NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली चुनाव : भाजपा ने इसे मोदी और संघ की विचारधारा पर जनमत-संग्रह में बदल दिया है
भाजपा ने अपने अभियान में दिल्ली की जनता के ज़हन में भरने यह भरने में लगी है कि भारत का संघी दृष्टिकोण क्या है और मोदी सरकार ने उसे कैसे लागू किया है।
सुबोध वर्मा
08 Feb 2020
Translated by महेश कुमार
BJP-RSS

दिल्ली विधानसभा के लिए कटु और भड़काऊ चुनाव प्रचार के अंतिम दिन, दिल्ली के कई इलाक़ों के  घरों में दैनिक अख़बार की तह में लिपटा एक पर्चा मिला जिसमें केजरीवाल को मुस्लिम टोपी पहने हुए दिखाया गया है और वे नमाज़ अदा कर रहे हैं। ख़बरों के अनुसार, इसे किसी "मुस्लिम" द्वारा जारी किया गया है। दिल्ली में भाजपा के ज़मीनी अभियान का यह ख़ास हिस्सा है जिसमें न केवल केजरीवाल को "देशद्रोहियों" के साथ खड़ा दिखाया जा रहा है बल्कि पूरे समुदाय को बलात्कारी और ठग के रूप में पेश किया जा रहा है। इसके दूसरी तरफ़ लोकसभा में, बीजेपी के एक युवा और उभरते सितारे ने कहा कि अगर आज देशभक्त भारतीय शाहीन बाग़ के ख़िलाफ़ खड़े नहीं होते हैं, तो दिल्ली में "मुग़ल राज की वापसी के दिन बहुत दूर नहीं हैं।" और एक अन्य मंत्री, गिरिराज सिंह ने कहा कि शाहीन बाग़ में  "आत्मघाती हमलावरों के जत्थे तैयार किए जा रहे है।"

यह सब अतुल्य और भयंकर लग सकता है लेकिन पिछले दो हफ़्तों से दिल्ली के हतप्रभ निवासियों को यही सब तेज़ी से परोसा जा रहा है। इस बारे में बहुत कुछ लिखा गया है कि कैसे अपने शानदार चुनाव रणनीतिकारों के साथ अजेय भाजपा को एक केंद्र शासित प्रदेश को जीतने के लिए इतना क्यों गिरना पड़ रहा है फिर भले ही वह राजधानी ही क्यों न हो। लेकिन, इसका एक और पहलू है, जो चुनावी रणनीतियों की नज़रों से परे है।

दो विचारों की लड़ाई 

भाजपा के दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति और गृह मंत्री अमित शाह ने ख़ुद ही इस लड़ाई को दो विचारधाराओं के बीच की चुनावी लड़ाई करार देकर दांव को ऊंचा कर दिया है। उन्होंने निश्चित रूप से इसे उन लोगों के बीच एक लड़ाई बना दिया जिन्होंने पाकिस्तान को उनकी मांद में हरा दिया/हमला किया, और वे लोग जो आज शाहीन बाग़ के साथ खड़े हैं।

उनके कहने का मतलब यह है: कि भाजपा ने आक्रामक हिंदूवाद के नाम की पहचान को काफ़ी अच्छे ढंग से दुश्मन पाकिस्तान पर हमला करके प्रदर्शित किया है, जबकि ‘आप’ और कांग्रेस शाहीन बाग़ में सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध का समर्थन कर रहे हैं, जिसे विभिन्न तरीक़ों से देशद्रोहियों के गढ़ के रूप वर्णित किया गया है (ज़्यादातर मुस्लिम महिलाएं), और दिल्ली के ही एक सांसद परवेश वर्मा ने कहा की ये लोग आपके घरों में घुसेंगे और आपकी बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे और आपका क़त्ल कर देंगे, और शाहीन बाग़ को आत्मघाती हमलावरों का एक केंद्र करार दिया। उनके अनुसार, भाजपा हिंदुओं की आत्मा है, और ‘आप’ हिंदुओं की दुश्मन है, और मुसलमानों की आत्मा।

आरएसएस की यह सोच, शुद्ध और बेमेल है। वे भारत को हिंदुओं की धरती और अल्पसंख्यकों को देशद्रोही के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि हिंदू ताक़त और उनकी एकता ही आगे बढ़ने का रास्ता है। और मोदी सरकार, ख़ासकर अपने दूसरे कार्यकाल में, संघ की पुरानी ख़ुराक पर है। दूरगामी बदलावों की एक श्रृंखला ये दिखाती हैं कि वे सभी आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित हैं – इस विचारधारा के तहत ही: धारा 370, तीन तलाक़, सीएए और एनआरसी को लाया गया है। उन्हें लगता है कि उन्हें जो जनादेश मिला है वह हिंदू राष्ट्र के लिए है!

