NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
डीयू : महिला हॉस्टल ने 'सफ़ेदी' करवाने के लिए कमरे ख़ाली करने का आदेश दिया
अंडरग्रेजुएट हॉस्टल फ़ॉर गर्ल्स ने सफ़ेदी करवाने के लिए हॉस्टल ख़ाली करने के अलावा छात्राओं से लॉकडाउन के दौरान की फ़ीस भी मांगी है। छात्राओं ने इस आदेश को तर्कहीन बताया है और कहा है कि हॉस्टल नाजायज़ फ़ीस मांग रहा है।
सत्यम् तिवारी
18 Aug 2020
डीयू

दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महिला छात्रावासों के प्रशासन द्वारा किये गए काम और जारी किये गए आदेश पत्रों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गाहे ब गाहे इन हॉस्टल अधिकारियों पर जातिवादी, महिला विरोधी और वर्गवादी होने के इलज़ाम छात्राओं की तरफ़ से लगते रहे हैं। कोई पुरानी बात नहीं है जब इसी साल के फ़रवरी महीने में अम्बेडकर गांगुली महिला छात्रावास की छात्राएँ हॉस्टल के कथित मॉरल पुलिसिंग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थीं और वार्डन पर महिला विरोधी टिप्पणी के आरोप लगे थे। इसके अलावा विश्वविद्यालय के महिला छात्रावासों में रहने वाली छात्राएं लम्बे समय से कर्फ़्यू टाइमिंग, मॉरल पुलिसिंग और प्रशासन के अन्य क्रूर आदेशों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करती रही हैं। हालिया मामला अंडरग्रेजुएट हॉस्टल फ़ॉर गर्ल्स का है। दिल्ली विश्वविद्यालय की अंडरग्रेजुएट छात्राओं के लिए बने इस छात्रावास के प्रशासन ने 16 अगस्त को नोटिस निकाला है कि छात्राओं को 3-4 दिन के लिए अपना कमरा ख़ाली करना होगा ताकि कमरों की सफ़ेदी की जा सके। प्रशासन ने इसके लिए छात्राओं को पहले एक हफ़्ते का समय दिया था, जिसके बाद नोटिस में बदलाव किया गया और अब कोई डेडलाइन नहीं दी गई है। इस आदेश को लेकर छात्राएँ ग़ुस्से में हैं, और वह ऐसे तर्कहीन आदेश पर सवाल भी उठा रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

डीयू के नार्थ कैंपस में स्थित अंडरग्रेजुएट हॉस्टल फ़ॉर गर्ल्स में क़रीब 800 छात्राएँ रहती हैं। यह छात्राएँ किरोड़ीमल कॉलेज, मिरांडा हाउस, रामजस, इंद्रप्रस्थ कॉलेज और अन्य कॉलेजों में पढ़ती हैं। किरोड़ीमल कॉलेज की छात्रा ने नाम न बताने की शर्त पर न्यूज़क्लिक ने बात की। उन्होंने कहा, "हम में से ज़्यादातर छात्राएँ होली की छुट्टियों में घर चली गई थीं। उसके बाद कोरोना वायरस की वजह से हम लोग वापस नहीं आ पाए। जो छात्राएँ हॉस्टल में थीं, उन्हें भी धीरे-धीरे ख़ाली करने को कहा गया और वह भी घर चली गईं। अप्रैल के बाद से हॉस्टल में कोई भी नहीं है, और हम लोग घर पर ही हैं।"

जबकि छात्राएँ घर पर हैं ऐसे में हॉस्टल ने एक आदेश जारी कर के कहा है कि उन्हें 3-4  दिन के लिए हॉस्टल ख़ाली करना होगा क्योंकि हॉस्टल के कमरों की सफ़ेदी (वाइटवॉशिंग) करवानी है। मिरांडा हाउस में पढ़ने वाली हॉस्टल की एक अन्य छात्रा ने बताया, "हम में से कई लोग बहुत दूर रहते हैं। तमाम लड़कियां कर्नाटक, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश की हैं, और वह सब घर पर हैं। कोविड के टाइम पर हमारे लिए हॉस्टल जाना बहुत मुश्किल है।"

आपको बता दें कि डीयू के हॉस्टल में हर साल मेरिट की तर्ज पर एडमिशन लेना होता है। छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल का प्रशासन उन्हें धमकी दे रहा है। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए छात्राओं ने अपने नाम साझा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, "हम डरे हुए हैं क्योंकि हॉस्टल ने हमें धमकी दी है कि अगर टाइम से हॉस्टल ख़ाली नहीं किया तो अगले टर्म में हमारा एडमिशन नहीं होगा।"

किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा अरुणाचल प्रदेश में रहती हैं। उन्होंने कहा, "हम लोग आर्थिक रूप से इतने संपन्न नहीं हैं कि इस वक़्त दिल्ली जा सकें। अगर हम दिल्ली गए भी तो 3-4 दिन तक कहाँ रहेंगे, हमारी सुरक्षा का क्या होगा इसका जवाब हॉस्टल प्रशासन के पास नहीं है। एक तरफ़ हॉस्टल ने हमें कोरोना की वजह से पहले कमरे ख़ाली करने को कहा था, और अब वह हमें कोरोना के दौरान हॉस्टल में आने को कह रहे हैं।"

हॉस्टल ने अपने नोटिस में कहा है कि छात्राएँ ख़ुद आ सकती हैं, या अपने किसी अभिभावक को भेज कर अपना सामान कमरे से हटवा सकती हैं। सवाल यह उठता है कि बिहार, अरुणाचल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल और देश के कोने-कोने से आने वाली छात्राएँ कैसे आएंगी या अपने अभिभावकों को कैसे भेजेंगी।

