NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
लॉकडाउन में भी महिलाओं, बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा बढ़ी, दिल्ली हाईकोर्ट सख़्त, तत्काल कार्रवाई के आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े हुए सभी पक्षों से कहा कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कैंपेन चलाएं। इसके अलावा ज़रूरत पड़ने पर वह पीड़ितों तक जल्द से जल्द मदद भी मुहैया करवाएं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Apr 2020
Image Courtesy:  Scroll

‘लॉकडाउन के चलते महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा-उत्पीड़न के मामलों की कार्रवाई में कोई व्यवधान न हो।’

ये टिप्पणी दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन में बढ़ती घरेलू हिंसा और बाल उत्पीड़न के संदर्भ में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसे मामलों को रिपोर्ट करने के लिए हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप नंबर जारी किए जाएं साथ ही उनका प्रचार-प्रसार भी अच्छे से हो।

क्या है पूरा मामला?

लॉकडाउन के चलते देश-विदेश में घरेलू हिंसा और बाल उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। संयुक्त राष्ट्र सचिव से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग तक इस मुद्दे की गंभीरता को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

इसे पढ़ें : लॉकडाउन के चलते घरेलू हिंसा के मामले बढ़े, महिला उत्पीड़न में यूपी सबसे आगे

इसे पढ़ें : कोरोना संकट के बीच दुनियाभर में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले

इसी सिलसिले में गैर सरकारी संगठन ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स, लिबर्टीइस एंड सोशल जस्टिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा गया था कि ऐसी रिपोर्ट सामने आ रही है जिससे पता चलता है कि लॉकडाउन के चलते महिलाओं और बच्चों के साथ उत्पीड़न/हिंसा की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

इसे पढ़ें : लॉकडाउन में बच्चों पर बढ़े अत्याचार के मामले हमारे सामाजिक पतन की कहानी बयां कर रहे हैं

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े हुए सभी पक्षों जिसमें केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय महिला आयोग, दिल्ली महिला आयोग, केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार शामिल हैं से कहा कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कैंपेन चलाएं। साथ ही मदद के लिए जरूरी हेल्पलाइन नंबर जारी करें, जो हर समय कार्यात्मक हों और इन्हें मैनज करने के लिए कुशल लोगों को लगाया जाए, जो शिकायतकर्ता की परेशानी समझ कर उसकी सही काउंसलिंग कर सके।

हाईकोर्ट के  मुख्य न्यायधीश जस्टीस डीएन पटेल और सी हरिशंकर की बेंच ने निर्देश दिया कि सभी पक्ष ये भी सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों की अगर कोई शिकायत या कोई रिपोर्ट सामने आती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में प्रोटेक्शन ऑफिसर की नियुक्तियां हो, जो यह सुनिश्चित करें कि जरूरत पड़ने पर वह पीड़ितों तक जल्द से जल्द मदद मुहैया करवाएंगे। कोर्ट के अनुसार अगर मौजूदा वक्त में प्रोटेक्शन ऑफिसर की कमी है तो अस्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति की जाए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के उत्पीड़न को रोकने के लिए यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लॉकडाउन के दौरान अगर कोई शिकायत मिलती है तो प्रोटेक्शन ऑफिसर को एक जगह से दूसरी जगह तक जाने में कोई दिक्कत ना आए, जिससे पीड़ित तक तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

संबंधित पक्षों ने कोर्ट में क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले हिंसा/उत्पीड़न की घटनाओं और अपराध को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आधिकारिक तौर पर पहले से ही हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप नंबर भी जारी किये जा चुके हैं, जिस पर शिकायतकर्ता अपनी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 7217735372 का हेल्पलाइन नंबर जारी किया है तो वहीं दिल्ली महिला आयोग ने ऐसी शिकायतों के लिए 9350181181 जारी किया हुआ है। इसी तरह से दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी ने हेल्पलाइन नंबर 1516 और व्हाट्सएप नंबर पर शिकायत भेजने के लिए 9667992802 जारी कर रखा है।

सभी पक्षों ने कोर्ट को यह भी बताया कि शिकायतकर्ता और पीड़ितों की काउंसलिंग के लिए भी अलग-अलग एनजीओ काम कर रहे हैं। जिससे कि लॉकडाउन के इन हालात में महिला और बाल उत्पीड़न/हिंसा और उनसे जुड़े हुए शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा किया जा सके और उचित कार्रवाई की जा सके।