लेकिन दिल्ली चुनाव में, भाजपा/आरएसएस को एक ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ा जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। दिल्ली में एक ऐसी सरकार है जिसके पास सीमित ताक़त है, और वह अपने द्वारा किए गए विभिन्न और विविध कल्याणकारी उपायों के कारण बहुत लोकप्रिय है। यह सरकार काफ़ी हद तक ईमानदार और साफ सुथरी भी दिखाई देती है। इसे लोगों के साथ चलने वाली सरकार के रूप में देखा जाता है न कि बड़ी अमीर (सुपर-रिच) क्रोनियों के साथ चलने वाली माना जाता है।

भाजपा/आरएसएस ने सोचा था कि उनकी अहंकारी और अंधकारवादी हिंदुत्व पर आधारित अस्पष्ट अपील इस सारे लोकलुभावनवाद को धो देगी क्योंकि उनकी सोच के अनुसार ये मध्ययुगीन विचार आर्थिक संकट और सब्ज़ियों की क़ीमतों के नीरस मुद्दों से बेहतर हैं। वे इसी तरह की समझ से देश के आर्थिक संकट से निबटने की कोशिश कर रहे हैं, उन्होंने सोचा कि यह सोच दिल्ली में भी काम आ जाएगी।

इस समझ ने न तो देश के बाक़ी हिस्सों में काम किया है, न ही यह दिल्ली में काम कर रही है। दिसंबर 2018 से भाजपा ने कई राज्यों में अपनी सरकारों को खो दिया है। उन्हे आरएसएस से प्रेरित नीतियों के ख़िलाफ़ देश भर में मुखर और निरंतर विरोधों का सामना करना पड़ रहा है। इसे श्रमिकों और किसानों की बड़ी हड़तालों का सामना करना पड़ा है। फिर भी उन्हें लगता है कि कुछ “देशद्रोही” लोगों को “गुमराह” कर रहे हैं। वरना सब कुछ ठीक है!

यह संघ के विचारों पर जनमतसंग्रह है 

इस प्रकार दिल्ली चुनाव को दोहरे जनमत संग्रह में बदल दिया गया है। एक ओर, मोदी और उनकी सरकार द्वारा लागू की गई आरएसएस की विचारधारा है। दूसरी तरफ लोगों के कल्याण का विरोधी विचार है। यह विरोधी विचार पूर्ण रूप से विकसित विचारधारा नहीं है और न ही ये किसी भी तरह से सबसे अच्छा विचार है जिसका सहारा लिया गया है। लेकिन जो है सो है।

इसके साथ, दिल्ली चुनाव, चुनावों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना बन जाती है। बीजेपी की हार, जो साफ़ तौर पर नज़र आ रही है, वह इस विचार को मानने से इनकार करती है कि हिंदू-मुस्लिम विरोधाभास और पाकिस्तान देश के शीर्ष मुद्दे हैं। भाजपा की हार समाज में कलह और हिंसा पैदा करने वाले आग लगाने के प्रयासों की अस्वीकृति भी होगी। यह न केवल समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करेगी, बल्कि भविष्य में हर दृष्टिकोण में लोगों के कल्याण की सर्वोच्चता पर ज़ोर देगी। 

11 फ़रवरी को वोटों की गिनती के साथ ही अमित शाह द्वारा लगाए गए दांव और उनके सवालों का जवाब दिया जाएगा। पूरे देश को नतीजों का इंतज़ार रहेगा।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Delhi Elections: BJP Made This Into Referendum on Modi & RSS Ideology

Delhi Elections
BJP
AAP
Congress
RSS
Amit Shah
Narendra modi
Parvesh Verma
giriraj singh
Communalism
polarisation

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • देश बचाने की लड़ाई में किसान-आंदोलन आज जनता की सबसे बड़ी आशा है।
    लाल बहादुर सिंह
    देश बचाने की लड़ाई में किसान-आंदोलन आज जनता की सबसे बड़ी आशा है
    10 Sep 2021
    किसान-आन्दोलन ने न सिर्फ आज़ादी की लड़ाई की बलिदानी परम्परा, उसके नारों की याद ताजा कर दी है वरन आज़ादी के लड़ाई के महान मूल्यों को भी पुनर्जीवित कर दिया है।
  • अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल के अमेरिकी युद्ध के बाद अब आगे क्या?
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल के अमेरिकी युद्ध के बाद अब आगे क्या?
    10 Sep 2021
    अनातोल लिवेन ने अफ़ग़ानिस्तान, चेचन्या और दक्षिणी काकेशस में हुए युद्धों को कवर किया है। अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे घटनाक्रम को लेकर अमेरिकी विरासत और तालिबान के उदय पर लिवेन के विचार यहां प्रस्तुत हैं।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों की SDM पर कार्यवाही की मांग, सिलेंडर की क़ीमतों की वृद्धि डबल
    09 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी करनाल में तीसरे दिन भी किसानो का प्रदर्शन पर, साथ ही हम देखेंगे किस प्रकार 150 से अधिक की संख्या में प्रख्यात नागरिकों ने कवि-गीतकार जावेद अख्तर और…
  • कोर्ट की दखल के बाद सरकार ने NDA में लड़कियों की भर्ती का रास्ता किया साफ़, लेकिन जीत अभी भी अधूरी!
    सोनिया यादव
    कोर्ट की दखल के बाद सरकार ने NDA में लड़कियों की भर्ती का रास्ता किया साफ़, लेकिन जीत अभी भी अधूरी!
    09 Sep 2021
    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महिलाएं नेशनल डिफेंस एकेडमी में दाख़िला ले सकती हैं और वो स्थायी कमिशन के लिए पात्र होंगी। सरकार ने एननडीए के साथ-साथ इंडियन नेवल एकेडमी में भी लड़कियों की…
  • नई MSP घोषणा: गेहूं की बाल में गेहूं का दाना ही नहीं 
    अजय कुमार
    नई MSP घोषणा: गेहूं की बाल में गेहूं का दाना ही नहीं 
    09 Sep 2021
    आशा किसान स्वराज के अध्यक्ष किरन विस्सा ने सरकार द्वारा जारी एमएसपी का हिसाब-किताब लगाकर बताया है कि पिछले साल के मुकाबले गेहूं की एमएसपी पर केवल 2% की वृद्धि की गई है। जो पिछले 12 सालों में सबसे कम…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License