हॉस्टल मांग रहा है डबल फ़ीस

मिरांडा हाउस की छात्रा ने बताया, "हमारे हॉस्टल की फ़ीस 85,000 रुपये है जो हमने अगस्त 2020 तक की जमा की हुई है। मगर हॉस्टल हमसे दोबारा फ़ीस मांग रहा है, और वह भी अप्रैल महीने से। हम अप्रैल से हॉस्टल में नहीं हैं, कोई बिजली-पानी-खाने का ख़र्चा नहीं हुआ है, तो क़ायदे से हमारी फ़ीस रिफंड की जानी चाहिए मगर हॉस्टल हमसे और ज़्यादा पैसे मांग रहा है, इस वक़्त हम इतने पैसे क्यों दें और कहाँ से दें?"

आपको बता दें, कि नॉर्थ कैम्पस में ही स्थित लड़कों के हॉस्टल में ऐसे कोई आदेश पारित नहीं किये गए हैं। हिन्दू कॉलेज हॉस्टल, जुबली हॉल, रामजस हॉस्टल या अन्य किसी भी बॉयज़ हॉस्टल को न कमरा ख़ाली करने का, न ही फ़ीस देने का कोई नोटिस दिया गया है। छात्राओं ने व्हाट्सएप पर जारी अपनी एक प्रेस रिलीज़ में कहा है कि यह प्रशासन का महिला विरोधी और जातिवादी रवैया है, जिसके तहत वह लगातार गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं को परेशान करता है। प्रेस रिलीज़ में आंबेडकर गांगुली हॉस्टल से निकाल गए कर्मचारियों के लिए भी बात रखी गई है, और कहा गया है कि प्रशासन का रवैया वर्गवादी है।

18 अगस्त को एक छात्रा ने न्यूज़क्लिक से कहा, "हम प्रशासन से मीटिंग करना चाह रहे हैं, हमने उन्हें लिखा है मगर अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है।"

प्रेस रिलीज़ में छात्राओं ने लिखा है, "हम मांग करते हैं कि हॉस्टल प्रशासन सफ़ेदी करवाने के लिए कमरे ख़ाली करवाने के निर्णय को वापस ले, और हमसे नाजायज़ फ़ीस भी न ले।" आंबेडकर गांगुली हॉस्टल के कर्मचारियों का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि, "हमारी मांगे है कि जब तक वार्डन, प्रोवोस्ट और अन्य अधिकारी अपना घर ख़ाली नहीं करेंगे, तब तक किसी कर्मचारी या छात्रा को भी यहाँ से जाने को न कहा जाये।"

हॉस्टल को ख़ाली करने के फ़रमान और लॉकडाउन के दौरान की फ़ीस देने के आदेश को लेकर जब हमने हॉस्टल की वार्डन स्नेहलता से बात करनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। संपर्क होने पर ख़बर अपडेट की जाएगी।

Delhi University
du
DU girls hostel
Undergraduate hostels for girls
Lockdown
COVID-19

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत


बाकी खबरें

  • sudan
    पीपल्स डिस्पैच
    सूडान: सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ 18वें देश्वयापी आंदोलन में 2 की मौत, 172 घायल
    17 Feb 2022
    इजिप्ट इस तख़्तापलट में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा है। ऐसे में नागरिक प्रतिरोधक समितियों ने दोनों देशों की सीमाओं पर कम से कम 15 जगह बैरिकेडिंग की है, ताकि व्यापार रोका जा सके।
  • muslim
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    मोदी जी, क्या आपने मुस्लिम महिलाओं से इसी सुरक्षा का वादा किया था?
    17 Feb 2022
    तीन तलाक के बारे में ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना, तब, जब मुस्लिम महिलाओं को उनकी पारंपरिक पोशाक के एक हिस्से को सार्वजनिक चकाचौंध में उतारने पर मजबूर किया जा रहा है, यह न केवल लिंग, बल्कि धार्मिक पहचान पर भी…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनाव में दलित-फैक्टर, सबको याद आये रैदास
    16 Feb 2022
    पंजाब के चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी पार्टियों के शीर्ष नेता बुधवार को संत रैदास के स्मृति स्थलों पर देखे गये. रैदास को चुनावी माहौल में याद करना जरूरी लगा क्योंकि पंजाब में 32 फीसदी…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मोदी की ‘आएंगे तो योगी ही’ से अलग नितिन गडकरी की लाइन
    16 Feb 2022
    अभी तय नहीं कौन आएंगे और कौन जाएंगे लेकिन ‘आएंगे तो योगी ही’ के नारों से लबरेज़ योगी और यूपी बीजेपी के समर्थकों को कहीं निराश न होना पड़ा जाए, क्योंकि नितिन गडकरी के बयान ने कई कयासों को जन्म दे दिया…
  • press freedom
    कृष्ण सिंह
    ‘दिशा-निर्देश 2022’: पत्रकारों की स्वतंत्र आवाज़ को दबाने का नया हथियार!
    16 Feb 2022
    दरअसल जो शर्तें पीआईबी मान्यता के लिए जोड़ी गई हैं वे भारतीय मीडिया पर दूरगामी असर डालने वाली हैं। यह सिर्फ किसी पत्रकार की मान्यता स्थगित और रद्द होने तक ही सीमित नहीं रहने वाला, यह मीडिया में हर उस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License