NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
जियो और फेसबुक की डील बताती है कि कोरोना के बाद भी दुनिया नहीं बदलने वाली
जियो और फेसबुक का पूरा करार एक ऐसी दुनिया की तरफ इशारा करता है कि जिसके पास डेटा है और पैसा है। अब इसके ख़तरे आप आसानी से समझ सकते हैं। पढ़िए ये विशेष विश्लेषण
अजय कुमार
24 Apr 2020
Jio fb
Image courtesy: Business Today

कोरोना वायरस से जूझ रही दुनिया में एक बहस यह भी चली कि कोरोना वायरस के बाद की दुनिया कैसी होगी?  क्या दुनिया को चलाने के तौर-तरीके बदलेंगे? ऐसे सवालों का जवाब आगे ही पता चलेगा। लेकिन जियो और फेसबुक के बीच हुए करार से ऐसा लगता है कि जिनके पास अकूत सम्पदा है वे दुनिया को केवल बाज़ार के एंगल से ही देखते हैं। बाज़ार के दृष्टिकोण से सोचने पर दुनिया उनके हाथों की कैदी बन जाती है, जिनके हाथों में अकूत सम्पदा है। ऐसे में दुनिया कभी बदलेगी ऐसा सोचना भी नामुमकिन लगने लगता है।  

फेसबुक और रिलाइंस जियो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं। जियो का मोबाइल बिकता है और डेटा रिचार्ज करवाया जाता है। फेसबुक एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, जो मोबाइल और डेटा के सहारे लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है, और साथ में चुपचाप लोगों के व्यवहार का विश्लेषण कर डेटा को सहारे दुनिया को अपने इशारे पर नचाने का काम भी करती रहती है। तो ज़रा सोचिये कि जब यह दोनों कंपनियां एक-साथ मिलकर काम करेंगी तो बाज़ार पर सबसे बड़ा कब्ज़ा किसका होगा? अंदाज़ा लगाना बिलकुल आसान है। जियो और फेसबुक साथ में मिलकर काम करने जा रहे हैं। टेलीकॉम के सहारे जुड़े बाज़ार के हर क्षेत्र में सबसे बड़े हिस्सेदार बनने जा रहे हैं। या यह कह लीजिए कि टेलीकॉम से जुड़े ई-कॉमर्स पर रिलाइंस जियो और फेसबुक का कब्ज़ा होने जा रहा है।  

मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक, मुकेश अंबानी की जियो में 43,574 करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है। इस निवेश के बाद जियो में फेसबुक की हिस्सेदारी 9.99% हो जाएगी। भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर में यह सबसे बड़ा एफडीआई है। दोनों कंपनियों के बीच इस डील के बाद जियो का वैल्यूएशन 4.62 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। यह मूल्यांकन डॉलर के मुकाबले रुपये को 70 मानकर किया गया है। नियामक की मंजूरी मिलने के बाद फेसबुक जियो में सबसे बड़ी माइनॉरिटी शेयरहोल्डर बन जाएगी।

प्रेस रिलीज में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि जियो और फेसबुक के बीच साझेदारी से प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन को और मजबूती मिलेगी। इससे ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी सुविधा होगी। कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास करेगी और जियो-फेसबुक के बीच हुई यह साझेदारी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अब ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस का सही मतलब समझिये, जो इस प्रेस रिलीज के सुंदर शब्दों में नहीं है। भारत में करीब 100 करोड़ मोबाइल यूज़र हैं। भारत में तकरीबन 33 करोड़ फेसबुक यूज़र हैं। फेसबुक की सब्सिडियरी कंपनी व्हाट्सएप के भी भारत में 40 करोड़ यूज़र हैं। रिलायंस जियो के देश में 38.8 करोड़ यूजर हैं। यानी फेसबुक के पास वैसा प्लेटफॉर्म है, जहां आसानी से भारत की बहुत बड़ी आबादी से जुड़ जा सकता है। अब इसका ख़तरा क्या है? ख़तरा ये कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक के जरिये इतनी बड़ी आबादी के डेटा का विश्लेषण कर यह समझ जा सकता है कि लोगों के सोचने का तरीका क्या है? वे क्या पसंद करते हैं? क्या नापसंद करते है? इसके आधार पर ऐसा बाज़ार बना सकता है जिसमें विक्रेता केवल रिलायन्स-जियो हो।

