NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
दार्जिलिंग : अब भी बरकरार है चाय श्रमिकों का संकट, चिंताएं और रोज़ी-रोटी का सवाल
“बागान मालिक मज़दूरों को यह कहकर मनमाने तरीके से काम करवा रहे हैं कि वे अपनी अन्य मांगों को भूल कर फिलहाल बागान को बचाने में पूरी मेहनत लगा दें।”
सरोजिनी बिष्ट
17 May 2020
दार्जिलिंग

सुमंती खुश हैं कि उनका चाय बागान खुल गया और अब वह फिर से काम पर जाने लगीं पर इस खुशी के बीच कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे लॉक डाउन के चलते जितने दिन काम नहीं हुआ उतने दिन की मज़दूरी का क्या होगा,  मिलेगी भी या नहीं और इससे भी बड़ी चिंता यह कि संकट के इस दौर में कहीं उनकी प्रत्येक दिन बनने वाली मज़दूरी पर न मार पड़ जाए और छंटनी का डर सो अलग।

तेईस वर्षीय  सुमंती एक्का पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले (सिलीगुड़ी मुख्यालय) के सचिंद्र चंद्रा चाय बागान में फैक्टरी मज़दूर  हैं। सुमंती कहती हैं कि वह बागान की परमानेंट वर्कर है, तो इस आधार पर  उसे और उस जैसे परमानेंट वर्करों को उन दिनों का वेतन भी मिलना चाहिए जितने दिन लॉकडाउन के कारण बागान बंद था, पर बागान मालिक द्वारा उनकी इस मांग को अनसुना कर दिया जा रहा है। बातचीत में सुमंती ने बताया कि वैसे भी चाय बागानों की हालत ठीक नहीं थी लेकिन लॉकडाउन ने रही सही कसर भी निकाल दी।

उन्होंने बताया कि लगभग एक महीना बागान बंद था अब भले ही बागान खुल गया हो लेकिन इस बंदी ने चाय श्रमिकों के सामने रोजी रोटी का संकट तो पैदा कर ही दिया। जिसके पास अपनी थोड़ी बहुत जमीन है  उनके  लिए संकट भले बहुत बड़ा न हो लेकिन भूमिहीन चाय मज़दूरों के सामने संकट का पहाड़ है।

क्या बागान और चाय फैक्टरी में पहले जैसा काम और माहौल है,  इस सवाल पर वह कहती हैं कुछ फ़र्क तो पड़ा है, जैसे अब काम के घंटों को लेकर सख्ती ज्यादा है अगर आठ या दस घंटे काम करना है तो करना है उसमें कोई ढील नहीं यानी काम का प्रेशर बहुत है क्योंकि जितने दिन काम बंद था उसकी पूरी पूर्ति करनी है। सुमंती ने बताया कि सब श्रमिकों को सात बजे ही पहुंच जाना होता है। उसके मुताबिक पहले सप्ताहिक पेमेंट होता था लेकिन अब पन्द्रह दिन में पेमेंट होता है। इसके अलावा बीमारी पर मिलने वाली छुट्टी और उस छुट्टी के बावजूद जो पैसा मिलता था उस पर भी मार पड़ी है। वह कहती हैं कि "हमारे साथ ऐसा क्यूं हो रहा है आखिर हमने अपनी मर्जी से तो छुट्टी नहीं की।"

सुमंती की तरह ख्रीस्त एक्का भी चाय श्रमिक हैं और पिछले पांच वर्षों से चाय बागान में पत्तियां तोड़ने का काम करती है। ख्रीस्त एक्का ने भी इन्हीं सब चिंताओं को लेकर अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि हम चाय श्रमिक वैसे भी रोजगार और आमदनी को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में रहते है और अब इन मौजूदा हालात ने दुष्चिंताएं और बढ़ा दी।

लॉकडाउन के कारण चाय उद्योग की चरमराती व्यवस्था को देखते हुए आखिरकार पश्चिम बंगाल सरकार ने करोना के चलते लागू पाबंदियों के बीच पचास फीसदी श्रमिकों के साथ काम की अनुमति दे दी। पहले यह संख्या पन्द्रह प्रतिशत तक थी फिर पच्चीस प्रतिशत हुई और अब पचास प्रतिशत तक पहुंच गई। चाय संगठनों ने सरकार की इस अनुमति का स्वागत तो किया पर उम्मीद भी जताई है कि जैसे असम के चाय बागानों में सौ प्रतिशत मज़दूरों के साथ काम की इजाजत मिल गई है वैसे यहां भी मिलनी चाहिए। 

चाय बागान मालिकों के सबसे बड़े संगठन "द कंसल्टेटिव कमेटी ऑफ प्लांटेशन एसोसिएशन" (सीसीपीए) के मुताबिक इस समय करीब 12 लाख चाय श्रमिकों की रोजी-रोटी खतरे में हैं और लॉकडाउन के चलते देश के चाय उद्योग को कम से कम 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है संगठन ने केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।

