NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
दिल्ली: रोज़गार के सवाल पर छात्र, नौजवान और मज़दूर आए एकसाथ, 22 मार्च को प्रदर्शन
इस प्रदर्शन कि मुख्य मांग है कि रोज़गार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए, बेरोज़गारों को 5000 रुपये मासिक का बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए और ग्रामीण इलाकों में लागू मनरेगा की तर्ज़ पर शहरों में भगत सिंह शहरी रोज़गार गारंटी कानून को बनाया जाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Mar 2021
दिल्ली: रोज़गार के सवाल पर छात्र, नौजवान और मज़दूर आए एकसाथ, 22 मार्च को प्रदर्शन

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत की वर्षगांठ की पूर्व संध्या 22 मार्च को स्थाई व सम्मानजनक रोजगार की माँग को लेकर दिल्ली के मज़दूर, छात्र व नौजवान जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन का आह्वान मज़दूर संगठन सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), युवाओं के संगठन भारत की जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई) और छात्र संगठन स्टूडेंट फ़ेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (एसएफआई) ने किया है।

  इस प्रदर्शन कि मुख्य माँग रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनवाने, बेरोज़गारों को 5000 रुपये मासिक का बेरोजगारी भत्ता दिलाने और ग्रामीण इलाकों में लागू मनरेगा की तर्ज़ पर शहरों में  भगत सिंह शहरी रोजगार गारंटी कानून को बनाए जाने की है।

ये संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार को 12 सूत्री मांगपत्र सौंपेंगे।

19 मार्च को इन संगठनों ने सयुंक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें संगठनों ने बताया कि उन्होंने रोजगार के सवाल पर छात्रों, श्रमिकों और बेरोज़गार युवाओं को एकजुट करने के लिए इस साल फरवरी में 'रोजगार को मौलिक अधिकार बनाएं' जाने का अभियान शुरू किया है। हाल के दिनों में हमने देखा है कि किस तरह हालात को बेहतर बनाने के लिए नौजवान सड़कों व सोशल मीडिया पर उतर रहे हैं।

  सीटू, डीवाईएफआई व एससफआई की दिल्ली राज्य कमेटियों ने 12 फरवरी 2021 को संयुक कन्वेंशन आयोजित किया था। इस कन्वेंशन के बाद तीनों संगठन दिल्ली के विभिन्न जिलों में अभियान के माँगों के साथ पर्चा वितरण व प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारे 12 सूत्रीय माँगपत्र के समर्थन में हस्ताक्षर भी इकट्ठा किए जा रहे हैं। औद्योगिक मजदूरों, रेहड़ी-पटरी कर्मी, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी, छात्र व नौजवानों की जन सभाएँ हो रही हैं, जिन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है।

तीनों संगठन प्रधानमंत्री व केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम 12 सूत्रीय माँगपत्र सौंपेंगे। इस प्रदर्शन को महिला संगठन, दलित संगठन व कलाकार भी अपना समर्थन देंगे।

संगठनों की संयुक्त प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि पिछले एक साल से रोज़गार की लगातार चरमराती व्यवस्था आज भयावह रूप ले चुकी है। 2008 के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से शुरू हुआ रोजगार संकट, नोटबन्दी, जीएसटी व कोरोना के दौरान बिना तैयारी के थोपे गए लॉकडाउन जैसी नीतियों के चलते बद से बदतर हो चुका है।

संगठनों ने श्रम मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले श्रम शक्ति की समयबद्ध रिपोर्ट (2019) और बाक़ी सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर हमला बोला और कहा कि देश में बेरोजगारी 45 सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सटी के सेंटर ऑफ सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट के सर्वे के मुताबिक 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच देश में हर साल औसतन 26 लाख नौकरियां खत्म हुईं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान खत्म हुई नौकरियों के आंकड़ा तो और भी खतरनाक है। एक संस्था की गणना के मुताबिक संगठित क्षेत्र में 147 लाख नौकरियां खत्म हुई, जिसमें से 95 लाख ग्रेजुएट व पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। यह पूरे रोजगार में लगे श्रम शक्ति का लगभग 13 फीसदी है।

