NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली : राशन को लेकर सरकारों के आपसी झगड़े में ग़रीबों के लिए क्या है?
दिल्ली की ग़रीब वर्ग के घर तक राशन पहुंचाने को लेकर केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच तकरार जारी है, मगर सवाल यह है कि काफ़ी देर से लागू हो रही इस योजना का जनता को कितना फ़ायदा मिल पाएगा?
मुकुंद झा
09 Jun 2021
दिल्ली : राशन को लेकर सरकारों के आपसी झगड़े में ग़रीबों के लिए क्या है?

आजकल दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सरकारी राशन को लेकर ठनी हुई है। दोनों ही सरकारें एक दूसरे पर गरीब विरोधी होने का ठप्पा लगा रही हैं और खुद को उनका हितैषी बता रही हैं। दिल्ली सरकार ने चुनाव के दौरान एक बड़ा वादा किया था कि वो गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से मिलने वाला राशन उनके घरों तक पहुंचाकर देगी जिसे वो कुछ महीने पहले लागू करने जा रही थी परंन्तु केंद्र ने उस पर आपत्ति जताई जिसके बाद उसमें कुछ संशोधन करके दिल्ली सरकार उसे दोबारा लेकर आई है। फिर दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर यानी उप राज्यपाल जो केंद्र के प्रतिनिधि हैं उन्होंने रोक दिया है। दिल्ली में सारी रार इसी को लेकर है। लेकिन इन सब में बड़ा सवाल यह है कि सरकारों के आपसी झगड़े में गरीबों के लिए भी कुछ है या ये बस एक नूरा कुश्ती है। क्योंकि दिल्ली में आज भी गरीब मज़दूर राशन के लिए परेशान हैं। क्या ये सरकारें उनकी समस्या का हल ढूंढ रही हैं या अपनी राजनैतिक रोटियां ग़रीबों की भूख की आग पर सेक रही हैं। सरकारों के वजूद में आने के छह और सात साल बाद भी गरीब को अपने हक़ के राशन के लिए बेइज़्ज़ती सहनी पड़ती है और धक्के खाने पड़ते हैं। सरकारों के वादे और योजनाएं गरीबों से दूर क्यों है? नई घोषणाओं में क्या बाधाएं हैं? गरीबों को सरकार की मंशा पर क्यों शक है? इन सभी सवालों के जवाब सरकारों ने आजतक तो दिए नहीं लेकिन सरकारों के झगड़े के बीच गरीब मज़दूरों के कुछ ज़रूरी सवाल हैं जिन्हें केजरीवाल और मोदी दोनों ही सरकारों से पूछे जाने की ज़रूरत है।

