NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
'विनाशकारी विकास' के ख़िलाफ़ खड़ा हो रहा है देहरादून, पेड़ों के बचाने के लिए सड़क पर उतरे लोग
हरिद्वार रोड स्थित जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक, मसूरी जाने वाले पर्यटकों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है। इस काम के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े 30 साल से भी अधिक पुराने 2200 पेड़ों को काटा जाना है। 
सत्यम कुमार
27 Sep 2021
Save Tree

‘’धरती के श्रृंगार हैं पेड़,

जीवन के आधार हैं पेड़’’

कविता की यह पंक्तियां हमें बताती है कि प्राकृतिक सुंदरता और एक मानव जीवन में पेड़ों का कितना महत्त्व है, यही बात भाजपा सरकार को बताने के लिये दूनवासी सड़कों पर उतर आए हैं। अपने प्रदर्शन के दौरान, उन्होंने सहस्त्रधारा रोड पर स्थित खलुंगा स्मारक पर एकत्रित होकर पेड़ों को बचाने की अपील भी की।

देहरादून में आए दिन बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के कारण जाम की समस्या बनी रहती है, जिस से निजात पाने के लिये सरकार, हरिद्वार रोड स्थित जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक, मसूरी जाने वाले पर्यटकों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के तौर पर विकसित करना चाहती है। जिसके लिए सरकार द्वारा जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक सहस्त्रधारा रोड को फोर लेन सड़क में बदला जाना है, इस काम के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े 30 साल से भी अधिक पुराने 2200 पेड़ों को काटा जाना है। 

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड: विकास के नाम पर विध्वंस की इबारत लिखतीं सरकारें

देहरादून के लोग इसी का विरोध कर रहे हैं। पेड़ों के कटान का विरोध करने के लिए 26 सितम्बर के दिन बड़ी संख्या में लोग सहस्त्रधारा रोड पर एकत्रित हुए, जिसमें भारी संख्या में गैर सरकारी संस्थाओ से जुड़े लोग, युवा, छात्र और बुजुर्ग के अलावा महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। साथ ही पेड़ों को बचाने के लिये दूनवासियों को एकजुट होने का सन्देश दिया। 

ये भी पढ़ें: पर्यावरणीय पहलुओं को अनदेखा कर, विकास के विनाश के बोझ तले दबती पहाड़ों की रानी मसूरी

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पेड़ों को काटने का प्रस्ताव रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डब्लूएचओ के अनुसार देहरादून में घटते पेड़ों के कारण इस शहर का नाम प्रदूषित शहरों की लिस्ट में है। 

ये भी पढ़ें: क्या एयरपोर्ट बनाने के नाम पर देहरादून के थानो इलाके के 9 हज़ार से ज्यादा पेड़ काट दिए जाएंगे?

पर्यावरणविदों के अनुसार देहरादून 100 सबसे प्रदूषित शहरों में 30वें स्थान पर है और देश में पांचवे स्थान पर है। ऐसे में सरकार पेड़ों को काटकर यहां की आवोहवा को खराब करना चाह रही है। हम सभी जानते हैं कि पेड़ों को संरक्षित करके ही पृथ्वी पर जीवन को बचाया जा सकता है।

2,200 पेड़ों को काटने के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग (फोटो - नितिन )

प्रदर्शन में शामिल हुए एसएफआई उत्तराखंड के नितिन मलेठा का कहना है कि अपने पर्यावरण का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है और पेड़ हमारे पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं, यदि पेड़ों की संख्या कम होती है तो इसका सीधा असर पर्यावरण पर होता है, इसलिए  एक छात्र होने के नाते हमारी यह जिम्मेदारी होती है कि हम अपने और अपनी आने वाली पीड़ी के लिये इन्हें संजोकर रखें और किसी भी गलत नीति का विरोध करना एक छात्र का अधिकार भी है। हम सभी जानते हैं कि विकास का यह मॉडल हमारे शहर के लिए कितना हानिकारक है इसलिए मैं सभी लोगो से आह्वान करता हूं कि वे अपने घरों से बाहर निकले और इस अंध विकास के विरोध में अपनी आवाज बुलन्द करें।’’

2,200 पेड़ों को काटने के खिलाफ रक्षा सूत्र बांधते बच्चे और अभिभावक (फोटो- सिटीजन फॉर ग्रीन दून)

