NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
दिल्ली : विश्वविद्यालयों को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में  लिया
दस महीने से अधिक समय तक कैंपस बंद रख कर छात्रों के प्रति सरकार की अनदेखी के खिलाफ एसएफआई का  शिक्षा मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन था, जहां से प्रदर्शनकारियो को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jan 2021
SFI

नयी दिल्ली: शिक्षा मंत्रालय के सामने विश्वविद्यालयों को खोलने और ‘फैलोशिप’ की राशि को समय पर दिए जाने की मांग को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ता  प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें  पुलिस ने बृहस्पतिवार को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एसएफआई के  दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया समेत कई छात्रों को  हिरासत में ले लिया और उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में लाया गया। वहां भी इन छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

आपको बता दें दस महीने से अधिक समय तक कैंपस बंद रखकर छात्रों के प्रति सरकार की अनदेखी के खिलाफ एसएफआई का विरोध प्रदर्शन था। उन्होंने अपने बयान में कहा हमारे साथी  एमएचआरडी में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, पुस्तकालयों और अन्य कैंपस सुविधाओं को फिर से खोलने के लिए एक ज्ञापन देने  के लिए एकत्र हुए थे। जब हम वहां पहुंचे तो पुलिस ने ज़बरन हमारे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और बदसलूकी की।  

हिरासत में लिए गए छात्र नेता डीयू में अंग्रेजी विभाग के एसएफआई कार्यकर्ता और एक एमफिल छात्र सुयश मौर्य ने कहा कि "छात्र जीवन को दांव पर लगाकर सरकार अपने हितों को आगे बढ़ा रही है। छात्रों को पढ़ने के लिए सामग्री, डेटा पैक, गैजेट्स, पढ़ने के लिए उचित वातावरण के कई मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। पिछड़े सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की महिला छात्र और छात्राएं दोहरे नुकसान में हैं। "

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की अध्यक्ष आईशी घोष ने ट्वीट किया, ‘‘एसएफआई के कार्यकर्ताओं को एमएचआरडी के सामने से हिरासत में ले लिया गया....वे परिसर को तुरंत खोले जाने, ‘डिजिटल डिवाइड’ (डिजिटल युग का लाभ ले सकने वाले और इस सुविधा से वंचित लोगों के बीच का अंतर) को कम करने, ‘फैलोशिप’ की राशि समय पर दिए जाने, आरक्षण नीति को कमजोर करना बंद करने और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए परामर्श उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे।’’

छात्र संघठन एसएफआई के सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसएफआई के करीब 15 सदस्य एमएचआरडी (शिक्षा मंत्रालय) के सामने एकत्रित हो गए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘उनमें से कम से सात-आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस थाने ले जाया गया है।’’

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन में भी ऐसी ही मांगे की गई हैं।

छात्र निकायों ने कहा कि श्रमिकों, किसानों और हाशिए पर खड़े समुदायों के छात्रों पर संसाधनों की कमी और ‘‘असमान वितरण’’ का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं ‘‘छात्राओं पर इसका अधिक असर पड़ रहा है’’।

 एसएफआई नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि यह प्रतिरोध की आवाज़ों पर एक दमन है, हम सरकार के ऐसे सत्तावादी कदम को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

SFI
Student Protests
SFI Protest
Universities Reopen
MINISTRY OF EDUCATION
MHRD
JNU
Aishe Ghosh
student union
AISA
UGC

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा


बाकी खबरें

  • शर्मनाक: अब धमकी की भाषा पर उतर आई है बीजेपी!
    मुकुल सरल
    शर्मनाक: कार्टून नहीं, किसानों को बीजेपी की खुली धमकी!
    30 Jul 2021
    यह कार्टून देखिए। यह बीजेपी उत्तर प्रदेश के ऑफिशयल ट्विटर हैंडल पर 29 जुलाई को प्रसारित किया गया और अभी तक बरकरार है। इसे देखकर कोई भी कह सकता है कि यह सीधे-सीधे किसान नेता राकेश टिकैत को धमकी है।
  • बैंक निजीकरण से धन्नासेठों को फायदा
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक निजीकरण से धन्नासेठों को फायदा
    30 Jul 2021
    52 साल पहले बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। अब इन्ही बैंकों को वापस प्राइवेट सेक्टर को बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट घरानों और धन्नासेठों को फायदा होगा
  • इज़रायली सैनिकों ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में एक अन्य फ़िलिस्तीनी युवक की हत्या की
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायली सैनिकों ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में एक अन्य फ़िलिस्तीनी युवक की हत्या की
    30 Jul 2021
    20 वर्षीय शौकत अवाद को उस समय गोली मारी गई जब इज़रायली सैनिकों ने 12 वर्षीय मोहम्मद अल-अलामी के अंतिम संस्कार में भाग लेने वाले लोगों पर गोलियां चलाई थीं। अलामी को इन सैनिकों ने एक दिन पहले गोली मार…
  • रियो टिंटोस द्वारा बड़े पैमाने पर खनन निविदा के ख़िलाफ़ सर्बिया में विरोध प्रदर्शन तेज़
    पीपल्स डिस्पैच
    रियो टिंटोस द्वारा बड़े पैमाने पर खनन निविदा के ख़िलाफ़ सर्बिया में विरोध प्रदर्शन तेज़
    30 Jul 2021
    पर्यावरण समूहों, प्रगतिशील राजनीतिक समूहों और स्थानीय लोगों के समूह ने पूरे सर्बिया से लिथियम समृद्ध जादराइट अयस्क के बड़े पैमाने पर खनन के लिए खनन दिग्गज रियो टिंटो की योजनाओं के ख़िलाफ़ विरोध तेज़…
  • आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
    अवधेश
    आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
    30 Jul 2021
    आमागढ़ जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है का क़िला मीणा समुदाय की अस्मिता से जुड़ा है लेकिन आज इसके साथ भगवे झंडे का विवाद भी जुड़ गया है, जिसे लेकर एक दूसरे को चुनौती दी जा रही है। इससे सामाजिक सौहार्द…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License