NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली लॉकडाउन : रेहड़ी-पटरी वालों के पिछले साल से भी बदतर हालात
जैसे-जैसे उनके जीवन में आर्थिक अनिश्चितता फिर से बढ़ रही है, पीएम-स्वनिधि योजना के तहत मिलने वाले वर्किंग कैपिटल लोन को "एकमुश्त नक़द सहायता" के रूप में देने की मांग भी तेज़ हो रही है।
रौनक छाबड़ा
06 May 2021
दिल्ली लॉकडाउन : रेहड़ी-पटरी वालों के पिछले साल से भी बदतर हालात

राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिनकी वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी उजागर हो रही है। ऐसे में लॉकडाउन लागू करना ज़रूरी हुआ है, इस बीच 55 साल के प्रवीण कुमार बेहद चिंतित हैं।

पिछले साल जब अचानक से 25 मार्च को देश्वयापी लॉकडाउन का ऐलान हुआ था, तो दिल्ली के लोटस टेम्पल के पास कोल्ड ड्रिंक का ठेला लगाने वाले स्ट्रीट वेंडर कुमार की ज़िंदगी ही पलट गई थी। अक्टूबर में जब रेहड़ी-पटरी वालों का का फिर से शुरू हुआ, तब उन्हें स्थिति बेहतर होने की थोड़ी सी उम्मीद मिली। हालांकि, इस साल उनकी उम्मीदों पर फिर से पानी फिर गया है और वह आर्थिक स्थिति की अनिश्चितता में जी रहे हैं।

निराश हो चुके कुमार ने न्यूज़क्लिक से फ़ोन पर बात करते हुए कहा, "2 हफ़्ते से ज़्यादा हो गए हैं और मैंने एक पैसा भी नहीं कमाया है।" दिल्ली में 19 अप्रैल से लॉकडाउन लगा हुआ है क्योंकि आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार मामलों को रोकने में असमर्थ नज़र आ रहे हैं।

रविवार को 30% से कुछ ऊपर के पॉजिटिविटी रेत के मद्देनज़र मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दूसरी बार लॉकडाउन को बढ़ा दिया था।

वायरस की वजह से लगे इस लॉकडाउन ने कुमार जैसे दिल्ली के स्ट्रीट वेंडर्स के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो बस खाने भर की कमाई कर पाते हैं। इसके साथ ही एक सच ये भी है बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी वाले शहर से प्रवासन कर रहे हैं और वह भी इसी तरह जी परेशानियों से जूझ रहे हैं।

62 साल के राजेन्द्र श्रीवास्तव लाजपत नगर सेंट्रल मार्किट में फ्रूट चाट बेचते थे। वह कहते हैं, "हालात बहुत ख़राब हैं शहर में, कितने ही साथी फिर से गाँव लौट गए। जो इधर हैं, उनका जीवन निकालना रोज़ मुश्किल होता जा रहा है।"

इसके साथ ही, अगर यह पिछले साल झेली गई मुसीबतों का ही दोहराव है, तब भी संकट यहीं ख़त्म नहीं होता है। कुमार का उदाहरण लीजिये, जिन्हें पिछले महीने अपने चाचा के लिए आईसीयू बेड ढूंढने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। वह कोविड पॉज़िटिव थे, और उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो रही थी।

कुमार अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया, "उनकी पिछले हफ़्ते मौत हो गई क्योंकि हम समय से उनका इलाज नहीं करवा पाए। मेरे एक और चाचा जीटीबी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। मुझे ख़ुद भी वायरस का डर लग रहा है और कम से कम बाहर जा रहा हूँ। लेकिन ऐसे समय में अपने रिश्तेदारों को कौन मना करेगा।"

नई दिल्ली के हॉकर्स जॉइंट एक्शन कमेटी जे धर्मेंद्र कुमार ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनके पास पिछले 1 हफ़्ते में ही 175 रेहड़ी-पटरी वालों के परिवार से फ़ोन आ गए हैं- जो ऑक्सीजन सिलिंडर, बेड या कोई दवाई और अन्य स्वास्थ्य मदद के लिए जानकारी लेना चाहते हैं।

एक्शन कमेटी के कुमार ने कहा, "यह कमी पूरे शहर में ही है और ज़ाहिर तौर पर हाशिये के लोग इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। जहाँ तक रेहड़ी-पटरी वालों की बात है, उनमें से ज़्यादातर प्रवासी हैं इसलिये उनके पास यहाँ कोई है नहीं जिससे वह मदद ले सकें, और आजकल तो हर किसी की हालत ख़स्ता बनी हुई है।"

