गया है। जिसमें कोरोना संकट के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में परीक्षा को लेकर यूजीसी द्वारा जारी किए गए निर्देश का हवाला देते हुए परीक्षा के लिए बनी एक कमेटी के द्वारा लिए गए फैसले पर अमल करने को कहा गया है। कमेटी ने जुलाई के पहले सप्ताह से सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए पेन-पेपर वाली चली आ रही पद्धति से परीक्षा लेने की बात की है। अगर परिस्थिति अनुकूल नहीं हुई तो जिस दूसरे विकल्प की बात कमेटी ने की है वह है 'ओपन बुक एग्जाम'। छात्र इन दोनों का एड़ी चोटी का जोर लगाकर विरोध कर रहे हैं। विरोध का कारण आखिर क्या है ?

मिड सेमेस्टर ब्रेक और होली की छुट्टियां एक साथ होने के कारण बाहर के कई छात्र अपने घर को चले गए थे। छुट्टियां इतनी बड़ी नहीं थीं कि अपने साथ पर्याप्त पठन-सामग्री और रेफरेन्स बुक भी साथ ले जाते! इसी बीच लॉकडाउन हो जाने की वजह से वे फंस गए हैं। लॉकडाउन के समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों से अपील की कि वे ऑनलाइन क्लास एवं पठन पाठन की सामग्री को उन छात्रों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध करवाएं। इसमें कोई शक नहीं कि शिक्षकों ने ज़ूम, गूगल मीट, डिस्कोर्ड, बिग ब्लू बटन, आदि एप के जरिए ऑनलाइन कक्षा आयोजित करने की कोशिश की। यह कोशिश रेगुलर क्लास की खानापूर्ति ही हो सकती थी। वही हुआ भी। स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन, घर का माहौल, आर्थिक-सामाजिक स्थिति ऐसी कि मुश्किल से तीस चालीस प्रतिशत से ज्यादा छात्र इस ऑनलाइन का लाभ नहीं उठा सके। फिर यह भी सत्य है कि सभी शिक्षक इस माध्यम से अभ्यस्त भी नहीं हैं।

परीक्षा यानी मूल्यांकन का मतलब है छात्रों की योग्यता एवं क्षमता का परीक्षण। छात्रों की गुणात्मकता को मात्रात्मक रूप में बदलने की प्रक्रिया। ऐसे में अगर छात्रों को योग्यता एवं क्षमता विकसित करने का समान अवसर न मिले तो क्या उस परीक्षण प्रक्रिया को निरपेक्ष माना जा सकता है?

कोरोना संक्रमण के कारण एक समान अवसर वाले मॉडल- क्लास रूम टीचिंग की व्यवस्था नहीं हो पाई। ऑनलाइन क्लास कुछ प्रतिशत छात्रों को ही उपलब्ध हो सकी। यही कारण है कि भेदभावपूर्ण प्रशिक्षण की वजह से निरपेक्ष मूल्यांकन संभव नहीं।

आज कोराना संक्रमण की सम्भावना के कारण समान अवसर वाले मॉडल पेन-पेपर वाली परीक्षा करवा पाना भी सम्भव नहीं। रेल और बसों के परिचालन अवरुद्ध हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न राज्यों के छात्र आते हैं। अंतर्राज्यीय आवाजाही अवरुद्ध है। उसके बाद संक्रमण के ख़तरे के कारण कितने अभिभावक दिल्ली आने और किराये के मकानों में बच्चों को तत्काल छोड़ने के लिए तैयार होंगे? यही कारण है कि अभिभावक से लेकर छात्र एवं अध्यापक तक इसका विरोध कर रहे हैं।

इसका विकल्प दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने ओपन बुक परीक्षा का दिया है। जिसमें छात्र विश्वविद्यालय पोर्टल से प्रश्न पत्र डाउनलोड करेंगे। डाउनलोड करने के बाद उन्हें तीन घंटे का समय दिया जाएगा। दो घंटे सादे काग़ज़ में उसका उत्तर लिखने के लिए और एक घंटा उसका पीडीएफ तैयार कर अपलोड करने के लिए। अगर तीन घंटे में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो? ख़ैर। क्या मूल्यांकन के लिए यह समान अवसर प्रदान करने वाली व्यवस्था है ? यहाँ भी वही सारी दिक़्क़तें मौजूद हैं जो ऑनलाइन क्लास के साथ रही है। समस्या यही है कि इसका समाधान क्या हो?

समाधान है 75:25 का मॉडल। दिल्ली विश्वविद्यालय में 75 अंक की लिखित परीक्षा होती है और 25 अंक का आंतरिक मूल्यांकन। अगर छात्रों के पाँच सेमेस्टर के प्राप्त अंकों का औसत निकाल कर उसे लिखित परीक्षा से प्राप्त अंक की जगह शामिल कर लिया जाए एवं उसमें आंतरिक मूल्यांकन में प्राप्त अंकों को जोड़ दिया जाए तो वह उसके अंतिम सेमेस्टर के पेपर का रिज़ल्ट हो जाएगा। यह ऐसी व्यवस्था होगी जो भेदभावपूर्ण नहीं होगी। अगर किसी छात्र को इमप्रूवमेंट की इच्छा हो तो उसे परिस्थितियों के अनुकूल होने के बाद मौक़ा दिया जाना चाहिए। यही ढाँचा उन पेपर के लिए भी अपनाया जा सकता है जिसमें वह पास नहीं कर पाया है।

बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ #DUAgainstOnlineExamination हैशटैग तो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ #DUwithSolutions का हैशटैग लाते हैं। दोनों एक ही पोस्टर में साथ आते हैं। इसकी वजह बहुत साफ़ है कि शिक्षक संगठन यह मानकर चल रहे हैं कि सरकार कोराना संकट का फ़ायदा उठाते हुए नयी शिक्षा नीति को लागू करने की तरफ़ बढ़ रही है। पहले ऑनलाइन क्लास पर ज़ोर और अब ऑनलाइन परीक्षा को पर्दे के पीछे से धकेलने का काम सरकार के निर्देश पर चल रहा है। भाजपा-आरएसएस इसी मामले में कांग्रेस से अलग है। तब कांग्रेस कपिल सिब्बल और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में इसी नीति को लागू कर रही थी और उनके जनसंगठन एफ़वाययूपी का सरेआम निर्लज्ज समर्थन कर रहे थे। जनता उनसे कट रही थी फिर भी वे नवउदारवादी नीति को लागू किए जा रहे थे।

भाजपा के पास आरएसएस है। आरएसएस जान रही है कि जनता उसकी जनविरोधी नीतियों से कट रही है। यही कारण है कि कोरोना संकट का फ़ायदा उठाते हुए मोदी सरकार के निर्देश पर देशभर की बीजेपी सरकारों ने श्रम क़ानून को ख़त्म करना शुरू कर दिया और मज़दूरों में रोष व्याप्त होने लगा तो आरएसएस के मज़दूर संगठन को सामने आना पड़ा। यही आज आरएसएस के छात्र संगठन के आने की मजबूरी है।

ये जनता में नीतियों की वजह से व्याप्त रोष को साम्प्रदायिक मोड़ देने और उसे भटकाने तक सामने हैं। इनका लक्ष्य सरकार के लिए कवच का काम करना है। यही कारण है कि आरएसएस के मंत्री खुलेआम ऑन लाइन कक्षा से लेकर परीक्षा को नयी शिक्षा नीति से जोड़कर उसकी तारीफ़ कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ इससे पैदा रोष को दिशा भ्रमित करने के लिए एबीवीपी उसे मात्र दिल्ली विश्वविद्यालय की समस्या के समाधान तक ही रखना चाहती है। आज ज़रूरत है छात्रों के रोष को संगठित करने की। छात्रों के इस संगठित रोष की ताक़त किसी भी शिक्षा विरोधी नीति को पीछे धकेलने के लिए काफ़ी होगी। आरएसएस की मोदी सरकार को यह पता है।

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Delhi University
DU Online Exam
DU Online Exam Case
ABVP
Corona Crisis
FYUP
#DUAgainstOnlineExamination
#DUwithSolutions
RSS
BJP
Congress

Related Stories

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 


बाकी खबरें

  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    कृषि क़ानून वापसी के बाद यूपी और पंजाब में संघ-सरकार की मंशा क्या?
    20 Nov 2021
    इस बार #HafteKiBaat में सिर्फ दो बातों की चर्चा: मोदी सरकार ने तीन कृषि कानूनों को क्यों और कैसे वापस लेने का फैसला किया? दूसरी बात कि आगे क्या होगा? यूपी और पंजाब के चुनावों में अब मोदी सरकार और संघ…
  • bitcoin
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: बिटकॉइन घोटाला ने सियासत में हलचल क्यों मचा दी है?
    20 Nov 2021
    इस स्कैम ने राज्य की राजननीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर सीएम बोम्मई पार्टी के भीतर की चुनौती से परेशान हैं तो वहीं दूसरी ओर सुस्त जांच को लेकर विपक्ष सरकार पर जमकर निशाना साध रहा है।
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष : भक्तों के बीच “थैंक्यू मोदी जी!” का नया शिड्यूल घोषित
    20 Nov 2021
    देख लीजिए, कोविड-19 की तरह, किसान आंदोलन की आपदा में से भी मोदी जी ने अवसर निकाल ही लिया। राजधानी में थैंक्यू मोदी जी सभाओं का शिड्यूल आ गया है। बाकी राज्यों में भी आज-कल में यह सिलसिला शुरू हो जाएगा…
  • Punjab
    तृप्ता नारंग
    पंजाब: अपने लिए राजनीतिक ज़मीन का दावा करतीं महिला किसान
    20 Nov 2021
    पुरुषों और महिलाओं द्वारा पारंपरिक तौर पर जो भूमिका निभाई जाती रही है, उसमें आमूलचूल बदलाव देखने को मिला है, क्योंकि किसान आंदोलन में महिलाओं ने जमकर भागीदारी की है। हालांकि नेतृत्वकारी भूमिका में…
  • The stakes of talks between the President of America and China and the period of peace on the pretext of Afghanistan
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति के बीच वार्ता का दांव और अफ़ग़ानिस्तान के बहाने शांति का दौर
    20 Nov 2021
    “पड़ताल दुनिया भर की’ में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बातचीत की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। मुद्दा रहा अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License