NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नताशा नरवाल की याचिका का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध, कहा- ‘सबूत नष्ट हो सकते हैं’
दिल्ली दंगों की आरोपी और जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल ने साल 2020 में मिली जमानत के उस आदेश में सुधार की मांग की है जिसमें उन्हें दिल्ली नहीं छोड़कर जाने का निर्देश दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Aug 2021
नताशा नरवाल

जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल ने 2020 में मिली जमानत के उस आदेश में सुधार की मांग की है जिसमें उन्हें दिल्ली छोड़कर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है. लेकिन दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल की अर्जी का बुधवार को विरोध किया है और कहा कि वह सबूत नष्ट कर सकती हैं।

नरवाल ने कहा है कि उन्हें अपनी पीएचडी के शोध के लिए बाहर जाना पड़ता है, साथ ही अपने पैतृक आवास भी जाना होता है लेकिन उसे हर बार अदालत से अनुमति मांगनी पड़ती है।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक राजीव कृष्ण शर्मा ने इस अर्जी का विरोध किया और अदालत को बताया कि नरवाल एक साजिशकर्ता हैं, अगर दिल्ली नही छोड़ने की शर्त में बदलाव किया गया तो वह सबूत नष्ट कर सकती हैं या फरार हो सकती हैं।

शर्मा ने कहा कि उसके खिलाफ साजिश के आरोप हैं और एक साजिशकर्ता हमेशा खतरनाक व्यक्ति होता है क्योंकि वह सबूत नष्ट कर सकता है। दिल्ली पुलिस ने पूछा, ‘‘अगर कल वे विदेश चलीं जाएं या फरार हो जाएं तो उन्हें कौन पकड़ेगा?’’
दिल्ली पुलिस ने आगे कहा ‘‘जब वे दंगा करने की साजिश रच रहे थे तो वे पीएचडी भी कर रहे थे। कई लोग मर गए। अदालत समझ सकती है कि वे पीएचडी के नाम पर क्या कर रहे थे।’’

इस बीच नरवाल की ओर से पेश वकील कुनाल नेगी और अदिति एस पुजारी ने अदालत को बताया कि वह तीन मामलों में आरोपी हैं लेकिन अदालत ने बाकी के दो मामलों में जमानत देते हुए उस पर ऐसी कोई शर्त नहीं लगायी है।

आपको बता दें कि नरवाल के साथ ही कई अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया हुआ है और उन पर फरवरी 2020 में हुई हिंसा के ‘‘मास्टरमाइंड’’ होने का आरोप है।

दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में दर्ज प्राथमिकी 59/2020 में कुल 15 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें तन्हा, नरवाल और कलिता, गुलफिशा फातिमा, इशरत जहां, सफूरा ज़रगर, मीरन हैदर, खालिद सैफी, शिफू-उर-रहमान और कई अन्य कार्यकर्ता भी शामिल हैं।  

23 मई 2020 की शाम पिंजरा तोड़ नामक संगठन की दो कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा उनके घर से गिरफ़्तार किया गया था। दोनों को बीती फरवरी में जाफ़राबाद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ हुए एक प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था। हालांकि आरोप ये भी है कि गिरफ़्तारी के समय परिवार वालों को कारण तक नहीं बताया गया था। अगले दिन रविवार, 24 मई 2020 के दिन इन दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन कोर्ट ने दोनों को ज़मानत दे दी थी। लेकिन इसके बाद ताकि वो जेल से रिहा न हो सकें इसलिए पुलिस ने कई अन्य मुक़दमे लगाएं है। अभी भी किसी भी मामले में पुलिस उन्हें दोषी नहीं ठहरा पाई है।

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देवांगना पर चार और नताशा पर तीन मामलों में मुकदमा चल रहा है। अब उन्हें सभी मामलों में ज़मानत मिल गई है। अभी वो ज़मानत पर जेल बाहर हैं।

