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भारत
राजनीति
दिल्ली : केजरीवाल सरकार राशन कार्ड को लेकर दे रही है विरोधाभासी आंकड़ें
दिल्ली सरकार ने दावा किया कि उसने 2016-2018 तक राशन कार्ड के किसी आवेदन को मंजूरी नहीं दी, लेकिन यह आरटीआई के तहत हासिल की गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 में 8,351 आवेदन मंज़ूर किये गए और 2018 में इनकी संख्या 31,688 थी जबकि 2019 और 2020 में स्वीकृत आवेदनों की संख्या क्रमश: 36,158 और 11,965 है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Dec 2020
केजरीवाल

दिल्ली: दिल्ली में राशन कार्ड की समस्या बहुत गंभीर है पिछले कई सालों से लोगो का आरोप रहा है कि केजरीवाल सरकार नए राशन कार्ड बना नहीं रही है। इसको ही लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में यचिका दायर की गई है ,उसपर सुनवाई के दौरान बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने दावा किया कि उसने 2016-2018 तक राशन कार्ड के किसी आवेदन को मंजूरी नहीं दी, लेकिन यह सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत हासिल की गई जानकारी के विरोधाभासी है जिसमें संकेत मिलता है कि इस अवधि के दौरान हजारों आवेदन मंज़ूर किये गए। इन्ही आकड़ों में अब केजरीवाल सरकार फंसती दिख रही है।

दिल्ली सरकार ने न्यायमूर्ति नवीन चावला के समक्ष दो महिलाओं की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह प्रतिवेदन दिया। याचिकाओं में महिलाओं ने रियायती खाद्यान्न प्राप्त करने के लिये उन्हें राशन कार्ड जारी करने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय को बताया कि आरटीआई के तहत प्राप्त की गई सूचना के मुताबिक वर्ष 2017 में 8,351 आवेदन मंज़ूर किये गए और 2018 में इनकी संख्या 31,688 थी जबकि 2019 और 2020 में स्वीकृत आवेदनों की संख्या क्रमश: 36,158 और 11,965 है।

दिल्ली सरकार द्वारा अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल के जरिये दायर की गई स्थिति रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत दिल्ली को आवंटित 72.77 लाख राशन कार्डों की अधिकतम सीमा 2016 में ही पूरी हो गई थी और उसके बाद 2018 तक किसी भी आवेदन को मंज़ूर नहीं किया गया।

दिल्ली सरकार द्वारा शहर में राशन कार्ड आवेदनों के लंबित होने के पीछे 2018 और 2019 में कर्मचारियों की भीषण कमी और उसके बाद 2019 और 2020 में क्रमश: आम चुनावों व विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों की तैनाती को इसकी वजह बताया गया और इस साल सरकार ने उनके कोविड-19 संबंधी ड्यूटी में व्यस्त होने का हवाला दिया।

दोनों महिलाओं की तरफ से पेश हुए वकील तुषार सान्नू दहिया ने हालांकि अदालत को बताया कि आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने इस दौरान हजारों आवेदन स्वीकृत किये हैं।

अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 18 जनवरी 2021 को तय की है।

राशन कार्ड को लेकर वाम दल ने कई बार दिल्ली में प्रदर्शन भी किया है। सीपीएम उत्तर -पूर्वी दिल्ली जो दिल्ली में प्रवासी मज़दूरों के गढ़ के तौर पर स्थापित हुआ है ,वहाँ के स्थानीय नेता फुलकान्त मिश्रा ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा दिल्ली में बड़ी संख्या में परवशी मज़दूर रहते है जिनके लिए आज भी राशन कार्ड दूर की कौड़ी है। जिसकी वजह से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिल पात है अन्य सरकारी सुविधा से भी वो वंचित रहते है। इसका बड़ा उदाहरण हमे कोरोना महामारी के दौरान दिखा जहाँ राशन कार्ड न होने की वजह से लोगो के सामने भोजन का संकट आ गया था ,जिस कारण हज़ारों मज़दूर पैदल ही अपने मूल स्थान की ओर चल दिए थे। उस दौरान सरकार ने बड़ी संख्या में तात्कालिक राशन कूपन मुहैया कराया लेकिन वो केवल तीन महीने के लिए ही वैलिड था।

उन्होंने केजरीवाल सरकार पर कई गभींर आरोप लगाए और कहा इस सरकार ने अपने कार्यकाल में राशन व्यवस्था को मज़बूत करने का वादा किया था लेकिन आज के समय में राशन कार्ड बनाना दूर की कौड़ी है। उन्होंने सरकार के उस दावे का भी जवाब दिया जिसमे सरकार ने कहा कि उसने 2016 के बाद से कोई राशन कार्ड की एप्लिकेशन मंजूर नहीं की है.  

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Arvind Kejriwal
Kejriwal government
AAP
Ration card scam
RTI
National Food Security Act
NFSA

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