NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
दिल्ली: बैंक कर्मचारियों के 'बैंक बचाओ, देश बचाओ' अभियान को ट्रेड यूनियनों, किसान संगठन का मिला समर्थन  
बैंक कर्मियों की भारत यात्रा मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाप्त हुई। जिसमें सरकार को चेताया गया कि अगर सरकार ने अपने निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज़ होगा।
मुकुंद झा
30 Nov 2021
Protest

देश में सरकारी बैंकों को निजीकरण के "खतरे" से बचाने की लड़ाई में ट्रेड यूनियन, किसान, राजनीतिक दल बैंक अधिकारियों के साथ एकजुटता जाहिर किया। बैंक कर्मियों की भारत यात्रा मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर समाप्त हुई। जिसमें सरकार को चेताया गया कि अगर सरकार ने अपने निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज़ होगा।

सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन ऑल इण्डिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के आह्वान पर ‘बैंक बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में पैदल मार्च किया गया और रैलियाँ निकाली गईं। बैंक बचाओ, देश बचाओ अभियान के तहत भारत यात्रा पर निकले बैंकरों ने मंगलवार 30 नवम्बर को दिल्ली के  जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद AIBOC की ओर से जो जन जागरूकता अभियान 24 नवंबर से भारत यात्रा के साथ शुरू हुआ था उसका अंत हुआ।

बैंक कर्मियों ने बैंक के निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई. इनका कहना है कि सरकार संसद में जो बिल लाने जा रही है उससे बैंकों के निजीकरण का रास्ता साफ होगा और रोजगार के अवसर कम होंगे। साथ ही किसानों, छोटे व्यवसायियों, स्वयं सहायता समूह समेत कमजोर वर्गों के लिए ऋण सुविधा भी लगभग खत्म हो जाएगी।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार दो सरकारी बैंकों का निजीकरण करने की बड़ी तैयारी कर रही है। इसी के चलते संसद के इस शीतकालीन सत्र में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाया जा सकता है। इससे सरकार को बैंकिंग नियमों में बदलाव करने का अधिकार मिल जाएगा। वहीं जिन दो बैंकों का निजीकरण करने के तैयारी चल रही है, उसका भी रास्ता साफ़ हो जाएगा। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने सरकार की ऐसी कोशिशों का विरोध करते हुए 30 नवंबर से संसद सत्र के दौरान दिल्ली में बड़ा धरना प्रदर्शन किया। 

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सरकारी बैंकों के प्रशासन को निजी हाथों में सौंपने से निश्चित रूप से सार्वजनिक बैंकिंग कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी, लेकिन इस कदम से आम जनता को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

दिलीप मंडल जो, स्टेट बैंक के कोलकता ब्रांच में अपनी सेवाएं दे रहे है उन्होंने तर्क दिया, "एक बार जब देश के बैंकों का निजीकरण हो जाएगा, तो बैंक जमाओं की सुरक्षा कमजोर हो जाएगी, साथ ही इससे किसानों, छोटे व्यवसायों और देश के कमजोर वर्गों के लोगों के लिए ऋण प्रवाह भी कम हो जाएगा।"  

55 वर्षीय मंडल ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के केंद्र के फैसले के बाद सार्वजनिक बैंक ग्राहकों के सामने आने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए अपने तर्क को यह कहते हुए स्पष्ट किया कि बैंकों के निजीकरण से उन्हें और भी अधिक असुविधा होगी"

इस बार, केंद्र ने संसद में बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 नाम का एक विधेयक पेश करने का फैसला किया है, जिसमें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सार्वजनिक बैंकों में न्यूनतम सरकारी होल्डिंग को 51 प्रतिशत से 26 प्रतिशत तक कम करने का प्रस्ताव करने की संभावना है।  

यदि नए विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो इस कदम से इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पहले निजीकरण की संभावना होगी। दोनों में, केंद्र के पास वर्तमान में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।

एआईबीओसी की महासचिव सौम्या दत्ता ने मंगलवार को न्यूज़क्लिक को बताया कि बैंक अधिकारियों के अभियान ने महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार को कवर किया, जहां राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन हुए और पर्चे बांटे गए।  

दत्ता ने कहा कि देश में लगभग 120 करोड़ ग्राहकों को वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा बैंकिंग सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।  उन्होंने कहा "अगर निजीकरण किया जाता है, तो ये बैंक कई लोगों के वित्तीय हितों की सेवा नहीं कर पाएंगे,"।

भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर, बैंक अधिकारियों के नेता ने देश में बैंकों की "पूर्ण हड़ताल" की ओर इशारा किया। दत्ता ने कहा, "हम केंद्र पर दबाव बनाने के लिए चुनावी राज्यों में अपने अभियान को तेज करने की भी योजना बना रहे हैं।"

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के महासचिव तपन सेन ने मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे बैंक अधिकारियों को संबोधित किया और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से उनके साथ एकजुटता व्यक्त की।

उन्होंने अपने भाषण के दौरान अधिकारियों से कहा, "देश के मेहनतकश लोगों के सभी वर्ग बैंकों के निजीकरण के खिलाफ आपकी लड़ाई में आपके साथ आएंगे।" उन्होंने कहा कि आगामी बजट सत्र के दौरान दो दिवसीय आम हड़ताल है, जिसमें यह मुद्दा भी उठाया गया था।   

अधिकारियों को अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के विजू कृष्णन ने भी संबोधित किया, जिन्होंने केंद्र सरकार से बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया, उसी तरह जैसे कि विवादास्पद कृषि कानून अब निरस्त कर दिए गए हैं। एआईकेएस संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का एक घटक है, जो किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है।

मंगलवार को प्रदर्शन में शामिल होने वालों में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेता भी शामिल थे। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पूछा, "न तो लोग, न ही कर्मचारी, फिर बैंकों के निजीकरण से किसे फायदा होगा।"

Bank Bachao Desh Bachao
bank employee's protest
Banking sector crises
banking sector
privatization
Modi Govt

Related Stories

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

किसानों की ऐतिहासिक जीत के मायने

बैंक यूनियनों का ‘निजीकरण’ के ख़िलाफ़ दो दिन की हड़ताल का ऐलान

'अच्छे दिन’ नहीं चाहिए, बस ये बता दो कब होगी रेलवे ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा?

सरकार ने फिर कहा, नहीं है आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों का 'आंकड़ा'

निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License