बता दें कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने देशव्यापी बंद से पहले और बाद के 25 दिनों में विभिन्न शहरों से मिली शिकायतों के आधार पर दावा किया है कि लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामले लगभग दोगुना हो गए हैं। आयोग ने इस साल 27 फरवरी से 22 मार्च के बीच और लॉकडाउन के दौरान 23 मार्च से 16 अप्रैल के बीच मिली शिकायतों की तुलना के बाद आंकड़े जारी किए।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बंद से पहले महिला आयोग को 123 शिकायतों मिली थीं जबकि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन व अन्य माध्यमों से घरेलू उत्पीड़न के 239 मामले दर्ज कराए गए।

 जानकारों का क्या कहना है?

दिल्ली हाईकोर्ट में वकिल आर्षी जैन कहती हैं, “कोर्ट के आदेश के बाद निश्चित ही सभी संस्थाओं में ऐसे मामलों के प्रति एक गंभीरता आएगी। इसके साथ ही उनकी जवाबदेही भी बढ़ेगी। लॉकडाउन की तमाम खबरों के बीच अभी तक घरेलू हिंसा या बाल उत्पीड़न के मामलों की ज्यादा जागरूकता नहीं है, शायद लोग अभी तक इसे सामान्य ही ले रहे हैं, लेकिन अब कोर्ट की दखलअंदाज़ी के बाद हम कुछ साकारात्मक उम्मीद कर सकते हैं।”

इसे भी पढ़ें : कैसे बच्चों को कोविड के अदृष्य प्रभाव से बचाएं? 

समाजिक कार्यकर्ता आस्था सिंह कहती हैं, “वास्तव में जो मामले इस समय रिपोर्ट हो रहे हैं, उनसे कहीं ज्यादा संख्या उन मामलों की है जो सामने ही नहीं आते। अगर आप पीड़ित महिला की दृष्टि से देखेंगे तो आप समझ सकते हैं कि इस समय उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती घर से बाहर निकलने की है। कई महिलाओं में ये भी डर होता है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद उनके साथ घर में क्या बर्ताव होगा, इस लॉकडाउन में वो कहां जाएंगी?”

आस्था आगे बताती हैं कि हमारे समाज में पितृसत्ता सोच आज भी घरों में हावी है। मर्दानगी के नाम पर लड़कों को मजबूत बनने, गुस्सा करने, हिंसक होने, खुद को लड़कियों से बेहतर मानने की सीख उन्हें घरों से ही मिलती है, जिसका खामियाज़ा परिवार में औरतों को भुगतना पड़ता है। घरेलू हिंसा के आंकड़ों में इजाफा इस बात का सबूत है कि लॉकडाउन में मर्दो का सारा गुस्सा और डर महिलाओं पर ही निकल रहा है।

 विदेशों में क्या हालात हैं?

दुनिया भर में कोरोना वायरस के चलते कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जहां लोग घरों में कैद हैं तो वहीं तेज़ी से बढ़ते प्रदूषण के स्तर की रफ्तार पर कुछ समय के लिए रोक लग गई है। आर्थिक जगत के मुनाफे के पहिए थम गए हैं लेकिन अफसोस इस महामारी में भी समाज के महिला विरोधी सोच और व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। कोरोना का कहर महिलाओं के सामने दोहरी चुनौती लेकर आया है। आधी आबादी के सामने सिर्फ बीमारी का खौफ ही नहीं बल्कि घरों में अपना मान-सम्मान और अस्तित्व खोने का भी डर है।

संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था यूएन पॉपुलेशन फंड के मुताबिक दुनिया भर में घरेलू हिंसा के मामलों में 20% तक की बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। फंड एक्जिक्यूटिव नतालिया कानेम के मुताबिक भविष्य में ये मामले बढ़कर 15 मिलियन तक हो सकते हैं।

गार्जियन के मुताबिक ब्रिटेन के हाउस ऑफ़ कॉमंस में भी चर्चा के दौरान सामने आया है कि पहले के मुकाबले लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतों में 50% तक का इजाफा हो गया है। हालात ये हैं कि डोमेस्टिक वॉयलेंस के मामलों में रोजाना औसत 100 गिरफ्तारियां भी हो रहीं हैं।