प्रदर्शन में शामिल सिटीजन फॉर ग्रीन दून से हिमांशु अरोड़ा का कहना है कि पेड़ों का बहुतायत में होना ही दून वैली की पहचान है लेकिन सरकारी नीतियों के कारण विकास के नाम पर दून वैली से उसकी पहचान छीनी जा रही है। यदि दून से पेड़ ही समाप्त हो गये तो अपनी एक अलग पहचान रखने वाला यहाँ का मौसम भी नहीं बचेगा, तब इस विकास का क्या मतलब होगा? इसीलिये हम लोगों ने ठाना है कि किसी भी कीमत पर हम लोग इन पेड़ों को नहीं कटने देंगे, चाहे एक बार फिर चिपको आंदोलन की शुरुआत क्यों न करनी पड़ जाए।

पर्यावरण विरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग (फोटो-सिटीजन फॉर ग्रीन दून)

ह्यूमन राइट्स लॉयर और कंज़र्वेशन एक्टिविस्ट रीनू पॉल का कहना है कि देहरादून हमारा अपना शहर है और इस को संजोय रखना भी हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए हम सभी दून वासियों को जागरूक होना होगा, हमे सुनिश्चित करना होगा कि इस विकास की कीमत हमारे लिये क्या होगी।

छात्रों ने 2,200 पेड़ों को काटने के खिलाफ किया प्रदर्शन (फोटो - नितिन)

आज जिस प्रकार से दून में विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है, वह दिन दूर नहीं जब हमारे शहर की हवा भी दिल्ली के जैसी प्रदूषित होगी। इसलिये हम सभी को समय रहते हुए इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।

(लेखक देहरादून स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं)

UTTARAKHAND
Dehradun
Disastrous Development
Save Trees
development
Uttarakhand government
Pushkar Singh Dhami
Save environment
Cutting trees

Related Stories

इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

देहरादून: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण ज़हरीली हवा में जीने को मजबूर ग्रामीण

उत्तराखंड के नेताओं ने कैसे अपने राज्य की नाज़ुक पारिस्थितिकी को चोट पहुंचाई

उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में वन गुर्जर महिलाओं के 'अधिकार' और उनकी नुमाइंदगी की जांच-पड़ताल

कार्टून क्लिक: पर्यावरण को दांव पर लगाकर पर्यावरणविद् का सम्मान!

उत्तराखंड: जलवायु परिवर्तन की वजह से लौटते मानसून ने मचाया क़हर

उत्तराखंड: बारिश ने तोड़े पिछले सारे रिकॉर्ड, जगह-जगह भूस्खलन से मुश्किल हालात, आई 2013 आपदा की याद

उत्तराखंड: विकास के नाम पर 16 घरों पर चला दिया बुलडोजर, ग्रामीणों ने कहा- नहीं चाहिए ऐसा ‘विकास’

उत्तराखंड: विकास के नाम पर विध्वंस की इबारत लिखतीं सरकारें


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन संकट, भारतीय छात्र और मानवीय सहायता
    01 Mar 2022
    यूक्रेन में संकट बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को छात्रों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य माध्यम से आज तत्काल कीव छोड़ने का सुझाव दिया है।
  • Satellites
    संदीपन तालुकदार
    चीन के री-डिज़ाइंड Long March-8 ने एक बार में 22 सेटेलाइट को ऑर्बिट में भेजा
    01 Mar 2022
    Long March-8 रॉकेट चीन की लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी की अकादमी में बना दूसरा रॉकेट है।
  • Earth's climate system
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: अब न चेते तो कोई मोहलत नहीं मिलेगी
    01 Mar 2022
    आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा है कि जलवायु परिवर्तन से आर्थिक दरार गहरी होगी, असमानता में इजाफ़ा होगा और ग़रीबी बढ़ेगी। खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे और श्रम व व्यापार का बाजार…
  • nehru modi
    डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रधानमंत्रियों के चुनावी भाषण: नेहरू से लेकर मोदी तक, किस स्तर पर आई भारतीय राजनीति 
    01 Mar 2022
    चुनाव प्रचार के 'न्यू लो' को पाताल की गहराइयों तक पहुंचता देखकर व्यथित था। अचानक जिज्ञासा हुई कि जाना जाए स्वतंत्रता बाद के हमारे पहले आम चुनावों में प्रचार का स्तर कैसा था और तबके प्रधानमंत्री अपनी…
  • रवि शंकर दुबे
    पूर्वांचल की जंग: यहां बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है सत्ता!
    01 Mar 2022
    यूपी में सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License