NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली पुलिस का ये कहना कि धर्म संसद में हेट स्पीच नहीं हुई, दुर्भाग्यपूर्ण है: पूर्व आईपीएस अधिकारी
पूर्व आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में दिल्ली पुलिस के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इसे काफी दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि पुलिस नफ़रती भाषण देने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रही है।
मुकुंद झा
16 Apr 2022
Suresh Chavhanke

पिछले कुछ सालों में अल्पसंख्यकों ख़ासकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने का भारत में एक सिलसिला बड़ी तेज़ी से शुरू हुआ है। इसके लिए कहीं धर्म संसद, कहीं धार्मिक महापंचायत हो रही है, और टीवी मीडिया का प्राइम टाइम भी इन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रहा है। जहाँ तक सोशल मीडिया का सवाल है तो वो इन धार्मिक उन्मादों का पोषक तो शुरू से ही है। ऐसी एक धर्म संसद पिछले साल दिल्ली में हुई थी जहाँ हेट स्पीच यानी नफ़रत भरे भाषण दिए गए थे। वहां खुलकर लोगों से मरने और मारने के लिए कहा गया था परन्तु देश की राजधानी की दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को बताया कि दिल्ली धर्म संसद के दौरान कोई नफ़रती भाषण नहीं दिया गया था। साथ ही उसने कहा कि ये मामला उसने बंद भी कर दिया है।

पुलिस ने कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि 19 दिसंबर 2021 को आयोजित दिल्ली धर्म संसद में कोई नफ़रती भाषण नहीं दिया गया।

दिल्ली पुलिस के इस हलफनामे को लेकर सभ्य समाज के लोग और क़ानून के जानकार सवाल उठा रहे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने पुलिस के इस हलफनामे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

दरअसल वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली और पटना हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज एवं सीनियर अधिवक्ता अंजना प्रकाश ने दिल्ली और उत्तराखंड में हुई कथित धर्म संसंद में दिए गए नफ़रती भाषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है। जिसपर कोर्ट सुनवाई कर रहा है। याचिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने वालों के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। इस याचिका की सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमण और न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति हीमा कोहली की पीठ सुनवाई कर रही हैं।

दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा है कि 19 दिसंबर 2021 को 'हिंदू युवा वाहिनी' की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में नफरत भरे भाषण दिए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इसके आधार पर सभी शिकायतों की जांच शुरू की गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होनी है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में दिल्ली पुलिस के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इसे काफी दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि पुलिस नफ़रती भाषण देने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रही है।

नारायण ने कहा कि इस धर्म संसंद में काफी ख़राब भाषण दिया गया था परन्तु पता नहीं कैसे दिल्ली पुलिस को इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा। खैर अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है वो खुद इस मामले को देखेगी और सब सामने आ जाएगा कि ये भाषण कितने खतरनाक थे और इसके बाद पुलिस कार्रवाई करने से नहीं बच पाएगी।

आपको बता दें ये कोई पहला मामला नहीं है जब दिल्ली की पुलिस सवालों के घेरे में हो। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मौके आए जब पुलिस के काम काज पर गंभीर सवाल उठे हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया की हिंसा हो या जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय की हिंसा या फिर दिल्ली में हुए दंगे इन सभी में दिल्ली पुलिस पर पक्ष में खड़े होने का आरोप लगा है। इसके अलावा दिल्ली में पिछले कुछ समय से धार्मिक संसद और महापंचायत जैसे कई कार्यक्रम हुए जिसमें खुलकर मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगला गया और मौके पर पुलिस मौजूद रही पर कुछ नहीं किया। जहाँ पर कार्रवाई की भी तो वो ऐसी थी जहाँ आरोपियों को सज़ा से ज़्यादा बचाने का प्रयास दिखा।

यह एक पैटर्न बनता दिख रहा है जहाँ पुलिस सत्ता सरंक्षित उन्मादियों को बचाती दिख रही है। इसी पैर्टन पर बात करते हुए नारायण ने कहा कि जामिया, जेएनयू हिंसा और दिल्ली दंगो में पुलिस का रवैया बिल्कुल भी प्रोफेशनल नहीं था। ये अपने आप में बहुत खतरनाक है। क्योंकि पुलिस किसी सरकार या खास विचारधारा से नहीं बल्कि संविधान से चलती है। परन्तु ये जो पैटर्न बनता दिख रहा है, वो देश की लोकतांत्रिक संरचना के लिए बेहद ही खतरनाक है।

उन्होंने आगे कहा कि पुलिस का व्यवहार केवल संविधान के अनुरूप होना चाहिए। पुलिस अपनी आईपीसी से चलती है। वो किसी भी पक्ष में नहीं होती है और न किसी राजनैतिक दल की गुलाम होती है। परन्तु ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली पुलिस राजनैतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को तो जेलों में बंद कर रही है परन्तु धार्मिक उन्मादियों को खुला छोड़ा हुआ है।