सीटू-समर्थित रेहड़ी पटरी हॉकर्स यूनियन के खजांची एसएन कुशवाहा भी उससे सहमत हैं। उनके अनुसार इस साल बढ़े मामलों के दौरान जो लोग मदद मांग रहे हैं वह पिछले साल से अलग हैं, पिछले साल देश्वयापी लॉकडाउन में लोगों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत खाने के राशन की थी।

कुशवाहा ने कहा, "हमारी यूनियन को कई स्ट्रीट वेंडर सदस्यों की मदद करने के लिये अपने संसाधनों को बढ़ाना पड़ा है, लोग अपने परिजनों के इलाज के लिए मदद मांग रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इतनी कोशिशों के बावजूद "ज़्यादा मदद मुमकिन नहीं ही पाती।"

न्यूज़क्लिक को सोमवार को जानकारी मिली कि हॉकर्स यूनियन के महासचिव शकील अहमद भी कोरोना पॉज़िटिव हैं, और उन्हें ख़ुद भी घर में ऑक्सीजन सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी। राजस्थान में किसी की मदद से उन्हें एक सिलिंडर हासिल हो पाया था।

एक्शन कमेटी के कुमार ने कहा, "यह बात सच है कि पिछले साल की तरह खाने के राशन की समस्या अभी तक पैदा नहीं हुई है।" मगर हर हफ़्ते बढ़ते लॉकडाउन और दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट से कोई राहत न मिलने की वजह से ऐसा ज़्यादा दिन तक मुमकिन नहीं होगा।

उन्होंने कहा, "हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर आज हमारे पास एक लिस्ट आई जिसमें 3000 रेहड़ी-पटरी वालों के नाम थे जिनके पास बस कुछ दिनों का राशन बचा है या बिल्कुल राशन नहीं बचा है।"

इसके मद्देनज़र, जॉइंट एक्शन कमेटी ने पिछले साल की तरह अपनी राशन वितरण योजना को शुरू करने की तैयारी कर ली है। कुमार ने कहा, "इस बार हमारे पास न पर्याप्त फ़ंड हैं, न ही पर्याप्त वालंटियर्स।"

पीएम-स्वनिधि से मिले क़र्ज़ को 'एकमुश्त नक़द सहायता' बनाया जाए

पिछले साल, अचानक लगाए लॉकडाउन से प्रेरित संकट के मद्देनजर, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने सड़क विक्रेताओं के लिए एक योजना शुरू की थी, जिसका नाम पीएम-स्वनिधि था, जिसके तहत विक्रेताओं को बिना किसी जमानत के पात्र विक्रेताओं को 10000 रुपये तक के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जाना था।

पिछले साल मई में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उसी योजना के लिए 5,000 करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी जो लगभग 50 लाख स्ट्रीट वेंडरों को राहत देने के लिए लक्षित था।

कार्यकर्ताओं द्वारा साझा किए गए अनुमानों के अनुसार, सड़क विक्रेताओं की कुल संख्या देश भर में चार करोड़ के करीब है।

योजना के डैशबोर्ड के अनुसार, सोमवार को, योजना के तहत आवेदन करने वाले 41.63 लाख स्ट्रीट वेंडर्स में से 20.34 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को 2,013 करोड़ रुपये दिए गए हैं। दिल्ली में, दो लाख लक्ष्य के विपरीत, इस योजना के तहत ऋण केवल 30, 422 के लिए वितरित किए गए हैं जो आधे से भी कम है, कुल 62, 288 सड़क विक्रेताओं ने आवेदन किया था।

यह आंकड़े सच्चाई बयान करने के लिए काफ़ी हैं। उस योजना के शुरू होने के एक साल बाद विशेषज्ञों द्वारा उठाई गई मांगें इन हालात में फिर से सामने आ रही हैं।

एक्शन कमेटी के कुमार ने समझाया, "कार्यशील पूंजी योजना की अवधारणा इस धारणा के तहत की गई थी कि ऋण किसी व्यक्ति को अपने वेंडिंग व्यवसाय को फिर से शुरू करने की अनुमति देगा। चूँकि उत्तरार्द्ध ने कभी उड़ान नहीं भरी, लगभग सभी प्रमुख महानगरों में तालाबंदी के कारण, ऋण सड़क विक्रेता के लिए एक और बोझ बन गया है।"

