NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
उत्पीड़न
कानून
भारत
राजनीति
दिल्ली दंगा: पुलिस पर कोर्ट के आदेश के बाद भी आरोपपत्र पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं देने का आरोप
न्यायाधीश ने जब तिहाड़ जेल प्रशासन से आरोपियों द्वारा जतायी गयी चिंता पर सवाल किया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Jan 2021
Delhi riots

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा मामलों में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) के तहत मुकदमे का सामना कर रहे कई आरोपियों ने मंगलवार को एक अदालत के सामने दावा किया कि आदेश के बावजूद जेल में उन्हें आरोपपत्र की प्रतिलिपि नहीं दी गयी।

आपको बता दें कि दिल्ली दंगे को लेकर पुलिस के रैवये पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।  पुलिस को कई बार अपने इस रवैये के कारण कोर्ट से भी फ़टकार खानी पड़ी है लेकिन लगाता नहीं कि दिल्ली पुलिस की सेहत पर इससे कोई फ़र्क पड़ा है।  क्योंकि एक बार फिर उसने कोर्ट के आदेश का ठीक से पालन नहीं किया है।  पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस को आरोपियों को उनके आरोपपत्र की पहुँच देने को कहा था और मीडिया में इसे लीक होने पर भी पुलिस को फ़टकार लगी थी।  

वहीं, कुछ आरोपियों ने मंगलवार की सुनवाई में दावा किया कि आरोपपत्र पढ़ने के लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। आरोपियों ने अदालत से जेल प्रशासन को एक घंटे से ज्यादा समय देने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया ताकि वे जेल में कंप्यूटर सिस्टम पर 1800 पन्ने का आरोपपत्र पढ़ पाएं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने मामले को दो फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान आरोपियों खालिद सैफी, शिफा उर रहमान और शादाब अहमद ने दावा किया कि अदालत के आदेश के तहत जेल के कंप्यूटर पर आरोपपत्र को अपलोड कर दिया गया है लेकिन उन्हें वहां तक पहुंच नहीं दी गयी है।

मंडोली जेल में बंद सैफी ने कहा, ‘‘पुलिस अधिकारियों ने कंप्यूटर में आरोपपत्र अपलोड कर दिया है लेकिन जेल अधिकारियों ने वहां तक पहुंच की इजाजत नहीं दी।’’

तिहाड़ जेल में बंद रहमान ने कहा कि जेल प्रशासन ने अब तक उन्हें सूचित नहीं किया है कि आरोपपत्र अपलोड कर दिया गया है।

आप के निलंबित पार्षद और सह आरोपी ताहिर हुसैन ने दावा किया कि वह आरोपपत्र नहीं पढ़ पाए क्योंकि कंप्यूटर पर हमेशा कोई न कोई बैठा रहता है। हुसैन ने पेन ड्राइव में इसे मुहैया कराने का अनुरोध किया ताकि वह पुस्तकालय जाकर वहां इसे पढ़ सकें।

आरोपियों को आरोपपत्र पढ़ने के लिए ज्यादा समय नहीं दिया गया, इस तथ्य का पता चलने के बाद अदालत ने नाराजगी प्रकट की।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने कहा कि उन्हें आरोपपत्र पढ़ने के लिए किसी दिन तीन घंटे दिए गए जबकि किसी दिन एक ही घंटा दिया गया।

जेएनयू के छात्र शरजील इमाम ने दावा किया कि आरोपपत्र पढ़ने के लिए उन्हें दो घंटे का ही समय दिया गया। पूर्व पार्षद इशरत जहां ने कहा कि उन्हें एक घंटे दिया गया। वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा ने कहा कि उन्हें आरोपपत्र पढ़ने के लिए केवल डेढ़ घंटे का वक्त दिया गया।

न्यायाधीश ने जब तिहाड़ जेल प्रशासन से आरोपियों द्वारा जतायी गयी चिंता पर सवाल किया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।

आरोपियों ने कहा था कि उन्हें अपने वकीलों से आधे घंटे की मुलाकात के दौरान इतना विशालकाय आरोपपत्र पर चर्चा करने में मुश्किलें आती हैं। इसके बाद अदालत ने पुलिस को जेल में कंप्यूटर में आरोपपत्र की एक प्रति अपलोड करने का निर्देश दिया था।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Delhi riots
Delhi Violence
Protest against CAA
Umar khalid
delhi police

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

दिल्ली: सिविल डिफेंस वालंटियर की निर्मम हत्या शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलती है!

न्यायपालिका को बेख़ौफ़ सत्ता पर नज़र रखनी होगी

दिल्ली बच्ची दुष्कर्म और हत्या मामला: चारों आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर

दिल्ली बलात्कार कांड: जनसंगठनों का कई जगह आक्रोश प्रदर्शन; पीड़ित परिवार से मिले केजरीवाल, राहुल और वाम दल के नेता

दिल्ली में महिलाओं से बलात्कार एवं उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी

मस्जिद में नाबालिग से बलात्कार, सुरक्षा के असल मुद्दे को सांप्रदायिकता का ऐंगल देने की कोशिश!

दिल्ली दंगे: ज़मानत के आदेश ‘संदिग्ध’ साक्ष्यों, ‘झूठे’ सुबूतों की कहानी बयां करते हैं


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License