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी सामने आया है कि बीते 3 महीनों में लॉक डाउन के दौरान ये हिंसा तेजी से बढ़ी है और महिलाओं और बच्चों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है। इस साल के अंत तक दुनिया भर से घरेलू हिंसा के 1.5 करोड़ मामले सामने आ सकते हैं।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव द्वारा अपील की गई है कि भारत सहित दुनिया के सभी राष्ट्रों को कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए अपने कार्ययोजना में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की रोकथाम व उसके निवारण के उपायों को शामिल किया जाना चाहिए। भारत में इस दिशा में राष्ट्रीय महिला आयोग ने पहल करते हुए घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए गैर-सरकारी संगठनों की एक टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। लेकिन इस दिशा में अभी भी केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तत्काल बड़े और ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।

novel coronavirus
Lockdown in World
India Lockdown
Domestic Violence
ncw
DCW
Ministry of Women and Child Development
Delhi High court

Related Stories

नौसेना लीक मामला: सीबीआई ने नौसेना के दो कमांडर के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल किया

गोवाः घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी लेकिन आंकड़े शून्य!

अकेले ड्राइविंग करते हुए भी मास्क पहनना अनिवार्य है : दिल्ली उच्च न्यायालय

उत्तराखंड: लॉकडाउन में भी नहीं थमे बलात्कार के मामले, हरिद्वार की बेटी की मौत पर ग़म और गुस्सा

पांच राज्यों में 30 फीसदी से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार

‘मीटू’ के बाद जुलाई में मिलीं महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की सर्वाधिक शिकायतें, उत्पीड़न में यूपी सबसे आगे

लॉकडाउन में बच्चों पर बढ़े अत्याचार के मामले हमारे सामाजिक पतन की कहानी बयां कर रहे हैं

लॉकडाउन के बीच भी नहीं थम रही यौन हिंसा, ललितपुर में नाबालिग़ से दुष्कर्म की कोशिश

झारखंडः लॉकडाउन के दौरान घर लौट रही छात्रा के साथ दस लड़कों ने किया गैंगरेप

दिल्ली हिंसा: संसद में चर्चा को लेकर गतिरोध तीसरे दिन भी जारी


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की लड़ाई जीतने के लिए UP-बिहार जैसे राज्यों में शक्ति-संतुलन बदलना होगा
    15 Dec 2021
    किसान इस बात को समझ गए हैं कि MSP उनका जायज हक है, यह बात अब पूरे देश के किसानों की अनुभूति का हिस्सा बन गयी है। और जैसा मार्क्स ने कहा, कोई विचार जब जनगण की अनुभूति बन जाता है तो वह एक Material…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    लखीमपुर हत्याकांड पर SIT की रिपोर्ट, योगी की मुफ़्त राशन योजना पर सवाल और अन्य ख़बरें
    14 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी लखीमपुर हत्याकांड पर SIT की रिपोर्ट, योगी की मुफ़्त राशन योजना और अन्य ख़बरों पर।
  • gorakhpur university
    सत्येन्द्र सार्थक
    अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़
    14 Dec 2021
    दीनदयाल गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के अंदर प्री पीएचडी छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कमलकांत ने कहा- इससे पहले हम सात बार प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन हमारी माँगें मानने की बजाय बातचीत…
  • Nagaland
    स्मृति कोप्पिकर
    कुन्नूर से नागालैंड: दो अंत्येष्टि, योग्य और अयोग्य पीड़ित
    14 Dec 2021
    मीडिया और अभिजात्य वर्ग ने नागालैंड में हत्याओं से मुंह मोड़ लिया, एक बार फिर उस चयनात्मकता को प्रदर्शित किया जिससे घटनाएं आम लोगों के सामने परोसी जाती हैं।
  • Brigadier's daughter
    रवि शंकर दुबे
    मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल
    14 Dec 2021
    भक्तों के चंगुल में फंसकर कुछ दिनों पहले ब्रिगेडियर एल एस लिड्डर की बेटी ट्रोल हो गई थीं…जिससे परेशान होकर उन्हें अपना ट्वीटर अकाउंट डिलीट करना पड़ा गया था।  लिड्डर की बेटी का गुनाह सिर्फ इतना था कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License