इसी तरह कानून के छात्र और दिल्ली में वकालत करने वाले रौशन ठाकुर ने कहा कि दिल्ली पुलिस दोहरा चरित्र दिखा रही है। एक तरफ जहाँ लोगों से शांति से सड़कों पर उतरकर चक्का जाम की अपील करने वाले लोगों को नफ़रती और भड़काऊ भाषण मानते हुए उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे कई कार्यकर्ताओं को दिल्ली दंगे का आरोपी बनाकर उनपर यूएपीए लगा दिया है जबकि सुरेश चव्हाणके और यति नरसिंघानंद जैसे लोग जो खुले आम लोगों से हथियार उठाने की बात करते हैं लेकिन वो खुले घूम रहे हैं। ये दिखाता है कि पुलिस कानून से नहीं बल्कि किसी राजनैतिक पूर्वागृह से काम कर रही है।

ठाकुर ने आगे कहा कि कोर्ट से आज भी उन्हें न्याय की उम्मीद है। क्योंकि न्यायालय संविधान की रक्षक है और आप देखेंगे कि दिल्ली दंगे के कई मामलों में पुलिस रोज़ कोर्ट में डांट खा रही है। हाँ, लेकिन इस न्याय की प्रक्रिया में समय ज़रूर लगेगा परन्तु विजय सत्य और न्याय की होगी और समाज के इन दुश्मनों को सज़ा जरूर मिलेगी।

कई जानकारों का मानना है कि पुलिस प्रशासन के इसी रवैये से इन नफ़रती लोगों को हिम्मत मिलती है और वो खुलकर धार्मिक उन्माद के ज़रिए माहौल खराब करते हैं। 19 दिसंबर, 2021 की धर्म संसद के बाद जनवरी, 2022 में जंतर-मंतर पर ऐसा ही एक आयोजन देखा था जहाँ खुले तौर पर मुसलमानो के नरसंहार की बात कही जा रही थी। पुलिस अभी तक किसी भी आरोपी को सज़ा नहीं दिला पाई है। जबकि हाल ही में दिल्ली के बुराड़ी में 4 अप्रैल को एक हिन्दू महापंचायत हुई जहाँ एकबार फिर भी वही लोग एकत्रित हुए जिनपर अलग-अलग समय पर धार्मिक उन्माद और समाज में वैमनस्य फैलने का आरोप लगा है। फिर से उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगला और वो यही नहीं रुके। उन्होंने इस कार्यक्रम को कवर करने गए पत्रकारों पर भी हमला किया। पुलिस ने कहा कि उसने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी लेकिन ये भी बड़े अचंभे की बात है कि बिना पुलिस अनुमति के ये कार्यक्रम घंटों चला और यहां मंच से देश में नफ़रत फैलाने का काम जारी रहा और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हालाँकि इस मामले में पुलिस ने चार एफआईआर दर्ज़ की है परन्तु इस घटना के इतने दिनों बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। ये बताने के लिए काफी है की पुलिस की मंशा क्या है?

dharm sansad
Delhi Dharm Sansad
delhi police
Hate Speech
Hate Crime
Communal Hate
Suresh Chavhanke
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?


बाकी खबरें

  • जोश क्लेम, यूजीन सिमोनोव
    जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 
    09 Apr 2022
    जलविद्युत परियोजना विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने में न केवल विफल है, बल्कि यह उन देशों में मीथेन गैस की खास मात्रा का उत्सर्जन करते हुए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न संकट को बढ़ा देता है। 
  • Abhay Kumar Dubey
    न्यूज़क्लिक टीम
    हिंदुत्व की गोलबंदी बनाम सामाजिक न्याय की गोलबंदी
    09 Apr 2022
    पिछले तीन दशकों में जातिगत अस्मिता और धर्मगत अस्मिता के इर्द गिर्द नाचती उत्तर भारत की राजनीति किस तरह से बदल रही है? सामाजिक न्याय की राजनीति का क्या हाल है?
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे
    09 Apr 2022
    एक तरफ लोगों को जहां बढ़ती महंगाई के चलते रोज़मर्रा की बुनियादी ज़रूरतों के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भी अब ज़्यादा से ज़्यादा पैसे खर्च…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: इमरान को हिन्दुस्तान पसंद है...
    09 Apr 2022
    अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले देश के नाम अपने संबोधन में इमरान ख़ान ने दो-तीन बार भारत की तारीफ़ की। हालांकि इसमें भी उन्होंने सच और झूठ का घालमेल किया, ताकि उनका हित सध सके। लेकिन यह दिलचस्प है…
  • ऋचा चिंतन
    डब्ल्यूएचओ द्वारा कोवैक्सिन का निलंबन भारत के टीका कार्यक्रम के लिए अवरोधक बन सकता है
    09 Apr 2022
    चूँकि डब्ल्यूएचओ के द्वारा कोवैक्सिन के निलंबन के संदर्भ में विवरण सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में यह इसकी प्रभावकारिता एवं सुरक्षा पर संदेह उत्पन्न कर सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License