हॉकर्स यूनियन के कुशवाहा ने तर्क दिया कि हाल ही में संक्रमण को अनुबंधित करने के कारण "बढ़े हुए डर" के कारण, अधिकांश वेंडिंग व्यवसाय "नाटकीय रूप से" ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर स्थानांतरित हो गए हैं। उन्होंने कहा, "यह इन कारणों के कारण था कि हम रुपये की सीधी राहत की मांग कर रहे हैं। सभी गैर-आयकर दाता परिवारों को 7,500 प्रति माह। इसमें स्ट्रीट वेंडर भी शामिल होंगे।"

वहीं दूसरी तरफ़ कुमार ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से गुज़ारिश की है कि कम से कम जो "वर्किंग कैपिटल लोन" प्राप्त हो चुका है, उसे पीएम-स्वनिधि के तहत "एकमुश्त नकद सहायता" माना जाए।

न्यूज़क्लिक ने मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट हरदीप पुरी, MoHUA और MoHUA के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा से जवाब मांगा है। जैसे ही उनका जवाब आएगा, उसे रिपोर्ट में शामिल कर दिया जाएगा।

फल-चाट विक्रेता श्रीवास्तव से सोमवार को पूछे जाने पर, न्यूज़क्लिक को सूचित करें कि उन्होंने अभी तक पीएम-स्वनिधि के तहत ऋण के लिए आवेदन नहीं किया है, न ही वह ऐसा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "ऋण आवेदन के लिए कई सारे काग़ज़ात की ज़रूरत है। और ऋण की राशि भी बहुत कम है। इसका कोई मतलब नहीं है, वह भी अब जब मुझे अंदाज़ा ही नहीं है कि मैं अपना काम दोबारा कब शुरू कर पाऊंगा।"

कोल्ड-ड्रिंक बेचने वाले कुमार के साथ ऐसा नहीं है। उन्हें 3 हफ़्ते पहले ऋण सैंक्शन हो गया था, मगर अभी राशि मिलनी बाक़ी है। कुमार ने कहा, "इस साल एक और लॉकडाउन की वजह से चीज़ें बद से बदतर हो गई हैं। मैं उसके बाद से अधिकारियों से ऋण के लिए नहीं कह रहा हूँ।"

क्यों? "क्योंकि मैं एक और मुसीबत नहीं पाल सकता - इस क़र्ज़ को चुकाने की मुसीबत।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Delhi Lockdown: For Street Vendors, a Worse ‘Repeat’ of Last Year’s Ordeal

Street vendors
Delhi
COVID-19
Lockdown
Hawkers Joint Action Committee
Delhi Rehri-Patri Hawkers’ Union
PM-SVANIDHI
aam aadmi party
Narendra modi

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • cartoon
    आज का कार्टून
    किसान आंदोलन का एक साल: ...अब MSP का पहाड़ तोड़ना बाक़ी है
    26 Nov 2021
    रस्ता हो जाता है परबत सागर में भी, जब जज़्बा होता है, जब हिम्मत होती है।
  • Police Turkey fired tear gas to stop female protesters
    एपी
    तुर्की में पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दागे आंसू गैस के गोले
    26 Nov 2021
    महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के उन्मूलन के लिए 25 नवंबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में इस्तांबुल की मुख्य सड़क इस्तिकलाल पर मार्च निकाला गया।
  • Siberia
    एपी
    रूस के साइबेरिया में कोयला खदान में आग लगने से 52 लोगों की मौत : रूसी मीडिया
    26 Nov 2021
    दक्षिण-पश्चिमी साइबेरिया के केमेरोवो क्षेत्र में घटना के वक्त लिट्सव्याजहन्या खदान में कुल 285 लोग थे और ‘वेंटिलेशन सिस्टम’ के माध्यम से खदान में धुआं जल्दी ही भर गया। इससे पहले, बचाव दल ने 239…
  • constitution
    भाषा
    संवैधानिक संस्थाओं पर निरंतर आघात कर रही भाजपा सरकार: कांग्रेस
    26 Nov 2021
    कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद आज संविधान दिवस के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
  • Akhilesh Yadav
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश में सपा-आरएलडी के गठबंधन के बाद बीजेपी को नहीं मिलेगा स्पष्ट बहुमत - विशेषज्ञों का दावा
    26 Nov 2021
    अखिलेश और जयंत की साझेदारी से जाट और मुस्लिम क़रीब आ सकते हैं और इससे बीजेपी का संतुलन ख़राब हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License