पहले बात करते हैं दिल्ली सरकार के द्वारा लाई गई नयी डोर स्टेप राशन योजना जिसके तहत वो गरीबों को उनके घर-घर राशन पहुँचाने का दावा कर रही है और वर्तमान व्यवस्था को लूट-तंत्र बताने पर तुली है। हालांकि पिछले छह साल से ये तंत्र उसी के अधीन है क्योंकि भले ही राशन देने की योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत केंद्र के पास है परन्तु राशन के वितरण तंत्र का संचालन दिल्ली सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन है। पहला सवाल तो यही जो विपक्ष उनसे पूछ भी रहा है अगर इस व्यवस्था में कोई गड़बड़ी है तो क्या उन्होने उस गड़बड़ी को पकड़ा और अगर पकड़ा तो क्या दोषियों को सज़ा दी? क्योंकि पिछले छह साल में शायद ही किसी राशन डीलर पर राशन देने में गड़बड़ी के लिए कार्यवाही या उसका लाइसेंस कैंसिल हुआ है। यह भी सच्चाई है कि इस दौरान शायद ही ऐसा कोई महीना होगा जहाँ राशन डीलरों ने ग़रीब मज़दूर को बिना परेशान किए राशन दिया हो या कहे नियमो के मुताबिक दुकाने खोलकर पूरा समय राशन दिया हो। जो बात खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री से लेकर सभी उनके पिछलग्गू नेता और मंत्री कह रहे हैं। इसलिए सवाल तो बनता है कि जब आप सब जान रहे थे तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दिल्ली में वर्तमान में सरकार के मुताबिक 72 लाख राशनकार्ड धारी हैं जिन्हें सरकारी राशन मिलता है। जबकि लाखों की तादाद में ऐसे भी लोग हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और वो प्रवासी मज़दूर और कामगार हैं। उनके लिए कोई व्यवस्था क्यों नहीं कर रही सरकार? जबकि हमने देखा है उनकी स्थति कितनी दयनीय है। इस महामारी में सबसे अधिक मार इन्हीं पर पड़ी है। न्यायालय की फटकार और आदेश के बाद इन सरकारों की अंतर्रात्मा जागी और इन्होंने इस महामारी के लिए सिर्फ दो महीने का मुफ़्त राशन देने का एलान किया। हालाँकि वो भी समय पर नहीं दिया। अब जब लॉकडाउन में ढील मिली रही है तब जाकर उन्हें राशन दिया जा रहा है। यानी ये मानिए दिल्ली में रह रहे प्रवासी मज़दूरों को कोरोना की दूसरी लहर से लगे लॉकडाउन के शुरुआती 50 दिनों तक कोई राहत नहीं मिली। दिल्ली में जनता कर्फ्यू 17 अप्रैल 2021 व संपूर्ण लॉकडाउन 19 अप्रैल से है। जबकि राशन चंद रोज़ पहले 5 जून से देना शुरू किया गया है। अब कथित तौर पर खुद को देश की सबसे क्रांतिकारी सरकार का दावा करने वाली केजरीवाल सरकार की मंशा पर मज़दूरों को विश्वास कैसी हो क्योंकि अभी भी प्रवासी मज़दूरों को जो राशन दिया जा रहा है उसमे सिर्फ गेहूं और चावल ही है वो भी प्रवासी मज़दूरों को अपना आत्मसम्मान खोकर सरकारी ठोकरें खाने के कई दिनों बाद मिल रहा है जबकि सरकारी गोदामों में राशन भरा पड़ा है। उत्तर-पूर्वी लोकसभा के करावल नगर विधान सभा में दिल्ली सरकार ने सभापुर के एक सरकारी स्कूल को राशन सेंटर बनाया है जहाँ मज़दूर राशन लेने के लिए इस महामारी के बीच सुबह पांच बजे से इस आस में लाइन लगते हैं कि उन्हें  राशन मिल जाएगा परन्तु कुछ चंद क़िस्मत वाले ही दिल्ली सरकार का राशन प्राप्त कर पाते हैं क्योंकि एक दिन में केवल यहाँ 100 लोगों को राशन दिया जा रहा है जबकि राशन लेने वाले हज़ारो की संख्या में हैं। राशन के लिए पिछले कई दिनों से धक्के खा रहे एक कोचिंग टीचर ने न्यूज़क्लिक से बात की लेकिन उन्होंने नाम नहीं बताने को कहा क्योंकि उन्हें लगता है इससे उनका समाज में औदा कम हो जाएगा और उनके छात्र उनका मज़ाक बनाएंगे। राजेश(उनका बदला हुआ नाम) वो तक़रीबन तीन किलोमीटर चलकर यहां राशन की लाइन में पांच जून से ही लग रहे हैं लेकिन उन्हें आजतक राशन नसीब नहीं हुआ क्योंकि कभी राशन ख़त्म हो जाता है तो कभी उन्हें टोकन नहीं मिल पाता है।

उन्होंने एक वाजिब सवाल केजरीवाल सरकार से पूछा कि जब वोट के लिए व्यवस्था उनके घर के पास हो जाती है और एक ही इलाके में दस-बीस सेंटर खुल जाते हैं तब राशन के लिए एक वार्ड में सिर्फ एक ही केंद्र क्यों बनाया गया है?

आपको बता दें दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सभी वार्डो में एक-एक राशन केंद्र बनाया है जहाँ वो बिना राशन कार्ड वाले गरीबो को राशन दे रही है।

ऐसे कितने ही लोग इस भीषण गर्मी में घंटो खड़े रहकर राशन ले रहे हैं लेकिन सरकार तो केवल टीवी पर बहस में व्यस्त है। यह योजना तो पूरी तरह से दिल्ली सरकार की है अगर उन्हें गरीबो की चिंता है तो इस राशन को वो क्यों नहीं घर-घर पहुंचा रही है। इससे ये भी पता चल जाता कि सरकार की यह घर-घर राशन वाली योजना कितनी सफल है। खैर ये भी नहीं तो कम से कम राशन केंद्र ही बढ़ा देते जिससे मज़दूरो को राशन लेने में आसानी होती लेकिन दिल्ली सरकार भी ज़मीन पर कम टीवी और मीडिया के लिए अधिक काम करती दिख रही है।

