NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन
दलित शोषण मुक्ति मंच(DSMM) ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा माँगा है और कहा राजस्थान सरकार कमजोर तबके की सुरक्षा में विफल रही है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Mar 2022
rajasthan protest

राजस्थान में दलित-वर्ग और महिलाओं पर बढ़ते हमलों के खिलाफ लगातार जन-आक्रोश बढ रहा है, सोमवार 21 मार्च 2022 को दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) सहित विभिन्न स॔गठनों ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा और उनसे इस्तीफ़ा देने की मांग भी रखी ।

डीएसएमएम के प्रदेश संयोजक एडवोकेट किशन मेघवाल ने बताया कि राजस्थान में कमजोर वर्गों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत लगातार हमले किए जा रहे हैं जो न केवल निंदनीय हैं अपितु राजस्थान की छवि को देश और दुनिया में धूमिल करने वाले हैं, जिस प्रकार से दलितों पर हमलों की बाढ़ आई हैं जिसने आपकी "संवेदनशील सरकार" की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

जोधपुर जिला कलेक्ट्रेट पर हुए विरोध-प्रदर्शन में सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए, वहां हुई आमसभा को सम्बोधित करते हुए डीएसएमएम के प्रदेश सहसंयोजक शैलेष मोसलपुरिया ने राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री गहलोत जिस गद्दी पर विराजमान है वो इन्हीं तड़पते, चीखते और लहुलुहान मतदाताओं के बदौलत हासिल हुई है।

नौजवान संगठन डीवाईएफआई के प्रदेश संयुक्त सचिव महिपाल सिंह ने कहा “विगत भाजपा सरकार के दौर में राजस्थान में दलित तबके पर हुए हमलों से परेशान होकर, कांग्रेस पर भरोसा करते हुए आपको सत्ता तक पहुँचा दिया, राज्य की कानून व्यवस्था का मजाक उड़ाया जाता हैं जबकि गृहमंत्री का कार्यभार भी आपके पास में हैं, इसके अलावा दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह भी है कि दलित उत्पीड़न का केंद्र बिन्दू जोधपुर संभाग है जहाँ से आप स्वयं आते हैं।”

भीम-आर्मी के नेता आनंदपाल आजाद भी इस विरोध स्थल पर आए और उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि “दलित-वर्ग के खिलाफ लगातार षड्यंत्र चलते रहते है, कभी अपनी पसंद का नाम रखने पर, कभी तावदार मूंछे रखने पर, कभी नाई द्वारा बाल काटने पर, कभी दुल्हे को घोड़ी पर चढने के सवाल पर एक सुनियोजित तरीक़े से एक के बाद एक हमले करते हुए दलित-वर्ग को भय के वातावरण में जीने को मजबूर कर दिया गया हैं।”

विभिन्न संगठनों द्वारा दिए गए ज्ञापन में मुख्य रूप से पाली के बाली में हुए जितेंद्रपाल मेघवाल हत्याकांड की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए इस प्रकरण में न्यायिक आयोग गठित करने, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।

ज्ञापन में लिखा है कि जोधपुर जिले के फलोदी में राहुल देवड़ा का अपहरण कर के तीन दिन तक बंधक बनाए रखा और फिर यातनाएं देते हुए पानी में डाल कर मौत के घाट उतार दिया। इस प्रकरण में पुलिस भारी दबाव में निष्पक्ष जाँच नहीं कर पा रही हैं। अतः इस मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए न्यायिक आयोग गठित किया जाए। 

ज्ञापन में पाली के राणी में प्रवीण और उसकी मां सीतादेवी को बोलेरो से कुचलकर मारने की कोशिश का मामला भी उठाया गया, घायल जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में भर्ती हैं जहां दोनों घायलों के इलाज में घोर लापरवाही सामने आई है अतः सरकार उनका समुचित ईलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें और आर्थिक सहायक उपलब्ध कराए।

मांग पत्र में धौलपुर जिले की घटना का जिक्र किया जहां एक दलित महिला के साथ उनके नाबालिग बच्चों के सामने ही हुई गैंगरेप की वारदात ने पूरे राजस्थान को कलंकित किया हैं, इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की।

कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए डीएसएमएम, भीम-आर्मी, स्टूडेंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), भारत की जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई), अजा/जजा संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) सहित सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि राजस्थान सरकार दलितों और महिलाओं पर बढ़ते हमलों को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाए,

जहाँ भी उत्पीड़न की घटना हो उस जिले के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को निलम्बित किया जाए एवं संबंधित थानाधिकारी को बर्खास्त किया जाए, दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले उपाधीक्षकों को सूचीबद्ध कर उन्हे जांच के लिए अयोग्य घोषित कर ब्लेक-लिस्टेड किया जाए। क्योंकि बढ़ती घटनाओं के लिए ऐसे जांच अधिकारी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं जो मुल्जिमों को बचाने के उद्देश्य से दूषित जांच कर के न्यायालयों में आधे-अधूरे दस्तावेजों के साथ चालान पेश कर रहे हैं परिणामस्वरूप मुल्जिमों पर दोष साबित नहीं हो पाते हैं जिसके चलते अपराधियों को ठोस संदेश नहीं मिलता हैं और कानून का भय न रहने से वारदातों में बढ़ोतरी होती हैं।

कई जिलों में Sc/St के विशेष न्यायाधीशों के पद खाली रहने से न्यायालय का काम प्रभावित होता है, दूसरे न्यायालयों में चार्ज देने से इस एक्ट की गंभीरता के नजरिए से सुनवाई नहीं होती, अतः राजस्थान के सभी जिलों में विशिष्ट न्यायालय Sc/St प्रकरण के न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, Sc/St एक्ट के तहत दर्ज प्रकरणों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिलती है। इसके लिए अनावश्यक अवरोध पैदा किए जाते है, पुलिस थानों में कई महीनों तक पीड़ितों के आवश्यक कागजात तक अपलोड नहीं किए जाते हैं, अतः इस तंत्र को चुस्त-दुरुस्त किया जाए ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

करीब आधा दर्जन संगठनों ने राजस्थान की सरकार को चेतावनी दी कि यदि करोड़ों लोगों के जीवन को गरिमामय बनाने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए तो एक आक्रामक जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की होगी, हम यह भी चेतावनी देते हैं कि यदि कानून ने अपना काम ठीक से नहीं किया तो लोग अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं संघर्ष के रास्ते पर चलने पर मजबूर होंगे, जिससे राजस्थान में जातीय संघर्ष की स्थिति पैदा होगी इसके लिए भी राजस्थान की सरकार की जिम्मेदारी होगी।

ये भी पढ़ें: राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला

Rajasthan
Rajasthan Protest
dalit
Dalit in Rajasthan
Attack on dalits
Dalit Rights
Fundamental Rights
ashok gehlot
Congress
Rajasthan Police
DSMM
DSMM Protest

Related Stories

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में सैलून वाले आज भी नहीं काटते दलितों के बाल!

दलित किशोर की पिटाई व पैर चटवाने का वीडियो आया सामने, आठ आरोपी गिरफ्तार

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पापा टॉफी लेकर आएंगे......’ लखनऊ के सीवर लाइन में जान गँवाने वालों के परिवार की कहानी

कोरोना वायरस : टीके की झिझक से पार पाते भारत के स्वदेशी समुदाय

बिहार: "मुख्यमंत्री के गृह जिले में दलित-अतिपिछड़ों पर पुलिस-सामंती अपराधियों का बर्बर हमला शर्मनाक"

भेदभाव का सवाल व्यक्ति की पढ़ाई-लिखाई, धन और पद से नहीं बल्कि जाति से जुड़ा है : कंवल भारती 

बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 

दलित और आदिवासी महिलाओं के सम्मान से जुड़े सवाल


बाकी खबरें

  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • mmummies
    संदीपन तालुकदार
    चीन के तारिम बेसिन ममी : डीएनए विश्लेषण से सामने आए हैरान करने वाले तथ्य
    30 Oct 2021
    27 अक्टूबर को 'नेचर' में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि यह ममी कुछ स्वदेशी लोगों के अवशेष हैं जिन्होंने शायद अपने पड़ोसी समूहों से कृषि विधियों को अपनाया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License