इसी आधार पर इस डील पर विश्लेषकों की राय कुछ ऐसी है- फेसबुक की सहायक कम्पनी व्हाट्सएप ने पेमेंट पे की अर्जी डाली थी लेकिन अभी तक व्हाट्सएप को पेमेंट पे की हैसियत नहीं मिली थी। यानी व्हाट्सएप पर अभी तक किस भी तरह का लेन-देन नहीं होता है। व्हाट्सएप ट्रांज़ैक्शन की सुविधा से मरहूम है। इसलिए भारत की बहुत बड़ी आबादी तक पहुंच होने के बाद भी फेसबुक की कमाई का सोर्स केवल विज्ञापन था, पेमेंट पे मेथड नहीं। जियो के पास जियो पेमेंट एप्पलीकेशन है और जियो मार्ट यानी ई-रिटेल बाज़ार है।

अभी तक जियो को अपने जियो मार्ट यानी इंलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद बाज़ार से बहुत बड़ी कमाई नहीं हो रही थी। फेसबुक के साथ जुड़ने पर जियो के रिटेल बाज़ार के विज्ञापन व्हाट्सएप पर आएंगे। इस प्लेटफॉर्म पर ट्रांज़ैक्शन की सुविधा भी होगी। व्हाट्सएप अगर एक खरीद-बिक्री पर मामूली कमाई भी करे तो उसकी अथाह कमाई होगी। 40 करोड़ से अधिक यूजर वाले जियो-फेसबुक का बाज़ार बहुत बड़ा हो जाएगा। फेसबुक की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक के जरिये हर दिन इस बाज़ार में बहुत सारे लोग जुड़ेंगे। हर दिन फेसबुक और जियो का बाज़ार बढ़ता चला जाएगा।  

इस पूरी बात को संक्षेप में कहा जाए तो यह कि आने वाले दिनों में भारत की बहुत बड़ी आबादी के लिए अब बाज़ार की जगह का काम रिलायंस और फेसबुक करने वाले हैं। यही इज ऑफ़ लिविंग और इसे ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का नाम दिया जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं कि इस डील के दो मायने हैं - एक आर्थिक मायने और दूसरा राजनीतिक मायने। आर्थिक मायने से तो बिलकुल साफ़ दिख रहा है कि फ़ेसबुक के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रिलायंस जियो ई-कॉमर्स के बाज़ार पर एकछत्र राज करने की ओर बढ़ रहा है। जहाँ फेसबुक प्लेटफॉर्म मुहैया करवाने की कमाई करेगा और  जियो रिटेल बजार मुहैया करवाने की। जहाँ तक राजनीतिक मायने की बात है तो वह यह है कि डेटा धांधली को लेकर फेसबुक पर आरोप लागते आ रहे हैं कि वह दूसरे देश से अपना डेटा साझा नहीं करता है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने तो बकायदा इस पर केस किया है। भारत जैसे देश में इन सब पचड़ों से बचने के लिए अगर रिलायंस का साथ मिल जाए तो फेसबुक को राजनीतिक सुरक्षा मिल जाएगी।  

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के रे अपने फेसबुक पोस्ट पर दिलचस्प बात लिखते हैं कि मार्च में सर्वोच्च न्यायालय ने बहुत सारे विवाद के बाद भी क्रिप्टोकरेंसी को ओके कर दिया था। फ़ेसबुक और जियो दोनों इस करेंसी की दौड़ में हैं और अब वे साथ-साथ हैं। सारी कहानी को एक साथ पढ़कर देखिए।  

कुल मिलाकर कहा जाए तो जियो और फेसबुक का पूरा करार एक ऐसी दुनिया की तरफ इशारा करता है कि जिसके पास डेटा है और पैसा है, वह आने वाली दुनिया को अपने इशारे पर नचा सकता है और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि वह दूसरे के इशारे पर नाच रहे हैं। अगर कोरोना के बाद भी दुनिया मुठ्ठी भर लोगों के इशारे पर चलने वाली है तो भूल जाइए कि संसाधनों का सही से बंटवारा होगा और कभी आपदा आएगी तो पैदल हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों को जाते हुए मजदूरों की तस्वीर नहीं दिखाई देगी। 

mukesh ambani
Reliance
Reliance Industries Limited
Facebook
Mark Zuckerberg
Telecom
Coronavirus
E-Commerce
E-commerce companies

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

जारी रहेगी पारंपरिक खुदरा की कीमत पर ई-कॉमर्स की विस्फोटक वृद्धि

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License