अब सरकार के राशन होमडिलिवरी वाले मसले पर आते हैं। दिल्ली सरकार के मुताबिक़ वो घर-घर राशन पहुँचाएगी और सही कार्डधारक को राशन मिला या नहीं इसके लिए वो उनका बायोमैट्रिक लेगी। लेकिन हमें भी पता है इसमें कितनी समस्या है। हमने कई राज्यों में देखा है इस बायोमैट्रिक सिस्टम की वजह से कितने ही लोगों को राशन नहीं मिल पाता है। यही वजह थी खुद दिल्ली सरकार ने भी केंद्र सरकार के ई-पीओएस (इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) को कुछ महीने के लिए लागू किया था परन्तु बायोमैट्रिक लेने में हो रही समस्या की वजह से इसे हटा दिया था क्योंकि यह इंटरनेट से चलता है तो इसमें कई बार गड़बड़िया भी होती हैं। अब बड़ा सवाल है कि जिन दिक्कतों की वजह से इसे हटाया गया था फिर उसे वापस लाने का क्या मतलब है?

दूसरा अभी नियम के मुताबिक़ राशन पूरे महीने मिलता है और व्यक्ति अपनी सहूलियत के हिसाब से ले आता है। लेकिन अब इस होमडिलवरी सिस्टम में उसे घर में इंतज़ार करना होगा कि पता नहीं कब राशन आ जाए। ऐसे में उन गरीब कामगारों को समस्या होगी जिनके घर में मियां बीवी दोनों काम करने जाते हैं और अगर इस बीच राशन आ जाए तो कौन लेगा? इस तरह के सवालों को लेकर भी मज़दूर बस्तियों में चर्चा है क्योंकि अधिकतर गरीब मज़दूरों में मियां-बीवीओ दोनों काम करने जाते हैं।  

अब केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से जन वितरण प्रणाली में ई-पीओएस उपकरणों का इस्तेमाल जल्द से जल्द चालू करने को कहा ताकि राष्ट्रीय राजधानी के करीब 10 लाख प्रवासी राशन कार्ड धारकों को दिल्ली सरकार से अपने खाद्यान्न का कोटा हासिल करने में मदद मिले। लेकिन यहाँ भी वही सवाल की क्या यह मज़दूरों की भलाई के लिए है या ये भी राजनीति है?

दिल्ली सरकार ने ई-पीओएस (इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) प्रणाली के ज़रिए राशन के वितरण पर अप्रैल 2018 में अस्थायी रोक लगा दी थी। क्योंकि इसमें कई तरह की समस्या थी।  

दिल्ली सरकार को लिखे एक पत्र में केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि ई-पीओएस मशीनें न केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसए) के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्नों के पारदर्शी वितरण के लिए बल्कि एक देश एक राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के कार्यान्वयन के लिए भी ज़रूरी हैं।

ओएनओआरसी प्रौद्योगिकी आधारित सुविधा है और इसके लिए राशन की दुकान पर ई-पीओएस उपकरण का प्रयोग जरूरी होता है। पांडे ने कहा कि इसके बिना प्रवासी श्रमिकों के लिए एक देश एक राशन कार्ड सुविधा का लाभ पहुंचाने में बाधा आ रही है।

उन्होंने कहा कि उनका विभाग दिल्ली सरकार को हर ज़रूरी तकनीकी सहयोग देने को तैयार है। इस तरह की सुविधा से दिल्ली के राशनकार्ड धारकों को दूसरे प्रदेश में राशन प्राप्त करने की सुविधा भी होगी। उन्होंने बताया कि ‘मेरा राशन’ मोबाइल ऐप इस समय दस भाषाओं में सुलभ है। इससे दिल्ली के नागरिकों को अपना राशन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

लेकिन इस व्यवस्था में खुद में ही कमी है क्योंकि लोगों द्वारा देश भर से शिकायत आती हैं कि बायोमैट्रिक न मिलने की वजह से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। ऐसे में इसे लागू करना मज़दूर और गरीबों के लिए एक और मुश्किल का सबब बन जाएगा।

Lockdown
COVID-19
Delhi
Ration distribution
Arvind Kejriwal
AAP Govt
narndra modi
BJP Govt
Migrant workers
Delhi’s doorstep ration delivery scheme

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License