इन संगठनों ने सरकार के कोरोना के दौरान उठाए गए आर्थिक कदमों की भी निंदा की और कहा 'ऐसे में सरकार का काम होना चाहिए था कि अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाए जिससे रोजगार सृजन हो सके। पर, इसके उलट सरकार खुद खर्चे कम करने के नाम पर रोजगार खत्म कर रही है। बीएसएनएल व अन्य सरकारी संस्थान, केंद्र सरकार, रेलवे आदि में हम यही देख सकते हैं। इसके साथ ही सरकार विभिन्न संस्थानों व क्षेत्रों के विनिवेश करने और देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों को सौंपने की तरफ आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रही है, जिसका रोजगार पर एयर गलत असर पड़ेगा।'

उन्होंने कहा  सरकार की नीतियां ही स्थायी व सम्मानजनक रोजगार देने के खिलाफ जाती हैं। अपरेंटिस एक्ट में संशोधन तथा नेशनल अप्रेंटिस प्रोमोशन स्कीम ऐसे नीतिगत कदम हैं जो स्थाई रोजगार के बदले अस्थाई रोजगार को आम बना देगा। यही रुख 4 लेबर कोड कानूनों तथा पिछले साल लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी देखने को मिलता है।

12 सूत्री मांग पत्र:-

1. रोजगार पाने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करो। भगत सिंह राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी कानून (भ. सिं. रा. श. रो. गा. का.) को लागू करो। इसके अंर्तगत कामगारों ध्श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दर पर कम से कम 200 दिनों के रोजगार की गारंटी करो। रोजगार न मिलने पर बेरोजगारों को 5000 रुपये का बेरोजगारी भत्ता दो।

2. भ. सिं. रा. श. रो. गा. का. के प्रभावी कार्यान्वन के लिए, रोजगार करने योग्य सभी युवाओं-कामगारों (स्थानीय व प्रवासी) को एक राष्ट्रीय व राज्य स्तर पंजीकरण कर सूचीबद्ध करो। इसमें अतिकुशल, कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों को अलग से श्रेणीबद्ध करो।

3. 21,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन घोषित करो। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए।

4. सरकार, प्राधिकरण व नगर निगम व निजी क्षेत्र में ठेका, आकस्मिक रोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनायें (आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील कामगार), शिक्षा व बाल-मजदूरों के विद्यालयों सहित और अन्य सेवाओं के तहत सभी कार्यरत कर्मियों को नियमित करो। उनके लिए न्यूनतम वेतन व समाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करो।

5. 2019 से केन्द्र व राज्य में खाली पड़े 60 लाख सरकारी पदों पर तत्काल भर्तियां शुरू करो। इन भर्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी के लिए तय आरक्षित पदों को भी अविलम्ब भरो। इसमें महिलाओं को समान अवसर सुनिश्चित करो। सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करो।

6. साप्ताहिक काम की समय-सीमा को 35 घंटे सीमित करो व 4 शिफ्ट का कार्य दिवस लागू करो। इससे ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।

7. सभी सरकारी अस्पताल, निजी अस्पताल व नर्सिंग होम में कांट्रैक्ट पर रखे गए नर्सों व अन्य स्टाफ की नौकरियों को नियमित करो। 2019 में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशानुसार नर्सों को प्रति माह न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये का भुगतान किया जाए।

8. शहर में पर्याप्त, सुरक्षित, स्वच्छ वेंडिंग जोन बनाए जाए। पुलिस या नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जबरन वसूली को रोकने के लिए कड़े इंतजाम करें। पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट-वेंडर) को कॉर्पोरेट सुपरमार्केट के कम्पटीशन एवं बेदखली से बचाने का इंतजाम करें।

9. ओला-उबर-स्विीगी-जमेटो जैसे ऑन-लाइन प्लेटफार्म के जरिए काम करने वाले कामगारों के काम से जुड़ी अनिश्चितताओं को दूर करने हेतु अलग कानून बनाओ।

10. डोमेस्टिक वर्कर्स का वेतन, काम के घंटे, साप्ताहिक छुट्टी, नोटिस-पे, इलाज व पेंशन कानूनी प्रावधान बना सुनिश्चित किया जाए।

11. साईकिल रिक्शा, ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा, टैक्सी चालक को इलाज, पेंशन, दुघर्टना बीमा, मृत्यु बीमा कानूनी प्रावधान बना सुनिश्चित किया जाए।

12. विद्यालय से विश्वविद्यालय स्तर तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का विस्तार किया जाए, इंटर्नशिप के दौरान तय न्यूनतम वेतन का आधा बतौर अलाउंस दिया जाए। सीबीएसई. में परीक्षा शुल्क समाप्त किया जाए।

Delhi Protests
unemployment
Fundamental Rights
CITU
DYFI
SFI
Narendra modi
BJP

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License