आपको बता दें कि नताशा नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में पीएचडी की छात्रा हैं। वे  पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं। ‘पिंजरा तोड़’ की स्थापना साल 2015 में हॉस्टल और पेइंग गेस्ट में छात्राओं की सुविधा और अधिकारों के मकसद से की गई थी।   नरवाल ने डीयू के हिंदू कॉलेज से स्नातक किया है।

आपको बता दें कि जेल में रहने के दौरान नताशा के पिता की भी कोरोना से मृत्यु हो गई थी। नताशा को ज़मानत न मिलने से वो अंतिम समय के संघर्ष में पिता का साथ न दे पाईं। उनकी माता का निधन काफ़ी साल पहले ही हो चुका था। जबकि उनका एक ही भाई था जो स्वयं कोरोना से जूझ रहा था। हालांकि पिता की मृत्यु के बाद उन्हें न्यायालय ने 14 दिन की अंतिरम ज़मानत दी थी।

नताशा के पिता महावीर जब तक जीवित थे वो लगातार कहते रहे कि उनकी बेटी बेक़सूर है और जेल से बाहर आएगी और उन्होंने यह भी कहा था की हो सकता है कि जब वो जेल से बाहर आए तो वो इस दुनिया में न हों। दुर्भाग्य से उनकी ये बात पूरी तरह सही साबित हुई और जब उनकी बेटी को ज़मानत मिली तो वो इस दुनिया को छोड़कर जा चुके थे।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Natasha Narwal
delhi police
UAPA

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला


बाकी खबरें

  • PM care Fund
    स्मृति कोप्पिकर
    पीएम-केयर्स फ़ंड का मालिक है कौन?
    28 Sep 2021
    किसी भी ऐसे फ़ंड को गोपनीयता के घेरे में नहीं रखा जा सकता है जिसमें लाखों भारतीयों ने दान किया हो क्योंकि उस पर भारत सरकार की मुहर थी और इस फ़ंड के नाम पर पर ही प्रधानमंत्री ने किसी भी संकट के दौरान…
  • bhagat singh
    मुकुल सरल
    हमें यह शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी
    28 Sep 2021
    ऐसे कई मशहूर शे'र हैं जो भगत सिंह के नाम से याद किए जाते हैं और उन्हीं के लिखे समझे जाते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं। ये शे’र उस दौर के अलग-अलग मशहूर शायरों के हैं जो भगत सिंह को बहुत पसंद थे और वे अक्सर…
  • stray cattle
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में किसानों से लिए आफ़त बने आवारा और छुट्टा पशु, चुनाव में बढ़ सकती हैं भाजपा की मुश्किलें
    28 Sep 2021
    यूपी के किसान पहले से ही बेहाल थे और अब आवारा पशुओं के चलते इनकी बदहाली कोढ़ में खाज सरीखी हो गई है। गोवंश संरक्षण के दिखावे के चलते किसानों को ऐसी अंधेरी खाईं में ढकेल दिया गया है, जहां से निकलने का…
  • biden
    एम. के. भद्रकुमार
    बड़े चक्र में गोल-गोल घूम रहा है क्वाड
    28 Sep 2021
    अब तक क्वाड से बहुत कम हासिल हुआ है। 2,145 शब्दों का साझा वक्तव्य एक बार फिर सामान्य चीज़ों की ही बात करता नज़र आता है।
  • Bhagat Singh
    प्रबल सरन अग्रवाल
    विशेष: भगत सिंह के बाद क्रांतिकारी आंदोलन का क्या हुआ?
    28 Sep 2021
    भगत सिंह की शहादत के बाद भी उनके साथी समाजवाद और आज़ादी के झंडे को उसी जोशो-खरोश के साथ उठाए रहे। आज भगत सिंह के जन्मदिवस पर उनके सभी साथियों को याद करना भी ज़रूरी है। तभी हम 1920-1930 के क्रांतिकारी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License