तराई संग्रामी चाय मज़दूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष अभिजीत मजूमदार ने बातचीत के दौरान बताया कि इसमें दो राय नहीं कि लॉकडाउन ने चाय उद्योग को खासा नुकसान पहुंचाया है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि मौजूदा हालात की आड़ में चाय बागान मालिक मनमानी पर भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि बागान मालिक मज़दूरों को यह कहकर मनमाने तरीके से काम करवा रहे हैं कि वे अपनी अन्य मांगों को भूल कर फिलहाल बागान को बचाने में पूरी मेहनत लगा दें।

अभिजीत मजूमदार के मुताबिक हम जैसे चाय श्रमिक संगठन जो लंबे समय से चाय श्रमिकों की जायज मांगों को लेकर लड़ रहे हैं, इस माहौल में वह मांगें ध्वस्त होती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पचास प्रतिशत मज़दूरों को काम की इजाजत मिल गई स्वागत योग्य जरूर है लेकिन बाकी बचे पचास प्रतिशत मज़दूरों के भविष्य का क्या होगा यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। उनके मुताबिक अधिकांश बागानों में हैंड सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स कुछ भी श्रमिकों को नियम के मुताबिक उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा इसलिए श्रमिक कठिन चुनौतियों के बीच काम करने को मजबूर हैं तो वहीं उनके संगठन को जानकारी मिली है कि कुछ जगह चाय श्रमिकों को एडवांस दिया गया है लेकिन उस एडवांस को आने वाले समय में उन्हीं के वेतन से काट लिया जाएगा जो कि बेहद अन्यायपूर्ण रवैया है।

जब उनसे पूछा गया कि सीसीपीए ने भारी नुकसान के चलते राजस्व ठप्प होने की बात कह कर चाय मज़दूरों को भुगतान करने में असमर्थता जताई है साथ ही सरकार से अपील की है कि आगामी तीन महीने तक हर मज़दूर के खाते में प्रत्येक सप्ताह एक हजार रुपये जमा कराएं, तो इसके जवाब में उन्होंने इसे महज एक छलावा बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चाय श्रमिकों का वाजिब पारिश्रमिक का मुद्दा अधर में लटका हुआ है उस ओर सरकार का विशेष ध्यान नहीं तो यह कैसे माने कि इस मांग पर विचार किया जाएगा।

बहरहाल इतना तय है कि अभी चाय बागानों में पचास फीसदी मज़दूरों के साथ काम होगा लेकिन बाकी के पचास फीसदी मज़दूरों के भविष्य का क्या होगा इसका जवाब न तो सरकार के पास है न ही चाय बागान मालिकों के पास। पर सुमंती या ख्रीस्त एक्का जैसे चाय मज़दूरों से जब बात होती है तो भविष्य को लेकर इनकी चिंताएं साफ़ दिखती हैं और इनकी चिंताओं से एक बात भी साफ होती है कि जब स्थायी मज़दूर इस मौजूदा हालात में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे तो अस्थायी मज़दूरों की रोजी रोटी का मुद्दा निश्चित ही बहुत बड़ा हो जाता है। 

(सरोजिनी बिष्ट स्वतंत्र पत्रकार हैं। और लंबे समय पश्चिम बंगाल में रही हैं।)

(एक फोटो वाट्सएप किया है। अगर ठीक न हो तो मेन फोटो दार्जिलिंग में किसी चाय बागान का लगा लेना। और इसे अंदर लगा लेना।)

darjeeling
Darjeeling tea workers
Coronavirus
Lockdown
economic crises
Tea industry
West Bengal

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • MP: अवैध बेदखली और लूट के खिलाफ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा- सरकार हमसे सीख ले कानून
    सबरंग इंडिया
    मध्य प्रदेश: अवैध बेदखली और लूट के ख़िलाफ़ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा सरकार हमसे सीखे क़ानून
    22 Jul 2021
    खंडवा में जागृत आदिवासी दलित संगठन के लाल झंडे के नेतृत्व में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के तीन हजार से ज्यादा लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव व धरना प्रदर्शन किया।
  • Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    न्यूज़क्लिक टीम
    Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    22 Jul 2021
    सरकार कहती है कि संसद सत्र को पटरी से उतारने के लिए विपक्ष और कुछ अन्य शक्तियों ने योजना के तहत 'पेगासस फोन-जासूसी का हौव्वा खड़ा किया. क्या सरकार का यह आरोप सही है?
  • khori village
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव में चल रही तोड़-फोड़ की कार्रवाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस
    21 Jul 2021
    "खोरी को पूरी दुनिया से काट कर एक गुमनाम मौत देने की पूरी साजिश है हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम की इसलिए आज इस बात ले सख़्त ज़रूरत है कि खोरी की खबर को मीडिया और व्यापक जन आबादी तक ले जाया जाए।'
  • जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    लाल बहादुर सिंह
    जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    21 Jul 2021
    ज़ाहिर है यह किसान आंदोलन के evolution में अगला चरण है, अवधारणा के स्तर पर एक जीवंत जनांदोलन द्वारा सांसदों के लिए "पीपुल्स ह्विप" के विचार का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है।
  • COVID
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 42,015 नए मामले, 3,998 मरीज़ों की मौत
    21 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 42,015 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4 लाख 7 हज़ार 170 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License